Shiv $ Sheetla Mata Mandir Bhota Hamirpur - HP

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SHIV $ SHEETLA MATA MANDIR BHOTA ... HAMIRPUR (H.P) created to show all the history and present information about temple.

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सभी सनातनी मित्रों को निर्जला एकादशी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए । निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की...
06/06/2025

सभी सनातनी मित्रों को निर्जला एकादशी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए ।
निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का मात्र धार्मिक महत्त्व ही नहीं है। ये व्रत मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के नज़रिए से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। इस एकादशी का व्रत करके श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। इस दिन विधिपूर्वक जल कलश का दान करने वालों को पूरे साल की एकादशियों का फल मिलता है। इस प्रकार जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
#निर्जला_एकादशी का #महत्व
निर्जला यानि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए और उपवास रखकर किया जाता है। इसलिए यह व्रत कठिन तप और साधना के समान महत्त्व रखता है। हिन्दू पंचाग अनुसार वृषभ और मिथुन संक्रांति के बीच शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी कहलाती है। इस व्रत को भीमसेन एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि पाँच पाण्डवों में एक भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया था और वैकुंठ को गए थे।इसलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी भी हुआ।
सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत कर लेने से अधिकमास की दो एकादशियों सहित साल की 25 एकादशी व्रत का फल मिलता है। जहाँ साल भर की अन्य एकादशी व्रत में आहार संयम का महत्त्व है। वहीं निर्जला एकादशी के दिन आहार के साथ ही जल का संयम भी ज़रूरी है। इस व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है यानि निर्जल रहकर व्रत का पालन किया जाता है। यह व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है। यह व्रत पुरुष और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है। व्रत का विधान है।
#व्रत_कथा
जब वेदव्यास ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प कराया था। तब युधिष्ठिर ने कहा - जनार्दन! ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी पड़ती हो, कृपया उसका वर्णन कीजिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा हे राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा व्यासजी करेंगे, क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद वेदांगों के पारंगत विद्वान् हैं।
तब वेदव्यासजी कहने लगे- कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी में अन्न खाना वर्जित है। द्वादशी को स्नान करके पवित्र होकर फूलों से भगवान केशव की पूजा करें। फिर पहले ब्राह्मणों को भोजन देकर अन्त में स्वयं भोजन करें। यह सुनकर भीमसेन बोले- परम बुद्धिमान पितामह! मेरी उत्तम बात सुनिए। राजा युधिष्ठिर, माता कुन्ती, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव, ये एकादशी को कभी भोजन नहीं करते तथा मुझसे भी हमेशा यही कहते हैं कि भीमसेन एकादशी को तुम भी न खाया करो परन्तु मैं उन लोगों से यही कहता हूँ कि मुझसे भूख नहीं सही जाएगी।
भीमसेन की बात सुनकर व्यासजी ने कहा- यदि तुम नरक को दूषित समझते हो और तुम्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति अभीष्ट है और तो दोनों पक्षों की एकादशियों के दिन भोजन नहीं करना।
भीमसेन बोले महाबुद्धिमान पितामह! मैं आपके सामने सच कहता हूँ। मुझसे एक बार भोजन करके भी व्रत नहीं किया जा सकता, तो फिर उपवास करके मैं कैसे रह सकता हूँ। मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है, अत: जब मैं बहुत अधिक खाता हूँ, तभी यह शांत होती है। इसलिए महामुनि ! मैं पूरे वर्षभर में केवल एक ही उपवास कर सकता हूँ। जिससे स्वर्ग की प्राप्ति सुलभ हो तथा जिसके करने से मैं कल्याण का भागी हो सकूँ, ऐसा कोई एक व्रत निश्चय करके बताइये। मैं उसका यथोचित रूप से पालन करुँगा।
व्यासजी ने कहा- भीम! ज्येष्ठ मास में सूर्य वृष राशि पर हो या मिथुन राशि पर, शुक्लपक्ष में जो एकादशी हो, उसका यत्नपूर्वक निर्जल व्रत करो। केवल कुल्ला या आचमन करने के लिए मुख में जल डाल सकते हो, उसको छोड़कर किसी प्रकार का जल विद्वान् पुरुष मुख में न डालें, अन्यथा व्रत भंग हो जाता है। एकादशी को सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन के सूर्योदय तक मनुष्य जल का त्याग करे तो यह व्रत पूर्ण होता है। इसके बाद द्वादशी को प्रभातकाल में स्नान करके ब्राह्मणों को विधिपूर्वक जल और सुवर्ण का दान करे। इस प्रकार सब कार्य पूरा करके जितेन्द्रिय पुरुष ब्राह्मणों के साथ भोजन करें। वर्षभर में जितनी एकादशियां होती हैं, उन सबका फल इस निर्जला एकादशी से मनुष्य प्राप्त कर लेता है, इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है। शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले भगवान केशव ने मुझसे कहा था कि ‘यदि मानव सबको छोड़कर एकमात्र मेरी शरण में आ जाय और एकादशी को निराहार रहे तो वह सब पापों से छूट जाता है।\"
कुन्तीनन्दन! निर्जला एकादशी के दिन श्रद्धालु स्त्री पुरुषों के लिए जो विशेष दान और कर्त्तव्य विहित हैं, उन्हें सुनो। उस दिन जल में शयन करने वाले भगवान विष्णु का पूजन और जलमयी धेनु यानी पानी में खड़ी गाय का दान करना चाहिए, सामान्य गाय या घी से बनी गाय का दान भी किया जा सकता है। इस दिन दक्षिणा और कई तरह की मिठाइयों से ब्राह्मणों को सन्तुष्ट करना चाहिए। उनके संतुष्ट होने पर श्रीहरि मोक्ष प्रदान करते हैं।
जिन्होंने श्रीहरि की पूजा और रात्रि में जागरण करते हुए इस निर्जला एकादशी का व्रत किया है, उन्होंने अपने साथ ही बीती हुई सौ पीढ़ियों को और आने वाली सौ पीढ़ियों को भगवान वासुदेव के परम धाम में पहुँचा दिया है। निर्जला एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, गौ, जल, शैय्या, सुन्दर आसन, कमण्डलु तथा छाता दान करने चाहिए। जो श्रेष्ठ तथा सुपात्र ब्राह्मण को जूता दान करता है, वह सोने के विमान पर बैठकर स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है। जो इस एकादशी की महिमा को भक्तिपूर्वक सुनता अथवा उसका वर्णन करता है, वह स्वर्गलोक में जाता है। चतुर्दशीयुक्त अमावस्या को सूर्यग्रहण के समय श्राद्ध करके मनुष्य जिस फल को प्राप्त करता है, वही फल इस कथा को सुनने से भी मिलता है।
भीमसेन! ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की जो शुभ एकादशी होती है, उसका निर्जल व्रत करना चाहिए। उस दिन श्रेष्ठ ब्राह्मणों को शक्कर के साथ जल के घड़े दान करने चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य भगवान विष्णु के समीप पहुँचकर आनन्द का अनुभव करता है। इसके बाद द्वादशी को ब्राह्मण भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करे। जो इस प्रकार पूर्ण रूप से पापनाशिनी एकादशी का व्रत करता है, वह सब पापों से मुक्त हो आनंदमय पद को प्राप्त होता है। यह सुनकर भीमसेन ने भी इस शुभ एकादशी का व्रत आरम्भ कर दिया।

शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा की ओर से सभी भक्तों को महाशिवरात्रि के पावन पर्व हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं । देवाधिदेव म...
26/02/2025

शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा की ओर से सभी भक्तों को महाशिवरात्रि के पावन पर्व हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।
देवाधिदेव महादेव व माता पार्वती सभी भक्तों का कल्याण करें । आपकी सभी मंगल कामनाओं को पूर्ण करें ।
ॐ नमः शिवायः । हर हर महादेव 🚩

शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है । हिमाचल प्रद...
26/08/2024

शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है ।
हिमाचल प्रदेश के मशहूर भजन गायक श्री अभिषेक सोनी जी श्री कृष्ण लीलाओं का गुणगान करेंगे ।
सभी भक्तजन सादर आमंत्रित है ।
समय : शाम 8 बजे से
स्थान : शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा
दिनांक : 26 अगस्त 2024

22/07/2024
आज देवशयनी एकादशी है। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक...
17/07/2024

आज देवशयनी एकादशी है। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत उपवास रखा जाता है। इस देवशयनी एकादशी के साथ ही चार महीनों तक चलने वाले चातुर्मास की भी शुरुआत हो जाती है। इसमें भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के योग निद्रा में चले जाने के कारण सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के आरंभ होने पर सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य चार महीनों के लिए वर्जित हो जाते हैं। इस वजह से देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा आराधना करने का विधान होता है।

देवशयनी एकादशी पर दुर्लभ योग
इस वर्ष देवशयनी एकादशी पर बहुत ही शुभ औऱ दुर्लभ संयोग बना है। हिंदू पंचांग के अनुसार देवशयनी एकादशी पर अनुराधा नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और शुक्ल जैसे शुभ योगों का निर्माण हो रहा है।

देवशयनी एकादशी का महत्व

देवशयनी एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है,और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस व्रत को रखने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। #देवशयनी_एकादशी

सभी सादर आमंत्रित है ।
20/01/2024

सभी सादर आमंत्रित है ।

शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा की ओर से आप सभी को सपरिवार दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं जी शुभ दीपा...
12/11/2023

शिव एवं शीतला माता मंदिर भोटा की ओर से आप सभी को सपरिवार दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं जी
शुभ दीपावली
🙏🏻

सभी भक्तजन सादर आमंत्रित है ।    #जन्माष्टमी VICKY SONI
01/09/2023

सभी भक्तजन सादर आमंत्रित है ।
#जन्माष्टमी
VICKY SONI

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