"ॐ एँ ह्रीं कलीं चामुडाये नमः "
जय माँ अवाहदेवी जय माँ जालपा ज य बाबा सरवन नाथ जी
माँ जालपा (अवाहदेवी) जी का इतिहास :-
अवाहदेवी एक बहुत ही सुंदर स्थान है/ यह हिमाचल प्रदेश के दो जिलों जिला हमीरपुर और जिला मंडी के सीमा क्षेत्र पर स्थित है / जिला हमीरपुर से 24 किलोमीटर दुरी पर पूरब की ओर स्तिथ है/
यह मंदिर सेंकडो वर्ष पुराना है / मंदिर मैं माँ जालपा पिंडी रूप मैं विर
ाजमान है / यहाँ गुग्गा पीर जी की पुराणी मूर्तियाँ भी स्थापित है / यह माँ सैंकड़ो लोगों की कुलजा है व आस्था का प्रतिक है / मेरा सारा बचपन इसी माँ के चरणों मैं बीता है /
इस मंदिर की कहानी मैं कुछ अपने पिता जी व कुछ आसपास के बुजुर्गों से सुनी है कि कैसे माँ ने यहाँ स्थान ग्रहण किया था / कई वर्ष पूर्ब जब यहाँ राजाओं का राज्य हुआ करता था / एक काँगड़ा रियासत और दूसरी मंडी रियासत / मंडी रियासत के जो अब जिला मंडी है की तहसील सरकाघाट के एक गाँव झड्यार का एक परिवार, काँगड़ा रियासत जो अबजिला हमीरपुर बन गयी है की तहसील भोरंज एक गाँव संगरोह के एक परिवार के खतों का खेती के लिए प्रयोग करते थे / एक बार खेतों मैं जुताई करते करते हल एक पत्थर से टकराया तो उस पत्थर से रक्त बहने लगा सब लोग हैरान हो गे और यह बात आग की तरह सब ओर फ़ैल गयी /फिर माँ की इस पिंडी को बाहर निकला और माँ ने दर्शन दिए और अपने लिए एक स्थान माँगा / तो मंडी के लोग कहने की ये पिंडी हमे मिली है इस लिए इसे हम अपने गाँव मैं ले जायेंगे वहांइसकी स्थापना करेंगे और हमीरपुर के लोग अपने यहाँ इसकी स्थापना करने के लिए अड़े हुए थे इस बीच मंडी वालों ने पिंडी उठाई और चल पड़े जब वे अवाहदेवी के पास आये तो उन्होंने वहां विश्राम करने के लिए पिंडी रखी जब वे जाने लगे तो पिंडी वहां से उठाई नहीं गयी काफी जोर लगा लिया सभी ने दोनों तरफ के लोग वहां इकठा थे तो बुजुर्गों ने फैसला किया कि इस पिंडी को यहीं स्थापित कर दिया जाये / दोनों परिवारों को इसकी पूजा अर्चना की जिमेवारी सौंप दी / तब से ले कर आज तक ये दो परिवार ही ही इसके मुख्या पुजारी है /
उसी समय से यहाँ का नाम अवाहदेवी पड़ गया क्योंकि यहाँ बहुत ही तेज हवाएं चलती थी / पुरे हमीरपुर मैं सबसे ऊँचा स्थान है किसी के मुख से अचानक ही निकला "वाह देवी " तब से यहाँ का नाम अवाहदेवी पड़ गया /समय बीतता गया और सन १९६५ के आस पास हरयाणा के जिला अम्बाला के गाँव नन्न्योला
से महात्मा बाबा श्री सरवन नाथ जी आये और यहाँ के मनोहारी दृश्य को देख कर यहीं तपस्या करने लग गए / एक दिन माँ ने उन्हे दर्शन दे कर कहा की यहाँ मेरा भवन बनाओ और आप भी यहीं अपनी कुटिया बना लो / बाबा जी को बहुत ही ज्ञान था और उन्होंने आसपास के गाँव को लोगों को भी अच्छी शिक्षा दी लोगों मैं ज्ञान की वर्षा कर दी / और बाबा जी ने अपने हरयाणा पंजाब के भक्तों और स्थानीय लोगों के साथ मिल कर इस मंदिर का निर्माण करवया / बाबा जी ने नन्योला मैं भी बहुत ही सुंदर मंदिर बनया है वहां भी उन्होंने माँ नैना देवी दो को बुला कर स्थान दिया है / काफी समय तक बाबा जी इस मंदिर की सेवा करते रहे और बाद मैं यह्ना मंदिर कमेटी बनायीं गयी / तब से आज तक इसकी देख रेख का जिम्मा पुजारियों और कमेटी के पास है / माँ के मंदिर के साथ बाबा श्री सरवन नाथ जी की समाधि
और उनके चेले बाबा श्री जोत नाथ जी समाधि और भगवान शिव का मंदिर है /
सन 1980 को यहाँ पर बाबा सरवन नाथ जी के समाथि लेने के बाद बाद उनके चेले बाबा जोत नाथ जी और बाबा जोत नाथ जी के चेले बाबा हंस नाथ जी यहाँ रहने लगे बहुत ज्ञानी साधू थे आज कल बाबा निर्मल नाथ जी बाबा हंस नाथ जी के चेले यहाँ के महंत है / बाबा निर्मल नाथ जी मेर एगुरु जी हैं / यहाँ माँ के मंदिर मैं हर साल नवरात्रों दीपावली और सभी हिन्दू त्योहारों पर भारी भीड़ रहती है , नवरात्रों पर यहाँ जागरण और भंडारों का भी आयोजन होता है / यहाँ लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने
पर जातर ले कर माता का सुक्रिया करने आते है / यहाँ बाबा सरवन नाथ जी का श्राध, हर पांचवें श्राध को होता है इस दिन बाबा जी द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता है/
यह माँ लाखों लोगो की कुलजा है / यहाँ तक़रीबन 250 -300 दुकाने है जिनका व्यापर मंदिर की बदोलत चलता है / बहुत खुशी की बात है की हमारे माननीय मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल जी की भी ये कुलजा है / और जब ये पहली बार मुख्यामंर्त्री बने थे तो भी इन्होने मंदिर का सौन्दर्यकर्ण करवाया था / अब दुबारा मुख्यमंत्री बने है तो अब इन्होने मंदिर के पुननिर्माण लिए सरकार की तरफ से 1 करोड़ रूपये मंजूर कर के इसका कार्य भी आरम्भ कर दिया है /
यहाँ से परिवहन की बहुत व्यवथा है यहाँ से दिल्ली, हरिद्वार, अमृतसर, जालंधर, पठानकोट, जम्मू कटरा, शिमला. धर्मशाला, पालमपुर, रोहडू, मंडी हमीरपुर और स्थानीय स्टार पर काफी परिवहन वयवस्था है /
राजेश शर्मा (सोनू)
सपुत्र श्री रोशन लाल शर्मा,
गाँव व डाक घर अवाहदेवी,
तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर ,
(हिमाचल प्रदेश) 177601 /
7018072110,9459051078
ईमेल :- rksonusharma@ gmail .