04/05/2026
"दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम"
दु+बिधा
दो तरफ बिधा हुआ।
Double Minded
यह एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है जिसका अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति दुविधा में होता है, तो वह न तो सांसारिक सुख (माया) प्राप्त कर पाता है और न ही आध्यात्मिक संतोष (राम)। इस कहावत का अर्थ है कि अनिश्चितता और अनिर्णय की स्थिति में, व्यक्ति दोनों तरफ से हार जाता है।
यह कहावत हमें सिखाती है कि जीवन में स्पष्टता और निर्णय लेना महत्वपूर्ण है। दुविधा में फंसे रहने से, हम न तो अपने सांसारिक लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं और न ही आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर पाते हैं। इसलिए, हमें अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ता से प्रयास करना चाहिए।
इस कहावत के कुछ अन्य संभावित अर्थ इस प्रकार हैं:
अनिश्चितता में समय बर्बाद करना:
जब हम किसी दुविधा में होते हैं, तो हम अक्सर अनिश्चितता में समय बर्बाद करते हैं। यह समय बर्बाद करना हमें न तो सांसारिक लाभ देता है और न ही आध्यात्मिक लाभ।
दोनों तरफ से हानि:
दुविधा की स्थिति में, हम दोनों तरफ से हानि उठाते हैं। हम न तो सांसारिक सुख प्राप्त कर पाते हैं और न ही आध्यात्मिक संतुष्टि।
निर्णय लेने का महत्व:
यह कहावत हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में निर्णय लेने का महत्व समझना चाहिए। अनिश्चितता में फंसे रहने से, हम अपने जीवन को बर्बाद कर रहे होते हैं।
संक्षेप में, "दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम" यह कहावत हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में स्पष्टता और निर्णय लेने की आवश्यकता है। अनिश्चितता में समय बर्बाद करने से, हम दोनों तरफ से हार जाते हैं