30/05/2026
सनातन धर्म में नाम संकीर्तन
(भगवान के पवित्र नामों का सामूहिक या व्यक्तिगत गान) को कलियुग में मोक्ष और शांति का सबसे सरल, अचूक और प्रभावी साधन माना गया है।विभिन्न शास्त्रों और संतों के अनुसार, नाम संकीर्तन की महिमा निम्नलिखित बिंदुओं से समझी जा सकती है:1. कलियुग का सर्वोच्च धर्मश्रीमद्भागवतम् (12.3.52) में स्पष्ट कहा गया है कि जो फल सत्ययुग में ध्यान से, त्रेतायुग में बड़े-बड़े यज्ञों से और द्वापर युग में भगवान की पूजा-अर्चना से मिलता है, वही फल कलियुग में केवल हरि कीर्तन (नाम संकीर्तन) करने मात्र से मिल जाता है।
*कृते यद्धयायतो विष्णुं त्रेतायां यजतो मखैः। द्वापरे परिचर्यायां कलौ तद्धरिकीर्तनात्॥*