20/10/2015
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह -23 अल -मॉमिनून(51-53)
ए पैगंबरों ,सुथरी चीज़ें खाओ और नेक काम करो /मैं जानता हूँ जो कुछ तुम करते हो /और यह तुम्हारा दीन एक ही दीन है /और मैं तुम्हारा रब हूँ तो तुम मुझसे डरो /फिर लोगों ने अपने दीन (धर्म) को आपस में टुकड़े-टुकड़े कर लिया/
सबसे पहले सिर्फ़ दीन (धर्म) हुआ, उसका नाम "सनातन धर्म " कहा गया ,आज इसी को सत्य सनातन वैदिक हिंदू धर्म कहते हैं,फिर उसके ही टुकड़े-टुकड़े कर दिए गये और उसीको यहूदी, ईसाई, इस्लाम, मोहम्मदी, शिया, सुन्नी, देवबंदी,बरेलवी, बोहरा, पाकिस्तान, बांग्लादेश, और नज़ाने क्या-क्या नाम दिए जा रहे हैं /"श्रीरामचरित्रमानस" में धर्म (दीन) के कलियुग में टुकड़े-टुकड़े किए जाने को गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं "प्रकट कीन्ह बहू पन्थ" /