06/06/2024
#कबीरभगवान_के_राजा_बने_शिष्य
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Diwas
🙏🙏 सत साहेब 🙏🙏
👑सर्वशक्तिमान कबीर जी ने दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी के असाध्य जलन के रोग को जो कि किसी भी प्रकार की औषधि सेवन से और भी जंतर मंत्र किसी से भी ठीक नहीं हुआ लेकिन कबीर साहेब के आशीर्वाद से ठीक हो गया था और भी बहुत से चमत्कार देखकर सिकंदर लोदी ने कबीर साहेब जी से नाम उपदेश लिया, उनके शिष्य बने।
👑एक समय की बात है काशी के राजा बीर देव सिंह बघेल ने जब परमात्मा कबीर जी को पहली बार सत्संग स्थल में निकट से देखा तो कबीर जी पृथ्वी से सवा हाथ ऊपर बैठे दिखाई दिए। यह लीला देखकर राजा समझ गया कि परमात्मा आए हैं। चरणों में शीश रखा और ब्राह्मणों के साथ ज्ञान चर्चा को पूरा सुनकर राजा-रानी ने परमेश्वर कबीर जी से उपदेश लिया।
👑बिजली खान पठान मगहर रियासत नवाब था एक समय मगहर नगर के आसपास यानि मगहर रियासत में दुर्भिक्ष पड़ा। त्राहि-त्राहि मच गई। सर्व जन्त्र-मंत्र, पाठ, हवन कर-करा लिए, परंतु व्यर्थ रहा। कबीर परमात्मा के आशीर्वाद से मगहर में बहुत वर्षा हुई फिर बिजली खान पठान ने कबीर जी से उपदेश लिया उनके शिष्य बने।
👑सुल्तान इब्राहिम इब्न अधम जो कि इराक में बल्ख का राजा था कबीर परमात्मा ने अन्य रूप धारण करके बहुत सारे चमत्कार दिखाकर उस राजा को ज्ञान समझाकर अपना शिष्य बनाया।
👑क्या आप जानते हो सुल्तान इब्राहिम इब्न अधम की सोलह हज़ार रानियां थीं, 18 लाख घोड़े, अरबों-खरबों का खज़ाना था लेकिन जब परमात्मा कबीर जी के ज्ञान को समझा तो सब कुछ छोड़कर भक्ति करने लगे थे।
👑परमात्मा कबीर जी त्रेतायुग में मुनींद्र ऋषि के रूप में आये हुए थे। मुनींद्र ऋषि के कई शिष्य थे जिनमें लंका पति रावण के भाई विभीषण भी शामिल है। उनकी गति त्रेतायुग में मुनींद्र ऋषि के तत्वज्ञान और बताई गई भक्ति विधि करने से हुई।
👑क्या आप जानते हो मीरा बाई जिनका विवाह चित्तौड़गढ़ के महाराजा भोजराज जी से हुआ थ। राजा की पत्नी होते हुए भी उन्होंने पहले संत रविदास जी और बाद में परमात्मा कबीर जी से नाम उपदेश लिया था ओर अपना कल्याण करवाया।
👑द्वापरयुग में राजा चन्द्रविजय और उसकी पत्नी इन्द्रमति दोनों को ही कबीर परमात्मा ने शरण में लिया और उनको मोक्ष प्रदान किया। द्वापरयुग में कबीर परमात्मा करुणामय नाम से आए थे।
👑राजा जगजीवन का एक नौलखा बाग था। वह बारह वर्ष से सूखा हुआ था। परमेश्वर कबीर जी उस सूखे बाग में जाकर बैठ गए। जिससे वह बाग हरा-भरा हो गया। इस चमत्कार को सुन राजा परमात्मा की शरण में आया। परमात्मा ने ज्ञान समझाया। पूरे परिवार 12 रानियों ने, चार पुत्रों और राजा ने दीक्षा ली। राजा को परमेश्वर ने सतलोक दिखाया। सबने आजीवन भक्ति की और सतलोक में अमर शरीर पूर्ण मोक्ष प्राप्त किया।
👑परमेश्वर कबीर जी राजा भोपाल के चौंक में जिंदा बाबा के रूप में प्रकट हुए और परमेश्वर ने राजा का महल सोने का बना दिया। इस चमत्कार को देख राजा ने जिन्दा बाबा के चरण छूए और अपनी शरण में लेने की इच्छा व्यक्त की। तब परमेश्वर ने उसे ज्ञान समझाया और राजा को सतलोक लेकर गए। इस तरह राजा भोपाल के पूरे परिवार के सर्व सदस्यों ने नाम लिया, मोक्ष करवाया।
👑परमेश्वर कबीर जी ने बताया कि मैं अमरपुरी नगरी के राजा भोपाल के महल के मध्य में बनी ड्योडी में पहुँचा। उस समय मैंने अपने शरीर का सोलह सूर्यों जितना प्रकाश बनाया। राजा को पता चला तो उठकर महल में आया। मेरे चरण पकड़कर पूछा कि क्या आप ब्रह्मा, विष्णु, शिव में से एक हो या परब्रह्म हो? मैंने कहा कि मैं इनसेे भी ऊपर के स्थान सतलोक से आया हूँ। राजा को विश्वास नहीं हुआ तो मैं अंतर्ध्यान हो गया। राजा पाँच दिन तक विलाप करता रहा। तब पाँचवें दिन मैं फिर उसी प्रकाशमय शरीर में प्रकट हुआ और राजा-रानी ने ज्ञान समझा, दीक्षा ली तथा अपना कल्याण करवाया।