Gurudev Deepak Gaur

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Official page of India's Famous Astrologer Guru Deepak Gaur Ji who has solved the all the problems of human life of many people through his remarkable remedies.

29/08/2023
29/08/2023

रक्षाबंधन का पर्व पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। जबकि इस बार पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त 2023 को प्रातः 10:59 से 31 अगस्त 2023 प्रातः 07 बजकर 5 मिनट तक रहेगी।
भद्राकाल – 30 अगस्त सुबह 7:58 से रात्रि 9:01 तक रहेगा।

*अत: भद्रा काल को छोड़कर शेष समय में रक्षाबंधन पर्व के सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।*

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27/12/2022



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08/09/2022

जैसे जैसे लोगों के पास पैसा बढ़ता है तो लोग गांव से शहर, शहर से महानगरों में जाकर ऐसी छोटी छोटी गुफाओं में कैद हो जाते हैं😔
फिर ये महंगी होटलों में खाना खाते हैं जिसकी वजह से इन्हें बड़े हॉस्पिटलों 🏥में इलाज करवाना पड़ता हैं
उनकी नजरों में तो वे अमीर है पर वे मानसिक रूप से गरीब है वास्तविक खुशहाल तो ग्रामीण ही है।👍
जो लोग गांव का महत्व समझते हैं उन पर ये बाते लागू नहीं होती हैं।👍🙏😘😘

08/09/2022

किसी दिन सुबह उठकर एक बार इसका जायज़ा लीजियेगा कि कितने घरों में अगली पीढ़ी के बच्चे रह रहे हैं? कितने बाहर निकलकर नोएडा, गुड़गांव, पूना, बेंगलुरु, चंडीगढ़,बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बड़ौदा जैसे बड़े शहरों में जाकर बस गये हैं?
कल आप एक बार उन गली मोहल्लों से पैदल निकलिएगा जहां से आप बचपन में स्कूल जाते समय या दोस्तों के संग मस्ती करते हुए निकलते थे।
तिरछी नज़रों से झांकिए.. हर घर की ओर आपको एक चुपचाप सी सुनसानियत मिलेगी, न कोई आवाज़, न बच्चों का शोर, बस किसी किसी घर के बाहर या खिड़की में आते जाते लोगों को ताकते बूढ़े जरूर मिल जायेंगे।
आखिर इन सूने होते घरों और खाली होते मुहल्लों के कारण क्या हैं ?
भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके एक बच्चा और ज्यादा से ज्यादा दो बच्चे हों और बेहतर से बेहतर पढ़ें लिखें।
उनको लगता है या फिर दूसरे लोग उसको ऐसा महसूस कराने लगते हैं कि छोटे शहर या कस्बे में पढ़ने से उनके बच्चे का कैरियर खराब हो जायेगा या फिर बच्चा बिगड़ जायेगा। बस यहीं से बच्चे निकल जाते हैं बड़े शहरों के होस्टलों में।
अब भले ही दिल्ली और उस छोटे शहर में उसी क्लास का सिलेबस और किताबें वही हों मगर मानसिक दबाव सा आ जाता है बड़े शहर में पढ़ने भेजने का।
हालांकि इतना बाहर भेजने पर भी मुश्किल से 1% बच्चे IIT, PMT या CLAT वगैरह में निकाल पाते हैं...। फिर वही मां बाप बाकी बच्चों का पेमेंट सीट पर इंजीनियरिंग, मेडिकल या फिर बिज़नेस मैनेजमेंट में दाखिला कराते हैं।
4 साल बाहर पढ़ते पढ़ते बच्चे बड़े शहरों के माहौल में रच बस जाते हैं। फिर वहीं नौकरी ढूंढ लेते हैं । सहपाठियों से शादी भी कर लेते हैं।आपको तो शादी के लिए हां करना ही है ,अपनी इज्जत बचानी है तो, अन्यथा शादी वह करेंगे ही अपने इच्छित साथी से।
अब त्यौहारों पर घर आते हैं माँ बाप के पास सिर्फ रस्म अदायगी हेतु।
माँ बाप भी सभी को अपने बच्चों के बारे में गर्व से बताते हैं । दो तीन साल तक उनके पैकेज के बारे में बताते हैं। एक साल, दो साल, कुछ साल बीत गये । मां बाप बूढ़े हो रहे हैं । बच्चों ने लोन लेकर बड़े शहरों में फ्लैट ले लिये हैं।
अब अपना फ्लैट है तो त्योहारों पर भी जाना बंद।
अब तो कोई जरूरी शादी ब्याह में ही आते जाते हैं। अब शादी ब्याह तो बेंकट हाल में होते हैं तो मुहल्ले में और घर जाने की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है। होटल में ही रह लेते हैं।
हाँ शादी ब्याह में कोई मुहल्ले वाला पूछ भी ले कि भाई अब कम आते जाते हो तो छोटे शहर, छोटे माहौल और बच्चों की पढ़ाई का उलाहना देकर बोल देते हैं कि अब यहां रखा ही क्या है?
खैर, बेटे बहुओं के साथ फ्लैट में शहर में रहने लगे हैं । अब फ्लैट में तो इतनी जगह होती नहीं कि बूढ़े खांसते बीमार माँ बाप को साथ में रखा जाये। बेचारे पड़े रहते हैं अपने बनाये या पैतृक मकानों में।
कोई बच्चा बागवान पिक्चर की तरह मां बाप को आधा - आधा रखने को भी तैयार नहीं।
अब साहब, घर खाली खाली, मकान खाली खाली और धीरे धीरे मुहल्ला खाली हो रहा है। अब ऐसे में छोटे शहरों में कुकुरमुत्तों की तरह उग आये "प्रॉपर्टी डीलरों" की गिद्ध जैसी निगाह इन खाली होते मकानों पर पड़ती है । वो इन बच्चों को घुमा फिरा कर उनके मकान के रेट समझाने शुरू करते हैं । उनको गणित समझाते हैं कि कैसे घर बेचकर फ्लैट का लोन खत्म किया जा सकता है । एक प्लाट भी लिया जा सकता है।
साथ ही ये किसी बड़े लाला को इन खाली होते मकानों में मार्केट और गोदामों का सुनहरा भविष्य दिखाने लगते हैं।
बाबू जी और अम्मा जी को भी बेटे बहू के साथ बड़े शहर में रहकर आराम से मज़ा लेने के सपने दिखाकर मकान बेचने को तैयार कर लेते हैं।
आप स्वयं खुद अपने ऐसे पड़ोसी के मकान पर नज़र रखते हैं । खरीद कर डाल देते हैं कि कब मार्केट बनाएंगे या गोदाम, जबकि आपका खुद का बेटा छोड़कर पूना की IT कंपनी में काम कर रहा है इसलिए आप खुद भी इसमें नहीं बस पायेंगे।
हर दूसरा घर, हर तीसरा परिवार सभी के बच्चे बाहर निकल गये हैं।
वही बड़े शहर में मकान ले लिया है, बच्चे पढ़ रहे हैं,अब वो वापस नहीं आयेंगे। छोटे शहर में रखा ही क्या है । इंग्लिश मीडियम स्कूल नहीं है, हॉबी क्लासेज नहीं है, IIT/PMT की कोचिंग नहीं है, मॉल नहीं है, माहौल नहीं है, कुछ नहीं है साहब, आखिर इनके बिना जीवन कैसे चलेगा?

भाईसाब ये खाली होते मकान, ये सूने होते मुहल्ले, इन्हें सिर्फ प्रोपेर्टी की नज़र से मत देखिए, बल्कि जीवन की खोती जीवंतता की नज़र से देखिए। आप पड़ोसी विहीन हो रहे हैं। आप वीरान हो रहे हैं।
आज गांव सूने हो चुके हैं
शहर कराह रहे हैं |

सूने घर आज भी राह देखते हैं.. वो बंद दरवाजे बुलाते हैं पर कोई नहीं आता...!!!!!

एक बार श्री राम चरित्र को याद करिए की भगवान को शिक्षा के लिए जाना पड़ा और गए भी उसके बाद जब रावण वध कर लिए तो लक्ष्मण जी ने कहा भैया लंका सोने की है क्यों न कुछ दिन यही विश्राम करे तब भगवान ने कहा की अपि स्वर्णमयी लंका न ने लक्ष्मण रोचते
जननि जन्मभूमिश्च स्वर्गा दपि गरियसी
अर्थात हे लक्ष्मण लंका भले ही सोने की है सर्वत्र सुख सुविधा है लेकिन अपनी माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है अर्थात यदि माता पिता बालक को बाहर पढ़ने भेजते है तो कोई गलत नहीं है अपितु वही जाकर भूल जाना सर्वथा गलत है।

#सत्य #जिंदगी #प्रेरणादायक #सच्ची #कहानी
~√€€®

07/09/2022

*हनुमानजी* की उड़ने की गति कितनी थी
जानिए हनुमानजी की उड़ने की गति कितनी रही होगी उसका अंदाजा आप लगा सकते हैं की रात्रि को 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक लक्ष्मण जी एवं मेघनाद का युद्ध हुआ था। मेघनाद द्वारा चलाए गए बाण से #लक्ष्मण जी को शक्ति लगी थी लगभग रात को 12:00 बजे के करीब और वो मूर्छित हो गए थे।

#रामजी को लक्ष्मण जी मूर्छा की जानकारी मिलना फिर दुखी होने के बाद चर्चा जे उपरांत हनुमान जी & विभीषणजी के कहने से सुषेण वैद्य को लंका से लेकर आए होंगे 1 घंटे में अर्थात 1:00 बजे के करीबन।

सुषेण वैद्य ने जांच करके बताया होगा किहिमालय के पास द्रोणागिरी पर्वत🏔️🏔️ पर यह चार औषधियां🏕️🏕️ मिलेगी जिन्हें उन्हें सूर्योदय से पूर्व 5:00 बजे से पहले लेकर आना था ।इसके लिए रात्रि को 1:30 बजे हनुमान जी हिमालय के लिए रवाना हुए होंगे।

हनुमानजी को ढाई हजार किलोमीटर दूर हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से उस औषधि को लेकर आने के लिए 3:30 घंटे का समय मिला था। इसमें भी उनका आधे घंटे का समय औषधि खोजने में लगा होगा ।आधे घंटे का समय कालनेमि नामक राक्षस ने जो उनको भ्रमित किया उसमें लगा होगा एवं आधे घंटे का समय भरत जी के द्वारा उनको नीचे गिराने में तथा वापस भेजने देने में लगा होगा।अर्थात आने जाने के लिये मात्र दो घण्टे का समय मिला था।

मात्र दो घंटे में हनुमान जी द्रोणगिरी पर्वत हिमालय पर जाकर वापस 5000 किलोमीटर की यात्रा करके आये थे, अर्थात उनकी गति ढाई हजार किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी।

आज का नवीनतम *मिराज* वायुयान🚀🚀 की गति 2400 किलोमीटर प्रति घंटा है ,तो हनुमान जी महाराज उससे भी तीव्र गति से जाकर मार्ग के तीन-तीन अवरोधों को दूर करके वापस सूर्योदय से पहले आए ।यह उनकी विलक्षण शक्तियों के कारण संभव हुआ था।
बोलिए हनुमान जी महाराज की जय
पवनसुत हनुमान की जय🚩
सियावर रामचंद्र जी की जय🚩

ॐ नमो नारायण🚩☝️

मांगलिक दोष-वैवाहिक गृहस्थ जीवन में रोज का क्लेश, वैचारिक मतभेद, पारिवारिक जनों के साथ आपसी मनमुटाव एवं संबंधों में तनाव...
19/08/2022

मांगलिक दोष-
वैवाहिक गृहस्थ जीवन में रोज का क्लेश,
वैचारिक मतभेद, पारिवारिक जनों के साथ आपसी मनमुटाव एवं संबंधों में तनाव, रोज-रोज के झगड़े, कानूनी कार्यवाही तथा पति -पत्नी के बीच विवाद जीवन को नर्क जैसा बना देता है | जिसका निदान मांगलिक दोष शांति द्वारा गुरुदेव दीपक गौड़ जी के तत्वाधान में 100% संभव है| जिन बालकों का विवाह नहीं हुआ है| उनकी कुंडली में उपस्थित मांगलिक दोष उनकी गृहस्थी को खराब कर सकता है| इसलिए मांगलिक बालक का विवाह अधिकांशतया मांगलिक जातक से ही किया जाता है| मांगलिक दोष की शांति विवाह से पूर्व करवा कर वैवाहिक जीवन को निश्चय ही सुखी बनाया जा सकता है|
जिन लोगों की शादी हो चुकी है तथा शादीशुदा जीवन को निर्वहन करने में किसी भी प्रकार की कठिनाइयां यदि आ रही हैं तो आपको उसका निराकरण गुरुदेव दीपक गौड़ जी के द्वारा निश्चय ही बतलाया जाएगा|
आपकी गृहस्थी को सुखी तथा सौम्य बनाने का शास्त्रोक्त प्रभावी उपाय गुरुदेव दीपक गौड़ जी के पास निश्चय ही है|
यदि आप भी चाहते हैं अपने या अपने किसी निजी परिचित का जीवन सुखी बनाना तो हमारे संस्थान के द्वारा आपको नि:शुल्क सलाह दी जाएगी|
हमारे संस्थान द्वारा मांगलिक दोष शोधन तथा मांगलिक दोष हेतु जन्मपत्रिका विश्लेषण पूर्णतया नि:शुल्क रहेगा| अधिक जानकारी के लिए अभी कॉल करें |
फोन नंबर - 9466315143, 01244084352
या लॉग ऑन करें- www.deepakgaurji.com


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मांगलिक दोष-वैवाहिक गृहस्थ जीवन में रोज का क्लेश, वैचारिक मतभेद, पारिवारिक जनों के साथ आपसी मनमुटाव एवं संबंधों में तनाव...
18/08/2022

मांगलिक दोष-
वैवाहिक गृहस्थ जीवन में रोज का क्लेश,
वैचारिक मतभेद, पारिवारिक जनों के साथ आपसी मनमुटाव एवं संबंधों में तनाव, रोज-रोज के झगड़े, कानूनी कार्यवाही तथा पति -पत्नी के बीच विवाद जीवन को नर्क जैसा बना देता है | जिसका निदान मांगलिक दोष शांति द्वारा गुरुदेव दीपक गौड़ जी के तत्वाधान में 100% संभव है| जिन बालकों का विवाह नहीं हुआ है| उनकी कुंडली में उपस्थित मांगलिक दोष उनकी गृहस्थी को खराब कर सकता है| इसलिए मांगलिक बालक का विवाह अधिकांशतया मांगलिक जातक से ही किया जाता है| मांगलिक दोष की शांति विवाह से पूर्व करवा कर वैवाहिक जीवन को निश्चय ही सुखी बनाया जा सकता है|
जिन लोगों की शादी हो चुकी है तथा शादीशुदा जीवन को निर्वहन करने में किसी भी प्रकार की कठिनाइयां यदि आ रही हैं तो आपको उसका निराकरण गुरुदेव दीपक गौड़ जी के द्वारा निश्चय ही बतलाया जाएगा|
आपकी गृहस्थी को सुखी तथा सौम्य बनाने का शास्त्रोक्त प्रभावी उपाय गुरुदेव दीपक गौड़ जी के पास निश्चय ही है|
यदि आप भी चाहते हैं अपने या अपने किसी निजी परिचित का जीवन सुखी बनाना तो हमारे संस्थान के द्वारा आपको नि:शुल्क सलाह दी जाएगी|
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Rakshabandhan
10/08/2022

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