Shri Santoshi Mata Mandir Trust Guna

Shri Santoshi Mata Mandir Trust Guna The Only Temple of SHRI SANTOSHI MATA, at Guna in Madhya Pradesh, Established in year "1964" with Natural idol "Murti".

श्री संतोषी माता मन्दिर गुना के नवरत्री के प्रथम  दिवस के दर्शन
19/03/2026

श्री संतोषी माता मन्दिर गुना के नवरत्री के प्रथम दिवस के दर्शन

19/03/2026

#शैलपुत्री

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥

माँ दुर्गा अपने पहले स्वरूपमें 'शैलपुत्री' के नामसे जानी जाती हैं । पर्वतराज हिमालयके वहाँ पुत्रीके रूपमें उत्पन्न होनेके कारण इनका यह 'शैलपुत्री' नाम पड़ा था । वृषभ-स्थिता इन माताजीके दाहिने हाथमें त्रिशूल और बायें हाथमें कमल पुष्प सुशोभित है । यही नव दुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं ।

अपने पूर्वजन्ममें ये प्रजापति दक्षकी कन्याके रूपमें उत्पन्न हुई थीं । तब इनका नाम 'सती' था । इनका विवाह भगवान् शङ्करजीसे हुआ था । एक बार प्रजापति दक्षने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया । इसमें उन्होंने सारे देवताओंको अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करनेके लिये निमन्त्रित किया । किन्तु शङ्करजीको उन्होंने इस यज्ञमें निमन्त्रित नहीं किया । सतीने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यन्त विशाल यज्ञका अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जानेके लिये उनका मन विकल हो उठा । अपनी यह इच्छा उन्होंने शङ्करजीको बतायी । सारी बातोंपर विचार करनेके बाद उन्होंने कहा— "प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं । अपने यज्ञमें उन्होंने सारे देवताओंको निमन्त्रित किया है । उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किये हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है । कोई सूचनातक नहीं भेजी है । ऐसी स्थितिमें तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा ।" शङ्करजीके इस उपदेशसे सतीका प्रबोध नहीं हुआ । पिताका यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनोंसे मिलनेकी उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी । उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान् शङ्करजीने उन्हें वहाँ जानेकी अनुमति दे दी ।

सतीने पिताके घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेमके साथ बात-चीत नहीं कर रहा है । सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं । केवल उनकी माताने स्नेहसे उन्हें गले लगाया । बहनोंकी बातोंमें व्यंग्य और उपहासके भाव भरे हुए थे । परिजनोंके इस व्यवहारसे उनके मनको बहुत क्लेश पहुँचा । उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक् भगवान् शङ्करजीके प्रति तिरस्कारका भाव भरा हुआ है । दक्षने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे । यह सब देखकर सतीका हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोधसे सन्तप्त हो उठा । उन्होंने सोचा भगवान् शङ्करजीकी बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है ।

वह अपने पति भगवान् शङ्करके इस अपमानको सह न सकीं । उन्होंने अपने उस रूपको तत्क्षण वहीं योगाग्निद्वारा जलाकर भस्म कर दिया । वज्रपातके समान इस दारुण-दुःखद घटनाको सुनकर शङ्करजीने क्रुद्ध हो अपने गणोंको भेजकर दक्षके उस यज्ञका पूर्णतः विध्वंस करा दिया ।

सतीने योगाग्निद्वारा अपने शरीरको भस्मकर अगले जन्ममें शैलराज हिमालयकी पुत्रीके रूपमें जन्म लिया । इस बार वह 'शैलपुत्री' नामसे विख्यात हुई । पार्वती, हैमवती भी उन्हींके नाम हैं । उपनिषद्की एक कथाके अनुसार इन्होंने हैमवती स्वरूपसे देवताओंका गर्व-भंजन किया था ।

'शैलपुत्री' देवीका विवाह भी शङ्करजीसे ही हुआ । पूर्वजन्मकी भाँति इस जन्ममें भी वह शिवजीकी अद्धांगिनी बनीं । नव दुर्गाओंमें प्रथम शैलपुत्री दुर्गाका महत्त्व और शक्तियाँ अनन्त हैं । नवरात्र पूजनमें प्रथम दिवस इन्हींकी पूजा और उपासना की जाती है । इस प्रथम दिनकी उपासनामें योगी अपने मनको 'मूलाधार' चक्रमें स्थित करते हैं । यहींसे उनकी योगसाधनाका प्रारम्भ होता है ।

ाँ ाँ🙏
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#वासन्तिक_नवरात्र_महापर्व
एवं भारतीय नव-वर्ष #रौद्र_संवत्सर
श्री विक्रम संवत् २०८३ की आप सभी
को हार्दिक बधाई एवं समस्त
शुभकामनाएँ 💐 सादर नमन !💞🙏💞
नमस्ते अस्तु भगवति मातरस्मान् पाहि सर्वतः🙏

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‼️ १९ मार्च २०२६ ‼️

📜🏵️ #पञ्चाङ्गम् 🏵️📜

🔯 #उ०भा० रा. ४|४० यावत् तदुपरि—
🔯 #उ०भा० रा. ४|४० उ. ⏩ |
🌝 #कुम्भराशिः रा. ११|१६ यावत् तदुपरि—
🌝 #मीनराशिः ति. १४ बुधे रा. ११|१६ उ. ⏩ |
🪩 #स्नान_दानादौ_३०_अमावस्या |
🎊 #नववर्षोत्सवः |
🕉️ #अद्यैव प्रातः ६|४० उ.
चान्द्रसंवत्सरस्यवासन्तनवरात्रस्यचारम्भः |
◍⁠ कलशस्थापनं |
◍ ध्वजारोपणं |
● वर्षपतिपूजा |
● साभ्यङ्गस्नानं |
◍⁠ पञ्चाङ्गफल श्रवणञ्च |
◍ प्रपादानारम्भः |
● अशक्तौ धर्मघटादिदानम् |
● आरोग्य विद्यातिलकव्रतानि |
▪️ अद्यारम्भ वर्षान्तं यावद् #रौद्र संवत्सरस्य
संकल्पादौ विनियोगः |
▪️ शैलपुत्री तथा च नवगौरी यात्रा क्रमेण
मुखनिर्मालिका गौरी दर्शन पूजनञ्च |
🌿▪️मिश्री [ शर्करा ] युत् निम्ब कोपल प्राशनम् I
🎊▪️गुड़ी पड़वा [ दक्षिण भारत ] I
🎊▪️उपादि [ दक्षिण भारत ] I
🎊▪️ तेलगुनववर्षारम्भः I
🚩▪️ कल्पादिः १ |
🎊▪️ युगादिः १ I
💥 #पञ्चक ⏩ |
■ यायिजययोगः प्रा. ६|४० उ. — रा.शे. ५|२५ या. I
■ सर्वार्थसिद्धियोगः रा. ४|४० उ. I
🌅 #सूर्योदयः प्रा. ६|२ वादने |
🌄 #सूर्यास्तः सा. ५|५८ वादने |
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🌞 #विविधमुहूर्त्ताः🌞

🌳 ❈ ति. ३० गुरौ मासान्तादिदोषः।

🌀 ❈ ति. ३० गुरु को मासान्तदोष है।

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🔴 #मूलविचार 🔴

#ज्येष्ठा/ #मूल — ति. ७ भौमे सा. ५|४६ उ. — ति. ९ गुरौ रा. १०|५२ या. |

#रेवती/ #अश्विनी — ति. १२ सोमे सा. ४|३८ उ. |
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💥II पञ्चक विचार II💥

ति. १२ सोमे सा. ४|३८ उ. ⏩ |
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🎊🏵️🕉️ #व्रत_पर्व_एवं_त्योहार 🕉️🏵️🎊

🎊🏵️🎊▪️फलम् - शास्त्र का नियम है कि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को ही रंग की होली घुरेड्डी, छारेडी, धूलिवन्दन मनाया जाय अतः पूरे देश में रंग की होली का प्रसिद्ध पर्व आज ४ मार्च बुधवार को मना जायेगा। आज होलिका भस्म को मस्तक पर स्पर्श कराकरे आगामी संवत्सर की कुशलता की मंगल कामना की जायेगी। वास्तव में यह पर्व आपसी सद्‌भाव के उन्नयन एवं मनोविकारों के शमन का है।

🎊🏵️🎊▪️ संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत का मान कल ६ मार्च शुक्रवार को होगा । चन्द्रोदय रात ८|४६ बजे चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जायेगा।

🎊🏵️🎊▪️ रंग पंचमी का पर्व ८ मार्च रविवार को होगा।

🎊🏵️🎊▪️काशी का लौकिक पर्व वृद्ध अङ्गारक ( बुढ़वा मंगल ) १० मार्च को काशी की प्राचीन परम्परा के अनुसार मनाया जायेगा। यह एक काशी का सांस्कृतिक पर्व है।

🎊🏵️🎊▪️श्री शीतलाष्टमी का व्रत ११ मार्च बुधवार को कि जायेगा। इसमें वासी पक्वान्न प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है।

🎊🏵️🎊▪️ पाप मोचनी एकादशी व्रत का मान सबके लिए १५ मार्च रविवार को होगा।

🎊🏵️🎊▪️पुत्र की कामना से सोम प्रदोष व्रत १६ मार्च को कि जायेगा।

🎊🏵️🎊▪️ मास शिवरात्रि का व्रत एवं वारुणी पर्वयोग १७ मार्च मंगलवार को है।

🎊🏵️🎊▪️ चैत्र कृष्ण चतुर्दशी १८ मार्च बुधवार को शिव सान्निध्य में गंगा स्नान करने से प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आज काशी के केदार कुण्ड का जल ग्रहण करना अत्यन्त पुण्यफल कारक माना जाता है।

🎊🏵️🎊▪️श्राद्ध के लिये अमावस्या का मान आज १८ मार्च बुधवार को होगा।

🎊🏵️🎊▪️स्नान दान की अमावस्या १९ मार्च गुरुवार को होगी और इसी के साथ संवत् २०८२ की समाप्ति भी हो जावेगी।

🎊🏵️🎊▪️इस वर्ष एक विशेष परिस्थिति बन रही है कि चैत्र कृष्ण अमावस्या प्रातः ६।४० वजे तक है। इसके बाद प्रतिपदा ( अगले संवत्सर की ) लग जायेगी जो अगले सूर्योदय से पूर्व ५।२४ बजे तक रहेगी। ऐसी परिस्थिति में शास्त्रीय आदेश के अनुसार १९ मार्च गुरुवार से ही क्षयवती प्रतिपदा में नया संवत्सर २०८३ बासन्तिक नवरात्र प्रारम्भ हो जायेगा। नवरात्र का कलशस्थापन प्रातः ६।४० बजे के बाद किसी भी समय किया जायेगा। शैलपुत्री एवं मुखनिर्मालिका गौरी का दर्शन-पूजन आज ही किया जायेगा। 'सिद्धार्थ' नामक नव संवत्सर का विनियोग पूजनादि सभी धार्मिक कृत्य में किये जायेंगे। देवगुरु बृहस्पति इस संवत्सर के राजा होंगे।

👉 पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का सूर्य ४ मार्च बुधवार को रात ३।५७ बजे से आवेगा।

👉 मीन राशि की सूर्य संक्रान्ति १४ मार्च शनिवार को रात ३।७ बजे से आयेगी एवं इसी के साथ खरमास प्रारम्भ हो जायेगा।

👉 उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का सूर्य १८ मार्च बुधवार को दिन ११।१७ बजे से आयेगा। शुभम्।
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📜 #श्रीशुभ_कालयुक्त_संवत्_२०८२_चैत्रकृष्णपक्षःI
#सौम्यायनं_याम्यगोलःl #वसन्तर्त्तुl #गुरुवारl
#अमावस्या प्रातः ६|४० यावत् तदुपरि— #प्रतिपदाl
#प्रतिपदा रा.शे. ५|२५ यावत् तदुपरि— #द्वितीयाl
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❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀
#दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका
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📜 #श्रीशुभ__रौद्र__संवत्__२०८३__चैत्रशुक्लपक्षःI
#सौम्यायनं_याम्यगोलःl #वसन्तर्त्तुl #गुरुवारl
#प्रतिपदा रा.शे. ५|२५ यावत् तदुपरि— #द्वितीयाl
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❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀
#दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका

26/02/2026

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी या रंगभरी एकादशी कहते हैं, इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है।

आमलकी या रंगभरी एकादशी के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, इस दिन को मनाने के कुछ अनूठे और रोचक पहलू निम्नलिखित हैं:

- आंवले का महत्व: इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है और भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करते हैं।।
- पौराणिक कथा: माना जाता है कि भगवान शिव इस दिन माता पार्वती का गौना कराने के बाद काशी पहुंचे थे, और वहां उनके आगमन का उत्सव मनाया गया था।
- रंगों का समावेश: इस दिन काशी में बाबा विश्वनाथ और माँ पार्वती को रंग अर्पित करने की परंपरा है, जो होली के आगमन की शुरुआत का प्रतीक है।
- आमलकी एकादशी का व्रत पाप नाश, मोक्ष प्राप्ति और स्वास्थ्य लाभ देने वाला माना जाता है।

इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करने से सुख-समृद्धि और जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

15/02/2026
15/02/2026
24/01/2026

#दशमहाविद्या_६

🪷 #भगवती_त्रिपुरभैरवी🪷

क्षीयमान विश्वके अधिष्ठान दक्षिणामूर्ति कालभैरव हैं उनकी शक्ति ही त्रिपुरभैरवी है । ये ललिता या महात्रिपुरसुन्दरीकी रथवाहिनी हैं । ब्रह्माण्डपुराणमें इन्हें गुप्त योगिनियोंकी अधिष्ठात्री देवीके रूपमें चित्रित किया गया है । मत्स्यपुराणमें इनके त्रिपुरभैरवी, कोलेशभैरवी, रूद्रभैरवी, चैतन्यभैरवी तथा नित्याभैरवी आदि रूपोंका वर्णन प्राप्त होता है । इन्द्रियोंपर विजय और सर्वत्र उत्कर्षकी प्राप्तिहेतु त्रिपुरभैरवीकी उपासनाका वर्णन शास्त्रोंमें मिलता है । महाविद्याओंमें इनका छठा स्थान है । त्रिपुरभैरवीका मुख्य उपयोग घोर कर्ममें होता है ।

इनके ध्यानका उल्लेख दुर्गासप्तशतीके तीसरे अध्यायमें महिषासुर-वधके प्रसंगमें हुआ है । इनका रंग लाल है । ये लाल वस्त्र पहनती हैं, गलेमें मुण्डमाला धारण करती हैं और स्तनोंपर रक्त चन्दनका लेप करती हैं, ये अपने हाथोंमें जपमाला, पुस्तक, तथा वर और अभय मुद्रा धारण करती हैं । ये कमलासन पर विराजमान हैं । भगवती त्रिपुरभैरवीने ही मधुपान करके महिषका हृदय विदीर्ण किया था । रुद्रयामल एवं भैरवीकुलसर्वस्वमें इनकी उपासना तथा कवचका उल्लेख मिलता है । संकटोंसे मुक्तिके लिये भी इनकी उपासना करनेका विधान है ।

घोर कर्मके लिये कालकी विशेष अवस्थाजनित मानोंको शान्त कर देनेवाली शक्तिको ही त्रिपुरभैरवी कहा जाता है । इनका अरुण वर्ण विमर्शका प्रतीक है । इनके गलेमें सुशोभित मुण्डमाला ही वर्णमाला है । देवीके रक्तलिप्त पयोधर रजोगुणसम्पन्न सृष्टि-प्रक्रियाके प्रतीक हैं । अक्षजपमाला वर्णसमाम्नायकी प्रतीक है । पुस्तक ब्रम्हविद्या है, त्रिनेत्र वेदत्रयी हैं तथा स्मिति हास करुणा है ।

आगम ग्रन्थोंके अनुसार त्रिपुरभैरवी एकाक्षररूप ( प्रणव ) हैं । इनसे सम्पूर्ण भुवन प्रकाशित हो रहे हैं तथा अन्तमें इन्हींमें लय हो जायँगे । ' अ ' से लेकर विसर्गतक सोलह वर्ण भैरव कहलाते हैं तथा क से क्ष तकके वर्ण योनि अथवा भैरवी कहे जाते हैं । स्वच्छन्दोद्योतके प्रथम पटलमें इस पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है । यहांपर त्रिपुरभैरवीको योगेश्वरीरूपमें बतलाया गया है । इन्होंने भगवान् शंकरको पतिरूपमें प्राप्त करनेके लिये कठोर तपस्या करनेका दृढ़ निर्णय लिया था । बड़े-बड़े ऋषि-मुनि इनकी तपस्याको देखकर दंग रह गये । इससे सिद्ध होता है कि भगवान् शंकरकी उपासनामें निरत उमाका दृढ़निश्चयी स्वरूप ही त्रिपुरभैरवी का परिचायक है । त्रिपुरभैरवीकी स्तुतिमें कहा गया है कि भैरवी सूक्ष्म वाक् तथा जगत् के मूल कारणकी अधिष्ठात्री है ।

त्रिपुरभैरवीके अनेक भेद हैं; जैसे सिद्धिभैरवी, चैतन्यभैरवी, भुनेश्वरीभैरवी, कमलेश्वरीभैरवी, कामेश्वरीभैरवी, षट्कूटाभैरवी, नित्याभैरवी, कोलेशीभैरवी, रुद्रभैरवी आदि ।

सिद्धिभैरवी उत्तराम्नाय पीठकी देवी हैं । नित्याभैरवी पश्चिमाम्नाय पीठकी देवी हैं, इनके उपासक स्वयं भगवान् शिव हैं । रुद्रभैरवी दक्षिणाम्नाय पीठकी देवी हैं । इनके उपासक भगवान् विष्णु हैं । त्रिपुरभैरवीके भैरव वटुक हैं । मुण्डमालातन्त्रानुसार त्रिपुरभैरवीको भगवान् नृसिंहकी अभिन्न शक्ति बताया गया है । सृष्टिमें परिवर्तन होता रहता है । इसका मूल कारण आकर्षण-विकर्षण है । इस सृष्टिके परिवर्तनमें क्षण-क्षणमें होनेवाली भावी क्रियाकी अधिष्ठातृशक्ति ही वैदिक दृष्टिसे त्रिपुरभैरवी कही जाती हैं । त्रिपुरभैरवीकी रात्रिका नाम कालरात्रि तथा भैरवका नाम कालभैरव है ।

ाँ ाँ
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उद्यद्भानु-सहस्रकान्ति- ,
मरुण-क्षौमां शिरोमालिकां।
रक्तालिप्त-पयोधरां ,
जपपटीं विद्यामभीतिं वरम्॥
हस्ताब्जैर्दधतीं त्रिनेत्र ,
विलसद्-वक्त्रारविन्दश्रियं ।
देवीं बद्ध-हिमांशु-रत्नमुकुटां
वन्दे समन्द-स्मिताम् ॥💞🙏💞

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‼️ २३ जनवरी २०२६ ‼️

📜🏵️ #पञ्चाङ्गम् 🏵️📜

✡️ #उ०भा० दि. १२|५१ यावत् तदुपरि—
🔯 #रेवती दि. १२|५१ उ. ⏩ |
🌝 #मीनराशि: ति.५ शुक्रे दि. ७|४१ उ. ⏩ |
👉 यत्र कुत्रापि यो माघेस्मरणन्वितः।
करोति मज्जनं तीर्थे सलभेत् गाङ्गमज्जनम्।
👉 माघे मूलकं ( मूली ) भक्षणं न कार्यम्।
👉 मासपर्यंत स्नानेप्यशक्तत्रयहं एकाहं वा स्यात्।
👉 यावन्माघमशक्तावन्ते दिनत्रयं स्नानम् विधेयम् |
🕉️ #गुप्तनवरात्र ⏩|
🚩 #श्रीशीतलाषष्ठी ( बंगाल ) |
⭕ #श्रवणे_सूर्यः सा. ४|३५ |
💥 #पञ्चक ति. २ भौमे रा. १|३० ⏩ |
■ यायिजययोगः रा. १०|३६ उ. ⏩ |
■ रवियोगः दि. १२|५१ या. |
■ पुनः रवियोगः सा. ४|३५ उ. ⏩ |
🌅 #सूर्योदयः प्रा. ६|३८ वादने |
🌄 #सूर्यास्तः सा. ५|२२ वादने |

पौष पूर्णिमा से माघ स्नान का मन्त्र—

दुःखदारिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च ।
प्रातः स्नानं करोम्यद्य माघे पाप विनाशने ।
मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युतमाधव ।
स्नानेनानेन मे देव यथोक्तफलदो भव ॥

यह मन्त्र पढ़ते हुए स्नान करें ।

तथा पुनः अर्घ्य दान दें—
मन्त्र—

सवित्रे प्रसवित्रे च परं धाम जले मम ।
त्वत्तेजसा परिभ्रष्टं पापं यातु सहस्त्रधा ॥

इसके बाद तर्पण आदि करें । -------------------------------------------------------------------------

🌞 #विविधमुहूर्त्ताः🌞

🌳 ❈ ति. ६ शनौ उ.भा. भे सुभगांविनाकृष्णवस्त्रधारण मुहूर्त्तः।

🌀 ❈ ति. ६ शनि को उ.भा. में सौभाग्यवती को छोड़कर कृष्णवस्त्रधारण मुहूर्त है।

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💥II पञ्चक विचार II💥

ति. २ भौमे रा. १|३० उ. — ति. ७ रवौ दि. ११|४७ या. I
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🎊🏵️🕉️ #व्रत_पर्व_एवं_त्योहार 🕉️🏵️🎊

🎊🏵️🎊▪️फलम् - चतुर्दशी तिथि की हानि हो जाने के कारण यह पक्ष १४ दिन का ही है। मंगलवार धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि का चन्द्रदर्शन मु.३० बाजार भाव को स्थिर रखेगा। यदि आप पूरे माघ मास भर गंगा स्नान करने में असमर्थ हैं तो तीन दिन तक स्नान कर लेने से भी पूरे माघ स्नान का फल प्राप्त हो जाता है।

🎊🏵️🎊▪️ माघ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र प्रारम्भ हो जायेगा। इसमें साधक गुप्त रूप से सिद्धि प्राप्त करने के लिए भवगती की पूजा आराधना अनुष्ठान करते हैं।

🎊🏵️🎊▪️ वसन्त पंचमी माता भगवती के विद्यादायिनी सरस्वती स्वरूप की आराधना का पर्व आज २३ जनवरी शुक्रवार को मनाया जायेगा। वागीश्वरी जयन्ती वाणी पूजा वसन्तोत्सव, रतिकाम महोत्सव के साथ विद्यानुरागी श्रद्धालुजन माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव पूर्वक पूजा अर्चना करेंगे। यह प्रकृति के उत्सव का भी पर्व है।

🎊🏵️🎊▪️अचला सप्तमी, रथ सप्तमी भी २५ जनवरी रविवार को है।

🎊🏵️🎊▪️भीष्माष्टमी २६ जनवरी सोमवार को है; इसमें सनातन धर्म के सार्वभौमिक सर्वकालिक पूर्वज पितामह भीष्म का श्राद्ध तर्पण सन्तान प्राप्ति के निमित्त किया जाता है।

🎊🏵️🎊▪️ महानन्दा नवमी का मान २७ जनवरी मंगलवार को होगा। आज ब्रह्म नायक श्री हरसू ब्रह्म देव की जयन्ती उनके धाम चौनपुर रोहतास में दर्शन पूजन महोत्सव के साथ सम्पन्न होगी।

🎊🏵️🎊▪️जया एकादशी २९ जनवरी गुरुवार को होगी। इसे भैमी एकादशी कहते है।

🎊🏵️🎊▪️ प्रदोष का व्रत ३० जन. शुक्रवार को किया जायेगा एवं आज ही भीष्म द्वादशी में भीष्म को उद्देश्य कर श्राद्ध तर्पण करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

🎊🏵️🎊▪️स्नान दान एवं व्रत सहित माघी पूर्णिमा १ फरवरी रविवार को होगी। आज ही राज राजेश्वरी ललिता देवी की जयन्ती एवं सन्त रविदास की जयन्ती भी मनाई जायेगी। सन्त रविदास की जन्मस्थली काशी के सीर गोवर्धन नामक स्थान तक शोभायात्रा निकाली जायेगी एवं विभिन्न समारोह सम्पन्न होंगे। माघी पूर्णिमा में तिल, कम्बल आदि का दान पुण्यफलदायक माना गया है।

👉 श्रवण नक्षत्र का सूर्य २४ जनवरी शनिवार को दिन में ४ बजे से आयेगा। शेयर बाजार में तेजी का झटका आयेगा। मादक द्रव्यों में तेजी चलेगी। पक्षान्त १ फरवरी को पश्चिम दिशा में शुक्र का उदय हो जायेगा। वर्षा होने तथा पुनः कड़ाके की ठंडक बढ़ जाने की सम्भावना है।।
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|| माघमासकृत्यम् ||

🔸 माघे_प्रयागस्नानमाहात्म्यम् :

प्रयागे माघ मासे तु त्र्यहं स्नानस्य यत्फलम् ।
अश्वमेधसहस्त्रेण तत्फलम् लभते भुवि ॥

[ पृथ्वी पर माघमास में मात्र तीन दिन प्रयाग स्नान करने मात्र से भी १ हजार अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है । ]

🔸यावान्माघं स्नानाशक्तौ त्र्यहं स्नायात् ॥
महामाघीं पुरस्कृत्य स्नायात्तत्रदिनत्रयमिति।

[ सम्पूर्ण माघ में तीर्थ स्नान न कर पाने की स्थिति में माघी पूर्णिमा से पूर्व तीन दिनों में विधि पूर्वक अस्थान करें। ]



🔹 माघसनियमाः —
भूमौ शयीतहोतव्यं साज्यं तिलसमन्वितम्।
सर्वान् कामानवाप्नोति विन्दते परमं सुखम्॥

✍️ माघमास में जो कहीं से भी प्रयाग का स्मरण करके स्नान करता है, उसे प्रयाग स्नान का फल प्राप्त होता है । माघमासमें मूली नहीं खाना चाहिए।

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📜 #श्रीशुभ_कालयुक्त_संवत्_२०८२_माघशुक्लपक्षःI
#सौम्यायनं_याम्यगोलःl #शिशिरर्त्तुःl #शनिवारl
#षष्ठी रात्रि १०|३६ यावत् तदुपरि— #सप्तमीl
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❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀
#दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका

23/01/2026

#दशमहाविद्या_५

🪷 #भगवती_भुवनेश्वरी🪷

देवीभागवतमें वर्णित मणिद्वीपकी अधिष्ठात्री देवी हृल्लेखा ( ह्रीं ) मन्त्रकी स्वरूपाशक्ति और सृष्टिक्रममें महालक्ष्मीस्वरूपा— आदिशक्ति भगवती भुवनेश्वरी भगवान् शिवके समस्त लीला-विलासकी सहचरी हैं । जगदम्बा भुवनेश्वरीका स्वरूप सौम्य और अंगकान्ति अरुण है । भक्तोंको अभय और समस्त सिद्धियाँ प्रदान करना इनका स्वाभाविक गुण है । दशमहाविद्याओंमें ये पाँचवें स्थान पर परिगणित हैं । देवीपुराणके अनुसार मूलप्रकृतिका दूसरा नाम ही भुवनेश्वरी है । ईश्वररात्रिमें जब ईश्वरके जगद्रूप व्यवहारका लोप हो जाता है, उस समय केवल ब्रह्म अपनी अव्यक्त प्रकृतिके साथ शेष रहता है, तब ईश्वररात्रिकी अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी कहलाती हैं । अंकुश और पाश इनके मुख्य आयुध हैं । अंकुश नियन्त्रणका प्रतीक है और पाश राग अथवा आसक्तिका प्रतीक है । इस प्रकार सर्वरूपा मूल प्रकृति ही भुवनेश्वरी हैं, जो विश्वको वमन करनेके कारण वामा, शिवमयी होनेसे जेष्ठा तथा कर्म-नियन्त्रण, फलदान और जीवोंको दण्डित करनेके कारण रौद्री कही जाती हैं । भगवान् शिवका वाम भाग ही भुवनेश्वरी कहलाता है । भुवनेश्वरीके संगसे ही भुवनेश्वर सदाशिव को सर्वेश होनेकी योग्यता प्राप्त होती है ।

महानिर्वाणतन्त्रके अनुसार सम्पूर्ण महाविद्याएँ भगवती भुवनेश्वरीकी सेवा में सदा संलग्न रहती हैं । सात करोड़ महामन्त्र इनकी सदा आराधना करते हैं । दसमहाविद्याएँ ही दस सोपान हैं । काली तत्त्वसे निर्मित होकर कमला तत्त्वतककी दस स्थितियाँ हैं, जिनसे अव्यक्त भुवनेश्वरी व्यक्त होकर ब्रह्माण्डका रूप धारण कर सकती हैं तथा प्रलयमें कमलासे अर्थात् व्यक्त जगत् से क्रमश: लय होकर कालीरूपमें मूल प्रकृति बन जाती हैं । इसलिये इन्हें कालकी जन्मदात्री भी कहा जाता है ।

दुर्गासप्तशतीके ग्यारहवें अध्यायके मंगलाचरण में भी कहा गया है कि ' मैं भुवनेश्वरी देवीका ध्यान करता हूँ । उनके श्रीअंगोंकी शोभा प्रातःकालके सूर्यदेवके समान अरुणाभ है । उनके मस्तकपर चन्द्रमाका मुकुट है । तीन नेत्रोंसे युक्त देवीके मुखपर मुस्कानकी छटा छायी रहती है । उनके हाथोंमें पाश, अङ्कुश, वरद एवं अभय मुद्रा शोभा पाते हैं ।

इस प्रकार बृहन्नीलतन्त्रकी यह अवधारणा पुराणोंके विवरणोंसे भी पुष्ट होती है कि प्रकारान्तरसे काली और भुवनेशी दोनोंमें अभेद है । अव्यक्त प्रकृति भुवनेश्वरीही रक्तवर्णा काली हैं । देवीभागवतके अनुसार दुर्गम नामक दैत्यके अत्याचार से संतप्त होकर देवताओं और ब्राह्मणों ने हिमालयपर सर्वकारणस्वरूपा भगवती भुनेश्वरीकी ही आराधना की थी । उनकी आराधनासे प्रसन्न होकर भगवती भुनेश्वरी तत्काल प्रकट हो गयीं । वे अपने हाथोंमें बाण, कमल-पुष्प तथा शाक-मूल लिये हुए थीं । उन्होंने अपने नेत्रोंसे अश्रुजलकी सहस्त्रों धाराएँ प्रकट कीं । इस जलसे भूमण्डलके सभी प्राणी तृप्त हो गये । समुद्रों तथा सरिताओंमें अगाध जल भर गया और समस्त औषधियाँ सिंच गयीं । अपने हाथमें लिये गये शाकों और फल-मूलसे प्राणियोंका पोषण करनेके कारण भगवती भुनेश्वरी ही ' शताक्षी ' तथा ' शाकम्भरी ' नामसे विख्यात हुईं । इन्होंने ही दुर्गमासुरको युद्धमें मारकर उसके द्वारा अपहृत वेदोंको देवताओंको पुनः सौपा था । उसके बाद भगवती भुवनेश्वरीका एक नाम दुर्गा प्रसिद्ध हुआ ।

भगवती भुवनेश्वरीकी उपासना पुत्र-प्राप्तिके लिये विशेष फलप्रदा है । रुद्रयामलमें इनका कवच, नीलसरस्वतीतन्त्रमें इनका हृदय तथा महातन्त्रार्णवमें इनका सहस्रनाम संकलित है ।

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उद्यद्दिनद्युति-मिन्दुकिरीटां ,
तुङ्गकुचां नयनत्रययुक्ताम्।
स्मेरमुखीं वरदाङ्कुश-पाशा-,
भीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम्॥
जगज्जनानन्दकरीं जयाख्यां ,
यशस्विनीं यन्त्रसुयज्ञयोनिम्।
जितामितामित्र-कृतप्रपञ्चां ,
भजामहे श्रीभुवनेश्वरीं ताम्॥
हरौ प्रसुप्ते भुवनत्रयान्ते ,
अवातरन्नाभिजपद्मजन्मा ।
विधिस्ततोऽन्धे विदधारयत्पदं,
भजामहे श्रीभुवनेश्वरीं ताम्॥💞🙏💞

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‼️ २३ जनवरी २०२६ ‼️

📜🏵️ #पञ्चाङ्गम् 🏵️📜

✡️ #पू०भा० दि. १|३६ यावत् तदुपरि—
🔯 #उ०भा० दि. १|३६ उ. ⏩ |
🌝 #कुम्भराशिः दि. ७|४१ यावत् तदुपरि—
🌝 #मीनराशि: दि. ७|४१ उ. ⏩ |
👉 यत्र कुत्रापि यो माघेस्मरणन्वितः।
करोति मज्जनं तीर्थे सलभेत् गाङ्गमज्जनम्।
👉 माघे मूलकं ( मूली ) भक्षणं न कार्यम्।
👉 मासपर्यंत स्नानेप्यशक्तत्रयहं एकाहं वा स्यात्।
👉 यावन्माघमशक्तावन्ते दिनत्रयं स्नानम् विधेयम् |
🕉️ #गुप्तनवरात्र ⏩|
🕉️ #श्रीवसन्तपञ्चमी_५ |
◍ वागीश्वरी जयन्ती यात्रा च |
◍ रतिकाम महोत्सवः |
🚩 #तक्षक_पूजा_५ |
🚩 #सरस्वती_पूजनम् |
🎊 #श्रीनेताजी_जयन्ती |
💥 #पञ्चक ति. २ भौमे रा. १|३० ⏩ |
■ रवियोगः दि. १|३६ उ. |
🌅 #सूर्योदयः प्रा. ६|३९ वादने |
🌄 #सूर्यास्तः सा. ५|२१ वादने |

पौष पूर्णिमा से माघ स्नान का मन्त्र—

दुःखदारिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च ।
प्रातः स्नानं करोम्यद्य माघे पाप विनाशने ।
मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युतमाधव ।
स्नानेनानेन मे देव यथोक्तफलदो भव ॥

यह मन्त्र पढ़ते हुए स्नान करें ।

तथा पुनः अर्घ्य दान दें—
मन्त्र—

सवित्रे प्रसवित्रे च परं धाम जले मम ।
त्वत्तेजसा परिभ्रष्टं पापं यातु सहस्त्रधा ॥

इसके बाद तर्पण आदि करें । -------------------------------------------------------------------------

🌞 #विविधमुहूर्त्ताः🌞

🌳 ❈ ति. ५ शुक्रे पू.भा. भे शनियुतिः । दि. १|३६ उ. उ.भा. मे शिशुताम्बूलभक्षण भूम्युपवेशन गर्भाधान ( पंचम्यां ) शय्यासनाद्युपभोग सुभगांविनानववस्त्रधारण लतापादपारोपण नौकाघटन विपणि धान्यच्छेदन मुहूर्तः।।

🌀 ❈ ति. ५ शुक्र को पू.भा. में शनियुति है। दि.१|३६ के बाद उ.भा. में शिशुताम्बूलभक्षण भूम्युपवेशन गर्भाधान (पंचमी में) नवीन खटिया-चौकी आदि का उपभोग सौभाग्यवती को छोड़कर नवीनवस्त्रधारण वाटिकारोपण नावनिर्माण विपणि फसल काटने का मुहूर्त है।

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💥II पञ्चक विचार II💥

ति. २ भौमे रा. १|३० उ. — ति. ७ रवौ दि. ११|४७ या. I
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🎊🏵️🕉️ #व्रत_पर्व_एवं_त्योहार 🕉️🏵️🎊

🎊🏵️🎊▪️फलम् - चतुर्दशी तिथि की हानि हो जाने के कारण यह पक्ष १४ दिन का ही है। मंगलवार धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि का चन्द्रदर्शन मु.३० बाजार भाव को स्थिर रखेगा। यदि आप पूरे माघ मास भर गंगा स्नान करने में असमर्थ हैं तो तीन दिन तक स्नान कर लेने से भी पूरे माघ स्नान का फल प्राप्त हो जाता है।

🎊🏵️🎊▪️ माघ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र प्रारम्भ हो जायेगा। इसमें साधक गुप्त रूप से सिद्धि प्राप्त करने के लिए भवगती की पूजा आराधना अनुष्ठान करते हैं।

🎊🏵️🎊▪️ वसन्त पंचमी माता भगवती के विद्यादायिनी सरस्वती स्वरूप की आराधना का पर्व आज २३ जनवरी शुक्रवार को मनाया जायेगा। वागीश्वरी जयन्ती वाणी पूजा वसन्तोत्सव, रतिकाम महोत्सव के साथ विद्यानुरागी श्रद्धालुजन माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव पूर्वक पूजा अर्चना करेंगे। यह प्रकृति के उत्सव का भी पर्व है।

🎊🏵️🎊▪️अचला सप्तमी, रथ सप्तमी भी २५ जनवरी रविवार को है।

🎊🏵️🎊▪️भीष्माष्टमी २६ जनवरी सोमवार को है; इसमें सनातन धर्म के सार्वभौमिक सर्वकालिक पूर्वज पितामह भीष्म का श्राद्ध तर्पण सन्तान प्राप्ति के निमित्त किया जाता है।

🎊🏵️🎊▪️ महानन्दा नवमी का मान २७ जनवरी मंगलवार को होगा। आज ब्रह्म नायक श्री हरसू ब्रह्म देव की जयन्ती उनके धाम चौनपुर रोहतास में दर्शन पूजन महोत्सव के साथ सम्पन्न होगी।

🎊🏵️🎊▪️जया एकादशी २९ जनवरी गुरुवार को होगी। इसे भैमी एकादशी कहते है।

🎊🏵️🎊▪️ प्रदोष का व्रत ३० जन. शुक्रवार को किया जायेगा एवं आज ही भीष्म द्वादशी में भीष्म को उद्देश्य कर श्राद्ध तर्पण करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

🎊🏵️🎊▪️स्नान दान एवं व्रत सहित माघी पूर्णिमा १ फरवरी रविवार को होगी। आज ही राज राजेश्वरी ललिता देवी की जयन्ती एवं सन्त रविदास की जयन्ती भी मनाई जायेगी। सन्त रविदास की जन्मस्थली काशी के सीर गोवर्धन नामक स्थान तक शोभायात्रा निकाली जायेगी एवं विभिन्न समारोह सम्पन्न होंगे। माघी पूर्णिमा में तिल, कम्बल आदि का दान पुण्यफलदायक माना गया है।

👉 श्रवण नक्षत्र का सूर्य २४ जनवरी शनिवार को दिन में ४ बजे से आयेगा। शेयर बाजार में तेजी का झटका आयेगा। मादक द्रव्यों में तेजी चलेगी। पक्षान्त १ फरवरी को पश्चिम दिशा में शुक्र का उदय हो जायेगा। वर्षा होने तथा पुनः कड़ाके की ठंडक बढ़ जाने की सम्भावना है।।
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|| माघमासकृत्यम् ||

🔸 माघे_प्रयागस्नानमाहात्म्यम् :

प्रयागे माघ मासे तु त्र्यहं स्नानस्य यत्फलम् ।
अश्वमेधसहस्त्रेण तत्फलम् लभते भुवि ॥

[ पृथ्वी पर माघमास में मात्र तीन दिन प्रयाग स्नान करने मात्र से भी १ हजार अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है । ]

🔸यावान्माघं स्नानाशक्तौ त्र्यहं स्नायात् ॥
महामाघीं पुरस्कृत्य स्नायात्तत्रदिनत्रयमिति।

[ सम्पूर्ण माघ में तीर्थ स्नान न कर पाने की स्थिति में माघी पूर्णिमा से पूर्व तीन दिनों में विधि पूर्वक अस्थान करें। ]



🔹 माघसनियमाः —
भूमौ शयीतहोतव्यं साज्यं तिलसमन्वितम्।
सर्वान् कामानवाप्नोति विन्दते परमं सुखम्॥

✍️ माघमास में जो कहीं से भी प्रयाग का स्मरण करके स्नान करता है, उसे प्रयाग स्नान का फल प्राप्त होता है । माघमासमें मूली नहीं खाना चाहिए।

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📜 #श्रीशुभ_कालयुक्त_संवत्_२०८२_माघशुक्लपक्षःI
#सौम्यायनं_याम्यगोलःl #शिशिरर्त्तुःl #शुक्रवारl
#पञ्चमी रात्रि १२|९ यावत् तदुपरि— #षष्ठीl
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❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀
#दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका

23/01/2026

सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌸 🙏

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