24/01/2026
#दशमहाविद्या_६
🪷 #भगवती_त्रिपुरभैरवी🪷
क्षीयमान विश्वके अधिष्ठान दक्षिणामूर्ति कालभैरव हैं उनकी शक्ति ही त्रिपुरभैरवी है । ये ललिता या महात्रिपुरसुन्दरीकी रथवाहिनी हैं । ब्रह्माण्डपुराणमें इन्हें गुप्त योगिनियोंकी अधिष्ठात्री देवीके रूपमें चित्रित किया गया है । मत्स्यपुराणमें इनके त्रिपुरभैरवी, कोलेशभैरवी, रूद्रभैरवी, चैतन्यभैरवी तथा नित्याभैरवी आदि रूपोंका वर्णन प्राप्त होता है । इन्द्रियोंपर विजय और सर्वत्र उत्कर्षकी प्राप्तिहेतु त्रिपुरभैरवीकी उपासनाका वर्णन शास्त्रोंमें मिलता है । महाविद्याओंमें इनका छठा स्थान है । त्रिपुरभैरवीका मुख्य उपयोग घोर कर्ममें होता है ।
इनके ध्यानका उल्लेख दुर्गासप्तशतीके तीसरे अध्यायमें महिषासुर-वधके प्रसंगमें हुआ है । इनका रंग लाल है । ये लाल वस्त्र पहनती हैं, गलेमें मुण्डमाला धारण करती हैं और स्तनोंपर रक्त चन्दनका लेप करती हैं, ये अपने हाथोंमें जपमाला, पुस्तक, तथा वर और अभय मुद्रा धारण करती हैं । ये कमलासन पर विराजमान हैं । भगवती त्रिपुरभैरवीने ही मधुपान करके महिषका हृदय विदीर्ण किया था । रुद्रयामल एवं भैरवीकुलसर्वस्वमें इनकी उपासना तथा कवचका उल्लेख मिलता है । संकटोंसे मुक्तिके लिये भी इनकी उपासना करनेका विधान है ।
घोर कर्मके लिये कालकी विशेष अवस्थाजनित मानोंको शान्त कर देनेवाली शक्तिको ही त्रिपुरभैरवी कहा जाता है । इनका अरुण वर्ण विमर्शका प्रतीक है । इनके गलेमें सुशोभित मुण्डमाला ही वर्णमाला है । देवीके रक्तलिप्त पयोधर रजोगुणसम्पन्न सृष्टि-प्रक्रियाके प्रतीक हैं । अक्षजपमाला वर्णसमाम्नायकी प्रतीक है । पुस्तक ब्रम्हविद्या है, त्रिनेत्र वेदत्रयी हैं तथा स्मिति हास करुणा है ।
आगम ग्रन्थोंके अनुसार त्रिपुरभैरवी एकाक्षररूप ( प्रणव ) हैं । इनसे सम्पूर्ण भुवन प्रकाशित हो रहे हैं तथा अन्तमें इन्हींमें लय हो जायँगे । ' अ ' से लेकर विसर्गतक सोलह वर्ण भैरव कहलाते हैं तथा क से क्ष तकके वर्ण योनि अथवा भैरवी कहे जाते हैं । स्वच्छन्दोद्योतके प्रथम पटलमें इस पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है । यहांपर त्रिपुरभैरवीको योगेश्वरीरूपमें बतलाया गया है । इन्होंने भगवान् शंकरको पतिरूपमें प्राप्त करनेके लिये कठोर तपस्या करनेका दृढ़ निर्णय लिया था । बड़े-बड़े ऋषि-मुनि इनकी तपस्याको देखकर दंग रह गये । इससे सिद्ध होता है कि भगवान् शंकरकी उपासनामें निरत उमाका दृढ़निश्चयी स्वरूप ही त्रिपुरभैरवी का परिचायक है । त्रिपुरभैरवीकी स्तुतिमें कहा गया है कि भैरवी सूक्ष्म वाक् तथा जगत् के मूल कारणकी अधिष्ठात्री है ।
त्रिपुरभैरवीके अनेक भेद हैं; जैसे सिद्धिभैरवी, चैतन्यभैरवी, भुनेश्वरीभैरवी, कमलेश्वरीभैरवी, कामेश्वरीभैरवी, षट्कूटाभैरवी, नित्याभैरवी, कोलेशीभैरवी, रुद्रभैरवी आदि ।
सिद्धिभैरवी उत्तराम्नाय पीठकी देवी हैं । नित्याभैरवी पश्चिमाम्नाय पीठकी देवी हैं, इनके उपासक स्वयं भगवान् शिव हैं । रुद्रभैरवी दक्षिणाम्नाय पीठकी देवी हैं । इनके उपासक भगवान् विष्णु हैं । त्रिपुरभैरवीके भैरव वटुक हैं । मुण्डमालातन्त्रानुसार त्रिपुरभैरवीको भगवान् नृसिंहकी अभिन्न शक्ति बताया गया है । सृष्टिमें परिवर्तन होता रहता है । इसका मूल कारण आकर्षण-विकर्षण है । इस सृष्टिके परिवर्तनमें क्षण-क्षणमें होनेवाली भावी क्रियाकी अधिष्ठातृशक्ति ही वैदिक दृष्टिसे त्रिपुरभैरवी कही जाती हैं । त्रिपुरभैरवीकी रात्रिका नाम कालरात्रि तथा भैरवका नाम कालभैरव है ।
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उद्यद्भानु-सहस्रकान्ति- ,
मरुण-क्षौमां शिरोमालिकां।
रक्तालिप्त-पयोधरां ,
जपपटीं विद्यामभीतिं वरम्॥
हस्ताब्जैर्दधतीं त्रिनेत्र ,
विलसद्-वक्त्रारविन्दश्रियं ।
देवीं बद्ध-हिमांशु-रत्नमुकुटां
वन्दे समन्द-स्मिताम् ॥💞🙏💞
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‼️ २३ जनवरी २०२६ ‼️
📜🏵️ #पञ्चाङ्गम् 🏵️📜
✡️ #उ०भा० दि. १२|५१ यावत् तदुपरि—
🔯 #रेवती दि. १२|५१ उ. ⏩ |
🌝 #मीनराशि: ति.५ शुक्रे दि. ७|४१ उ. ⏩ |
👉 यत्र कुत्रापि यो माघेस्मरणन्वितः।
करोति मज्जनं तीर्थे सलभेत् गाङ्गमज्जनम्।
👉 माघे मूलकं ( मूली ) भक्षणं न कार्यम्।
👉 मासपर्यंत स्नानेप्यशक्तत्रयहं एकाहं वा स्यात्।
👉 यावन्माघमशक्तावन्ते दिनत्रयं स्नानम् विधेयम् |
🕉️ #गुप्तनवरात्र ⏩|
🚩 #श्रीशीतलाषष्ठी ( बंगाल ) |
⭕ #श्रवणे_सूर्यः सा. ४|३५ |
💥 #पञ्चक ति. २ भौमे रा. १|३० ⏩ |
■ यायिजययोगः रा. १०|३६ उ. ⏩ |
■ रवियोगः दि. १२|५१ या. |
■ पुनः रवियोगः सा. ४|३५ उ. ⏩ |
🌅 #सूर्योदयः प्रा. ६|३८ वादने |
🌄 #सूर्यास्तः सा. ५|२२ वादने |
पौष पूर्णिमा से माघ स्नान का मन्त्र—
दुःखदारिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च ।
प्रातः स्नानं करोम्यद्य माघे पाप विनाशने ।
मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युतमाधव ।
स्नानेनानेन मे देव यथोक्तफलदो भव ॥
यह मन्त्र पढ़ते हुए स्नान करें ।
तथा पुनः अर्घ्य दान दें—
मन्त्र—
सवित्रे प्रसवित्रे च परं धाम जले मम ।
त्वत्तेजसा परिभ्रष्टं पापं यातु सहस्त्रधा ॥
इसके बाद तर्पण आदि करें । -------------------------------------------------------------------------
🌞 #विविधमुहूर्त्ताः🌞
🌳 ❈ ति. ६ शनौ उ.भा. भे सुभगांविनाकृष्णवस्त्रधारण मुहूर्त्तः।
🌀 ❈ ति. ६ शनि को उ.भा. में सौभाग्यवती को छोड़कर कृष्णवस्त्रधारण मुहूर्त है।
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💥II पञ्चक विचार II💥
ति. २ भौमे रा. १|३० उ. — ति. ७ रवौ दि. ११|४७ या. I
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🎊🏵️🕉️ #व्रत_पर्व_एवं_त्योहार 🕉️🏵️🎊
🎊🏵️🎊▪️फलम् - चतुर्दशी तिथि की हानि हो जाने के कारण यह पक्ष १४ दिन का ही है। मंगलवार धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि का चन्द्रदर्शन मु.३० बाजार भाव को स्थिर रखेगा। यदि आप पूरे माघ मास भर गंगा स्नान करने में असमर्थ हैं तो तीन दिन तक स्नान कर लेने से भी पूरे माघ स्नान का फल प्राप्त हो जाता है।
🎊🏵️🎊▪️ माघ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र प्रारम्भ हो जायेगा। इसमें साधक गुप्त रूप से सिद्धि प्राप्त करने के लिए भवगती की पूजा आराधना अनुष्ठान करते हैं।
🎊🏵️🎊▪️ वसन्त पंचमी माता भगवती के विद्यादायिनी सरस्वती स्वरूप की आराधना का पर्व आज २३ जनवरी शुक्रवार को मनाया जायेगा। वागीश्वरी जयन्ती वाणी पूजा वसन्तोत्सव, रतिकाम महोत्सव के साथ विद्यानुरागी श्रद्धालुजन माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव पूर्वक पूजा अर्चना करेंगे। यह प्रकृति के उत्सव का भी पर्व है।
🎊🏵️🎊▪️अचला सप्तमी, रथ सप्तमी भी २५ जनवरी रविवार को है।
🎊🏵️🎊▪️भीष्माष्टमी २६ जनवरी सोमवार को है; इसमें सनातन धर्म के सार्वभौमिक सर्वकालिक पूर्वज पितामह भीष्म का श्राद्ध तर्पण सन्तान प्राप्ति के निमित्त किया जाता है।
🎊🏵️🎊▪️ महानन्दा नवमी का मान २७ जनवरी मंगलवार को होगा। आज ब्रह्म नायक श्री हरसू ब्रह्म देव की जयन्ती उनके धाम चौनपुर रोहतास में दर्शन पूजन महोत्सव के साथ सम्पन्न होगी।
🎊🏵️🎊▪️जया एकादशी २९ जनवरी गुरुवार को होगी। इसे भैमी एकादशी कहते है।
🎊🏵️🎊▪️ प्रदोष का व्रत ३० जन. शुक्रवार को किया जायेगा एवं आज ही भीष्म द्वादशी में भीष्म को उद्देश्य कर श्राद्ध तर्पण करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
🎊🏵️🎊▪️स्नान दान एवं व्रत सहित माघी पूर्णिमा १ फरवरी रविवार को होगी। आज ही राज राजेश्वरी ललिता देवी की जयन्ती एवं सन्त रविदास की जयन्ती भी मनाई जायेगी। सन्त रविदास की जन्मस्थली काशी के सीर गोवर्धन नामक स्थान तक शोभायात्रा निकाली जायेगी एवं विभिन्न समारोह सम्पन्न होंगे। माघी पूर्णिमा में तिल, कम्बल आदि का दान पुण्यफलदायक माना गया है।
👉 श्रवण नक्षत्र का सूर्य २४ जनवरी शनिवार को दिन में ४ बजे से आयेगा। शेयर बाजार में तेजी का झटका आयेगा। मादक द्रव्यों में तेजी चलेगी। पक्षान्त १ फरवरी को पश्चिम दिशा में शुक्र का उदय हो जायेगा। वर्षा होने तथा पुनः कड़ाके की ठंडक बढ़ जाने की सम्भावना है।।
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|| माघमासकृत्यम् ||
🔸 माघे_प्रयागस्नानमाहात्म्यम् :
प्रयागे माघ मासे तु त्र्यहं स्नानस्य यत्फलम् ।
अश्वमेधसहस्त्रेण तत्फलम् लभते भुवि ॥
[ पृथ्वी पर माघमास में मात्र तीन दिन प्रयाग स्नान करने मात्र से भी १ हजार अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है । ]
🔸यावान्माघं स्नानाशक्तौ त्र्यहं स्नायात् ॥
महामाघीं पुरस्कृत्य स्नायात्तत्रदिनत्रयमिति।
[ सम्पूर्ण माघ में तीर्थ स्नान न कर पाने की स्थिति में माघी पूर्णिमा से पूर्व तीन दिनों में विधि पूर्वक अस्थान करें। ]
🔹 माघसनियमाः —
भूमौ शयीतहोतव्यं साज्यं तिलसमन्वितम्।
सर्वान् कामानवाप्नोति विन्दते परमं सुखम्॥
✍️ माघमास में जो कहीं से भी प्रयाग का स्मरण करके स्नान करता है, उसे प्रयाग स्नान का फल प्राप्त होता है । माघमासमें मूली नहीं खाना चाहिए।
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📜 #श्रीशुभ_कालयुक्त_संवत्_२०८२_माघशुक्लपक्षःI
#सौम्यायनं_याम्यगोलःl #शिशिरर्त्तुःl #शनिवारl
#षष्ठी रात्रि १०|३६ यावत् तदुपरि— #सप्तमीl
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❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀
#दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका