Aanjandham

Aanjandham Aanjan dham is the birth place of veer hanuman...............its located in toto gumla jharkhand....

आप सभी हिन्दु धर्मावलिबियोँ का हनुमान जन्मभूमि मेँ स्वागत है।
जय श्री राम

जय हनुमान
20/04/2013

जय हनुमान

29/03/2013

हनुमान जी की भक्ति की झलक प्रदान करती हैं. आप भी नजर डालिएजरा और हो सके तो कुछ लाइनें अवश्य पढ़ें.
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन॥
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप॥

झारखण्ड के ही हैँ हनुमान जी
17/03/2013

झारखण्ड के ही हैँ हनुमान जी

वीर हनुमान जन्मकथाअप्सरा पुंजिकस्थली (अंजनी नाम से प्रसिद्ध) केसरी नामक वानर कीपत्नी थी। वह अत्यंत सुंदरी थी तथा आभूषणों...
29/01/2013

वीर हनुमान जन्मकथा
अप्सरा पुंजिकस्थली (अंजनी नाम से प्रसिद्ध) केसरी नामक वानर कीपत्नी थी। वह अत्यंत सुंदरी थी तथा आभूषणों से सुसज्जित होकर एकपर्वत शिखर पर खड़ी थी। उनके सौंदर्य पर मुग्ध होकर वायु देव ने उनका आलिंगन किया। व्रतधारिणी अंजनी बहुत घबरा गयी किंतु वायु देव के वरदान से उसकीकोख से हनुमान ने जन्म लिया। [1] जन्म लेने के बाद हनुमान ने आकाशमें चमकते हुए सूर्य को फल समझा और उड़कर लेने के लिए आकाश-मार्गमें गये। मार्ग में उनकी टक्कर राहु से हो गयी। राहु घबराया हुआ इन्द्र के पास पहुंचा और बोला- 'हे इन्द्र, तुमने मुझे अपनी क्षुधा के समाधान के लिए सूर्य और चंद्रमा दिए थे।
आज अमावस्या है, अत: मैं सूर्य कोग्रसने गया था, किंतु वहां तो कोईऔर ही जा रहा है।' इन्द्र क्रुद्धहोकर ऐरावत पर बैठकर चल पड़े। राहु उनसे भी पहले घटनास्थल पर गया। हनुमान ने उसे भी फल समझा तथा उसकी ओर झपटे। उसने इन्द्र को आवाज़ दी। तभी हनुमान ने ऐरावत को देखा। उसे और भी बड़ा फल जानकर वे पकड़ने के लिए बढ़े । इन्द्र ने क्रुद्ध होकर अपने वज्र से प्रहार किया, जिससे हनुमान की बायीं ठोड़ी टूट गयी और वे नीचे गिरे। यह देखकर पवनदेव हनुमान को उठाकर एक गुफ़ामें चले गये। संसार-भर की वायु उन्होंने रोक ली। लोग वायु के अभाव से पीड़ित होकर मरने लगे। मनुष्य-रूपी प्रजा ब्रह्मा के पास गयी। ब्रह्मा विभिन्न देवताओं को लेकर पवनदेव के पास पहुंचे। उनके स्पर्शमात्र से हनुमान ठीक हो गये। साथ आए देवताओं से ब्रह्मा ने कहा- 'यह बालक भविष्य में तुम्हारे लिए हितकर होगा। अत: इसे अनेक वरदानों से विभूषित करो।'
*. इन्द्र ने प्रसन्नता से स्वर्णके कमल की माला देकर कहा- 'मेरेवज्र से इसकी हनु टूटी है, अत: यह हनुमान कहलायेगा। मेरे वज्रसे यह नहीं मरेगा।'
*. सूर्य ने अपना सौंवा भाग हनुमान को दे दिया और भविष्य में सब शास्त्र पढ़ाने का उत्तरदायित्व लिया।
*. यम ने उसे अपने दंड से अभय कर दिया कि वह यम के प्रकोप से नहीं मर पायेगा।
*. वरुण ने दस लाख वर्ष तक वर्षादि में नहीं मरने का वर दिया।
*. कुबेर ने अपने अस्त्र-शस्त्रों से निर्भय कर दिया।
*. महादेव ने किसी भी अस्त्र से न मरने का वर दिया।
*. ब्रह्मा ने हनुमान को दीर्घायुबताया और ब्रह्मास्त्र से न मरने का वर दिया। साथ ही यह वर भी प्रदान किया कि वह इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ होगा।
*. विश्वकर्मा ने अपने बनाये अस्त्र-शस्त्रों से उसे निर्भय कर दिया।
जय श्री राम

दुनिया चले न श्रीराम के बिना।रामजी चलें न हनुमान के बिना।पार न लगोगे श्रीराम के बिना।राम न मिलेंगे हनुमान के बिना। ।कमजो...
26/01/2013

दुनिया चले न श्रीराम के बिना।
रामजी चलें न हनुमान के बिना।
पार न लगोगे श्रीराम के बिना।
राम न मिलेंगे हनुमान के बिना। ।
कमजोर तो हमेशा मजबूरी के चलते विनम्र होता है लेकिन यदि शक्तिशाली व्यक्ति विनम्र है तोनिश्चित ही वह बुद्धि और बल से परिपूर्ण है। डरपोक किस्म के राजा सुग्रीव के समक्ष भी हनुमानजी विनम्र बने रहते थे औरसर्वशक्तिमान प्रभु श्रीराम के समक्ष भी।
राम और सुग्रीव दोनों का ही काम हनुमानजी के बिना एक पल भी चलता नहीं था फिर भी हनुमानजी विनम्रतापूर्वक हाथ जोड़कर खड़े रहते थे। रावण ने हनुमानजीकी विनम्रता का सम्मान नहीं किया, बल्कि उनका अपमान किया। ठीक है आप सम्मान न करो तो कोई बात नहीं लेकिन अपमान करने का अधिकार आपको किसने दिया?
इसका परिणाम रावण को भुगतना पड़ा। हनुमानजी ने लंका स्थित उसके महल को राख में मिला दिया। लोग कहते हैं कि उन्होंने पूरी लंका जला दी जबकि ऐसा नहीं है। हनुमानजी ने रावण के अपराध की सजा सिर्फ रावण को ही दी। रावण के पूरे महल को खाक कर दिया और कहा की दोबारा जब मैं आऊँगा तो तेरी जीवन लीला समाप्त होते हुएदेखने ही आऊँगा।
बुद्धि और शक्ति जब क्रुद्ध होती है तो फिर उस पर किसी का भीबस नहीं चलता। जो जाने-अनजाने राम या हनुमानजी का उपहास या अपमान करते हैं वे नहीं जानते कि वे किस गर्त में गिरते जा रहेहैं।
हमारे पास दो-दो महावीर हैं एक हैं हनुमान और दूसरे हैं वर्धमान। एक परम भक्त हैं तो दूसरे अहिंसा के पुजारी। अहिंसकहुए बगैर भक्त भी नहीं हुआ जा सकता। अजर-अमर जय हनुमान कहने मात्र से ही संकट मिट जाते हैं।
अंजनी पुत्र : हनुमान के पिता सुमेरु पर्वत के राजा केसरी थे तथा उनकी माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र कहा जाता है।
पवन पुत्र : उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ।उस काल में वायु को मारुत भी कहाजाता था। मारुत अर्थात वायु, इसलिए उन्हें मारुति नंदन भी कहा जाता है। वैसे उनमें पवन के वेग के समान उड़ने की शक्ति होने के कारण भी यह नाम दिया गया।
हनुमान : इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की हनु (ठुड्डी) टूट गई थी, इसलिए तब से उनका नाम हनुमान हो गया।
बजरंगबली : वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारणउन्हें वज्रांगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली। लेकिन यह शब्द ब्रज और अवधि के संपर्क में आकर बजरंग बली हो गया। बोलचाल की भाषा में बना बजरंगबली भी सुंदरशब्द है।
भक्तों में श्रेष्ठ हनुमान

01/01/2013

आज नये वर्ष मंगलवार का शुभ दिन आप सभी को शुभकामनायेँ
आज मंगलवार है
महावीर का वार है
सच्चे मन से जो कोई गाये
उसका बेङा पार है
जय श्री राम

आँजनधाम(वीर बजरंगी का जन्मस्थल) झारखण्ड के गुमला जिले से कुछ दुरी पर हैमाता अँजनी के नाम पर इस गाँव का नाम आँजन पङा,माता...
21/12/2012

आँजनधाम(वीर बजरंगी का जन्मस्थल) झारखण्ड के गुमला जिले से कुछ दुरी पर है
माता अँजनी के नाम पर इस गाँव का नाम आँजन पङा,माता अँजनी हनुमान जी को गोद पर लिये हुये हैँ
यह मंदिर काफी प्राचीन और एतिहासिक है
मंदिर से कुछ दुरी पर अँजनी गुफा है
यहाँ दुर दुर से लोग दर्शन करने आते रहते हैँ
यहाँ आने से ऐसा प्रतित होता है मानो सारा जीवन आनंदमयी हो गया हो
जय श्री राम
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अँजनी पुत्र वीर हनुमान की जय
19/12/2012

अँजनी पुत्र वीर हनुमान की जय

19/12/2012

जय बजरंग बली

हनुमान जी की जन्मभूमि "आँजन धाम" मेँ आपका स्वागत है
08/09/2012

हनुमान जी की जन्मभूमि "आँजन धाम" मेँ आपका स्वागत है

07/09/2012

WELCOME TO AANJAN DHAM,ITS HANUMAN JI BIRTH PLACE....LOCATED IN TOTO GUMLA,.......

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