सनातन धर्म

सनातन धर्म सनातन धर्म, हिंदू धर्म का वैकल्पिक नाम है। सनातन, अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त।

20/12/2025
हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है — चैत्र माह की पूर्णिमा को और कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को। एक तिथि...
18/10/2025

हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है —

चैत्र माह की पूर्णिमा को और कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को।

एक तिथि उनके जन्म से जुड़ी है और दूसरी तिथि अमरत्व प्राप्ति की कथा से जुड़ी हुई है।

चैत्र पूर्णिमा की कथा – जन्म दिवसपौराणिक मान्यता के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन अंजनी और केसरी के पुत्र के रूप में भगवान शिव के रुद्रावतार हनुमान जी का जन्म हुआ था। उनके जन्म के समय देवताओं ने उन्हें असाधारण शक्ति और बुद्धि का वरदान दिया था।
बाल्यकाल में एक दिन जब उन्हें बहुत भूख लगी, तो उन्होंने आकाश में चमकते सूर्य को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इंद्र देव ने अपने वज्र से उन पर प्रहार किया, जिससे वे मूर्छित हो गए। यह देखकर उनके पिता पवन देव क्रोधित हो गए और उन्होंने पूरे संसार की वायु रोक दी। ब्रह्मा देव ने हस्तक्षेप कर पवन देव को शांत किया और हनुमान जी को नया जीवन प्रदान किया। इस प्रकार उस दिन को उनके पुनर्जन्म और विजय का प्रतीक माना गया और चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाने लगा।

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की कथा – अमरत्व प्राप्तिदूसरी बार हनुमान जयंती कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (कृष्ण चतुर्दशी) को मनाई जाती है। इस दिन हनुमान जी को अमरत्व और असीम शक्ति का वरदान मिला था। कथा के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान राम की सेवा और माता सीता की भक्ति से प्रसन्न होकर माता सीता ने उन्हें यह वरदान दिया कि वे चिरंजीवी रहेंगे और सदा कलियुग के भक्तों की रक्षा करेंगे।

इसलिए इस दिन को “हनुमान जन्मोत्सव” या “कृष्ण चतुर्दशी हनुमान जयंती” कहा जाता है।

दोनों उत्सवों का विभिन्न क्षेत्रों में महत्वउत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयंती का अधिक प्रचलन है, जबकि दक्षिण भारत में कार्तिक चतुर्दशी वाली हनुमान जयंती को प्रमुख माना गया है। दोनों ही पर्व हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और चिरंजीवत्व के प्रतीक हैं और इन पर पूजा-अर्चना करने से जीवन में ऊर्जा, साहस और संकट से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।

28/08/2025

*गणपति बप्पा के बाद हम मोरया क्यों कहते हैं?*

बहुत से लोग शायद नहीं जानते होंगे!

गणपति बप्पा मोरया में मोरया शब्द का एक विशेष महत्व है।

भक्तगण भगवान गणेश की स्तुति करने के लिए हर समय गणपति बप्पा मोरया का जाप करते हैं।
लेकिन हममें से कितने लोग जानते हैं कि मोरया शब्द का क्या अर्थ है?

मोरया शब्द चौदहवीं शताब्दी के भगवान गणेश के एक प्रसिद्ध भक्त मोरया गोसावी को संदर्भित करता है, जो मूल रूप से कर्नाटक के शालिग्राम नामक गाँव के थे, जहाँ उनकी भक्ति को पागलपन माना जाता था।
बाद में वे पुणे के पास चिंचवाड़ में बस गए और कठोर तपस्या करके भगवान का आह्वान किया।

उन्होंने श्री चिंतामणि में सिद्धि (विशेष शक्तियाँ और आशीर्वाद) प्राप्त कीं और उनके पुत्र ने इस घटना की स्मृति में मंदिर का निर्माण कराया।

कहा जाता है कि मोरया ने अहमदाबाद के सिद्धि विनायक और कोरेगांव के मोरेश्वर में भी तपस्या की थी, जहाँ उन्होंने मंदिर का निर्माण भी कराया था।

मोरया की भक्ति से अभिभूत होकर, भगवान गणेश ने उन्हें उनकी हर मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद दिया।

मोरया ने प्रार्थना की कि जब भी कोई उनके प्रभु को याद करे, तो उन्हें इस धरती पर उनके परम भक्त के रूप में सदैव याद किया जाए।

इस प्रकार, यह भगवान और उनके भक्त के बीच के अटूट संबंध को दर्शाता है।

गणपति बप्पा मोरया कहते समय इसे हमेशा याद रखें!!!!

24/08/2025

वामन भगवान और बाली की कथा

बहुत समय पहले दानवों के राजा महाबली (बाली) बड़े पराक्रमी और दानी राजा थे। वे अत्यन्त शक्तिशाली थे और उनके तेज़ से तीनों लोक कंपित रहते थे। उन्होंने यज्ञ-याग और भक्ति से देवताओं का राज्य भी छीन लिया था।

देवों ने इन्द्र के नेतृत्व में भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे बाली से देवताओं का राज्य वापस दिलाएँ। भगवान विष्णु ने इस बार एक विशेष रूप धारण करने का निश्चय किया — वामनावतार।

भगवान वामन के रूप में ब्राह्मण बालक के रूप में प्रकट हुए। वे छोटे कद के, जटाजूटधारी और हाथ में कमंडलु धारण किए प्रकट हुए।

जब बाली अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे, तभी वामन वहाँ पहुँचे। बाली ने उनका सत्कार किया और पूछा –
"हे ब्रह्मचारी! आप क्या चाहते हैं? मैं आपको क्या दान दूँ?"

वामन बालक ने कहा –
"मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए, जहाँ मैं अपने तीन कदम चल सकूँ।"

राजा बाली आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने सोचा – इतना छोटा ब्राह्मण और माँग भी कितनी छोटी! उन्होंने हँसते हुए कहा –
"हे ब्रह्मचारी! आप जो चाहें मांग सकते हैं। इतना ही क्यों, पूरे गाँव, नगर या और धन मांग सकते हैं। तीन पग भूमि से आपका क्या होगा?"

लेकिन वामन बोले –
"जिसको जितनी आवश्यकता हो, उतना ही मांगना चाहिए। मुझे तीन पग भूमि ही चाहिए।"

राजा बाली ने यह दान देने का संकल्प कर दिया। उनके गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें चेताया –
"राजन! यह कोई साधारण बालक नहीं है, यह स्वयं भगवान विष्णु हैं। अगर तुम दान दोगे तो सारा राज्य चला जाएगा।"

लेकिन महाबली ने धर्म के पालन के लिए कहा –
"यदि भगवान ही मांग रहे हैं तो उन्हें रोकना अनुचित होगा। दान से पीछे हटना असत्य होगा।"

जब बाली ने संकल्प किया, तभी भगवान वामन ने अपना असली रूप धारण कर लिया। वे विशाल विराट स्वरूप में प्रकट हुए।

पहले कदम से उन्होंने पूरी धरती नाप ली।

दूसरे कदम से उन्होंने पूरा आकाश और स्वर्ग नाप लिया।

अब तीसरे कदम के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा।

भगवान ने पूछा –
"राजन! अब बताओ तीसरा पग कहाँ रखूँ?"

राजा बाली ने नम्र होकर अपना सिर झुका दिया और कहा –
"हे प्रभु! तीसरा पग आप मेरे सिर पर रखें।"

भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रख दिया और बाली को सुतल लोक का स्वामी बना दिया। वहाँ पर भी बाली को भगवान का विशेष संरक्षण और संगति प्राप्त हुई।










16/08/2025

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

शिव तांडव स्तोत्रम 🙏🏻🙏🏻
25/07/2025

शिव तांडव स्तोत्रम 🙏🏻🙏🏻

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