24/08/2025
वामन भगवान और बाली की कथा
बहुत समय पहले दानवों के राजा महाबली (बाली) बड़े पराक्रमी और दानी राजा थे। वे अत्यन्त शक्तिशाली थे और उनके तेज़ से तीनों लोक कंपित रहते थे। उन्होंने यज्ञ-याग और भक्ति से देवताओं का राज्य भी छीन लिया था।
देवों ने इन्द्र के नेतृत्व में भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे बाली से देवताओं का राज्य वापस दिलाएँ। भगवान विष्णु ने इस बार एक विशेष रूप धारण करने का निश्चय किया — वामनावतार।
भगवान वामन के रूप में ब्राह्मण बालक के रूप में प्रकट हुए। वे छोटे कद के, जटाजूटधारी और हाथ में कमंडलु धारण किए प्रकट हुए।
जब बाली अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे, तभी वामन वहाँ पहुँचे। बाली ने उनका सत्कार किया और पूछा –
"हे ब्रह्मचारी! आप क्या चाहते हैं? मैं आपको क्या दान दूँ?"
वामन बालक ने कहा –
"मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए, जहाँ मैं अपने तीन कदम चल सकूँ।"
राजा बाली आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने सोचा – इतना छोटा ब्राह्मण और माँग भी कितनी छोटी! उन्होंने हँसते हुए कहा –
"हे ब्रह्मचारी! आप जो चाहें मांग सकते हैं। इतना ही क्यों, पूरे गाँव, नगर या और धन मांग सकते हैं। तीन पग भूमि से आपका क्या होगा?"
लेकिन वामन बोले –
"जिसको जितनी आवश्यकता हो, उतना ही मांगना चाहिए। मुझे तीन पग भूमि ही चाहिए।"
राजा बाली ने यह दान देने का संकल्प कर दिया। उनके गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें चेताया –
"राजन! यह कोई साधारण बालक नहीं है, यह स्वयं भगवान विष्णु हैं। अगर तुम दान दोगे तो सारा राज्य चला जाएगा।"
लेकिन महाबली ने धर्म के पालन के लिए कहा –
"यदि भगवान ही मांग रहे हैं तो उन्हें रोकना अनुचित होगा। दान से पीछे हटना असत्य होगा।"
जब बाली ने संकल्प किया, तभी भगवान वामन ने अपना असली रूप धारण कर लिया। वे विशाल विराट स्वरूप में प्रकट हुए।
पहले कदम से उन्होंने पूरी धरती नाप ली।
दूसरे कदम से उन्होंने पूरा आकाश और स्वर्ग नाप लिया।
अब तीसरे कदम के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा।
भगवान ने पूछा –
"राजन! अब बताओ तीसरा पग कहाँ रखूँ?"
राजा बाली ने नम्र होकर अपना सिर झुका दिया और कहा –
"हे प्रभु! तीसरा पग आप मेरे सिर पर रखें।"
भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रख दिया और बाली को सुतल लोक का स्वामी बना दिया। वहाँ पर भी बाली को भगवान का विशेष संरक्षण और संगति प्राप्त हुई।