15/02/2026
समुद्र आज कुछ अधिक ही उग्र था। लहरें चट्टानों से टकराकर मानो चुनौती दे रही थीं—“कौन है जो हमारी सीमा को लाँघ सके?”
उसी किनारे पर एक छोटी-सी चिड़िया खड़ी थी। उसने अपनी नन्ही-सी चोंच में समुद्र का थोड़ा-सा जल भरा और उड़कर किनारे पर गिरा दिया।
पास ही बैठी अन्य चिड़ियाँ उसे विस्मय से देख रही थीं।
एक ने पूछा, “तुम क्या कर रही हो?”
वह शांत स्वर में बोली, “मैं समुद्र को खाली कर रही हूँ।”
सब हँस पड़ीं—“इतने विशाल समुद्र को तुम? अपनी इतनी-सी चोंच से?”
चिड़िया ने आकाश की ओर देखा, फिर दृढ़ स्वर में कहा—
“हाँ, मेरी चोंच छोटी है, पर मेरा संकल्प विशाल है। यदि मैं अपना कर्तव्य निभाती रहूँ, तो प्रकृति भी मेरी सहायता करेगी। मैं परिणाम नहीं, प्रयास की अधिकारी हूँ।”
और वह फिर से उड़ चली—एक और बूँद उठाने।
उसकी अटल निष्ठा देखकर कुछ चिड़ियाँ उसके साथ जुड़ गईं।
लहरें अब भी प्रचंड थीं, पर उस छोटी-सी चिड़िया के मन में भय नहीं था।
उस दिन समुद्र नहीं सूखा,
पर अनेक हृदयों में साहस का सागर अवश्य उमड़ पड़ा।
संदेश:
“अटल संकल्प के आगे परिस्थितियाँ झुक जाती हैं।
जो निरंतर प्रयास करता है, प्रकृति स्वयं उसका मार्ग प्रश