20/07/2026
"जब ठाकुर जी ने भक्त के लिए चबाया सूखा चना" 🌸✨
वृंदावन के निधिवन में एक सीधे-साधे संत रहते थे। वे दिन भर ठाकुर जी के भजन में लीन रहते और जो कुछ भी रूखा-सूखा मिलता, उसका भोग कन्हैया को लगा देते।एक दिन बाबा के पास खाने को कुछ नहीं था, केवल एक मुट्ठी सूखे और कड़े चने थे। बाबा ने सोचा, "मेरे कन्हैया के दांत बहुत कोमल हैं, वह इतने कड़े चने कैसे चबाएगा?"बाबा ने चनों को पानी में भिगो दिया ताकि वे मुलायम हो जाएं। पर भूख और बुढ़ापे के कारण बाबा की आंख लग गई।तभी आधी रात को निधिवन में श्री राधा-रानी और सखियों के साथ ठाकुर जी रास रचाने आए। रास के बीच में कृष्ण जी को अचानक भूख लगी। वे चुपके से बाबा की कुटिया में गए। वहां कटोरे में भीगे चने रखे थे। कन्हैया मजे से चने चबाने लगे।चनों की "करम-करम" आवाज सुनकर बाबा की नींद खुल गई। उन्होंने देखा कि एक अत्यंत सुंदर, सांवला सा बालक बड़े चाव से चने खा रहा है।बाबा ने डांटते हुए कहा, "अरे लाला! रुक, ये चने मत खा। ये अभी पूरी तरह भीगे नहीं हैं, बहुत कड़े हैं। तेरे दांतों में दर्द हो जाएगा।"बालक रूपी कृष्ण मुस्कुराए और बोले, "बाबा! तुम्हारे प्यार के आगे ये चने मुझे माखन से भी ज्यादा कोमल और मीठे लग रहे हैं।" इतना कहकर वह बालक वहां से गायब हो गया।सुबह जब मंदिर के पट खुले, तो सब हैरान रह गए! ठाकुर जी के छप्पन भोग सजे हुए थे, लेकिन उनके अधरों (होठों) पर चने का एक छोटा सा टुकड़ा चिपका हुआ था।
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श्री राधा-कृष्ण और उनके परम भक्त सूरदास जी का यह प्रसंग फेसबुक पोस्ट के लिए बहुत सुंदर और भावुक है। यह सिखाता है कि भगवान अपने भक्त की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं।
आप इसे सीधे कॉपी करके अपने फेसबुक पर पोस्ट कर सकते हैं:
"जब कृष्ण बने अंधे भक्त की लाठी" 🌸✨
एक बार परम कृष्ण भक्त सूरदास जी ब्रज की गलियों में प्रभु की भक्ति में लीन होकर गाते हुए चल रहे थे। वे आंखों से देख नहीं सकते थे।
चलते-चलते अचानक उनका पैर फिसला और वे एक गहरे सूखे कुएं में जा गिरे। कुआं गहरा था, इसलिए वे चाहकर भी बाहर नहीं निकल पा रहे थे। सूरदास जी घबराए नहीं, उन्होंने कुएं में बैठे-बैठे ही अपने कन्हैया को पुकारना शुरू कर दिया।
वे पूरे भाव से गाने लगे:
"गोविंद द्वारकावासी, कृष्ण गोपीजनप्रिय..."
सच्चे दिल से निकली पुकार को भला ठाकुर जी कैसे टालते? तभी कुएं के ऊपर एक छोटा सा बालक आया। उसने कुएं में हाथ लटकाया और कहा, "बाबा! मेरा हाथ पकड़ लो, मैं तुम्हें बाहर निकाल देता हूँ।"
सूरदास जी ने जैसे ही उस नन्हें बालक का कोमल हाथ पकड़ा, उनके पूरे शरीर में एक दिव्य आनंद की लहर दौड़ गई। बालक ने एक ही झटके में सूरदास जी को ऊपर खींच लिया।
कुएं से बाहर आते ही सूरदास जी समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं उनके प्राणप्रिय श्री कृष्ण हैं। उन्होंने उस हाथ को कसकर पकड़ लिया।
तब लीलाधारी कृष्ण ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ छुड़ा लिया और वहां से अंतर्ध्यान (गायब) हो गए।
इस पर सूरदास जी मुस्कुराए और रोते हुए भावुक होकर बोले:
👉 "बांह छुड़ाए जात हो, निबल जान के मोहि।
हृदय से जब जाओगे, तब मरद बदौंगी तोहि।।"
(अर्थात: हे कृष्ण! मुझे कमजोर जानकर आप हाथ छुड़ाकर तो भाग रहे हो, लेकिन अगर मेरे दिल से निकलकर जाओ, तब मैं आपको मर्द (बलवान) मानूँगा!)
सीख: भगवान केवल प्रेम और भाव के भूखे हैं। जब भक्त उन्हें सच्चे दिल से पुकारता है, तो वे उसकी रक्षा के लिए खुद दौड़े चले आते हैं।
जय श्री राधे कृष्णा! 🙏❤️
क्या आप इस प्रसंग को और छोटा करना चाहते हैं, या किसी विशेष भक्त (जैसे मीराबाई या कर्माबाई) की कहानी पोस्ट करना चाहते हैं? मुझे बताएं ताकि मैं इसे आपकी पसंद के अनुसार बदल सकूं।
कृष्ण भक्त सूरदास का एक अद्भुत प्रेम से ओत प्रोत कथानक ------------------------------------------------- "हाथ छुड़ाये जात हो, निर्बल जानि के मोय । हृदय से जब जाओगे, तो सबल जानूँगा तोय ।।" संत सूरदास जी के जीवन का एक प्रसंग- एक बार संत सूरदास को किसी ने भजन के लिए आमंत्रित किया.. भजन कार्यक्रम के बाद उस व्यक्ति को सूरदास जी को अपने घर तक पहुँचाने का ध्यान नही रहा और वह अन्य अतिथियों की सेवा में व्यस्त हो गया। सूरदास जी ने भी उसे तकलीफ नहीं देना चाहा और खुद लाठी लेकर गोविंद–गोविंद करते हुये अंधेरी
उन्हे लगा कि हो न हो, यह कन्हैया है, वे समझ गए कि आज गोपाल खुद मेरे पास आए हैं । क्यो नहीं मैं इनका हाथ पकड़ लूँ । यह सोंच उन्होने अपना हाथ उस लकड़ी पर कृष्ण (
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Surdas ji katha 🪷🙂↕️❤️
संत-रचित भक्त सूरदासजी और उनके इष्टदेव "हाथ छुड़ाए जात हो, निबल जानि के मोहि। हृदय से जब जाओगे, सबल कहूँगा तोहि॥"
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नीचे फेसबुक के सबसे ज्यादा वायरल होने वाले जनरल हैशटैग्स और श्री राधा-कृष्ण, वृंदावन से जुड़े खास हैशटैग्स की लिस्ट दी गई है। आप इन्हें अपनी पोस्ट के अंत में कॉपी-पेस्ट कर सकते हैं:
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