श्री हित हरिवंश

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"जब ठाकुर जी ने भक्त के लिए चबाया सूखा चना" 🌸✨        वृंदावन के निधिवन में एक सीधे-साधे संत रहते थे। वे दिन भर ठाकुर जी...
20/07/2026

"जब ठाकुर जी ने भक्त के लिए चबाया सूखा चना" 🌸✨


वृंदावन के निधिवन में एक सीधे-साधे संत रहते थे। वे दिन भर ठाकुर जी के भजन में लीन रहते और जो कुछ भी रूखा-सूखा मिलता, उसका भोग कन्हैया को लगा देते।एक दिन बाबा के पास खाने को कुछ नहीं था, केवल एक मुट्ठी सूखे और कड़े चने थे। बाबा ने सोचा, "मेरे कन्हैया के दांत बहुत कोमल हैं, वह इतने कड़े चने कैसे चबाएगा?"बाबा ने चनों को पानी में भिगो दिया ताकि वे मुलायम हो जाएं। पर भूख और बुढ़ापे के कारण बाबा की आंख लग गई।तभी आधी रात को निधिवन में श्री राधा-रानी और सखियों के साथ ठाकुर जी रास रचाने आए। रास के बीच में कृष्ण जी को अचानक भूख लगी। वे चुपके से बाबा की कुटिया में गए। वहां कटोरे में भीगे चने रखे थे। कन्हैया मजे से चने चबाने लगे।चनों की "करम-करम" आवाज सुनकर बाबा की नींद खुल गई। उन्होंने देखा कि एक अत्यंत सुंदर, सांवला सा बालक बड़े चाव से चने खा रहा है।बाबा ने डांटते हुए कहा, "अरे लाला! रुक, ये चने मत खा। ये अभी पूरी तरह भीगे नहीं हैं, बहुत कड़े हैं। तेरे दांतों में दर्द हो जाएगा।"बालक रूपी कृष्ण मुस्कुराए और बोले, "बाबा! तुम्हारे प्यार के आगे ये चने मुझे माखन से भी ज्यादा कोमल और मीठे लग रहे हैं।" इतना कहकर वह बालक वहां से गायब हो गया।सुबह जब मंदिर के पट खुले, तो सब हैरान रह गए! ठाकुर जी के छप्पन भोग सजे हुए थे, लेकिन उनके अधरों (होठों) पर चने का एक छोटा सा टुकड़ा चिपका हुआ था।

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श्री राधा-कृष्ण और उनके परम भक्त सूरदास जी का यह प्रसंग फेसबुक पोस्ट के लिए बहुत सुंदर और भावुक है। यह सिखाता है कि भगवान अपने भक्त की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं।
आप इसे सीधे कॉपी करके अपने फेसबुक पर पोस्ट कर सकते हैं:
"जब कृष्ण बने अंधे भक्त की लाठी" 🌸✨
एक बार परम कृष्ण भक्त सूरदास जी ब्रज की गलियों में प्रभु की भक्ति में लीन होकर गाते हुए चल रहे थे। वे आंखों से देख नहीं सकते थे।
चलते-चलते अचानक उनका पैर फिसला और वे एक गहरे सूखे कुएं में जा गिरे। कुआं गहरा था, इसलिए वे चाहकर भी बाहर नहीं निकल पा रहे थे। सूरदास जी घबराए नहीं, उन्होंने कुएं में बैठे-बैठे ही अपने कन्हैया को पुकारना शुरू कर दिया।
वे पूरे भाव से गाने लगे:
"गोविंद द्वारकावासी, कृष्ण गोपीजनप्रिय..."
सच्चे दिल से निकली पुकार को भला ठाकुर जी कैसे टालते? तभी कुएं के ऊपर एक छोटा सा बालक आया। उसने कुएं में हाथ लटकाया और कहा, "बाबा! मेरा हाथ पकड़ लो, मैं तुम्हें बाहर निकाल देता हूँ।"
सूरदास जी ने जैसे ही उस नन्हें बालक का कोमल हाथ पकड़ा, उनके पूरे शरीर में एक दिव्य आनंद की लहर दौड़ गई। बालक ने एक ही झटके में सूरदास जी को ऊपर खींच लिया।
कुएं से बाहर आते ही सूरदास जी समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं उनके प्राणप्रिय श्री कृष्ण हैं। उन्होंने उस हाथ को कसकर पकड़ लिया।
तब लीलाधारी कृष्ण ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ छुड़ा लिया और वहां से अंतर्ध्यान (गायब) हो गए।
इस पर सूरदास जी मुस्कुराए और रोते हुए भावुक होकर बोले:
👉 "बांह छुड़ाए जात हो, निबल जान के मोहि।
हृदय से जब जाओगे, तब मरद बदौंगी तोहि।।"
(अर्थात: हे कृष्ण! मुझे कमजोर जानकर आप हाथ छुड़ाकर तो भाग रहे हो, लेकिन अगर मेरे दिल से निकलकर जाओ, तब मैं आपको मर्द (बलवान) मानूँगा!)
सीख: भगवान केवल प्रेम और भाव के भूखे हैं। जब भक्त उन्हें सच्चे दिल से पुकारता है, तो वे उसकी रक्षा के लिए खुद दौड़े चले आते हैं।
जय श्री राधे कृष्णा! 🙏❤️

क्या आप इस प्रसंग को और छोटा करना चाहते हैं, या किसी विशेष भक्त (जैसे मीराबाई या कर्माबाई) की कहानी पोस्ट करना चाहते हैं? मुझे बताएं ताकि मैं इसे आपकी पसंद के अनुसार बदल सकूं।

कृष्ण भक्त सूरदास का एक अद्भुत प्रेम से ओत प्रोत कथानक ------------------------------------------------- "हाथ छुड़ाये जात हो, निर्बल जानि के मोय । हृदय से जब जाओगे, तो सबल जानूँगा तोय ।।" संत सूरदास जी के जीवन का एक प्रसंग- एक बार संत सूरदास को किसी ने भजन के लिए आमंत्रित किया.. भजन कार्यक्रम के बाद उस व्यक्ति को सूरदास जी को अपने घर तक पहुँचाने का ध्यान नही रहा और वह अन्य अतिथियों की सेवा में व्यस्त हो गया। सूरदास जी ने भी उसे तकलीफ नहीं देना चाहा और खुद लाठी लेकर गोविंद–गोविंद करते हुये अंधेरी
उन्हे लगा कि हो न हो, यह कन्हैया है, वे समझ गए कि आज गोपाल खुद मेरे पास आए हैं । क्यो नहीं मैं इनका हाथ पकड़ लूँ । यह सोंच उन्होने अपना हाथ उस लकड़ी पर कृष्ण (

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Surdas ji katha 🪷🙂‍↕️❤️
संत-रचित भक्त सूरदासजी और उनके इष्टदेव "हाथ छुड़ाए जात हो, निबल जानि के मोहि। हृदय से जब जाओगे, सबल कहूँगा तोहि॥"

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नीचे फेसबुक के सबसे ज्यादा वायरल होने वाले जनरल हैशटैग्स और श्री राधा-कृष्ण, वृंदावन से जुड़े खास हैशटैग्स की लिस्ट दी गई है। आप इन्हें अपनी पोस्ट के अंत में कॉपी-पेस्ट कर सकते हैं:








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20/07/2026

जब ठाकुर जी ने भक्त के लिए चबाया सूखा चना" 🌸✨ ृंदावन के निधिवन में एक सीधे-साधे संत रहते थे। वे दिन भर ठाकुर जी के भजन में लीन रहते और जो कुछ भी रूखा-सूखा मिलता, उसका भोग कन्हैया को लगा देते।एक दिन बाबा के पास खाने को कुछ नहीं था, केवल एक मुट्ठी सूखे और कड़े चने थे। बाबा ने सोचा, "मेरे कन्हैया के दांत बहुत कोमल हैं, वह इतने कड़े चने कैसे चबाएगा?"बाबा ने चनों को पानी में भिगो दिया ताकि वे मुलायम हो जाएं। पर भूख और बुढ़ापे के कारण बाबा की आंख लग गई।तभी आधी रात को निधिवन में श्री राधा-रानी और सखियों के साथ ठाकुर जी रास रचाने आए। रास के बीच में कृष्ण जी को अचानक भूख लगी। वे चुपके से बाबा की कुटिया में गए। वहां कटोरे में भीगे चने रखे थे। कन्हैया मजे से चने चबाने लगे।चनों की "करम-करम" आवाज सुनकर बाबा की नींद खुल गई। उन्होंने देखा कि एक अत्यंत सुंदर, सांवला सा बालक बड़े चाव से चने खा रहा है।बाबा ने डांटते हुए कहा, "अरे लाला! रुक, ये चने मत खा। ये अभी पूरी तरह भीगे नहीं हैं, बहुत कड़े हैं। तेरे दांतों में दर्द हो जाएगा।"बालक रूपी कृष्ण मुस्कुराए और बोले, "बाबा! तुम्हारे प्यार के आगे ये चने मुझे माखन से भी ज्यादा कोमल और मीठे लग रहे हैं।" इतना कहकर वह बालक वहां से गायब हो गया।सुबह जब मंदिर के पट खुले, तो सब हैरान रह गए! ठाकुर जी के छप्पन भोग सजे हुए थे, लेकिन उनके अधरों (होठों) पर चने का एक छोटा सा टुकड़ा चिपका हुआ था

जब ठाकुर जी ने भक्त के लिए चबाया सूखा चना" 🌸✨ ृंदावन के निधिवन में एक सीधे-साधे संत रहते थे। वे दिन भर ठाकुर जी के भजन में लीन रहते और जो कुछ भी रूखा-सूखा मिलता, उसका भोग कन्हैया को लगा देते।एक दिन बाबा के पास खाने को कुछ नहीं था, केवल एक मुट्ठी सूखे और कड़े चने थे। बाबा ने सोचा, "मेरे कन्हैया के दांत बहुत कोमल हैं, वह इतने कड़े चने कैसे चबाएगा?"बाबा ने चनों को पानी में भिगो दिया ताकि वे मुलायम हो जाएं। पर भूख और बुढ़ापे के कारण बाबा की आंख लग गई।तभी आधी रात को निधिवन में श्री राधा-रानी और सखियों के साथ ठाकुर जी रास रचाने आए। रास के बीच में कृष्ण जी को अचानक भूख लगी। वे चुपके से बाबा की कुटिया में गए। वहां कटोरे में भीगे चने रखे थे। कन्हैया मजे से चने चबाने लगे।चनों की "करम-करम" आवाज सुनकर बाबा की नींद खुल गई। उन्होंने देखा कि एक अत्यंत सुंदर, सांवला सा बालक बड़े चाव से चने खा रहा है।बाबा ने डांटते हुए कहा, "अरे लाला! रुक, ये चने मत खा। ये अभी पूरी तरह भीगे नहीं हैं, बहुत कड़े हैं। तेरे दांतों में दर्द हो जाएगा।"बालक रूपी कृष्ण मुस्कुराए और बोले, "बाबा! तुम्हारे प्यार के आगे ये चने मुझे माखन से भी ज्यादा कोमल और मीठे लग रहे हैं।" इतना कहकर वह बालक वहां से गायब हो गया।सुबह जब मंदिर के पट खुले, तो सब हैरान रह गए! ठाकुर जी के छप्पन भोग सजे हुए थे, लेकिन उनके अधरों (होठों) पर चने का एक छोटा सा टुकड़ा चिपका हुआ था

उनकी कृपा से आपका हर दिन सुख, समृद्धि और आनंद से परिपूर्ण हो।जय श्री राधे कृष्ण! 🙏✨
20/07/2026

उनकी कृपा से आपका हर दिन सुख, समृद्धि और आनंद से परिपूर्ण हो।
जय श्री राधे कृष्ण! 🙏✨

"जब कृष्ण बने अंधे भक्त की लाठी" 🌸✨🙏🚩   एक बार परम कृष्ण भक्त सूरदास जी ब्रज की गलियों में प्रभु की भक्ति में लीन होकर ग...
20/07/2026

"जब कृष्ण बने अंधे भक्त की लाठी" 🌸✨🙏🚩

एक बार परम कृष्ण भक्त सूरदास जी ब्रज की गलियों में प्रभु की भक्ति में लीन होकर गाते हुए चल रहे थे। वे आंखों से देख नहीं सकते थे।चलते-चलते अचानक उनका पैर फिसला और वे एक गहरे सूखे कुएं में जा गिरे। कुआं गहरा था, इसलिए वे चाहकर भी बाहर नहीं निकल पा रहे थे। सूरदास जी घबराए नहीं, उन्होंने कुएं में बैठे-बैठे ही अपने कन्हैया को पुकारना शुरू कर दिया।वे पूरे भाव से गाने लगे:

"गोविंद द्वारकावासी, कृष्ण गोपीजनप्रिय...

"सच्चे दिल से निकली पुकार को भला ठाकुर जी कैसे टालते? तभी कुएं के ऊपर एक छोटा सा बालक आया। उसने कुएं में हाथ लटकाया और कहा, "बाबा! मेरा हाथ पकड़ लो, मैं तुम्हें बाहर निकाल देता हूँ।"सूरदास जी ने जैसे ही उस नन्हें बालक का कोमल हाथ पकड़ा, उनके पूरे शरीर में एक दिव्य आनंद की लहर दौड़ गई। बालक ने एक ही झटके में सूरदास जी को ऊपर खींच लिया।कुएं से बाहर आते ही सूरदास जी समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं उनके प्राणप्रिय श्री कृष्ण हैं। उन्होंने उस हाथ को कसकर पकड़ लिया।तब लीलाधारी कृष्ण ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ छुड़ा लिया और वहां से अंतर्ध्यान (गायब) हो गए।इस पर सूरदास जी मुस्कुराए और रोते हुए भावुक होकर बोले:

👉 "बांह छुड़ाए जात हो, निबल जान के मोहि।हृदय से जब जाओगे, तब मरद बदौंगी तोहि।।"
(अर्थात: -हे कृष्ण! मुझे कमजोर जानकर आप हाथ छुड़ाकर तो भाग रहे हो, लेकिन अगर मेरे दिल से निकलकर जाओ, तब मैं आपको मर्द (बलवान) मानूँगा!)

जय श्री राधे कृष्णा! 🙏❤️
(अगर आप रील या वीडियो डाल रहे हैं)

19/07/2026

महाप्रभु जगन्नाथ की करुणा: एक सच्ची घटना 🚩

यह घटना पुरी धाम के एक परम भक्त बंधु महंती की है। बंधु महंती बहुत गरीब थे। एक बार उनके गांव में भयंकर अकाल पड़ा। जब परिवार भुखमरी की कगार पर आ गया, तो उनकी पत्नी ने कहा—"सुना है पुरी में तुम्हारे एक परम मित्र रहते हैं, जो ब्रह्मांड के राजा हैं। क्या हम उनके पास नहीं चल सकते?"बंधु महंती अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर पुरी धाम आ गए। वे जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास पहुंचे। मंदिर में भारी भीड़ थी। बंधु महंती दूर एक कोने में खड़े होकर रोने लगे और प्रभु के दर्शन करने लगे।शाम हो गई, पट बंद हो गए। बच्चे भूख से तड़प रहे थे। पत्नी ने पूछा—"तुम्हारे मित्र महाप्रभु कहां हैं? क्या उन्होंने हमें भोजन नहीं दिया?" बंधु महंती ने मुस्कुरा कर कहा—"वे बहुत व्यस्त हैं, अभी लाखों भक्तों को खिला रहे होंगे। थोड़ा धैर्य रखो।"रात के बारह बजे। पूरा पुरी धाम सो रहा था। तभी मंदिर के भीतर एक चमत्कार हुआ। स्वयं भगवान जगन्नाथ एक बड़े सोने के थाल में छप्पन भोग लेकर मंदिर से बाहर आए। वे सीधे उस कोने में गए जहां बंधु महंती का परिवार भूखा सोया था।प्रभु ने बंधु महंती को जगाया और कहा—"मित्र बंधु! उठो, तुम्हारी भाभी (माता लक्ष्मी) ने तुम्हारे और बच्चों के लिए यह महाप्रसाद भेजा है।" भूखे परिवार ने तृप्ति से भोजन किया। भोजन के बाद प्रभु अदृश्य हो गए, लेकिन वह सोने का थाल वहीं छूट गया।अगली सुबह जब मंदिर के पुजारियों ने देखा कि रत्न सिंहासन से सोने का थाल गायब है, तो हड़कंप मच गया। ढूंढते-ढूंढते सिपाही सिंह द्वार के पास पहुंचे, जहां बंधु महंती के पास वह राजकीय सोने का थाल मिला। उन्हें चोरी के आरोप में जेल में डाल दिया गया।बंधु महंती जेल में रोते हुए बोले—"हे कालिया! मैंने तो चोरी नहीं की, तुमने मुझे प्रसाद दिया था। पर मैं खुश हूं कि तुम्हारे राज्य की जेल में हूं।"उसी रात पुरी के राजा को सपने में महाप्रभु जगन्नाथ ने दर्शन दिए। प्रभु क्रोधित होकर बोले—"राजन्! तुमने मेरे परम मित्र बंधु महंती को जेल में डाल दिया? वह मेरा मेहमान था। तुरंत उसे ससम्मान आजाद करो और मेरे भंडार से उसके जीवनभर के भोजन का प्रबंध करो।"राजा सुबह उठकर रोते हुए जेल पहुंचे, बंधु महंती के पैरों में गिर पड़े और उन्हें ससम्मान रिहा किया।

19/07/2026

महाप्रभु जगन्नाथ की करुणा: एक सच्ची घटना 🚩

यह घटना पुरी धाम के एक परम भक्त बंधु महंती की है। बंधु महंती बहुत गरीब थे। एक बार उनके गांव में भयंकर अकाल पड़ा। जब परिवार भुखमरी की कगार पर आ गया, तो उनकी पत्नी ने कहा—"सुना है पुरी में तुम्हारे एक परम मित्र रहते हैं, जो ब्रह्मांड के राजा हैं। क्या हम उनके पास नहीं चल सकते?"बंधु महंती अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर पुरी धाम आ गए। वे जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास पहुंचे। मंदिर में भारी भीड़ थी। बंधु महंती दूर एक कोने में खड़े होकर रोने लगे और प्रभु के दर्शन करने लगे।शाम हो गई, पट बंद हो गए। बच्चे भूख से तड़प रहे थे। पत्नी ने पूछा—"तुम्हारे मित्र महाप्रभु कहां हैं? क्या उन्होंने हमें भोजन नहीं दिया?" बंधु महंती ने मुस्कुरा कर कहा—"वे बहुत व्यस्त हैं, अभी लाखों भक्तों को खिला रहे होंगे। थोड़ा धैर्य रखो।"रात के बारह बजे। पूरा पुरी धाम सो रहा था। तभी मंदिर के भीतर एक चमत्कार हुआ। स्वयं भगवान जगन्नाथ एक बड़े सोने के थाल में छप्पन भोग लेकर मंदिर से बाहर आए। वे सीधे उस कोने में गए जहां बंधु महंती का परिवार भूखा सोया था।प्रभु ने बंधु महंती को जगाया और कहा—"मित्र बंधु! उठो, तुम्हारी भाभी (माता लक्ष्मी) ने तुम्हारे और बच्चों के लिए यह महाप्रसाद भेजा है।" भूखे परिवार ने तृप्ति से भोजन किया। भोजन के बाद प्रभु अदृश्य हो गए, लेकिन वह सोने का थाल वहीं छूट गया।अगली सुबह जब मंदिर के पुजारियों ने देखा कि रत्न सिंहासन से सोने का थाल गायब है, तो हड़कंप मच गया। ढूंढते-ढूंढते सिपाही सिंह द्वार के पास पहुंचे, जहां बंधु महंती के पास वह राजकीय सोने का थाल मिला। उन्हें चोरी के आरोप में जेल में डाल दिया गया।बंधु महंती जेल में रोते हुए बोले—"हे कालिया! मैंने तो चोरी नहीं की, तुमने मुझे प्रसाद दिया था। पर मैं खुश हूं कि तुम्हारे राज्य की जेल में हूं।"उसी रात पुरी के राजा को सपने में महाप्रभु जगन्नाथ ने दर्शन दिए। प्रभु क्रोधित होकर बोले—"राजन्! तुमने मेरे परम मित्र बंधु महंती को जेल में डाल दिया? वह मेरा मेहमान था। तुरंत उसे ससम्मान आजाद करो और मेरे भंडार से उसके जीवनभर के भोजन का प्रबंध करो।"राजा सुबह उठकर रोते हुए जेल पहुंचे, बंधु महंती के पैरों में गिर पड़े और उन्हें ससम्मान रिहा किया।

🌸 श्री राधा-कृष्ण दिव्य प्रसंग: जब छप्पन भोग पर भारी पड़ा राधा जी का प्रेम 🌸एक बार भगवान श्री कृष्ण के सामने छप्पन प्रकार...
19/07/2026

🌸 श्री राधा-कृष्ण दिव्य प्रसंग: जब छप्पन भोग पर भारी पड़ा राधा जी का प्रेम 🌸

एक बार भगवान श्री कृष्ण के सामने छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन (Chhappan Bhog) परोसे गए।ठाकुर जी ने भोजन की थाली को देखा, मुस्कुराए, लेकिन एक भी निवाला नहीं उठाया।पास ही खड़ी ललिता सखी ने अचरज से पूछा— "हे प्राणनाथ! आपके प्रिय व्यंजन सामने हैं, फिर आप भोग क्यों नहीं लगा रहे? क्या इसमें कोई कमी है?"श्री कृष्ण ने बड़े प्यार से उत्तर दिया— "सखी! इन व्यंजनों में कोई कमी नहीं है। यह बहुत स्वादिष्ट और सुगन्धित हैं। लेकिन, इसमें वो 'स्वाद' गायब है जिसके बिना मेरा पेट नहीं भरता।"सखी सोच में पड़ गई। तभी वहाँ लाड़ली जी (श्री राधा रानी) पधारीं। उनके हाथ में मिट्टी का एक छोटा सा पात्र था, जिसमें उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई ताजी छाछ और बाजरे की सूखी रोटी रखी थी।राधा जी ने जैसे ही वह प्रेम-भरी रोटी ठाकुर जी के आगे बढ़ाई, श्री कृष्ण के चेहरे पर अलौकिक आनंद आ गया। उन्होंने छप्पन भोग को एक तरफ कर दिया और बड़े चाव से राधा जी की दी हुई सूखी रोटी खाने लगे।ललिता सखी ने हैरान होकर पूछा— "प्रभु! छप्पन भोग छोड़कर इस सूखी रोटी में आपको ऐसा क्या मिल गया?"श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले— "सखी! इन छप्पन भोगों में 'ऐश्वर्य और आदर' का भाव है, लेकिन किशोरी जी की इस सूखी रोटी में 'निश्छल प्रेम और समर्पण' का रस है। मैं व्यंजनों का भूखा नहीं, मैं तो केवल प्रेम का भूखा हूँ!"

👁️  जब एक अंधे भिखारी ने भगवान से आंखें मांगने से इनकार कर दिया! 📿यह दिल को छू लेने वाला प्रसंग वृन्दावन के संत पूज्य श्...
14/07/2026

👁️ जब एक अंधे भिखारी ने भगवान से आंखें मांगने से इनकार कर दिया! 📿यह दिल को छू लेने वाला प्रसंग वृन्दावन के संत पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संगों में अक्सर सुनाते हैं। यह कहानी बताती है कि सच्ची भक्ति और प्रभु पर अटूट भरोसा क्या होता है।

🛕🚩 एक मंदिर के बाहर एक अंधा वृद्ध भिखारी रोज बैठता था। वह बहुत गरीब था, लेकिन उसका नियम पक्का था—वह दिनभर हाथ में माला लेकर प्रभु का नाम जपता रहता था।एक दिन भगवान उसकी भक्ति से बहुत प्रसन्न हुए और साक्षात उसके सामने प्रकट हो गए। भगवान ने कहा, "मांगो भक्त! तुम्हारी भक्ति से मैं खुश हूँ। तुम जो चाहोगे, मैं तुम्हें दूंगा। क्या तुम्हें अपनी आंखें वापस चाहिए?"अंधे भिखारी ने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ लिए और कहा, "नहीं प्रभु! मुझे आंखें नहीं चाहिए।"भगवान हैरान रह गए! उन्होंने पूछा, "संसार का हर व्यक्ति देखने की चाह रखता है। तुम अंधेपन का इतना भारी दुख भोग रहे हो, फिर भी आंखें क्यों नहीं मांगते?"उस परम भक्त भिखारी ने जो जवाब दिया, वह हमारे जीवन की सोच बदल सकता है।

उसने कहा:"हे गोविंद!

🙏🙏 अगर आज आप मुझे आंखें दे देंगे, तो मैं इस सुंदर और मायावी संसार को देखने लगूँगा। मेरी आँखों में वासना, लालच और दूसरों के प्रति ईर्ष्या आने लगेगी। मैं दुनिया की चकाचौंध में खोकर आपको भूल जाऊँगा।""अभी मैं अंधा हूँ, तो मेरी आँखों के सामने सिर्फ और सिर्फ आपका धुंधला स्वरूप रहता है। मेरा मन संसार में नहीं भटकता, बल्कि आपकी याद में लगा रहता है। मुझे यह अंधापन मंजूर है प्रभु, लेकिन आपके नाम का विस्मरण मंजूर नहीं!"





प्रसंग: जब जीवन में बहुत कष्ट और परेशानियाँ आएं, तो महाराज जी का यह वचन हमेशा याद रखना चाहिए।विचार: "जब तुम्हारे जीवन मे...
13/07/2026

प्रसंग: जब जीवन में बहुत कष्ट और परेशानियाँ आएं, तो महाराज जी का यह वचन हमेशा याद रखना चाहिए।

विचार: "जब तुम्हारे जीवन में बहुत बड़ा दुख आए, तो रोना मत। यह मत सोचना कि भगवान तुमसे रूठ गए हैं। बल्कि यह सोचना कि प्रभु तुम्हारे पुराने कर्मों का हिसाब काटकर तुम्हें पवित्र कर रहे हैं। दुख में जो भगवान का हाथ थामे रखता है, प्रभु उसे अपने और करीब खींच लेते हैं। जो समय आज बुरा है, वो कल बदल जाएगा, क्योंकि ठाकुर जी कभी अपने भक्त का साथ नहीं छोड़ते।

"प्रभु पर भरोसा है तो 'जय श्री कृष्ण' लिखें।"🙏🙏🙏


प्रसंग: एक बार एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से पूछा— "महाराज जी, हम ठाकुर जी को रोज़ भोग लगाते हैं, पर हमें कैसे पता च...
13/07/2026

प्रसंग: एक बार एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से पूछा— "महाराज जी, हम ठाकुर जी को रोज़ भोग लगाते हैं, पर हमें कैसे पता चले कि उन्होंने भोजन पाया या नहीं? उन्हें भूख कब लगती है?"

महाराज जी का उत्तर: महाराज जी मुस्कुराए और बोले— "ठाकुर जी को छप्पन भोग की भूख नहीं है। उन्हें भूख लगती है तुम्हारे 'भाव' की। जब तुम रोकर, तड़पकर प्रेम से उन्हें पुकारते हो और कहते हो— 'प्रभु, जो कुछ है सब आपका है, आकर स्वीकार करो'— ठीक उसी क्षण ठाकुर जी भूखे दौड़े चले आते हैं। बिना प्रेम के तुम अमृत भी चढ़ाओगे, तो वो स्वीकार नहीं करेंगे, और प्रेम से एक तुलसी का पत्ता भी दोगे, तो वो तृप्त हो जाएंगे।

"नीचे कमेंट के लिए लिखें: "अगर बात दिल को छू गई हो, तो कमेंट में 'राधे राधे' ज़रूर लिखें।"
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