अष्टावक्र गीता

अष्टावक्र गीता 🙏 अष्टावक्र गीता

नियमित रूप से | सरल हिंदी अर्थ
आत्म-ज्ञान • मुक्ति • शांति

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✨ 1K Followers – आपका प्रेम, हमारा सौभाग्य! 🙏🕉️आज अष्टावक्र गीता परिवार ने 1,000 Followers का एक सुंदर पड़ाव पार किया है...
08/07/2026

✨ 1K Followers – आपका प्रेम, हमारा सौभाग्य! 🙏🕉️
आज अष्टावक्र गीता परिवार ने 1,000 Followers का एक सुंदर पड़ाव पार किया है।
यह सिर्फ़ एक संख्या नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, सत्य और जागरूकता के मार्ग पर साथ चलने वाले आप सभी का विश्वास है।
आपके हर Follow, Like, Comment और Share ने इस यात्रा को आगे बढ़ाया है।
हमारा प्रयास रहेगा कि अष्टावक्र गीता के अमूल्य ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ और हर हृदय में आत्मबोध की ज्योति प्रज्वलित करें।
यह तो बस शुरुआत है...
आगे की यात्रा भी आपके साथ और भी प्रेरणादायक होगी।
हृदय से धन्यवाद! ❤️🙏
ॐ तत्सत। 🕉️

08/06/2026

तुम्हारे दुखों की असली जड़ क्या है?

महर्षि अष्टावक्र कहते हैं —अहं कर्त्तर्यहंमानमहाकृष्णाहिर्दक्षितः ।। नाहं कर्त्तेति विश्वासामृतं पीत्वा सुखी भव ।।८।।

"मैं कर्ता हूँ" यही अहंकार का विष है।

और

"मैं कर्ता नहीं हूँ" यही मुक्ति का अमृत है।

📜 अष्टावक्र गीता | श्लोक 8

🕉️ हरि ॐ तत्सत्




07/06/2026

✨ क्या तुम सच में बंधे हुए हो?

महर्षि अष्टावक्र कहते हैं —

"तुम पूरे जगत के साक्षी हो और सदा से मुक्त हो।"

बंधन केवल तब पैदा होता है जब हम अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाते हैं।

📜 अष्टावक्र गीता — श्लोक 7















06/06/2026

🕉️ अष्टावक्र गीता | श्लोक 6

धर्म, अधर्म, सुख और दुःख — ये सब मन के अनुभव हैं।

लेकिन जो इन सबको देख रहा है, वह कभी नहीं बदलता।

महर्षि अष्टावक्र का संदेश:

"तुम न कर्ता हो, न भोक्ता।
तुम केवल साक्षी हो।"

📜
धर्माधर्मौ सुखं दुःखं मानसानि न ते विभो।
न कर्तासि न भोक्तासि मुक्त एवासि सर्वदा॥

ऐसे ही सनातन ज्ञान के लिए Page Follow करें।
























#𝗟𝗶𝗳𝗲𝗖𝗵𝗮𝗻𝗴𝗶𝗻𝗴𝗢𝗽𝗽𝗼𝗿𝘁𝘂𝗻𝗶𝘁𝘆
























05/06/2026

अष्टावक्र गीता | श्लोक 5 🔥 तुम कौन हो? |अष्टावक्र गीता श्लोक 5 #अष्टावक्रगीता
अगर आपका नाम बदल जाए...
अगर आपका शरीर बदल जाए...
अगर आपकी सारी पहचानें छिन जाएँ...

तो आप कौन हैं?

महर्षि अष्टावक्र कहते हैं —

"तुम न जाति हो, न शरीर, न इंद्रियाँ।
तुम असंग, निराकार और विश्व के साक्षी हो।"

यही आत्मज्ञान का सार है। 🙏

कमेंट में "ॐ" लिखिए यदि यह संदेश आपके हृदय तक पहुँचा।







02/06/2026

अभी इसी पल मुक्त हो जाना चाहते हो?
अष्टावक्र गीता | श्लोक ४
यदि देहं पृथक्कृत्य चिति विश्राम्य तिष्ठसि ।
अधुनैव सुखी शान्तः बन्धमुक्तो भविष्यसि ॥४॥
सरल अर्थ:
अपने शरीर को अपने से पूरी तरह अलग समझ लो…
शुद्ध चैतन्य (चिति) में गहरी विश्राम कर लो…
तो अभी इसी क्षण तुम सुखी, शांत और बंधन-मुक्त हो जाओगे।
कोई कल नहीं…
कोई साधना नहीं…
अधुनैव — अभी! इसी वक्त!
जो लोग तनाव, चिंता, बंधनों और दुख में जी रहे हैं…
ये श्लोक उनके लिए जीवन बदलने वाला है।
❤️ Comment में लिखो: “अधुनैव” या “मुक्त”
🔁 Share करो उन दोस्तों को जो सच में शांति ढूंढ रहे हैं
🏷️ Tag करो उस व्यक्ति को जिसे ये संदेश सबसे ज्यादा चाहिए
अष्टावक्र गीता सीरीज़ – श्लोक ४
पूरा वीडियो ऊपर देखो 👆
हरि ॐ तत्सत् 🙏
#अष्टावक्रगीता #श्लोक४
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#आत्मज्ञान




01/06/2026

अष्टावक्र गीता का सबसे Powerful श्लोक 🔥
“तुम शरीर नहीं हो… तुम शुद्ध साक्षी हो”
🕉️ अष्टावक्र गीता | अध्याय १ • श्लोक ३

न पृथिवी न जलं नाग्निर्न वायुर्द्यौर्न वा भवान् ।
एषां साक्षिणमात्मानं विद्धि मुक्तये ॥

मतलब:
आप न पृथ्वी हैं, न जल, न अग्नि, न वायु, न आकाश…
आप इन सबके सिर्फ साक्षी हैं — शुद्ध आत्मा!

यह एक श्लोक जीवन की सारी पहचान बदल देता है 🙏

क्या आपने कभी खुद से पूछा — “मैं कौन हूँ?”
कमेंट में “ॐ” लिखकर बताओ ❤️

जो इस ज्ञान को समझना चाहते हैं, उन्हें Tag कर दो 👇





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