Sri Ramakrishna Satsang Mandal Gondia

Sri Ramakrishna Satsang Mandal Gondia (Official Page)

Sri Ramakrishna Satsang Mandal, Gondia, is a Charitable Philanthropic Organisation and a Member of Ramakrishna-Vivekananda Bhav Prachar Parishad, MS under the guidance of Ramakrishna Math and Ramakrishna Mission, Belur Math, Howrah.

Suprabhatam....Gondia Railway Station Manager Shri Mrityunjay Roy and CCI Gondia Railway Incharge Shri Pramod Kumar Yada...
24/05/2026

Suprabhatam....Gondia Railway Station Manager Shri Mrityunjay Roy and CCI Gondia Railway Incharge Shri Pramod Kumar Yadav visited Darekasa to inspect the “First Trance ( Pratham Bhava Samadhi) Place of Swami Vivekananda” for installation of a memorial plaque at Gondia Railway Station.

गोंदिया रेलवे स्टेशन मैनेजर श्री मृत्युंजय रॉय और सीसीआई गोंदिया रेलवे इंचार्ज श्री प्रमोद कुमार यादव ने गोंदिया रेलवे स्टेशन पर एक स्मरणिका पट्टी लगाने हेतु “स्वामी विवेकानंद की प्रथम समाधि (भाव समाधि) स्थल” के निरीक्षण हेतु दारेकसा का दौरा किया।

Jai Maa

फलहारिणी कालिकापूजन श्रीषोड़शी-पूजनश्रीषोड़शी-पूजन का आयोजनः बंगला सन् १२८० के ज्येष्ठ का महीना आधे से भी अधिक बीत चुका ...
16/05/2026

फलहारिणी कालिकापूजन श्रीषोड़शी-पूजन

श्रीषोड़शी-पूजन का आयोजनः बंगला सन् १२८० के ज्येष्ठ का महीना आधे से भी अधिक बीत चुका है। आज फलहारिणी कालिकापूजन की पुनीत तिथि अमावस्या (२५ मई १८७३ ई.) है। इसलिए दक्षिणेश्वर मन्दिर में आज विशिष्ट पर्व उपस्थित हुआ है। श्रीजगदम्बा के पूजन की इच्छा से श्रीरामकृष्णदेव ने आज विशेष आयोजन किया है। किन्तु वह आयोजन मन्दिर में न होकर उनकी इच्छानुसार गुप्त रूप से उनके कमरे में किया गया है। पूजन के समय देवी को बैठाने के निमित्त मांगल्य-चित्र से भूषित एक पीढ़ा पूजक के आसन के दक्षिण की ओर स्थापित है। सूर्यास्त हो गया, क्रमशः गहन अन्धकार से अवगुण्ठित होकर अमावस्या की रात्रि उपस्थित हुई। श्रीरामकृष्णदेव के भानजे हृदयराम को आज मन्दिर में रात के समय देवी का विशेष पूजन करना है, इसलिए श्रीरामकृष्णदेव के पूजन के आयोजन में यथासाध्य सहायता प्रदान कर वह मन्दिर चला गया तथा श्रीराधागोविन्दजी की रात्रिकालीन सेवा-पूजा समाप्त कर दीनू पूजारी वहाँ आकर श्रीरामकृष्णदेव को उस कार्य में सहायता करने लगा। देवी के गूढ़-पूजन के आयोजन को सम्पूर्ण करने में रात के नौ बज गये। श्रीमाताजी को पूजन के समय उपस्थित रहने के लिए श्रीरामकृष्णदेव ने पहले से ही सन्देश भेज दिया था; वे भी उस समय वहाँ आकर उपस्थित हुईं। श्रीरामकृष्णदेव पूजन करने बैठे।

श्रीमाँ का अभिषेक कर श्रीरामकृष्णदेव द्वारा पूजनः पूजन के द्रव्यों का शोधन कर पूर्वकृत्य सम्पन्न किया गया। तब

श्रीरामकृष्णदेव ने मांगल्य-चित्रभूषित पीढ़े पर बैठने के लिए श्रीमाँ को संकेत किया। पूजन दर्शन करती हुई श्रीमाताजी पहले से ही अर्धबाह्यदशा को प्राप्त कर चुकी थीं। इसलिए वे क्या कर रही हैं, इस बात की सम्यक् उपलब्धि किये बिना ही मन्त्रमुग्ध की तरह उस समय पूर्वाभिमुख बैठे हुए श्रीरामकृष्णदेव के दक्षिण की ओर उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके बैठ गयीं। सम्मुखस्थित घट के मन्त्र-पुनीत वारि के द्वारा श्रीरामकृष्णदेव ने बारम्बार श्रीमाँ का विधिवत् अभिषेक किया। तदनन्तर उनको मन्त्र श्रवण कराने के पश्चात् उन्होंने उस समय प्रार्थना-मन्त्र का उच्चारण किया -

"हे बाले! हे सर्वशक्ति अधीश्वरी माते! त्रिपुरासुन्दरी ! सिद्धि का द्वार उन्मोचन करो, इनके (श्रीमाँ के) शरीर-मन को पवित्र कर इनके अन्दर आविर्भूत हो सर्वकल्याण साधन करो!"

पूजन समाप्त होने पर दोनों की समाधि तथा देवी के चरणों में श्रीरामकृष्णदेव द्वारा जप पूजनादि समर्पणः तदनन्तर श्रीमाँ के अंगों में मन्त्रों का विधिवत् न्यास करने के बाद श्रीरामकृष्णदेव ने साक्षात्-देवबुद्धि से षोड़शोपचार के द्वारा उनका पूजन किया तथा भोग लगाकर अपने हाथों से प्रसादी वस्तुओं का कुछ अंश उनके मुँह में दिया। बाह्यज्ञान तिरोहित होकर श्रीमाँ समाधि में लीन हो गयीं! श्रीरामकृष्णदेव भी अर्धवाह्यदशा में मन्त्रोच्चारण करते हुए समाधिस्थ हो गये ! समाधि-मग्न पूजक समाधिस्थ देवी के साथ आत्मस्वरूप में सम्मिलित तथा एकीभूत हो गये।

कितना ही समय बीत गया! रात्रि का द्वितीय प्रहर भी बीत गया। आत्माराम श्रीरामकृष्णदेव के अन्दर तब कुछ कुछ बाह्य चेतना के लक्षण दिखायी देने लगे। पहले की तरह अर्धबाह्यदशा प्राप्त कर उन्होंने देवी को आत्मनिवेदन किया। तदनन्तर अपने साधन का फल तथा जप की माला इत्यादि सब कुछ देवी के श्रीचरणों में सदा के लिए विसर्जन कर मन्त्रोच्चारण करते हुए वे उन्हें प्रणाम करने लगे - "हे सर्वमंगलमांगल्ये! हे सर्वकर्मनिष्पन्नकारिणि ! हे शरणदायिनि ! त्रिनयने! शिवगेहिनि ! गौरि! हे नारायणि! तुम्हें प्रणाम है, मैं तुमको प्रणाम करता हूँ।" पूजा समाप्त हुई। मूर्तिमती विद्यारूपिणी मानवी के देह को अवलम्बन कर ईश्वर की उपासना करने के पश्चात् श्रीरामकृष्णदेव की साधना

की परिसमाप्ति हुई उनके देव-मानवत्व को सभी प्रकार से सम्पूर्णता प्राप्त हुई। (श्रीरामकृष्णलीलाप्रसंग भाग-१ पृष्ठ-३२२)

Today, (14th May 2026) devotees from Sri Ramakrishna Satsang Mandal Gondia met with Pujaniya Swami Divyanandaji Mahara (...
14/05/2026

Today, (14th May 2026) devotees from Sri Ramakrishna Satsang Mandal Gondia met with Pujaniya Swami Divyanandaji Mahara (Vice President Ramakrishna Math and Ramakrishna Mission Belur) at Ramakrishna Mission Vivekananda Ashram Raipur Chhattisgarh and received Maharaja's blessings.

Suprabhatam.... Visuals of the transformation of the "First Trance Place of Swami Vivekananda" Darekasa . (06 May 2026)स...
07/05/2026

Suprabhatam.... Visuals of the transformation of the "First Trance Place of Swami Vivekananda" Darekasa . (06 May 2026)

सुप्रभात... स्वामी विवेकानंद के 'प्रथम समाधि स्थल' - दारेकासा के कायाकल्प के दृश्य। (06 मई 2026)

मस्ती की पाठशालामस्ती के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी7 मई से 13 मई 2026गतिविधियाँ : समय-सुबह 7.30 से 9.30 तकअभी प...
07/05/2026

मस्ती की पाठशाला

मस्ती के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी

7 मई से 13 मई 2026

गतिविधियाँ : समय-सुबह 7.30 से 9.30 तक
अभी पंजीकरण करें

1. श्लोक और भारतीय संस्कृति शिक्षा

9511731631/7776065464

2. कला और शिल्प

3. पारंपरिक खेल

पता - श्री रामकृष्ण सत्संग मंडल जसानी पाइप फैक्ट्री के पास कन्हारटोली गोंदिया महाराष्ट्र

4. योग और ध्यान

5. नृत्य

6. पिकनिक

7. आनंद मेला

आयु- 5 साल से 13 साल

अध्यात्मिक प्रवचन सोमवार- दि. ०४ मई २०२६ ( सोमवार)        संध्या ०७.०० से ०८.००"अध्यात्मिक जीवन के लिए मार्गदर्शन-स्वामी...
04/05/2026

अध्यात्मिक प्रवचन
सोमवार- दि. ०४ मई २०२६ ( सोमवार)
संध्या ०७.०० से ०८.००
"अध्यात्मिक जीवन के लिए मार्गदर्शन-स्वामी कृष्णअमृतानन्द , (असीम महाराज) सचिव,रामकृष्ण मिशन, ग्वालियर
श्री रामकृष्ण सत्संग मंडल, जसानी पाइप कारखाने से थोड़ा आगे, कन्हार टोली (रेलटोली)

मस्ती की पाठशालामस्ती के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी7 मई से 13 मई 2026गतिविधियाँ : समय-सुबह 7.30 से 9.30 तकअभी प...
04/05/2026

मस्ती की पाठशाला

मस्ती के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी

7 मई से 13 मई 2026

गतिविधियाँ : समय-सुबह 7.30 से 9.30 तक
अभी पंजीकरण करें

1. श्लोक और भारतीय संस्कृति शिक्षा

9511731631/7776065464

2. कला और शिल्प

3. पारंपरिक खेल

पता - श्री रामकृष्ण सत्संग मंडल जसानी पाइप फैक्ट्री के पास कन्हारटोली गोंदिया महाराष्ट्र

4. योग और ध्यान

5. नृत्य

6. पिकनिक

7. आनंद मेला

आयु- 5 साल से 13 साल

Buddha Purnima celebration today at Belur Math
01/05/2026

Buddha Purnima celebration today at Belur Math

रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानंद  जी द्वारा आज ही के दिन, 1 मई 1897 को की गई थी।आज रामकृष्ण मिशन के पावन स्थापन...
01/05/2026

रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानंद जी द्वारा आज ही के दिन, 1 मई 1897 को की गई थी।
आज रामकृष्ण मिशन के पावन स्थापना दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान श्री रामकृष्ण देव, माँ सारदा और स्वामी विवेकानंद जी के दिव्य आदर्श हम सभी के जीवन में सेवा, त्याग और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें।
“आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च” — इसी महान आदर्श के साथ हम सब आगे बढ़ें।

आज आदि शंकराचार्य जयंती.विश्वगुरुश्री आद्य शंकराचार्य जयंतीआज वैशाख शुद्ध पंचमी है। हिंदू धर्म के सबसे बड़े गुरु आदि शंक...
21/04/2026

आज आदि शंकराचार्य जयंती.

विश्वगुरुश्री आद्य शंकराचार्य जयंती
आज वैशाख शुद्ध पंचमी है। हिंदू धर्म के सबसे बड़े गुरु आदि शंकराचार्य की जयंती। वो दार्शनिक जिन्होंने वैदिक धर्म को फिर से स्थापित किया। केरल के कलाडी में जन्मे (508 BC-476 BC)।

उन्हें सनातन संस्कृति को फिर से स्थापित करने के लिए शिव का अवतार माना जाता है। वे सिर्फ़ 32 साल जिए। लेकिन उनके ज्ञान.. लीला.. अद्भुत साहित्य ने उन्हें विश्वगुरु बना दिया। जब वे तीन साल के थे, तब उनके पिता गुज़र गए.. उनकी माँ ने उनका ख्याल रखा।
सरस्वती उनकी ज़बान पर रहती थीं। आठ साल की उम्र में उन्होंने संन्यास ले लिया और गुरु की तलाश में ओंकारेश्वर आ गए। लगभग 500 BC में, उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक और द्वारका से जगन्नाथपुरी तक पूरे भारत की यात्रा की और वैदिक धर्म को फिर से स्थापित किया। शंकराचार्य ने पूरे देश में पैदल यात्रा की और कठिन चारधाम यात्रा की, द्वारका मठ, जगन्नाथपुरी मठ, श्रृंगेरी मठ और ज्योतिर्मठ में चार पीठ बनाए, हर एक पर एक शंकराचार्य को पीठासीन पुजारी नियुक्त किया और शंकराचार्य परंपरा की स्थापना की।
हम हमेशा यह वाक्य सुनते हैं "ब्रह्म सत्यं जगन मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः"। यानी, केवल ब्रह्म ही सत्य है, संसार माया (भ्रम) है। यह अद्वैत दर्शन आदि शंकराचार्य ने सिखाया था।
अद्वैत का मतलब है अद्वैत (अ+द्वैत), यानी ईश्वर, जीव और संसार तीन अलग-अलग चीजें नहीं बल्कि एक हैं। ब्रह्म ही परम सत्य है, निराकार, आनंदमय (सत्-चित्-आनंद) और संसार है। यह संसार जो हमें दिखता है, वह माया के कारण ही सत्य लगता है। यह माया ब्रह्म का ही प्रत्यक्ष रूप है, जो हमें आत्म-ज्ञान से दूर रखती है। हर जीव में जो 'आत्मा' है, वह असल में 'ब्रह्म' है। लेकिन अज्ञानता के कारण आत्मा खुद को शरीर मानती है, लेकिन ज्ञान होने पर उसे 'ब्रह्म' के रूप का अनुभव होता है।
मोक्ष का मतलब है यह ज्ञान (आत्म-साक्षात्कार) कि 'मैं शरीर नहीं बल्कि आत्मा हूँ' और 'मैं और ब्रह्म एक हैं'। यानी मोक्ष। यह मोक्ष मरने के बाद नहीं, बल्कि जीते जी मिल सकता है। आचार्य ने उपनिषदों, भगवद् गीता और ब्रह्म सूत्रों (प्रस्थान त्रयी) पर कमेंट करके इस फिलॉसफी को स्थापित किया। फिर धर्म में जो कन्फ्यूजन पैदा हुआ... झगड़ा जीतकर खत्म हुआ।
भगवान निराकार होते हुए भी भक्ति के लिए उन्होंने एक साकार रूप स्थापित किया। प्रशंसा में कविताएँ लिखी गईं। हिंदू संस्कृति के इस पहले विश्व गुरु को प्रणाम जिन्होंने यह कहकर एकता बनाई कि दुनिया की हर आत्मा 'शिव' है।

Address

Kanhartoly Jasani Pipe Factory Road Gondia
Gondia

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sri Ramakrishna Satsang Mandal Gondia posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Sri Ramakrishna Satsang Mandal Gondia:

Share