26/06/2023
हिंदू धर्मग्रंथ केवल भारतमें ही क्यों?
बहुत बड़ा प्रश्न सनातन धर्मियों के ऊपर मुस्लिम,ईसाई और अन्य संप्रदाय के लोग करते हैं की आपका जो सनातन धर्म है वो किन्ही गिने चुने देशों में क्यों रह गया ?
और मुस्लिम पूरे संसार में क्यों बढ़ रहे ,ईसाई पूरी दुनिया में क्यों फैले ?
ऐसा प्रश्न था ...!
और मैं ये बतानी चाहती हूं की ऐसा प्रश्न किसी समय हमारे पूर्वजों के सामने जैन और बुद्ध भी दागते थे हालांकि आज जैन और बुद्ध लगभग सारी दुनिया से समाप्त हो गए हैं।
जो जितना तेज से ऊपर चढ़ता है वो उतना ही तेजी से ऊपर से गिरता है ..।
केवल 1443 हिजरी चल रहा है मुस्लिम का, ईसाइयों का 2000 ईस्वी चल रहा है इससे ज्यादा प्राचीन तो नहीं हैं आपलोग।
हमारा 1 अरब 96 करोड़ 53 लाख 123वां वर्ष चल रहा है ।
तो इतना अंतर है हमदोनो में ।
क्या 1443 वर्ष पहले श्रृष्टि हुई थी यदि सृष्टि नहीं हुई थी मुहम्मद से शुरू कर रहे हो तो श्रृष्टि संवत क्यों नहीं चलाया?
हमारे यहां युधिष्ठिर संवत है ,विक्रम संवत है और अनेक प्रकार संवत है जिससे पता चलता है की कौन से महापुरुष वो किस समय पर हुए हैं कौन सी घटना कब हुई।
लेकिन श्रृष्टि संवत हमारा सदेव चलता है ये सब चीज आपको नही पता ।तो केवल अर्वाचीन लोग हैं आप , आपने इतने ही सालों में दुनिया में 20% नास्तिक पैदा कर दिए।
आपके जो चमत्कार हैं ,अंधविश्वास से भरी हुई आपकी धार्मिक पुस्तकों में बातें हैं उसके कारण लगभग 20% लोग इस पूरे दुनिया में नास्तिक हो गए।
हमारे कारण नही हुए ,क्युकी जब वेद सारे संसार में फैले थे तोह इस प्रकार का आचरण नही था ।और वेद कभी समाप्त भी नही होंगे ।लगभग 2 अरब साल से आज भी हमलोग जैसे वैदिक धर्मी भारत ने लाखों करोड़ो हैं।इससे पता चलता है इतनी प्राचीन कोई चीज चली और ये आज भी सशक्त है।तो इसे कहते हैं श्रेष्ठता ..!🚩
भीड़ तो भंडारे में खाना खिलाने के नाम पर भी बुला लेते हैं,भीड़ तोह नाई की दुकान पर भी इक्कठा हो जाती है लेकिन उस भीड़ को ठीक दिशा देना ,भाईचारे की और आकर्षित करना ,सुख देना ये केवल और केवल श्रेष्ठ संस्कार
जहां से मिले वो श्रेष्ठ आध्यात्मिक सिक्षाएं जिस ग्रंथ में हो या जिसने दी हो उसे ही तो धर्म कहते हैं।।
धर्म किसी मुस्लिम का ही नही हो सकता , ईसाई का ही नही हो सकता , हिंदू का ही नही हो सकता ।धर्म सारी श्रृष्टि का होगा पूरी सृष्टि का । और वैदिक धर्म जहां केवल मनुष्य मात्रकारी नही प्राणी मात्र के सुख के लिए हैं।
धर्म इस कहते हैं।
केवल हमारा नही सारे संसार का लेकिन स्वार्थ, लोभ ,लालच कौन मान रहा है कोई नही मान रहा है यही तो समस्या है इस संसार की इसीलिए सभी दुखी हैं।आपसी लड़ाई झगडे बढ़ रहे हैं, बलात्कार,चोरी , व्यभिचार , अनाचार,भ्रष्टाचार सारी समस्या इसी प्रकार से बढ़ रही है ।
ये मेरा है ये तेरा है ये छोटे मस्तिष्क के लोग ये छोटे दिल वाले लोग ऐसी बातें करते हैं की हमारी christianity सारे संसार में है हमारे ईसाई यहां पर हैं।ऐसा नहीं होना चाइए ।
जो उदार चरित्र वाले हैं जिनका हृदय बड़ा है विशाल है उनके लिए तो सारा संसार ही परिवार है ।
आपलोग इसी प्रकार से चीजें करते हैं।की जिस पिता से निकले हैं उस पिता से निकलकर कर के जो बेटे पुत्र फैले हुए हैं ये आज कह रहे हैं की ये पिता गलत है इसको कुछ नही पता हमारी 20-20 संतान हो गईं तो हम बड़े हो गए ये पिता क्या है अपने पिता को नकार रहे हैं ।
में ज्यादा उदाहरण देती हूं की आसानी से समझ आ जाय की पुनः ऐसा प्रश्न फिर न उठे ।
देखिए जब आपके ईसा मसीह जीसस इजराइल ने गए यहां से भारत आदि से वेद का अध्यन करके प्रचार प्रसार करने गए जब इजराइल में तो वहां पर unpar अत्याचार हुई। गिने चुने 8-10 उनके शिष्य थे फिर 12 हुए ऐसे ही बढ़ते चले गए तो उस समय उनकी संख्या बिल्कुल ही जीरो थी उसका मतलब जब वो ईसा मसीह जीसस सिक्षावों का आसार प्रचार कर रहा था केवल 19-20 लोगों को लेकर तो क्या वो गलत कर रहा था उस समय! संख्या से आप ये अंदाजा लगा रहे हो की हम पूरी दुनिया में फैले हैं और आप थोड़े हो तो गलत हो ऐसा अंदाजा आप लगा रहे हो तो जीसस फिर अपने जीसस पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया 😂......!!!
इसी प्रकार से मुहम्मद वाले आ गए , मुहम्मद ने एक से 2 किया 2 से 3 फिर 100 aur Phirr बढ़ता चला गया तो अपने ही मुहम्मद पर प्रश्न खड़ा कर दिया की जब वो अकेला था की जब वो 10-10 20-20 logon के साथ था तब तो वो केवल सीमित जगह पर था मक्का में फिर मदीना में तो क्या us समय मुहम्मद गलत था ?
आपने ही मुहम्मद को गलत सिद्ध कर दिया मैने तो नही किया 🤣....!
संसार सुखी और समृद्धि हो इसीलिए सत्य को लेकर आती हूं जितने भी जो धर्म के नाम पर अधर्म चल रहा है उसका भी सत्य यहां पर बताती हूं ।
कोई भी मन ने मेल नही है केवल सत्य आपतक पहुंचाती हूं ।
~सिद्धि शुक्ला
जय श्रीराम🙏🚩
#सनातन #सनातनभारत