Siddhi Shukla

Siddhi Shukla धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्

27/06/2023

कर्मफल ये नहीं कहता है कि
बुरे कर्म का परिणाम बुरा होता है,
कर्मफल का सिद्धांत है कि
बुरा कर्म बुरे कर्ता से निकलता है;

भ्रष्ट पहले मन होगा
तभी तो भ्रष्ट कर्म होगा,

ये है कर्मफल!

~ सिद्धि शुक्ला

27/06/2023

आज एक ट्रेंड चल गया है की सब कोई अपने अपने भगवान को अल्लाह को जीसस को खुदा को कोई कबीर को कोई राधा को वेद में सिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं। इसमें कितनी सच्चाई है ये में बताऊंगी और ये कर क्यों रहे हैं ये भी बताऊंगी । बहुत महत्वपूर्ण विषय है आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा । ये आजकल जो ट्रेंड चला है इसका सीधा सा कारण ये है की ये जानते ही नही हैं वेदों के विषय में बिलकुल कुछ नही जानते , दो सब्द यहां से उठा लिए 2 सब वहां से उठा लिए और कह दिया देखो मुहम्मद शब्द ,देखो कबीर शब्द अरे 3एक मुझसे आके बोला देखो मेरा नाम आ गया वेद में अनिल 😂इनको ये भी पता की जो वेद में नाम होते हैं वो स्थानवाचक,व्यक्तिवाचक नाम नही होते हैं।
इनकोपता ही नहीं है की क्या गलत है क्या सही है बस सिद्ध करना है जबरदस्ती घुसेड़ना है वहां पर ।

अब ये ऐसा कर क्यों रहें हैं ,
तो पहली बात तो ये है की यदि वेदों में वहां ये सिद्ध कर रहे हैं और इनसे मैं एक प्रश्न दाग दूं की आपका अल्लाह पहले आया था या आदम पहले आया था कौन से में ज्यादा ताकत है..!
यहवुआ में ज्यादा ताकत है या जीसस में ज्यादा ताकत है ..!
अब ये चुप हो जायेंगे यहां पर ।
वेद सबसे प्राचीन हैं इसीलिए सारे के सारे वेदों में अपने नाम को घुसेड़ रहे हैं।
ये सबके सब वेदों में नाम घुसेड़ देते हैं ताकि अपने धर्म को प्राचीन सिद्ध कर सकें
जब ये मुल्ले और ईसाई कह रहे हैं की हमारा ये वेद में हैं तब क्यो कुरान को मान रहे हो भाई बाइबिल को क्यों मान रहे हो आप क्यों बेटों के चक्कर में पड़े हो बाप को चोर कर जो की वेद है ।
सीधी बात है इसमें कोई गड़ित का सिद्धांत तो नही है ये लोग अगर कह रहे हैं की वेद में अल्लाह का नाम है जीसस का नाम है राधा का नाम है कबीर का नाम है तो सीधी बात है की ये लोग वेद को प्रमाणिक मान लिए हैं क्युकी वेद सबसे प्राचीन हैं।
अगर इनसे पूछा जाए की कुरान बाइबल आदि की जो सीक्षाएं हैं वो वेदों के समान है ।।दिन और रात का अंतर है दोनो में , पूर्व पश्चिम का अंतर है दोनो में।
वेद के विपरीत हैं इनके ग्रंथ तो कैसे कह सकते हैं यहां का नाम वहां है ।
पहले बाप आता है फिर बेटा आता है कुरान बाइबल तो बाद में आई है सबसे पहले तो वेद है और ये राधा तो बाद में चलन शुरू किया है हिंदुओं में ,ये कबीर तो जल्दी ही आए थे 500-600 साल पहले । इन सबको तुम वहां सिद्ध करके दिखा दो आ जाना मेरे सामने सिद्ध करके दिखा देना देख लेंगे तुम्हे ।

अब समझयिये की ये सारा का सारा षड्यंत्र हैं क्यो हैं ।
हम कहते हैं श्रुति अर्थात वेद ।वेदों को हम श्रुति भी कहते हैं ।
अर्थात गुरु शिष्य परंपरा से आदिकाल से चला आ रहा है ।
ये सारी की सारी जो चीजें हैं इसीलिए घूम रही हैं ।
प्रश्न खड़ा कर दीजिए बाइबल पर की भैया आपकी श्रृष्टि 6000 साल पहले बन गई ये बाइबल तो बिल्कुल ही बाद में आई।तो तबतक आपका खुदा नींद की गोली खाकर सो रहा था ?
मनुष्य ने क्या किया उसको कैसे पता चला की इस श्रृष्टि का कैसे उपभोग करना है कैसे पालन पोषण करना है कैसे संतान उत्पत्ति करना है उसको कुछ नही पता था ।उसको ज्ञान देना चाइए था न ।अरे ..! फोन के साथ भी बुकलेट आती है ताकि पता चल जाए कैसे इस्तेमाल करना है ।
और वेद जब श्रृष्टि बनी उसी समय परमात्मा ने दे दिया था की कैसे कैसे क्या क्या करना है , यदि दूसरे प्रदेशों में जाना है तो कैसे जाएं ऐसे विमान बनाना है , सारी चीजें उसके दें दी थी ।
तो इसीलिए ये सबकुछ वेद में घुसेड़ देते हैं तुम्हारा नाम वेद में हमारा नाम वेद में सबकुछ वेद में है । जब सबकुछ वेद में है तुम प्रमाण भी दे रहे हो तो क्यों कुरान और बाइबल के चक्कर में घुसते ही भाई ?
ये रही मुल्लों और ईसाइयों की बात ।
अब ये राधा का क्या चक्कर कहां से आई कौन हैं ये बाद में बताऊंगी नही तो बड़ा ही जाएगा ज्यादा पोस्ट ।

~सिद्धि शुक्ला

जय श्रीराम 🙏🏹🚩

26/06/2023

हिंदू धर्मग्रंथ केवल भारतमें ही क्यों?

बहुत बड़ा प्रश्न सनातन धर्मियों के ऊपर मुस्लिम,ईसाई और अन्य संप्रदाय के लोग करते हैं की आपका जो सनातन धर्म है वो किन्ही गिने चुने देशों में क्यों रह गया ?
और मुस्लिम पूरे संसार में क्यों बढ़ रहे ,ईसाई पूरी दुनिया में क्यों फैले ?
ऐसा प्रश्न था ...!
और मैं ये बतानी चाहती हूं की ऐसा प्रश्न किसी समय हमारे पूर्वजों के सामने जैन और बुद्ध भी दागते थे हालांकि आज जैन और बुद्ध लगभग सारी दुनिया से समाप्त हो गए हैं।
जो जितना तेज से ऊपर चढ़ता है वो उतना ही तेजी से ऊपर से गिरता है ..।
केवल 1443 हिजरी चल रहा है मुस्लिम का, ईसाइयों का 2000 ईस्वी चल रहा है इससे ज्यादा प्राचीन तो नहीं हैं आपलोग।
हमारा 1 अरब 96 करोड़ 53 लाख 123वां वर्ष चल रहा है ।
तो इतना अंतर है हमदोनो में ।
क्या 1443 वर्ष पहले श्रृष्टि हुई थी यदि सृष्टि नहीं हुई थी मुहम्मद से शुरू कर रहे हो तो श्रृष्टि संवत क्यों नहीं चलाया?
हमारे यहां युधिष्ठिर संवत है ,विक्रम संवत है और अनेक प्रकार संवत है जिससे पता चलता है की कौन से महापुरुष वो किस समय पर हुए हैं कौन सी घटना कब हुई।
लेकिन श्रृष्टि संवत हमारा सदेव चलता है ये सब चीज आपको नही पता ।तो केवल अर्वाचीन लोग हैं आप , आपने इतने ही सालों में दुनिया में 20% नास्तिक पैदा कर दिए।
आपके जो चमत्कार हैं ,अंधविश्वास से भरी हुई आपकी धार्मिक पुस्तकों में बातें हैं उसके कारण लगभग 20% लोग इस पूरे दुनिया में नास्तिक हो गए।
हमारे कारण नही हुए ,क्युकी जब वेद सारे संसार में फैले थे तोह इस प्रकार का आचरण नही था ।और वेद कभी समाप्त भी नही होंगे ।लगभग 2 अरब साल से आज भी हमलोग जैसे वैदिक धर्मी भारत ने लाखों करोड़ो हैं।इससे पता चलता है इतनी प्राचीन कोई चीज चली और ये आज भी सशक्त है।तो इसे कहते हैं श्रेष्ठता ..!🚩
भीड़ तो भंडारे में खाना खिलाने के नाम पर भी बुला लेते हैं,भीड़ तोह नाई की दुकान पर भी इक्कठा हो जाती है लेकिन उस भीड़ को ठीक दिशा देना ,भाईचारे की और आकर्षित करना ,सुख देना ये केवल और केवल श्रेष्ठ संस्कार
जहां से मिले वो श्रेष्ठ आध्यात्मिक सिक्षाएं जिस ग्रंथ में हो या जिसने दी हो उसे ही तो धर्म कहते हैं।।
धर्म किसी मुस्लिम का ही नही हो सकता , ईसाई का ही नही हो सकता , हिंदू का ही नही हो सकता ।धर्म सारी श्रृष्टि का होगा पूरी सृष्टि का । और वैदिक धर्म जहां केवल मनुष्य मात्रकारी नही प्राणी मात्र के सुख के लिए हैं।
धर्म इस कहते हैं।
केवल हमारा नही सारे संसार का लेकिन स्वार्थ, लोभ ,लालच कौन मान रहा है कोई नही मान रहा है यही तो समस्या है इस संसार की इसीलिए सभी दुखी हैं।आपसी लड़ाई झगडे बढ़ रहे हैं, बलात्कार,चोरी , व्यभिचार , अनाचार,भ्रष्टाचार सारी समस्या इसी प्रकार से बढ़ रही है ।
ये मेरा है ये तेरा है ये छोटे मस्तिष्क के लोग ये छोटे दिल वाले लोग ऐसी बातें करते हैं की हमारी christianity सारे संसार में है हमारे ईसाई यहां पर हैं।ऐसा नहीं होना चाइए ।
जो उदार चरित्र वाले हैं जिनका हृदय बड़ा है विशाल है उनके लिए तो सारा संसार ही परिवार है ।
आपलोग इसी प्रकार से चीजें करते हैं।की जिस पिता से निकले हैं उस पिता से निकलकर कर के जो बेटे पुत्र फैले हुए हैं ये आज कह रहे हैं की ये पिता गलत है इसको कुछ नही पता हमारी 20-20 संतान हो गईं तो हम बड़े हो गए ये पिता क्या है अपने पिता को नकार रहे हैं ।
में ज्यादा उदाहरण देती हूं की आसानी से समझ आ जाय की पुनः ऐसा प्रश्न फिर न उठे ।
देखिए जब आपके ईसा मसीह जीसस इजराइल ने गए यहां से भारत आदि से वेद का अध्यन करके प्रचार प्रसार करने गए जब इजराइल में तो वहां पर unpar अत्याचार हुई। गिने चुने 8-10 उनके शिष्य थे फिर 12 हुए ऐसे ही बढ़ते चले गए तो उस समय उनकी संख्या बिल्कुल ही जीरो थी उसका मतलब जब वो ईसा मसीह जीसस सिक्षावों का आसार प्रचार कर रहा था केवल 19-20 लोगों को लेकर तो क्या वो गलत कर रहा था उस समय! संख्या से आप ये अंदाजा लगा रहे हो की हम पूरी दुनिया में फैले हैं और आप थोड़े हो तो गलत हो ऐसा अंदाजा आप लगा रहे हो तो जीसस फिर अपने जीसस पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया 😂......!!!

इसी प्रकार से मुहम्मद वाले आ गए , मुहम्मद ने एक से 2 किया 2 से 3 फिर 100 aur Phirr बढ़ता चला गया तो अपने ही मुहम्मद पर प्रश्न खड़ा कर दिया की जब वो अकेला था की जब वो 10-10 20-20 logon के साथ था तब तो वो केवल सीमित जगह पर था मक्का में फिर मदीना में तो क्या us समय मुहम्मद गलत था ?
आपने ही मुहम्मद को गलत सिद्ध कर दिया मैने तो नही किया 🤣....!

संसार सुखी और समृद्धि हो इसीलिए सत्य को लेकर आती हूं जितने भी जो धर्म के नाम पर अधर्म चल रहा है उसका भी सत्य यहां पर बताती हूं ।
कोई भी मन ने मेल नही है केवल सत्य आपतक पहुंचाती हूं ।

~सिद्धि शुक्ला
जय श्रीराम🙏🚩

#सनातन #सनातनभारत

26/06/2023

मुक्ति चाहिए सबको,किन्तु मुक्ति की तरफ बढता कोई अपवाद स्वरूप ही है।

26/06/2023

जिंदगी जब सिखाती हैं तो तोड़ कर सिखाती हैं और गुरु जब सिखाता है तो करुणा के साथ सिखाता है और गुरु मुक्ति का मार्ग दिखा सकते है लेकिन मुक्ति के लिये प्रयत्न हमे भी करना है।

26/06/2023

📝

विश्राम तो सत्य में ही मिलता है

झूठ को छोड़ कर के सत्य के ओर जाया जाता है

सच की खोज जैसा कुछ नही होता है झूठ त्यागा जाता है

सच्चाई की तलाश बंद करो झूठ खोजा करो

खोजने की शुरुआत अंदर से करो

सच नही झूठ खोजना है बाहर नही भीतर खोजना है

जिसने अपने भीतर का झूठ खोज लिया उसे सब मिल जाता है

आप की प्रगति हो रही है या नही ये भी जाचने का पैयमाना जानिए की आप अपना झूठ देख पा रहें हैं या नहीं

आप अगर अपने चोर को पकड़ो तो दुखी मत हो जाना इसका मतलब ये है की भीतर एक चौकीदार भी है

अह्म की अनुपस्थिति है आत्मा और कुछ नही

साक्षी नही होना है निर्लिप्त होना है

आप में कितना साक्षित्व है कितना भोग ये देखना हो तो ये देख लो की आप भविष्य को ले कर कर कितन सोचते हो

सपने आप देखते हो संतुष्टि के लिए और सपने से संतुष्टि मिलती नही कभी, चाहे वो पूरा हो या न हो

आप का विरोध ही आप को सत्य तक पहुचने से रोके हुए है

हम किसी की तारीफ़ उसके मुख के सामने नही करते हैं गोली मर के करते हैं

मुक्ति चाहिए तो सभी को लेकिन मुक्ति के तरफ बढ़ता कोई कोई ही है

किसी से भी आप उसके चुनाव का अधिकार नहीं छीन सकते

सांप हूँ लेकिन सांप रहना नहीं हैं

बुद्धि अपने पक्ष में मत चलाओ

~ सिद्धि शुक्ला

26/06/2023

सच्चाई की तलाश बंद करो
झूठ की तलाश शुरू करो !!
साक्षी नहीं होना है निर्लिप्त होना है !
अपने कर्म और विचार का अवलोकन आत्मज्ञान है! आत्मा कालातीत है ,अहंकार का जन्म और मृत्यु होता है!
प्रकृति- अनंतसागर
अहंकार -लहर
आत्मा -साक्षी
जो असली है उसका अनुभव नहीं हो सकता असली चीज की पहचान है वह अनुभव करने वाले को खत्म कर देती है!

~ सिद्धि शुक्ला

26/06/2023

भविष्य के बारे मे हम जितने चिंतित होंगे उतना हम प्रकृति में लिप्त होते जायेंगे।हमे निर्लिप्त होना है।

26/06/2023

प्रकृति में मात्र प्रक्रिया होती है। उसे अहम से कोई मतलब नहीं होता। वो बात अलग है की अहम अपने कर्ता भाव के चलते उससे कामनावश लिप्तता करता है।

बंधन ही पहचान है। बंधन खोने के साथ पहचान भी खो जायेगी।

सपने में आपका नाम मानलो टॉमी है। अब जागने के बाद कोई आपको टॉमी बोले आप सोच पाओगे आप टॉमी थे ? यही है जागना। आत्मस्थ होने के बाद ऐसा होता है जागरण।

हम कृष्ण, राम को भी देखते हैं हमारे ही सपने में होंगे हमारे जैसे ही ऐसे। जैसे पशु के सामने कृष्ण आ जाए, उसे दिखेगा मांस है। जैसे कामी पुरुष के सामने मीरा आ जाए, उसे दिखेगा क्या स्त्री।

जो अपनी वास्तविक पहचान पाना चाहता है, उसे अपनी जूठी पहचान छोड़नी पड़ेगी।

हल्के हल्के तर गए, डूबे जिन सिर भार।

जो कुछ असली है उसका कोई अनुभव नहीं हो सकता। जिसका अनुभव हो रहा है वो प्रकृति ही होगा।

सत्य को नहीं खोजना होता है। झूठ को खोजना है और उसे छोड़ना होता है।

खोजने की शुरुआत अंदर से करो। बाहर नहीं है, झूठ अंदर ही हैं हमारे।

जिसने अपने अंदर का झूठ खोज लिया उसे सब मिल जाएंगे, राम, कृष्ण, शिव, हनुमान सब।

संत को अपने अंदर की एक छोटी सी बेईमानी दिख जाती है, जो ढोल बजाकर बताते हैं। की वाह भाई खेल रहा था वापस मेरे साथ। 😂

उदाहरण : मलूकनाथ। सयाना बन रहा था देख इतने वक्त से, है तो तू वैसा ही।

जिसे ये समझ आ गया उसके बद्री, केदार सब हो गए।

*प्रकृति एक अनंत नदी है, अहम उसमें उठी एक लहर है, आत्मा उस लहर की तटस्थ साक्षी है।*

जो अपने साक्षित्व भाव को भी देख लेगा वो सही में साक्षी हो गया।

साक्षी नहीं होना है, निर्लिप्त होना है। दरिया के अंदर होना है, भीगना नहीं है।

आप अपने भविष्य को लेकर कितने सपने बनाते हैं वो आपको दिखा देगा आप भोगी हो।

शांत वातावरण में तो शांत कोई भी रह ले, जो अशांत वातावरण में भी शांत रह सके। वो हुआ गहरा ध्यान, गहरी शांति।

~ सिद्धि शुक्ला

26/06/2023

जिसको मन कहते हैं वो तन ही है।

जब तक खुद को अपूर्ण मान रहे हो तब तक अहम है।
भीतर मै से खाली होना ही मुक्ति है।

26/06/2023

प्रकृति माने प्रक्रिया
और हमें लगा हमनें जीवन जिया
पर ये संसार, शरीर और मन
इनमें किसी ने कुछ नहीं किया

पहले सुना psychology is climatology
फिर जाना psychology is physiology
अब लगता है psychology is searchengine-ology
या कहें google की algorithm-ology

क्या सचमुच किसी ने कुछ नहीं किया?
किया तो! अहम् ने शोर किया
जो है algorithmic प्रक्रिया
उसे अपना चेतन चुनाव घोषित किया

और ध्यान फिर, फिर हटा दिया
अपने और अपनी प्रक्रियाओं से
प्रकृति तत्त्वों को इकठ्ठा किया
और अपना नाम बना दिया

सब ऐसा मटियामेल किया
कि अनजान को भी नाम दे ही दिया
अपने ही दुःख का कारण बना
प्रकृति में पहचान खोज-खोज मरा

जो हर बात हम जानते हैं
उसमें नहीं कोई तुक है
बस, बहुत सारा दुःख है

हमारी पहचानें बंधनों से हैं
और हमारे रिश्ते बंधनों से हैं
आत्मज्ञान के उदय होने पर
पहचान अस्त होती है
और कैदी नंबर २७ की
कैद से रिहाई होती है

जो सपनें में था भिखारी
उसकी खुल गई नींद सारी
बुद्ध से पूछा किसी ने: who are you?
वे बोले - मैं वो जो जागृत हूँ

जागरण अर्थात नया जन्म होना
मानवता के साझे सपने का टूटना
हैरानी तो ये की झूठ लगता जाना-पहचाना
और जो है सत्य, अपना, उसको अजनबी जाना

जाग्रति माने अकेलापन
पर हमें है echo chamber का प्रलोभन
क्योंकि हम यहाँ टूटकर भी नहीं टूटते
एक-दुसरे के मूल को हैं रहते सहेजते

झूठी पहचानें हम छोड़े नाहीं
सर गठरी लिए डूबे भवसागर माहीं

तो करुणावश संत बुलावें, 'आओ, आओ'
'यहाँ आओ और चिज्जू पाओ'
जैसे जानवर को कोई बुलाए
और अहमप्रकृति जानवर होकर भी न जाए
ये तो अद्भुत अचम्भा है
क्या ये मेरा ही रचा है?

असली का अनुभव मूरख करता
जो अद्वैत है वो अनुभवगत ना होता
वो जो मौन का अनुभव करें
वो जैसे मर कर भी शोर सुनें

सत्य, मौन, वास्तविक प्रेम - ये सब
होता नहीं कभी अनुभवगत
पर अनुभोक्ता है ऐसा खोखला भिखारी
कि उसे ज़िन्दगी की भद्दी बदतमीज़ी नहीं समझ आ री

जितना वह सत्य से दूर है
उतना शोर से आकुल मूढ़ है
पर जितना सत्य के पास है जाता
भिखारी मन उतना अवाक रह जाता
आखिरकार हो पालतू कुत्ता
पा जाता विश्राम अनूठा

अगर है आँख में माया का वास
तो कैसे फलित हो राम दर्शन की आस
जब माया की चोरी पकड़ो तो होवे उल्लास
क्योंकि अभी जाना कि चौकीदार भी है अपने पास

सारा शोर है मैं की बेईमानी
पहचान पराए से अपनी जानी
इक नुक्ते में गल मुकदी है
इस झगड़ालु तों पाई मुक्ति है
दुइ को वैसे ही दिल से दूर किया
जैसे बुद्ध ने अंगुलिमाल को मार दिया

नदी, लहर और वो कालातीत
जो तट का है साक्षीत्व
अहम् है ऐसी लहर का नाम
अज्ञान और भूख जिसकी पहचान
अज्ञानी भिखारी जो फिरे मारा-मारा
तभी कहें साहिब - गुरु से कर मेल गँवारा

असली साक्षी अप्रतिभागि
जो नहीं अभोगी, वो अभागी
श्रीकृष्ण का कर्मयोग है सिखाता
कि कर्म में तुम्हारी नहीं प्रतिभागिता

भोग की इच्छा है भविष्य की परेशानी
forecasting is OK पर envisioning नहीं करो हे प्राणी

finally, जो वेदांत संस्कृत में कह गए ऋषिवर
बाबा ने वो प्रेम उड़ेल दिया सिंधी-पंजाबी में कहकर

~ सिद्धि शुक्ला

26/06/2023

दुनिया की हर समस्या का हल
जीवन के कर्मों का फल है गीता।
कृष्ण का साक्षात स्वरूप और
वेदों का सार है गीता।

ज्ञान का भंडार,धर्म, अर्थ
काम, मोक्ष का सार है गीता
मया, मोह, लोभ, क्रोध एवं
मोक्ष का आधार है गीता

सब ग्रंथों का सार एवं वेद
पुराणों का विस्तार है गीता
भक्ति से मुक्ति योग ज्ञान वैराग्य,
सबका द्बार है गीता

कृष्ण ने कहा गीता में
मैं सबमें हूं, सब मुझमें है
सूरज चांद सितारे, मैं हूं
ये नदियां पहाड़ सब मैं हूं

मैं पहले भी था, बाद में भी रहूंगा
धर्म वो है जो धारण करें
कर्म वो है जो किया जाये
कर्म फल ही जीवन का सार
गीता पढ़ने से होता जीव का उद्धार

~ Siddhi Shukla

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