साधन-समर Acharya P K Ojha

साधन-समर Acharya P K Ojha Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from साधन-समर Acharya P K Ojha, श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम, अलहन परासी, पो./सिंघाडी, थाना-गोह, जिला-औरंगाबाद, बिहार-, भारत ।, Goh.

[शाक्त, शैव और वैष्णवकी त्रिपथगा]
🌹भक्ति, योग और तन्त्र🌹
[This page is devoted to Divine and insightful interpretation of Ancient Vedic Science, with emphasis on the key principles and philosophies of Sanatani Sanskriti, as in our Eternal Scriptures.]

🔱🌹भगवान् शिवकी रघुपतिव्रतनिष्ठा🌹🔱=============================== #कामाख्या  #बगलामुखी  #छिन्नमस्ता "शिव-सम को रघुपति-व्र...
07/08/2026

🔱🌹भगवान् शिवकी रघुपतिव्रतनिष्ठा🌹🔱
===============================
#कामाख्या
#बगलामुखी
#छिन्नमस्ता
"शिव-सम को रघुपति-व्रत-धारी।
बिनु अघ तजी सती-असि अस नारी।।"
🔱🌹🌺 #श्रीरामचरितमानसकी इस चौपाईमें ग्रन्थकार श्रीगोस्वामीने महर्षि याज्ञवल्क्यके प्रवचन द्वारा भगवान् शिव और माता सतीदेवीकी असीम महिमा बड़े ही सुन्दर ढंगसे प्रतिपादित की है। प्रथम चरणमें 'शिव-सम को' और द्वितीय चरणमें 'सति-असि नारी' पदके द्वारा दम्पतिकी महिमाकी गम्भीरता पराकाष्ठाको पहुॅंचा दी गई है। भगवान् शिवके लिये 'रघुपति-व्रत-धारी' विशेषण ही उनके व्रतकी महत्ताको प्रकट कर रहा है, क्योंकि संसारमें सब धर्मोंका सार, सब तत्त्वोंका निचोड़ भगवत्प्रेम ही निश्चित किया गया है। भगवान् परब्रह्ममें दृढ़ निष्ठाका हो जाना ही परम् विशिष्ट धर्म है और भगवान् शिवने तो अपने अनुभवसे इसीको सार समझकर सम्पूर्ण जगतको नि:सार निश्चित कर लिया था। जैसे-----------
"उमा कहौं मैं अनुभव अपना।
सत हरिभजन जगत सब सपना।।"

🔱🌹🌺 #अब चौपाईके दूसरे चरण पर दृष्टिपात करें---
'बिनु अघ तजी सती असि नारी।'
इस पदमें 'अघ' शब्द आया है। अघ और अपराधमें महान् अन्तर है। अघ उस दुष्कर्मको कहते हैं जो वेदादिद्वारा निषिद्ध होनेपर भी जान-बूझकर अपनी वासनानुसार किये जाते हैं। अतः वह क्षम्य कभी नहीं हो सकते, उनका फल अवश्यमेव भोगना पड़ता है। परन्तु 'अपराध' चूकको कहते हैं, जो सदैव क्षम्य होती है, क्योंकि वह किसी पापबुद्धि या कुवासनाके कारण न होकर भूलसे की जाती है।
#माता सतीने जो सीताका वेष धारण किया था उसमें कदापि कोई कुवासना न थी। उसका उद्देश्य तो केवल यही जाॅंच करनेका था कि श्रीरघुनाथजी सचमुच ही सच्चिदानन्द ब्रह्मके अवतार हैं अथवा राजपुत्र हैं। केवल भगवत्स्वरूपके बोधार्थ सीताका वेष धारण करना 'अघ' नहीं कहा जा सकता। और नारीका त्याग केवल अघके ही कारण हो सकता है। परन्तु केवल अपराध हो जानेपर, जो क्षम्य भी हो सकता है, भगवान् शिवने उसे क्षमा न कर उपासनामें विरोध पड़नेके भयसे त्याग दिया। भगवान् शिवकी इस रघुपतिव्रतनिष्ठाको कोटि-कोटि दण्डवत् प्रणाम् है।

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०७/०८/२०२६

🌺मेरे स्वयं के विचार 🌺       =========================       🌹🌺 #अवसाद अर्थात् (Depression) कोई भगवान् के द्वारा दिया गय...
02/08/2026

🌺मेरे स्वयं के विचार 🌺
=========================
🌹🌺 #अवसाद अर्थात् (Depression) कोई भगवान् के द्वारा दिया गया रोग नहीं है, यह आपके जीवनमें उपलब्ध उन घटिया, पतित, गलत संगत वाले और अनैतिक लोगोंके द्वारा प्रदान किया गया उपहार है जिनपर आप आँख बंद करके सदैव विश्वास करते हैं।
🌺🌹 is not a disease given by God.
It is often the "gift" left behind by the vile, corrupt, unethical, and toxic people in your life—the very people in whom you placed your blind trust.

The deepest scars are rarely caused by enemies;
they are most often inflicted by those we trusted the most.

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०२/०८/२०२६

🌹एक सच्ची घटना और मेरा चिंतन🌹========================== #भावुक व्यक्ति समझदार होकर भी बेवकूफ इसलिये कहलाया,क्योंकि उसने ...
02/08/2026

🌹एक सच्ची घटना और मेरा चिंतन🌹
==========================
#भावुक व्यक्ति समझदार होकर भी बेवकूफ इसलिये कहलाया,
क्योंकि उसने बुद्धिसे पहले हृदय पर विश्वास किया।
वह जीत सकता था,
पर उसने संबध चुन लिये।
वह छोड़ सकता था पर उसने निभाना चुना।
इस स्वार्थसे भरी हुई दुनियाॅं में
जो मनुष्य बने रहनेकी ज़िद करता है,
दुनियाॅं सबसे पहले
उसीकी बुद्धि पर संदेह करती है।
🌺🌹 sensitive soul is often mistaken for a fool,
not because they lack wisdom,
but because they chose to trust their heart before their mind.

They could have emerged victorious,
yet they chose to preserve their relationships.

They could have walked away,
yet they chose loyalty over convenience.

In a world consumed by selfishness,
the one who stubbornly chooses to remain truly human
is often the first
whose intelligence is questioned.

For kindness is mistaken for weakness,
loyalty for foolishness,
and compassion for a lack of judgment.
Yet, in the end,
it is these very qualities
that define the true greatness of a human being.

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०२/०८/२०२६

🔱सदैव स्मरण रखने योग्य🔱=====================🌹 #संसारके किसी भी व्यक्तिको किसी भी परिस्थितिमें अपनी मर्यादाको आत्महत्याकी...
31/07/2026

🔱सदैव स्मरण रखने योग्य🔱
=====================
🌹 #संसारके किसी भी व्यक्तिको किसी भी परिस्थितिमें अपनी मर्यादाको आत्महत्याकी सीमा तक नहीं जाने देना चाहिये।🌹
🌹 no circumstances should a person in this world allow their sense of dignity and self-respect to be pushed to the point of su***de. 🌹

प्रेषक-
आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
३१/०७/२०२६

🔱श्रीशिव🔱============ #कामाख्या  #बगलामुखी  #छिन्नमस्ता 🌺 #आज पता नहीं क्यों मैं भगवान् शिवका ध्यान आते ही अपना लोभ-संवर...
31/07/2026

🔱श्रीशिव🔱
============
#कामाख्या
#बगलामुखी
#छिन्नमस्ता
🌺 #आज पता नहीं क्यों मैं भगवान् शिवका ध्यान आते ही अपना लोभ-संवरण नहीं कर सका। अमृतमय तत्त्वके आस्वादनकी स्पृहाका परिहार न कर सका। मैं समझता हूॅं कि यह स्पृहा, यह लोभ, यह पङ्गुके गिरिलंघनकी कामनासे भी अधिक असंभव है।
'यं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि।'
🌺 #वेद भी जिसके तत्त्वका निरूपण करनेमें चकित है, मैं विषयासक्त मूढ़ मनुष्य उसीके तात्विक रुपको जानना चाहता हूॅं। यह सत्य ही मेरी धृष्टता है, जानता हूॅं यह अमार्जनीय (अक्षन्तव्य) अपराध है। हृदय थर-थर कांप रहा है। भय और उद्वेगसे, नहीं-नहीं उल्लास, और आनन्दसे भी।
🌺 #हे देवाधिदेव करुणानिधान ! तुम अपने इस दीन दासके ऊपर एक बार प्रसन्न हो।
भवदुपगमशून्ये मन्मनोदुर्गमध्ये
निवसति भयहीन: कामवैरित्रिपुस्ते।
स यदि तव विजेयस्तूर्णमागच्छ शम्भो
नृपतिरधिमृगव्यं किं न कान्तारमेति।।

🌺 #हे शंकर ! मेरे मनके किलेमें तुम्हारा प्रवेश नहीं है, इसीसे तुम्हारा शत्रु काम निर्भय होकर वहाॅं बस रहा है। यदि उसे जीतनेकी इच्छा हो तो यहाॅं तुरन्त चले आओ। क्या शिकारके लिये राजा पशुओंसे भरे जंगलमें नहीं जाता ?'

🌺 #हे शिव ! तुम्हारे प्रसादसे पवित्र स्पर्शमणिकी प्रभासे मेरी हृदय-गुहा आलोकित हो, जिससे मैं उस आलोकमें तुम्हारे दुर्ज्ञेय तत्त्वको क्षणमात्रके लिये भी अणुमात्र अवलोकनकर कृतार्थ हो जाऊॅं। हे महेश्वर ! महाकवि कहते हैं----'महेश्वरस्त्र्यम्बक एव नापर:'। महान् ईश्वर परमेश्वर तुम्हीं हो; परमेश्वरका तत्व ही तुम्हारा तत्व है।

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
३१/०७/२०२६

🔱महायोगिश्वर भगवान् शंकर भाग-०१🔱============================ #माॅं कामाख्या #माॅं बगलामुखी #माॅं भुवनेश्वरी 🌹🌺 #जगत्पति,...
31/07/2026

🔱महायोगिश्वर भगवान् शंकर भाग-०१🔱
============================
#माॅं कामाख्या
#माॅं बगलामुखी
#माॅं भुवनेश्वरी
🌹🌺 #जगत्पति, जगद्गुरु, त्रिपुरारी (अर्थात् काम, क्रोध एवं अहंकारूपी तीन नगरोंका ध्वंस करनेवाले), उमाशंकर (उमापति), ज्योतिर्मय, चिदानन्दमय, योगेश्वर, ज्ञान-निधान भगवान् शिव जो महादेव, शंकर, हर, शम्भू, सदाशिव, रुद्र, शूलपाणि, भैरव, उमा-महेश्वर, नीलकण्ठ, त्रिलोचन (त्रिनेत्र), त्र्यम्बक, विश्वनाथ, चन्द्रशेखर, अर्धनारीश्वर, महेश्वर, नीललोहित, परमशिव, दिगम्बर, दक्षिणामूर्ति, इत्यादि नामोंसे पुकारे जाते हैं, मैं साञ्जलि प्रणाम् करता हूॅं।
🌹🌺 #अहा ! कैसे दयामय हैं ! कैसे प्रेमी और कृपासागर हैं !! वे अपने भक्तोंके मुण्डोंकी मालाको गलेमें धारण करते हैं। वे वैराग्य, करुणा, प्रेम एवं ज्ञानकी मूर्ति हैं। उन्हें संहार-रूप कहना मूर्खता है। वे तो वास्तवमें नवजीवनके दाता हैं। जब-जब हमारा ये पांचभौतिक देह जरा, व्याधि अथवा अन्य कारणोंसे इसी जन्ममें अधिक विकासके अयोग्य हो जाता है तब वे इस निकम्मे अस्थिपंजरको छीनकर हमें दूसरा नया, निरामय एवं बलवान् शरीर देते हैं जिसके द्वारा हम अधिक शीघ्र अपना रास्ता तैयार कर सकते हैं। वे अपनी सारी सन्ततिको अपने चरण-पंकजकी ओर शीघ्र ले जाना चाहते हैं। वे उन्हें शीघ्र ही अपना तेजोमय धाम शिवपद देना चाहते हैं।
शेष.......................................................।

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
३१/०७/२०२६

🌹एक सच्ची घटना और मेरा चिंतन🌹----------------------------------------------------🔥🌹🌺 #एक ऐसा व्यक्ति जिसको अपने सम्पूर्ण...
30/07/2026

🌹एक सच्ची घटना और मेरा चिंतन🌹
----------------------------------------------------
🔥🌹🌺 #एक ऐसा व्यक्ति जिसको अपने सम्पूर्ण जीवनमें स्नेह, प्रेम, प्यार और सहानुभूति कभी मिली ही नहीं, उसके जीवनमें प्रवेश कर कभी उसे सुधारने और नूतन पथ दिखाकर मार्गदर्शक बननेका प्रयास मत करो, वो कभी इसका सच्चा अधिकारी ही नहीं था। उसका क्रोध, कड़वाहट, अत्यधिक झूठ बोलना, गलत संगत में पड़कर अनैतिक जीवनशैली अपनाना, अपने उत्तरदायित्वोंसे भागना और घटिया सोच किसी भी प्रेमको उत्पन्न होनेके पहले ही उसे समाधिस्थ कर देती है। आप जिसे सुधारनेमें लगे हो, वह सही अर्थोमें एक बहुत गहरा गर्त है जो आपको भी अपने साथ नीचे गिरा देगा। ऐसे लोगोंका अकेलापन उनके अपने ही किये हुए कर्मोंके परिणाम हैं। प्रेम, प्यार, मोहब्बत, स्नेह और आदर उन लोगोंके लिये है जो इनके सच्चे अधिकारी हैं। उन लोगोंके लिये नहीं, जो बस सहानुभूतिको अधिकार समझकर अपनी गंदी और अनैतिक जीवनशैलीसे दूसरों का जीवन नष्ट-भ्रष्ट कर देते हैं।🔥🌹
A True Incident: My Reflections
------------------------------------------------------
"Never assume that your love, compassion, or guidance alone can transform a person who has spent a lifetime without truly understanding the meaning of affection, trust, respect, or genuine human connection. A heart that has long been surrendered to anger, resentment, deception, moral decay, and irresponsibility often loses the ability to recognize the very light that seeks to illuminate it.

Bitterness silences gratitude. Habitual falsehood destroys trust. Corrupt company erodes character. An immoral way of life extinguishes every possibility of love before it can ever blossom. Such a person may not merely refuse your kindness—they may ultimately consume it.

Be careful not to mistake endless sympathy for wisdom. Some souls become so deeply attached to their own darkness that every hand extended to lift them becomes another hand they pull down. The abyss does not always ask for company; sometimes, it quietly creates it.

Loneliness is not always an injustice inflicted by the world. More often than not, it is the silent harvest of one's own thoughts, choices, actions, and character.

Love, respect, kindness, and compassion are among the noblest gifts that one human being can offer another. They should be entrusted to those who honour them with integrity and gratitude—not to those who mistake compassion for weakness, kindness for entitlement, and whose persistent dishonesty and immoral conduct leave broken lives and wounded hearts in their wake.

True wisdom lies not only in knowing whom to embrace, but also in recognizing whom to leave behind. For preserving your own peace, dignity, and moral integrity is not an act of selfishness—it is an act of responsibility."

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
३०/०७/२०२६

🌹Guru Purnima🌹--------------------------------🌺  Guru is not merely a physical being; therefore, the Guru is never subje...
30/07/2026

🌹Guru Purnima🌹
--------------------------------
🌺 Guru is not merely a physical being; therefore, the Guru is never subject to death. The Guru is eternally one with the Supreme Existence and, hence, is immortal. This is the Supreme Reality—the eternal principle known as Guru Tattva.

🌺 scriptures proclaim that unwavering faith, profound reverence, complete trust, and unflinching devotion to a true and scripturally authentic Guru are alone sufficient to attain the highest spiritual realization and every blessing that is truly worth attaining.

🌺 the deepest humility and boundless reverence, I offer my Sashtanga Dandavat Pranam—my complete prostrations—and my heartfelt gratitude at the sacred feet of all the saints, sages, realized masters, yogis, siddhas, divine deities, and the Supreme Divine Consciousness whose grace has illumined my spiritual journey. I also bow with profound gratitude before all visible and invisible manifestations of Divine Consciousness, whose silent presence, guidance, and blessings continue to enrich my life.

🌹 leaf of a tree that selflessly offers shade is worthy of honour, for true greatness is revealed through silent service. 🌹

🔥 soul can ever repay the immeasurable debt of a mother's unconditional love, boundless affection, and selfless sacrifice. 🔥

🌺 gratitude remain the foundation of our lives, humility our greatest ornament, and Divine Grace our eternal refuge.

Acharya Pawan Kumar Ojha
Sri Sri Paramhans Kanan Ashram
Goh, A-Bad. Bihar, Bharat
२९/07/2026

🔥गुरु पूर्णिमा🔥--------------------------🌺गुरु शिष्य का परम् दिव्य दिवस है।🌺=========================== #ॐ ऐं गुरवे नमः।...
30/07/2026

🔥गुरु पूर्णिमा🔥
--------------------------
🌺गुरु शिष्य का परम् दिव्य दिवस है।🌺
===========================
#ॐ ऐं गुरवे नमः।
#ॐ ऐं परम् गुरवे नमः।
#ॐ ऐं परापर गुरवे नमः।
#ॐ ऐं परमेष्ठि गुरवे नमः।

🌺 #गुरु शरीरी नही है, इसलिये गुरु की कभी मृत्यु भी नहीं होती। गुरु तो अस्तित्व में समाहित है अतः वह अमर है। यही परम् तत्त्व है और गुरु तत्त्व भी।
#ग्रंथानुमोदित एवं सच्चे गुरु के प्रति अखण्ड आस्था, श्रद्धा, विश्वास, और निष्ठा रखने मात्रसे सबकुछ पाया जा सकता है।
🔥🌹🌺 #मैं जिन साधु-संत, महात्माओं, योगियों, सिद्धों, देवी-देवताओं और परम् दिव्य चेयनाओंके सम्पर्कमें रहता हूॅं उन्हें एवं अन्य दृश्य-अदृश्य सभी चेतनाओं के श्रीचरणोंमें साष्टांग दंडवत् प्रणाम् और आभार व्यक्त करता हूॅं।
🔱गुरु समान दाता नहीं, याचक शिष्य समान।
तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान।।🔱

🌹 #जो वृक्ष छाया देता है,
उसकी एक-एक पत्तियाॅं आदरणीय होती है।🌹
🔥 #ममता की घाट पर सदैव कोई टीक नहीं सकता।🔥

आचार्य पवन कुमार ओझा।
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
२९/०७/२०२६
१९९३ २०२६

Address

श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम, अलहन परासी, पो./सिंघाडी, थाना-गोह, जिला-औरंगाबाद, बिहार-, भारत ।
Goh
८२४२०३

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when साधन-समर Acharya P K Ojha posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share