साधन-समर-आचार्य पवन कुमार ओझा

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साधन-समर-आचार्य पवन कुमार ओझा Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from साधन-समर-आचार्य पवन कुमार ओझा, श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम, अलहन परासी, पो./सिंघाडी, थाना-गोह, जिला-औरंगाबाद, बिहार-, भारत ।, Goh.

[शाक्त, शैव और वैष्णवकी त्रिपथगा]
🌹भक्ति, योग और तन्त्र🌹
[This page is devoted to Divine and insightful interpretation of Ancient Vedic Science, with emphasis on the key principles and philosophies of Sanatani Sanskriti, as in our Eternal Scriptures.]

🌺मैं, महिषी और मेरी माँ तारा: सूक्ष्म जगत का आँखों देखा सत्य और भविष्य की चेतावनी🌺--------------------------------------...
07/10/2026

🌺मैं, महिषी और मेरी माँ तारा:
सूक्ष्म जगत का आँखों देखा सत्य और भविष्य की चेतावनी🌺
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🌺🌹१९९७-९८ का वह वर्ष जब मुझे प्रातः स्मरणीय, परम् श्रद्धेय, परम् पूज्य गुरुदेव, भगवान् 'ठाकुर' श्रीश्रीरामकृष्ण परमहंस ने अद्भुत और अलौकिक कृपासे इस अबोध और अनभिज्ञ ब्राह्मण बालक को तन्त्रमें दीक्षित कर अनुग्रहित किया था। वो समस्त प्रक्रियाएं सूक्ष्म रूप में स्वत: घटित हुई थी, ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूॅं कि इससे संबंधित चिंतन न तो मैंने कभी किया था और न ही कभी चाहा था। उस समय मैं इस विद्या को जानता था, कि स्थूल, सूक्ष्म, कारण और महाकारण भी है अथवा तो होता है। परन्तु मैं भी उसके लायक हूॅं, ये मुझे पता नहीं था।
🌺🌹 #इस सृष्टिमें अकारण तो कुछ घटित होता नहीं है, अतः मैं एक अद्भुत और अलौकिक और रहस्यमय घटना की चर्चा कर ही देता हूॅं, क्योंकि उसके बिना उपरोक्त और अन्य सभी आध्यात्मिक घटनाओंका आधार ही नहीं होगा। चूंकि मेरे आदरणीय पिताश्री बिहार सरकार में एक अधिकारीके पद पर रह चुके हैं। १९९१-९३ में उनके साथ कुछ दिन रहनेका अवसर प्राप्त हुआ और उसी समय रहस्मय ढंग से मुझे 'अष्टभुजी' माता दुर्गाकी एक अद्भुत छवि प्राप्त हुई जो कमल पुष्पोंसे वृताकार होकर माता को आवेष्टित की हुई थी। फिर अचानक मुझे आन्तरिक प्रेरणा हुई और मैंनें उनपर सर्वस्व न्योछावर कर माॅं एवं गुरु, दोनों रूपोंमें उन्हें स्वीकार कर लिया। आगे चलकर इनकी अलौकिक कृपासे देवी कवच आदि और सिद्ध-कुंजिका मेरे नियंत्रण में हो गया, इसका रहस्योद्घाटन २००२ में तब हुआ जब मेरा सामना पटना में एक अघोरी तांत्रिक से हुआ। इससे संबंधित विस्तृत चर्चा मैं बाद में फिर कभी करूंगा।
२००२ में मैं पहली बार पश्चिम बंगालके वीरभूम जिले में स्थित 'तारापीठ' गया था। उसके बाद से ही मेरे विशुद्ध अन्तःकरणमें एक विचार प्रवाहमान था कि मुझे सहरसा, बिहार में स्थित 'महिषी' शक्तिपीठ भी अवश्य जाना चाहिये, और वो चिर प्रतिक्षित इच्छा पूरी हुई ०१/१०/२०२६ को जब मेरे जानेके लिये सारे मार्ग प्रशस्त कर दिये गये स्वयं माॅं ताराके द्वारा।
३०/०९/२०२६ को रात्रिमें पटना से ही मेरी गाड़ी खुली और प्रातःकाल वहाॅं पहुॅंचा। फिर स्नानादि से निवृत होकर मैं माॅं ताराके मंदिर परिसर में कदम रखा। जैसा कि मैं सदैव करता हूॅं, पहले चारों तरफ से मंदिर का अवलोकन किया, फिर गर्भगृह में प्रवेश किया, माॅं के विग्रह आदि पर दृष्टिपात किया और फिर बाहर आकर बलि स्थान को देखा। तत्पश्चात् गर्भगृहमें स्थित माॅं तारा, एकजटा, नील सरस्वती और भूतभावन भगवान् शिवका ही एक रूप 'अक्षोभ्य' (भैरव) विग्रहके ठीक सामने लगभग ५० फीट की दूरी पर अपना आसन ग्रहण लिया।
🌺🌹 #मैं न्यास आदि करके माॅं ताराकी अद्भुत और अलौकिक ऊर्जाके साथ स्वयंको स्थापित करनेवाला ही था कि, अचानक मेरा शरीर शीतल हो गया और मेरा भौतिक शरीर असहाय, अक्षम और निष्प्राण हो गया। अब मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि, ये सब हुआ कैसे ? और इसका कारण क्या है ? फिर मैंने 'ठाकुर' श्रीश्रीरामकृष्ण परमहंस देव का स्मरण किया, और कहा कि ये सब क्या हो रहा है ? तब माॅं तारा नें आकाशवाणी की, कि "अपनी शक्तियों का प्रयोग यहाॅं मत करो।" मैंने कहा कि माॅं तुम अच्छी तरह से जानती हो कि ये सभी शक्तियाॅं जिनमें कुछ नकारात्मक ऊर्जा वाली भी हैं मेरी सुरक्षा व्यवस्था में रहती हैं और तुमने हीं अपने अन्य रूपों में आकर इन्हें मुझको प्रदान भी किया है। फिर माॅं ने कहा कि "मैं तुम्हारी परीक्षा लेकर ये देखना चाहती थी, कि तुमको मृत्यु भयभीत करती है या नहीं, क्योंकि आनेवाले समय में तुम्हें ऐसी अन्य परिस्थितियोंका सामना करना पड़ सकता है।"
🌺🌹 #फिर माॅं के समक्ष मैंने उससे कहा, कि क्या तुम्हारे रहते ब्रह्माण्डकी कोई भी शक्ति मुझे भयभीत कर सकती है भला! फिर माॅं ने कहा कि आनेवाला समय बहुत ही भयावह है पुत्र, अतः तुमको मैं पहले से और सबल एवं शक्तिशाली बनाना चाहती हूॅं। आचार, विचार, संस्कार और हर प्रकार से नैतिक मूल्योंका पतन हो जायेगा। लोग काम और अर्थ अर्थात् भोग-विलास में आकण्ठ डूब जायेंगे, अच्छे-अच्छे ज्ञानी, भक्त, साधु-संत, महात्मा, विद्वान आदि अपने मूल सिद्धांतों से भटककर कलियुगी प्रवाहमें बह जायेंगे। अतः ब्रह्मचर्य व्रतका कठोरताके साथ पालन करो। मैं सदैव तुम्हारे साथ थी और रहुॅंगी। मैं किसी भी परिस्थितिमें तुम्हें नहीं छोड़ सकती।"
🌺🌹 #कुछ और गोपनीय संवाद हुआ, जिसका संबंध भारतवर्ष और सम्पूर्ण विश्वसे है, जिसे मैं व्यक्त नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसा करनेसे सृष्टि और प्रकृतिके योजनाओं में हस्तक्षेप होगा जो मैं नहीं कर सकता।
अब मुझे और लिखने की अनुमति नहीं हो रही है, अतः मैं इस संवाद को यहाॅं विराम देता हूॅं।
आप सभीका परम् मंगल हो!
जय माॅं तारा।
जय माॅं कामाख्या।

तुम्हारा अबोध बालक-
आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०७/१०/२०२६

🌹संसार की प्रशंसा:- विग्रह पर चढ़ा क्षणिक पुष्प🌹----------------------------------------- #संसार यदि तुम्हें अपने मस्तक ...
05/10/2026

🌹संसार की प्रशंसा:-
विग्रह पर चढ़ा क्षणिक पुष्प🌹
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#संसार यदि तुम्हें अपने मस्तक पर बिठाने लगे अथवा विराजमान ही कर दे, तो वैसी स्थिति में सदैव सावधान रहना!
• #जिस प्रकार किसी मंदिर में भगवान के विग्रह पर चढ़ा हुआ पत्र, पुष्प, जल, फल आदि कुछ नियत समय के पश्चात् या तो मुरझाकर गिर जाते हैं या फिर उन्हें वहाँ से हटा दिया जाता है।
• #ठीक उसी प्रकार इस संसार में मिलने वाला मान-सम्मान भी क्षणभंगुर है, क्योंकि यह इस संसार का शाश्वत सिद्धांत है। इसलिए यश और कीर्ति के अहंकार से सदैव सावधान रहें।

🌹व्यक्ति से बड़ा राष्ट्र:-
अकाट्य सत्य🌹
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#संसार का कोई भी व्यक्ति—वह चाहे धार्मिक हो, आध्यात्मिक हो, साधु, संत, महात्मा, सिद्ध या योगी ही क्यों न हो... उसकी स्थिति और अवस्था जो भी हो, वह अपने राष्ट्र से बड़ा कभी नहीं हो सकता, कभी नही!

🌹 #भौतिक संसार में लोकप्रियता क्षणभंगुर (Temporary) है।

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०५/१०/२०२६

🌹"The Ultimate Success: Realizing the Image of God Within"🌹-----------------------------------"Ask yourself what is the ...
28/09/2026

🌹"The Ultimate Success: Realizing the Image of God Within"🌹
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"Ask yourself what is the purpose of your life. You have been made in the image of God, that is your real self. Realizing the image of God within you is the ultimate success----infinite joy, fulfilment of every desire, victory over all difficulties of the body and incursions of the world."
--------Paramahansa Yogananda

🌹🌺 is the fourth anthology of talks and essays by Paramahansa Yogananda-----a sequel to Man's Eternal Quest (1975), The Divine Romance (1986), Journey to Self Realization (1997), and Solving The Mystery of Life (2025). The wisdom in these volumes is not the studied learning of a scholar, it is the empirical testimony of a dynamic spiritual personage whose life was filled with inner joy and outer accomplishment, a world teacher who lived what he taught, a Premavatar whose sole desire was to share God's wisdom and love with all.🌹🌺

Shared & Commended By:
Acharya Pawan Kumar Ojha
🏡 Sri Sri Paramahansa Kanan Ashram
📍Goh, Aurangabad, Bihar, Bharatvarsh

Reflection: Have you ever paused to ask yourself the true purpose of your life? Share your thoughts and spiritual experiences in the comments below.
28/09/2026
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                        🌺 #अथर्वा प्राणसूत्र: पराविज्ञान और माॅं बगलामुखी का रहस्य"================================🌺 #अथ...
11/09/2026


🌺 #अथर्वा प्राणसूत्र: पराविज्ञान और माॅं बगलामुखी का रहस्य"
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🌺 #अथर्ववेद से तन्त्र तक: 'वल्गा' से 'बगलामुखी' बनने का विज्ञान"
🌺 #अथर्वा सूत्र: क्या मनुष्यों में भी होता है Wirless System वायरलेस सिस्टम ?"
🌺 #अथर्वा: ब्रह्माण्डीय आकर्षण का प्राणसूत्र"

🌹🌺 #प्रत्येक प्राणी के शरीर में 'अथर्वा' नामक एक 'प्राणसूत्र' निरंतर प्रवाहित होता रहता है। सूक्ष्म होने के कारण हम इसे स्थूल दृष्टि से देखने में असमर्थ रहते हैं, परंतु यह एक प्रकार की Wireless Telegraphy (वायरलेस-टेलीग्राफी) है।
📡 क्या है अथर्वा सूत्र का विज्ञान ?
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🌺 #जब 500 या 10,000 मील की दूरी पर रहने वाले हमारे किसी आत्मीय के दुःख से हमारा चित्त अचानक व्याकुल हो जाता है, तो हमें संदेश पहुँचाने वाली उस अदृश्य 'परोक्ष-शक्ति' का नाम ही 'अथर्वा' है। इस महाशक्ति-सूत्र के विज्ञान से हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसी व्यक्ति को भी आकर्षित किया जा सकता है।
🐕 जीव-जंतुओं में इसकी उपस्थिति
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🌺 #जिस अथर्वा-सूत्र को हम सामान्य मनुष्य नहीं जान पाते, उसे श्वान (कुत्ता) और काक (कौआ) तुरंत पहचान लेते हैं। कुत्ता इसी शक्ति-प्रवाह से पृथ्वी को सूंघता हुआ आते हुए चोर का पता लगा लेता है, क्योंकि चोर जिस मार्ग से जाता है, उस मार्ग की मिट्टी, वस्त्र, नाखून या केश में उसका प्राण 'वासना रूप' से अंकित हो जाता है।
📿 'वल्गामुखी' से 'बगलामुखी' का रहस्य
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🌺 #इन सूक्ष्म आधारों पर उस व्यक्ति पर मनचाहा प्रयोग किया जा सकता है। अथर्वसूत्र-रूपा इसी महाशक्ति का वैदिक नाम 'बल्गामुखी' (वल्गामुखी) है। निरुक्त के अनुसार, जिस प्रकार 'हिंस' शब्द अक्षरों के बदलने से 'सिंह' बन जाता है, उसी प्रकार वेदों का 'वल्गा' शब्द तंत्र (आगम) में आकर 'बगला' रूप में परिणत हो गया। निगम-शास्त्र की 'वल्गा' ही आगम की 'बगलामुखी' हैं! इस कृत्या महाशक्ति की साधना करने वाला साधक शत्रुओं को नियंत्रित कर सकता है।
#सावधान !
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🌺 #ऐसी दिव्य शक्तियों का प्रयोग कभी भी किसी भी परिस्थिति में अपने निहित स्वार्थ के लिए नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से समस्त भूमंडल में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। यह उस महाशक्ति का दुरुपयोग है, जो मात्र जगत् के कल्याण के लिए है।

📝आचार्य पवन कुमार ओझा
🏡श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
📍गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष
११/०९/२०२६

💬 जिज्ञासा: क्या आपने कभी इतनी दूरी पर बैठे किसी प्रियजन के संकट का पहले से अनुभव किया है? तंत्र और विज्ञान के इस अद्भुत मेल पर अपने विचार कमेंट बॉक्स में साझा करें। 👇

१.  #तीर्थ या पर्यटन: सुगमता में खोती दिव्यता।२.  #सनातन संस्कृति की रीढ़: हमारे दिव्य तीर्थस्थल।३.  #तीर्थस्थलों का आधु...
04/09/2026

१. #तीर्थ या पर्यटन: सुगमता में खोती दिव्यता।
२. #सनातन संस्कृति की रीढ़: हमारे दिव्य तीर्थस्थल।
३. #तीर्थस्थलों का आधुनिकीकरण: विकास या पतन ?
४. #मर्यादा विहीन होते हमारे महातीर्थ।

🌺 #अनादिकालसे धार्मिक और आध्यात्मिक तीर्थस्थल जो हम सभी सनातनी भारतीयोंके लिये परम् दिव्य एवं ज्ञान-विज्ञानका प्रेरणास्रोत रहा है, आज अर्थागम तथा पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृतिके वशीभूत होकर पतनकी ओर अग्रसर है। यह सचल एवं जीवंत रहकर 'वैदिक विज्ञान और भारतीय सनातनी हिन्दूधर्म एवं संस्कृति' की सदैव सुरक्षा करते रहा है। जब से भारतीयों ने अर्थ और काम को केंद्र में रहकर सभी तीर्थस्थलोंका आधुनिकीकरण, सौंदर्यीकरण तथा वहाॅं तक पहुंचने के मार्गको सुगम बनाया है तभी से इनकी दिव्यता और अलौकिक भव्यता नष्ट-भ्रष्ट होने लगी।
🌺 #जो तीर्थ कभी तपस्या, साधना, आराधना, जप, ध्यान आदि धार्मिक और आध्यात्मिक प्रकल्पोंके लिये जाना जाता था, वो आज पर्यटन, भौतिक सुखों, और भोग-विलासोंका प्रासादिक गृह बनकर रह गया है।
🌺 #तीर्थ, महातीर्थ, शक्तिपीठ, महाशक्ति-पीठ, सिद्धपीठ और अन्य परम् दिव्य चेतनाओंसे ओतप्रोत, दिव्य और भव्य हमारे तीर्थस्थल जबतक दुर्गम थे, तभीतक इनकी भव्यता और दिव्यता थी। जबसे इनको सुगम, सरल, और आधुनिक सुख-सुविधाओं सुसज्जित किया गया तबसे तीर्थ पर्यटन स्थल बनकर रह गया।
🌺 #हमारे भारतवर्षके सभी तीर्थस्थल 'वैदिक विज्ञान और भारतीय सनातनी हिन्दूधर्म एवं संस्कृति' के रीढ़ हैं, जीवन हैं, संस्कार हैं, संस्कृति हैं, आचरण हैं। सम्पूर्ण 'भारतीय सनातनी हिन्दूधर्म एवं संस्कृति' में तीर्थस्थलोंका कितना महत्व है इसका अनुभव आप इसी से कर सकते हैं कि एक तीर्थ गुरु है, एक तीर्थ राजा है और एक तीर्थ समस्त तीर्थोंका प्राण है। तीर्थोंके बिना तो भारतवर्षका कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है।
🌺 #वैदिक विज्ञान और भारतीय सनातनी हिन्दूधर्म एवं संस्कृतिको' सुरक्षित रखना है तो परम् दिव्य तीर्थस्थलोंको परम् पवित्र और पूजनीय मानकर इनकी सभी मर्यादाओंको सम्पूर्णताके साथ स्वीकार करना होगा।

📝आचार्य पवन कुमार ओझा
🏡श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
📍गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०४/०९/२०२६
💬 वैचारिक मंथन: क्या आप इस विचार से सहमत हैं कि आधुनिक सुख-सुविधाओं ने तीर्थों की आध्यात्मिक चेतना को नुकसान पहुँचाया है? अपनी गरिमापूर्ण राय कमेंट में अवश्य दें। 👇

🔱होनी और मानवीय कर्तव्य🔱--------------------------------------------🌹🌺 #जो होना है वो तो होकर ही रहेगा, अतः मनुष्य का कर...
02/09/2026

🔱होनी और मानवीय कर्तव्य🔱
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🌹🌺 #जो होना है वो तो होकर ही रहेगा,
अतः मनुष्य का कर्तव्य है
कि वर्तमान की झोली में अपना उपहार देकर आगे बढ़ जाय।🌹🌺

[What is meant to happen shall inevitably happen.
Therefore, one’s duty is to offer the gift of one’s finest efforts to the present moment and keep moving forward.]

💭 आपका चिंतन: क्या हम सचमुच भविष्य की चिंता में अपना आज (वर्तमान) खो रहे हैं? अपने विचार कमेंट बॉक्स में साझा करें। 👇

आचार्य पवन कुमार ओझा
श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम
गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
०२/०९/२०२६

🌍 महासागर के तट पर प्यासा भारत: पाश्चात्य अंधी दौड़ और खोती मर्यादाएं 🌍=====================यह इस देश का बहुत बड़ा दुर्भ...
30/08/2026

🌍 महासागर के तट पर प्यासा भारत: पाश्चात्य अंधी दौड़ और खोती मर्यादाएं 🌍
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यह इस देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है...जिस 'वैदिक विज्ञान और भारतीय सनातनी हिंदू धर्म एवं संस्कृति' ने अपनी चैतन्यता और आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा सदैव सम्पूर्ण विश्व को अपनी ओर आकर्षित किया, जिसके अद्भुत एवं अलौकिक ज्ञान ने संसार के प्रतिभावानों को इस भारतभूमि पर पधारने और यहाँ के आदर्शों को आत्मसात करने के लिए विवश किया... आज यहाँ के लोग ही अपनी इस अमूल्य धरोहर से दूर होते जा रहे हैं।
🌊 महासागर के पास रहकर भी प्यासे!
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• जैसे महासागर के पास रहने वाले भी प्यासे रह जाते हैं, ठीक उसी तरह आज भारत की आधुनिक पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता और भौतिकवादी संस्कृति के पीछे अंधी होकर भागी जा रही है।
• हमारी सनातनी संस्कृति में मर्यादा, आचरण, व्यवहार और अनुशासन को जीवन का आधार माना गया है। लेकिन आधुनिक स्वच्छंदता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की आड़ में आज अनुशासन और मर्यादा वाली बातें कुछ लोगों को बंधन या शोषण लगने लगी हैं।
⚠️ स्वतंत्रता बनाम स्वच्छंदता की विडंबना
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जब समाज में मर्यादा और अनुशासन की सीमाओं को पूरी तरह लांघ दिया जाता है, तब समाज में अभद्रता और अपराध जन्म लेते हैं। और विडंबना यह है कि जब कोई संकट या अभद्रता सामने आती है, तब समाज को पुनः उन्हीं मर्यादाओं की याद आती है। यह सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए एक अत्यंत दु:खद और विचारणीय स्थिति है।
हे भगवान्! सम्पूर्ण समाज को सद्बुद्धि प्रदान करो कि हम अपनी जड़ों को पहचानें।

📝 लेखक: आचार्य पवन कुमार ओझा
🚩 मंच: साधन-समर-आचार्य पवन कुमार ओझा
🏡 आश्रम: श्रीश्रीपरमहंस कानन आश्रम,
📍गोह, औरंगाबाद, बिहार, भारतवर्ष।
३०/०८/२०२६
💬 आपके विचार: स्वतंत्रता और मर्यादा के इस संतुलन पर आपकी क्या राय है? क्या आधुनिकता की दौड़ में हम सचमुच अपनी जड़ों को खो रहे हैं? कमेंट में अपनी गरिमापूर्ण राय साझा करें। 👇

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