15/08/2026
तेरा वैभव अमर रहे मां
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स्वतंत्रता दिवस: १५ अगस्त २०२६
सम्माननीय गुरुजन, मातृशक्ति, देश के वीर जवानो, युवा साथियो, प्यारे बच्चो और प्रिय देशवासियो—
आप सभी को ८०वें स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत मंगलकामनाएँ!
आज का दिन केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान गाने और मिठाई बाँटने का ही नहीं है; अपितु उत्साह के साथ-साथ पुनः यह संकल्प लेने का दिन है कि हम अपने देश के खोए हुए गौरव, वैभव, समृद्धि और ज्ञान-विज्ञान को पुनः प्रतिष्ठित करके ही दम लेंगे।
आइए, हम संकल्प लें कि हम न इस जाति के हैं न उस जाति के, न इस भाषा-भाषी के हैं न उस भाषा-भाषी के, न इस प्रांत के हैं न उस प्रांत के, और न ही हम किसी पंथ या संप्रदाय के हैं। हमारी एकमात्र पहचान भारत है, हमारी भाषा भारत है, हमारा पंथ व धर्म भी भारत है। हमारा ईश्वर और अल्लाह भी भारत है। हमारा स्वर्ग और जन्नत भी भारत है। हमारा परमगति और मोक्ष भी भारत है।भारत केवल हमारी मातृभूमि ही नहीं, यह हमारा प्राण है, हमारी आत्मा है और हमारा आराध्य है। यही हमारी पूजा और इबादत है।
१५ अगस्त १९४७ को भारत ने विदेशी शासन की बेड़ियाँ तोड़ दी थीं। हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर हमें राजनीतिक स्वतंत्रता दिलाई। किसी ने हँसते-हँसते फाँसी का फंदा चूमा, किसी ने जेल की कालकोठरी की यातनाएँ सहीं, किसी ने सीने पर गोलियाँ खाईं, तो किसी ने अपना घर-परिवार छोड़कर राष्ट्र को ही अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
उनके अमर बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत की खुली हवा में साँस ले रहे हैं। उन सभी हुतात्माओं को कोटि-कोटि नमन!
आज भारत विश्व-पटल पर तीव्रता से आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और नवाचार सहित अनेक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। हमारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष की असीम गहराइयों को खोज रहे हैं और हमारे युवा पूरे विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
किंतु राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल सुदृढ़ अर्थव्यवस्था या सशक्त सैन्य बल तक सीमित नहीं होती; राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके चरित्रवान नागरिक होते हैं।
यदि नागरिक ईमानदार हैं, तो राष्ट्र सुदृढ़ है।
यदि युवा चरित्रवान हैं, तो राष्ट्र सुरक्षित है।
यदि शिक्षक आदर्शवान हैं, तो राष्ट्र सुशिक्षित है।
यदि नेतृत्व निष्कलंक है, तो लोकतंत्र सशक्त है।
यदि समाज में करुणा है, तो संस्कृति जीवंत है।
अतः आज हमें केवल यह नहीं सोचना है कि— “देश मेरे लिए क्या करेगा?”
अपितु यह सोचना है कि— “मैं देश के लिए क्या-क्या कर सकता हूँ?”
एक सैनिक सीमा पर डटकर देश की रक्षा करता है। एक किसान खेत में पसीना बहाकर अन्न उपजाता है। एक शिक्षक चरित्र-निर्माण कर राष्ट्र का भविष्य गढ़ता है। एक वैज्ञानिक अपने ज्ञान से देश को नई दिशा देता है। एक चिकित्सक जीवन की रक्षा करता है। एक श्रमिक अपने अथक परिश्रम से राष्ट्र की नींव मजबूत करता है।
एक सामान्य नागरिक भी अपने दैनिक जीवन में राष्ट्रसेवा कर सकता है। सबसे बड़ी राष्ट्रसेवा यह है कि,
हम ऐसे श्रेष्ठ नागरिक बनें, जिस पर देश को गर्व हो।
ऐसा आचरण करें, जिससे समाज में शांति, सद्भाव और सुव्यवस्था बनी रहे। ऐसी जीवनशैली अपनाएँ, जिससे भारत शक्तिशाली, संवेदनशील और संस्कारवान बने—जो आधुनिक भी हो और अपनी जड़ों से भी जुड़ा रहे।
इस पावन स्वतंत्रता दिवस पर हम यह व्रत लें कि हम केवल 'हमारा भारत महान' का नारा ही नहीं लगाएंगे, अपितु अपने कर्मों से इसे और अधिक महान, विवेकवान, समर्थवान और आत्मनिर्भर बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।
हमारी मातृभूमि केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं है; यह करोड़ों हृदयों की आशा है, हमारे पूर्वजों के तप और बलिदान की धरोहर है, हमारी संत-परंपरा की जाग्रत चेतना है और हमारे भविष्य की पवित्र ज़िम्मेदारी है। हम इस ज़िम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएँगे। हे मातृभूमि! तेरे लिए —
गगन से तोड़ लाएँगे सितारे भी ॥
सजाएँगे तेरे भाल पे माँ, नया इतिहास रच देंगे,
समर्पण की सलोनी आग में यह शीश धर देंगे।
हथेली पर लिए संकल्प, यह युग-गीत गाएँगे,
सँवारने तिमिर तेरा, गगन से तोड़ लाएँगे सितारे भी!
न रुकना है, न झुकना है, समंदर चीर जाना है,
धरा से चाँद तक भारत की आभा बिछाना है।
हृदय में धड़कती निष्ठा, भुजा में प्राणों का बल है,
हमारे श्वेत कर्मों से सजेगा राष्ट्र का कल है।
असंभव को सुगम करके, नया पथ हम बनाएँगे,
सँवारने तिमिर तेरा, गगन से तोड़ लाएँगे सितारे भी!
चरित्रों की सुचिता से तेरी यह शान चमकेगी,
तिरंगे के सुनहरे रूप में पहचान दमकेगी।
रहे युग-युग तेरा वैभव, यह वंदन प्राण-वीणा का,
सफ़ल कर देंगे हर सपना, शहीदों की साधना का।
चरण में मातृभू के हम मुकुट ऐसा सजाएँगे,
सँवारने तिमिर तेरा, गगन से तोड़ लाएँगे सितारे भी!
पुनश्च नमन, जय भारत!
वंदे मातरम्!
जय हिन्द!
"हम रहें या न रहें, तेरा वैभव अमर रहे माँ!"
शुभं भवतु मंगलं भवतु
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श्री कबीर ज्ञान मंदिर
गिरिडीह झारखंड
दिनांक 15 अगस्त 2026