Vrindavan dham ram mandir

Vrindavan dham ram mandir Hare Krishna! Welcome to the official page of the Vrindavan Dham Ram Mandir. We are in Vrindavan garden, Sahibabad.

HARE KRISHNA HARE KRISHNA KRISHNA HARE HARE
HARE RAMA HARE RAMA RAMA RAMA HARE HARE

02/06/2026

हमारी माई श्यामा जू को राज 🌸👑 जाके अधीन सदा ही सांवरो, या ब्रज को सरताज… हमारी माई श्यामा जू को राज। 🌸 ज्यादा कुछ तुमसे ना चाहूँ, तेरे चरणों की धूल बना लो राधे… बस इतना वरदान मिल जाए, कि जीवन तेरे नाम हो जाए। ✨ Even Krishna, the crown jewel of Vrindavan, finds his greatest joy in the love of Radha. Radhe Radhe ❤️ This reel beautifully unfolds the divine mystery of Vrindavan—the supreme glory of Shrimati Radha Rani. As Krishna lovingly follows her through the sacred groves, Radha’s compassion, grace, and spiritual sovereignty illuminate every corner of the forest. The sequence moves through longing, surrender, divine music, and loving service, ultimately revealing the eternal truth celebrated by saints for centuries: even the beloved Lord of Braj remains forever enchanted by Radha’s love. The waterfalls, golden rays, blooming flowers, and sacred Yamuna surroundings create an atmosphere of complete devotion and spiritual surrender. “राधा नाम वह द्वार है, जहाँ स्वयं कृष्ण भी प्रेमी बनकर खड़े रहते हैं।” Comment “राधे राधे” 🌸 Save this reel whenever you wish to remember the eternal glory of Shrimati Radha Rani. radha rani bhakti reel, radha krishna devotion, shyama ju ko raj, vrindavan devotional reel, radha rani glory, krishna devotion to radha, radha krishna cinematic reel, vrindavan love story, devotional shorts radha rani, radha krishna spiritual video, braj bhakti content, radha naam mahima, radha krishna aesthetic reel, divine vrindavan visuals, radhe radhe devotional content

राधे राधे 🙏
01/06/2026

राधे राधे 🙏

एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था। उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रह...
01/06/2026

एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था। उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रहते थे।

एक दिन एक वैज्ञानिक अपनी बेटी के साथ उसी जंगल में शोध करने के लिए आया। अपना तम्बू लगाने के बाद वैज्ञानिक पौधों के नमूने इकट्ठा करने के लिए बाहर निकला ।

लेकिन लड़की तम्बू की सुंदरता को देखकर रुक गयी। उसने पहले ज़मीन पर एक पुराना कालीन रखा और उस पर एक बिस्तर बिछाया। तम्बू के बीच लालटेन लटकाई और उसके नीचे एक छोटी मेज़ और सफेद सेब से भरा कटोरा रख दिया।

वह सेब देखने में बहुत ताज़ा, खुबसूरत और बड़े लग रहे थे।

सारे बन्दर लालच से उस कृत्रिम सेब को पेड़ों पर बैठे देख रहे थे।

तम्बू के सामने जगह साफ करने के लिए लड़की बाहर निकली,तब एक बंदर ने तेज़ी से झपटा मारा और एक कृत्रिम सेब उठा लिया। तभी उसी समय लड़की की नज़र भी उस पर पड़ गयी, लड़की ने तुरंत बंदूक उठाकर निशाना लगाया और गोली दाग दिया, लेकिन सभी बंदर इतनी देर में वहां से भाग गए।

काफी देर के बाद सारे बन्दर रुक गए जब उन्होंने देखा कि अब उनका कोई पीछा नहीं कर रहा है।

चोर बंदर ने हाथ उठाकर सबको सेब दिखाया। सभी बंदर हैरत से और ललचाई नज़र से उस बंदर को देखने लगे कि उसे कितना अच्छा सेब मिला है ।सभी इस कृत्रिम सेब को हाथ लगाने की कोशिश करने लगे।

चोर बंदर ने सबको फटकार कर ये कृत्रिम सेब लिया और एक पेड़ की सबसे ऊंची शाख पर जाकर सेब खाने के लिए मुंह में दबा दिया।

कृत्रिम सेब बेहद कड़े प्लास्टिक से बना था । बंदर के दांतों में चबाने से दर्द शुरू हो गया। बंदर ने दो तीन बार और कोशिश की लेकिन हर बार दर्द होने लगा।

उस दिन चोर बंदर ने पेड़ की उसी शाखा पर भूखा रहकर गुज़ारा । अगले दिन वह पेड़ से नीचे आया ।

सभी बंदरों ने उसे सम्मान से देखा, क्योंकि उसके हाथ में वो कृत्रिम सेब मौजूद था। दूसरे बंदरों से मिलने वाला सम्मान को देखकर चोर बंदर ने सेब पर पकड़ मज़बूत बना ली।

अब दूसरे बंदर फलों की तलाश में निकले और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक कूद कर फल तोड़ तोड़कर खाने लगे।

चोर बंदर के एक हाथ में कृत्रिम सेब था,इसलिए वो पेड़ पर नहीं चढ़ सका। वो सेब को हाथ से नहीं छोड़ना चाहता था इसलिए वह दिन भर भूखा प्यासा रहा और यही सिलसिला आगे कुछ दिन तक चलता रहा।

हालांकि दूसरे बंदर उसके हाथ में कृत्रिम सेब देखकर उसका सम्मान करते लेकिन उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं देते।

चोर बंदर भूख से इतना निढाल हो गया था कि अब उसे अपना आखिरी वक़्त नज़र आने लगा। उसने एक बार फिर उस सेब को खाने की कोशिश की लेकिन इस बार नतीजा अलग नहीं था। उसके दांत इस बार भी दर्द कर रहे थे ।

चोर बंदर को आँखों के सामने पेड़ों से लटका हुआ फल दिखाई दे रहा था। लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इन पेड़ों पर चढ़ सके। धीरे धीरे उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गई। जैसे ही उसकी जान निकली कृत्रिम सेब पर पकड़ ढीली होने से वो उसके हाथ से बाहर लुढ़क गया।

शाम को बाकी बंदर, मरे बंदर के पास आए, कुछ आंसू बहाये और उसके शरीर को पत्तों से ढक दिया। जब वो ये कर रहे थे तब एक और बंदर को एक कृत्रिम सेब मिला और उसने अपना हाथ ऊँचा कर के सभी बंदरो को सेब दिखाना शुरू कर दिया।
........

दुनिया की मिसाल इस प्लास्टिक के सेब की तरह है, इससे कुछ नहीं मिलता। जबकी इसे देखने वाले प्रेरित होते रहते हैं और दुनिया को हाथ में रखने का दावेदार आख़िर में ख़ाली हाथ इस दुनिया से चला जाता है। कोई और आकर उसकी दुनिया पर क़ब्ज़ा कर लेता है।

"झूठा दिखावा इंसान को पहले थका देता है और फिर मार डालता है..!!"
*🙏🏾

श्री बांकेबिहारी लाल जी के आज के राजभोग आरती दिव्य दर्शन, श्री वृंदावन धाम सेदिनांक :- 31/5/2026🕉🛕🪔🥥🪷🐄🔔🪈🚩ॐ नमो भगवते वास...
01/06/2026

श्री बांकेबिहारी लाल जी के आज के राजभोग आरती दिव्य दर्शन, श्री वृंदावन धाम से
दिनांक :- 31/5/2026
🕉🛕🪔🥥🪷🐄🔔🪈🚩
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏🙏🙏🙏🙏

*सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे।*
*तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: ।।*

हे सत् चित्त आनंद, हे संसार की उत्पत्ति के कारण। हे दैहिक, दैविक और भौतिक तीनो तापों का विनाश करने वाले महाप्रभु। हे श्रीकृष्ण आपको कोटि कोटि नमन 🙏🙏🙏🙏🙏

राधे राधे जय श्री कृष्णा
01/06/2026

राधे राधे जय श्री कृष्णा

जय श्री बांके बिहारी लाल जी बिहारी जी चाहे जितना भी सता लो,ये दिल कभी तुम्हारे खिलाफ नहीं जाएगा।ठाकुर जी तुझे बारम्बार प...
01/06/2026

जय श्री बांके बिहारी लाल जी

बिहारी जी चाहे जितना भी सता लो,
ये दिल कभी तुम्हारे खिलाफ नहीं जाएगा।

ठाकुर जी तुझे बारम्बार प्रणाम निराला तेरा वृंदावन धाम,
नज़र अपने भक्तों पर कर दो।
जो भी तुझे देखे सुध बिसरावें नैनों से जांदू तूं ऐसा चलावे
नज़र अपने भक्तों पर कर दो।

जब जीवन का बोझ दिल को थका दे और हर रास्ता धुंधला लगे, तब बस एक बार बाँके बिहारी जी की ओर देख लेना।
उनकी कृपा चुपचाप टूटे हुए मन को संभाल लेती है, क्योंकि बिहारी जी बिना कहे भी अपने भक्त के हर दर्द को समझ लेते हैं।
विश्वास रखिए, जो आज समझ नहीं आ रहा… वह भी बाँके बिहारी जी की कृपा से कल आपके हित में ही होगा।

जय जय श्री राधे राधे

क्या हुआ जब भगवान ने अपने भक्त के खेत में खुद हल चलाया? | धन्ना भगत की अद्भुत कथाराजस्थान की तपती धरती पर बसे एक छोटे से...
01/06/2026

क्या हुआ जब भगवान ने अपने भक्त के खेत में खुद हल चलाया? | धन्ना भगत की अद्भुत कथा

राजस्थान की तपती धरती पर बसे एक छोटे से गांव में धन्ना नाम का एक किसान रहता था। वह न कोई बड़ा विद्वान था, न ही उसे शास्त्रों का ज्ञान था। उसके पास न धन था, न वैभव। लेकिन उसके पास एक ऐसी चीज थी जो बड़े-बड़े ऋषियों के पास भी दुर्लभ होती है—निर्मल और निष्कपट भक्ति।

धन्ना का जीवन बहुत साधारण था। सुबह सूरज निकलने से पहले खेतों में जाना, दिनभर मेहनत करना और शाम को घर लौट आना, यही उसकी दिनचर्या थी। लेकिन उसके मन में हमेशा एक प्रश्न उठता था कि आखिर भगवान को कैसे पाया जाता है?

एक दिन उसने अपने गांव के एक पंडित को देखा। पंडित जी प्रतिदिन बड़े प्रेम से अपने ठाकुर जी की पूजा करते थे। वे मूर्ति को स्नान कराते, चंदन लगाते, फूल चढ़ाते और फिर बड़े आदर से भोजन अर्पित करते।

धन्ना कई दिनों तक यह दृश्य देखता रहा। आखिर एक दिन वह पूछ बैठा—

"पंडित जी, आप रोज इस मूर्ति को इतना प्यार क्यों देते हैं?"

पंडित ने उत्तर दिया—

"यह कोई साधारण मूर्ति नहीं है। यह स्वयं भगवान हैं। जो सच्चे मन से इनकी सेवा करता है, भगवान उसके सारे काम बना देते हैं।"

धन्ना की आंखें चमक उठीं।

"तो क्या भगवान सचमुच अपने भक्तों की मदद करते हैं?"

पंडित जी ने हां में सिर हिला दिया।

बस फिर क्या था। धन्ना ने भी भगवान की सेवा करने का निश्चय कर लिया। उसने पंडित जी से कहा—

"मुझे भी एक भगवान दे दीजिए।"

पंडित जी ने सोचा कि यह भोला किसान अब पीछे पड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने रास्ते से एक साधारण पत्थर उठाया और धन्ना को पकड़ा दिया।

"ले जा, ये तेरे ठाकुर जी हैं।"

लेकिन जिसे पंडित मजाक समझ रहे थे, धन्ना ने उसे सच मान लिया।

वह उस पत्थर को बड़े सम्मान से अपने घर ले गया। उसने उसे साफ किया, स्नान कराया और घर के सबसे अच्छे स्थान पर बैठा दिया।

उस दिन घर में केवल मोटी बाजरे की रोटी और थोड़ा सा साग बना था। धन्ना ने थाली सजाई और भगवान के सामने रख दी।

फिर हाथ जोड़कर बोला—

"ठाकुर जी, पहले आप खाइए, फिर मैं खाऊंगा।"

लेकिन भोजन वैसा ही रखा रहा।

धन्ना को लगा शायद भगवान संकोच कर रहे हैं।

उसने आंखें बंद कर लीं।

"अब तो खा लो प्रभु, मैं नहीं देख रहा।"

कुछ देर बाद उसने आंखें खोलीं। रोटी ज्यों की त्यों पड़ी थी।

धीरे-धीरे शाम हो गई।

धन्ना ने फिर आग्रह किया।

"प्रभु, अगर आप नहीं खाओगे तो मैं भी नहीं खाऊंगा।"

एक दिन बीता...

दूसरा दिन बीता...

तीसरा दिन भी बीत गया...

धन्ना भूखा-प्यासा भगवान के सामने बैठा रहा।

उसका शरीर कमजोर होने लगा लेकिन उसका विश्वास नहीं डिगा।

आखिरकार भक्त के प्रेम ने भगवान को विवश कर दिया।

अचानक उस पत्थर से दिव्य प्रकाश निकला।

कमरे में अद्भुत सुगंध फैल गई।

और अगले ही क्षण वहां स्वयं श्रीकृष्ण एक सुंदर ग्वाले के रूप में प्रकट हो गए।

उनके चेहरे पर मनमोहक मुस्कान थी।

उन्होंने रोटी उठाई और बड़े चाव से खाने लगे।

धन्ना खुशी से झूम उठा।

वह बोला—

"अरे ठाकुर जी! अगर खाना ही था तो पहले खा लेते। मुझे तीन दिन भूखा क्यों रखा?"

भगवान मुस्कुराकर हंस पड़े।

उस दिन से एक अनोखा संबंध शुरू हो गया।

धन्ना रोज भोजन बनाता और भगवान स्वयं आकर उसके साथ बैठकर खाते।

दोनों मित्रों की तरह बातें करते।

दिन बीतते गए।

फिर खेती का मौसम आ गया।

पूरा गांव खेतों की तैयारी में जुट गया।

हर किसान अपने बैलों के साथ खेत जोत रहा था।

लेकिन धन्ना अभी भी भगवान की भक्ति में मग्न था।

जब उसके पिता ने यह देखा तो वे क्रोधित हो गए।

उन्होंने डांटते हुए कहा—

"अगर खेत नहीं जोते तो इस साल भूखे मर जाओगे!"

धन्ना मजबूरी में अपने कमजोर बैलों को लेकर खेत पहुंच गया।

लेकिन खेत की मिट्टी बहुत कठोर थी।

उसने कई बार हल चलाने की कोशिश की लेकिन बैल एक कदम भी आगे नहीं बढ़े।

गांव वाले उसका मजाक उड़ाने लगे।

"क्यों भगत? अब भगवान आकर खेती करेंगे क्या?"

यह सुनकर धन्ना की आंखों में आंसू आ गए।

वह खेत की मेड़ पर बैठ गया और मन ही मन बोला—

"प्रभु, भोजन करने तो रोज आते हो। आज तुम्हारे दोस्त की इज्जत का सवाल है।"

इतना कहना था कि दूर से एक बलशाली युवक आता दिखाई दिया।

उसके चेहरे पर अद्भुत तेज था।

वह मुस्कुराते हुए बोला—

"क्यों भाई, मदद चाहिए क्या?"

धन्ना ने हां कर दी।

युवक ने हल पकड़ा।

और फिर जो हुआ वह देखकर सब हैरान रह गए।

जो बैल चल नहीं पा रहे थे वे अचानक बिजली की गति से दौड़ने लगे।

कठोर जमीन मक्खन की तरह कटने लगी।

कुछ ही घंटों में पूरा खेत तैयार हो गया।

धन्ना आश्चर्यचकित था।

लेकिन चमत्कार यहीं खत्म नहीं हुआ।

जब बीज बोने का समय आया तो धन्ना के पास बीज खरीदने के पैसे भी नहीं थे।

उसने खेत में पड़े कुछ जंगली और कड़वे तुंबे के बीज ही बिखेर दिए।

गांव वाले हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।

"यह आदमी पागल हो गया है!"

समय बीत गया।

फसल तैयार हुई।

जहां बाकी खेतों में अनाज लहरा रहा था, वहीं धन्ना के खेत में केवल बड़े-बड़े कड़वे तुंबे उगे थे।

गांव का जमींदार लगान लेने पहुंचा।

उसने गुस्से में एक तुंबा उठाया और जमीन पर पटक दिया।

लेकिन अगले ही क्षण वहां सन्नाटा छा गया।

क्योंकि तुंबे के अंदर से अनगिनत हीरे-मोती और बहुमूल्य रत्न बाहर निकल पड़े थे।

सबकी आंखें फटी रह गईं।

दूसरा तुंबा तोड़ा गया।

उसमें भी रत्न।

तीसरा तोड़ा गया।

उसमें भी खजाना।

देखते ही देखते पूरा खेत हीरों, मोतियों और बहुमूल्य रत्नों से भर गया।

गांव वाले स्तब्ध थे।

जमींदार के हाथ कांपने लगे।

लेकिन धन्ना सब समझ चुका था।

उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।

उसे याद आया वह रहस्यमयी युवक...

वह कोई साधारण किसान नहीं था।

वह स्वयं उसके प्रिय ठाकुर जी थे।

धन्ना ने आकाश की ओर देखा और हाथ जोड़ दिए।

उसे उस दिन समझ आ गया कि भगवान को बड़े यज्ञ, महंगे भोग और दिखावे की आवश्यकता नहीं होती।

उन्हें चाहिए केवल सच्चा प्रेम, अटूट विश्वास और निष्कपट भक्ति।

और जब भक्त का विश्वास सच्चा हो, तब भगवान केवल उसके घर भोजन करने ही नहीं आते, बल्कि उसके खेत में हल चलाने भी उतर आते हैं।

जय श्री कृष्ण। 🙏🌸
RADHE RADHE JAI SHREE KRISHNA JI

कृष्णय वासुदेवाया हर परमात्मने 🙏💫🌟🌠👏😊
01/06/2026

कृष्णय वासुदेवाया हर परमात्मने 🙏💫🌟🌠👏😊

मेरे नीलमणि गोपाल
01/06/2026

मेरे नीलमणि गोपाल

Lord Śrī Kṛṣṇa, the Personality of Godhead, and Balarāma played like human beings, and so masked They performed many sup...
01/10/2024

Lord Śrī Kṛṣṇa, the Personality of Godhead, and Balarāma played like human beings, and so masked They performed many superhuman acts.

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