04/01/2018
https://www.youtube.com/watch?v=HjP0Aspkucw&feature=em-uploademail
अध्यात्म की दुनिया की एक प्राचीन खोज,
-------------------कलयुग में कल्पवृक्ष "श्री सिद्ध मंगल कलश"
दोस्तों इस संसार में चार मुख्य सुख हैं, पहला सुख निरोगी काया दूसरा सुख थोड़ी सी माया तीसरा कुलवन्ता नारी चौथा सुख पुत्र अधिकारी।
दोस्तों इन चारों सुखों में से किसी एक सुख का न होना जीवन में काफी खलता है.
दोस्तों यह चारों सुख हमें तभी मिलते हैं जब व्यक्ति के कुल देवता, पितृ देवता और नवग्रह देवता सभी प्रशन्न /खुश / शान्त हों।
दोस्तों प्राचीन पुराणों में लिखित व्याख्या है की 33 करोड़ देवी देवताओं का वास कलश में है, इसी लिए पंडित जी शुभ और अशुभ सभी कार्यों में कलश स्थापना करके ही पूजा प्रारम्भ करते है।
दोस्तों आजकल हम लोग अपने घर/ व्यपार स्थान पर कलश की स्थापना करके एक दिन या दस दिन तक ही पूजा करते हैं.
क्या आप जानते हैं, कि हमारे पूर्वज- बुजुर्ग घर / व्यपार स्थान में स्थाई रूप से सिद्ध मंगल कलश की स्थापना करके सिद्ध मंगल कलश की पूजा प्रतिदिन क्यों किया करते थे?
मान्यता है कि श्रद्धा पूर्वक सिद्ध मंगल कलश के नारियल पर जल अर्पित करके पूजा अराधना करने से 33 करोड़ देवी देवताओं में कुल देवता, पितृ देवता और नवग्रह देवता सभी प्रशन्न /खुश / शान्त रहते हैं.
मान्यता भी है जिस स्थान पर सिद्ध मंगल कलश की स्थापना करके श्रद्धा पूर्वक जल चढ़ाकर पूजा आराधन की जाती है उस घर/ स्थान पर श्री लक्ष्मी गणेश जी के साथ नारायण जी आपार कृपा बरसती है।
दोस्तों मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति सिद्ध मंगल कलश की श्रद्धा पूर्वक पूजा अराधना करता है उस व्यक्ति के पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं और उस व्यक्ति के जीवन में मंगल ही मंगल होने लगता है।
इस लिए आप भी सिद्ध मंगल कलश के दर्शन करें और अधिक से अधिक लोगों को दर्शन करने के लिए इस मैसेज जो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
Kashton se chutkara dilwane wala mangal kalash kya hai aur kaise banta hai, yeh dikhlaya hai maine is video me. Phool wala nariyal saubhagya se mil jata hai ...