श्री हनुमान मंदिर, मंडोला पंचलोक Hanuman Temple, Mandola, Panchlok

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श्री हनुमान मंदिर, मंडोला पंचलोक Hanuman Temple, Mandola, Panchlok मंडोला पंचलोक स्थित श्री हनुमान मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो निर्मोही अनी अखाड़ा द्वारा संचालित है।

10/11/2023
24/10/2023

विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय श्री राम।

16/10/2023

या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।

ताज बीबी की कृष्ण भक्ति----------------कर्षयती इति कृष्ण - अर्थात कृष्ण की ओर आकर्षित होने के लिए आपको यत्न नहीं करना। क...
08/09/2023

ताज बीबी की कृष्ण भक्ति
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कर्षयती इति कृष्ण - अर्थात कृष्ण की ओर आकर्षित होने के लिए आपको यत्न नहीं करना। केवल कुछ पग आगे बढ़ाने हैं और वो सांवला सलोना, मन मोहन स्वयं आपको अपनी ओर खींच लेगा। ऐसे न जाने कितने प्रसंग मिलते आये हैं, जहां लोगों के जीवन में कुछ ऐसे आकस्मिक और अलौकिक अनुभव हुए जिसने उन्हें आजीवन कृष्ण भक्त बना दिया। क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, क्या पुरुष क्या महिला, जिसने भी इस उल्टी धार में पैर रखा, स्रोत की ओर खिंचता चला गया।
कौन कह सकता था कि मुग़ल शासकों में सबसे कट्टर शासक औरंगजेब की भतीजी ताज बीवी कृष्ण भक्ति में ऐसी डूबेगी कि इतिहास में प्रमुख कृष्ण भक्तों में गिनी जाएगी। कहा जाता है कि ताज बीवी अपनी हज यात्रा के दौरान ब्रज भूमि से होकर गुज़र रही थी। ब्रज भूमि के घंटे-घड़ियालों की ध्वनि ताज बीवी के कर्ण पटल पड़ी। ताज बीवी ऐसे वातावरण में पली-बढ़ी थी जहाँ कृष्ण भक्ति तो दूर, कृष्ण का नाम लेना भी अपराध था। स्पष्ट है कि ताज बीवी को कृष्ण के बारे में कुछ भी पता नहीं था। सहज उत्सुकतावश प्रश्न कर डाला- ये क्या हो रहा है? ताज के दीवान ने अनमने ढंग से उत्तर दिया- यहां छोटे लोगों का खुदा रहता है। दीवान ने सोचा कि ताज इस उत्तर से संतुष्ट होकर यात्रा पर अग्रसर हो जाएंगी, पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। छोटे लोगों के खुदा का जादू आरम्भ हो चुका था। कदम स्वतः ही मंदिर की ओर खिंचते चले गए। ताज की वेशभूषा देखकर मंदिर के पंडों को समझते देर नहीं लगी कि वो इतर धर्मावलंबी थी। पंडों ने ताज को प्रवेश नहीं करने दिया। ताज मंदिर के सामने ही बैठ कर गुहार लगाने लगी। उत्सुकता अब आकुलता में बदल चुकी थी, तभी छैल-छबीले, रंग रंगीले, मोर मुकुट धारी कुंज बिहारी नंदलाल बाँकी चाल से चलते हुए ताज के पास आ गए। फिर क्या था, प्रेम नदिया में उतर चुकी ताज ऐसी डूबी कि फिर ऊपर नहीं आयी। हज यात्रा वहीं छोड़ ब्रज में बस गयी और गोस्वामी विट्ठलनाथ जी की शिष्या बन गयी। कई मुल्ला, मौलवियों को ताज का यह व्यवहार रास नहीं आया। उन्होंने इस्लाम का वास्ता दिया। ताज ने उत्तर दिया-
अब शरअ नहीं मेरे कुछ काम की,
श्याम मेरे हैं, मैं मेरे श्याम की।
बृज में अब धूनी रमा ली जायेगी,
जब लगन हरि से लगा ली जायेगी।

ताज यहीं नहीं रुकी। आगे चुनौतीपूर्ण शब्दों में कहा -

अल्ला बिस्मिल्ला रहमान औ रहीमी छोड़,
पुर वो शहीदों की चर्चा चलाऊँगी।
सूथना उतार, पहन घाघरा घुमावदार,
फ़रिया को फार शीश चुनरी चढ़ाऊंगी॥
कहत है ताज कृष्ण सों पैजकर,
वृन्दावन छोड़ अब कितहूँ न जाउंगी।
बांदी बनूंगी महारानी राधा जू की,
तुर्कनी बहाय नाम गोपिका कहाउंगी॥

इसके बाद ताज ने कृष्ण के कई पद लिखे। ये पद आज भी पुष्टिमार्ग परंपरा में जाते हैं।

ब्रजभूमि में रमणरेती के पास ताज बीवी का समाधि स्थल आज भी उस अलौकिक प्रेम की गाथा का साक्षी है।

नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।
08/09/2023

नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।

15/08/2023

**** भक्तजन कृपया ध्यान दें। ****
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मंदिर के सिंहद्वार के सामने की भूमि जो मंदिर को सड़क से जोड़ती है, पिछले चालीस सालों से भक्तों द्वारा मंदिर में प्रवेश के लिए प्रयोग में लाई जा रही है। कुछ दिनों पहले आवास विकास के अधिकारियों द्वारा इस भूमि पर दावा पेश किया गया और कहा गया की वे इस पर कुछ निर्माण कार्य करवाना चाहते हैं। रही बात मंदिर के रास्ते की तो 2.5 से 3 फीट चौड़ा रास्ता देने की पेशकश की गई है, वो भी सीधा नहीं घुमावदार।

इस बात से भक्तों के मन में भारी असंतोष है। ऐसे कदम से न केवल मंदिर की शोभा कम होगी बल्कि पर्व विशेष पर भक्तों की भीड़ होने पर असुविधाजनक स्थिति भी पैदा होगी।

सभी सम्माननीय भक्तजनों से अनुरोध है कि मंदिर की भव्यता और भक्तो की सुविधा बनाए रखने के हेतु इस रास्ते को बचाने के लिए विधिसम्मत तरीके से प्रयत्न करें।

हनुमान जी की कृपा से आपका प्रयत्न अवश्य सफल होगा।

जय श्री राम। जय बजरंग बली।

श्री शत्रुघ्न जी महाराज
संपर्क सूत्र- +918744821297

मंडोला पंचलोक स्थित श्री हनुमान मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो निर्मोही अनी अखाड़ा द्वारा संचालित है।

ॐ श्री हनुमते नमः।
12/08/2023

ॐ श्री हनुमते नमः।

स्मृतियाँ : श्री श्री 108 मनोहर दास त्यागी जी महाराज।
27/06/2023

स्मृतियाँ : श्री श्री 108 मनोहर दास त्यागी जी महाराज।

28/05/2023

मंदिर प्रांगण में दिनांक 5 जून से 12 जून 2023 तक श्रीधाम वृन्दावन के प्रसिद्ध भागवतविद श्री अजय कृष्ण वशिष्ठ जी द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का समय दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक रहेगा।

25/05/2023

मंदिर प्रांगण में दिनांक 5 जून से 12 जून 2023 तक श्रीधाम वृन्दावन के प्रसिद्ध भागवतविद श्री अजय कृष्ण वशिष्ठ जी द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का समय दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक रहेगा। कथा का सजीव प्रसारण श्री गुरुमुख साधना यूट्यूब चैनल पर होगा। इस चैनल की लिंक हम नीचे दे रहे हैं। दिनांक 5 जून 2023 को प्रातः 8 बजे से कलश यात्रा होगी। आप सभी भक्तों से अनुरोध है कि मंदिर में पधारकर कथामृत का रसास्वादन करें और आयोजन को सफल बनाएं।

निवेदक:
श्री श्री 108 शत्रुघन दास जी महाराज
+918744821297

कथा का यूट्यूब लिंक:
https://youtube.com/

मंडोला पंचलोक स्थित श्री हनुमान मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो निर्मोही अनी अखाड़ा द्वारा संचालित है।

10/12/2022

एक खबर पढ़ी थी कि मंदसौर जिले में हिन्दू से मुसलमान बने कुछ लोगों ने गोबर खा और गोमूत्र से नहाकर कर घर वापसी की। घर वापसी कराने वाले महा-पंडित या महंत से मेरा सवाल है कि इतना ज्ञान लाते कहाँ से हैं- शास्त्रों से मिलता है या ज्ञान की बारिश होती है। आधी-अधूरी अधकचरे ज्ञान से समाज में भ्रांति फैला रहे हैं ये लोग। इस तरीके के धर्मांतरण से हिन्दू धर्म बदनाम हो रहा है। हिन्दू धर्म में बहुत सारी चीज़ें पवित्र मानी गयी है, पर किन चीज़ों से नहाना है, किन्हें खाना है और किन्हें जलाना है, इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। वैसे तो हिन्दुओं को लोगों ने पहले ही गोबर खाने वालों की संज्ञा दे रखी है। अगर गोबर नहाने या खाने की चीज़ होती तो भगवान को गोबर का भोग क्यों नहीं लगाया जाता? भगवान का अभिषेक गो-मूत्र से क्यों नहीं किया जाता? पारे (पारद) को भी परम पवित्र माना गया है। क्या कोई पारे को खाएगा क्या? यहाँ तक कि पारद शिवलिंग के अभिषेक का जल भी पीने के लिए वर्जित है. ऋषि, मुनियों को पारे की विषाक्तता का ज्ञान था। गाय के पांच उत्पादों को परम पवित्र माना गया है, जिन्हें पञ्च-गव्य कहा गया है। ये हैं - दुग्ध अर्थात दूध, दही, घृत अर्थात घी, गोमूत्र और गोबर। दुग्ध, दही, और घृत अभिषेक करने के लिए, घृत आहुति के लिए और गोबर जलाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। गोमूत्र का प्रयोग आयुर्वेद में औषधि में किया जाता है। गोमूत्र का औषधि के रूप में प्रयोग कोई नया या चौंकाने वाला नहीं है. व्हेल की उल्टी, पेड़ों की फफूंदी, जानवरों का मल किसी न किसी औषधि या इत्र बनाने में होता है। इन तथाकथित पोंगा पंडितों को जो धर्मांतरण करवा रहे हैं, सबको गोबर और गोमूत्र की पार्टी दी जानी चाहिए, जहाँ खाना अनिवार्य हो।
एक बात और, गोबर के खाने और नहाने से कोई हिन्दू नहीं बन जाता।

24/10/2022

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प्रकाश पर्व दीपावली की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं।
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Ghaziabad
201102

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