08/09/2023
ताज बीबी की कृष्ण भक्ति
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कर्षयती इति कृष्ण - अर्थात कृष्ण की ओर आकर्षित होने के लिए आपको यत्न नहीं करना। केवल कुछ पग आगे बढ़ाने हैं और वो सांवला सलोना, मन मोहन स्वयं आपको अपनी ओर खींच लेगा। ऐसे न जाने कितने प्रसंग मिलते आये हैं, जहां लोगों के जीवन में कुछ ऐसे आकस्मिक और अलौकिक अनुभव हुए जिसने उन्हें आजीवन कृष्ण भक्त बना दिया। क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, क्या पुरुष क्या महिला, जिसने भी इस उल्टी धार में पैर रखा, स्रोत की ओर खिंचता चला गया।
कौन कह सकता था कि मुग़ल शासकों में सबसे कट्टर शासक औरंगजेब की भतीजी ताज बीवी कृष्ण भक्ति में ऐसी डूबेगी कि इतिहास में प्रमुख कृष्ण भक्तों में गिनी जाएगी। कहा जाता है कि ताज बीवी अपनी हज यात्रा के दौरान ब्रज भूमि से होकर गुज़र रही थी। ब्रज भूमि के घंटे-घड़ियालों की ध्वनि ताज बीवी के कर्ण पटल पड़ी। ताज बीवी ऐसे वातावरण में पली-बढ़ी थी जहाँ कृष्ण भक्ति तो दूर, कृष्ण का नाम लेना भी अपराध था। स्पष्ट है कि ताज बीवी को कृष्ण के बारे में कुछ भी पता नहीं था। सहज उत्सुकतावश प्रश्न कर डाला- ये क्या हो रहा है? ताज के दीवान ने अनमने ढंग से उत्तर दिया- यहां छोटे लोगों का खुदा रहता है। दीवान ने सोचा कि ताज इस उत्तर से संतुष्ट होकर यात्रा पर अग्रसर हो जाएंगी, पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। छोटे लोगों के खुदा का जादू आरम्भ हो चुका था। कदम स्वतः ही मंदिर की ओर खिंचते चले गए। ताज की वेशभूषा देखकर मंदिर के पंडों को समझते देर नहीं लगी कि वो इतर धर्मावलंबी थी। पंडों ने ताज को प्रवेश नहीं करने दिया। ताज मंदिर के सामने ही बैठ कर गुहार लगाने लगी। उत्सुकता अब आकुलता में बदल चुकी थी, तभी छैल-छबीले, रंग रंगीले, मोर मुकुट धारी कुंज बिहारी नंदलाल बाँकी चाल से चलते हुए ताज के पास आ गए। फिर क्या था, प्रेम नदिया में उतर चुकी ताज ऐसी डूबी कि फिर ऊपर नहीं आयी। हज यात्रा वहीं छोड़ ब्रज में बस गयी और गोस्वामी विट्ठलनाथ जी की शिष्या बन गयी। कई मुल्ला, मौलवियों को ताज का यह व्यवहार रास नहीं आया। उन्होंने इस्लाम का वास्ता दिया। ताज ने उत्तर दिया-
अब शरअ नहीं मेरे कुछ काम की,
श्याम मेरे हैं, मैं मेरे श्याम की।
बृज में अब धूनी रमा ली जायेगी,
जब लगन हरि से लगा ली जायेगी।
ताज यहीं नहीं रुकी। आगे चुनौतीपूर्ण शब्दों में कहा -
अल्ला बिस्मिल्ला रहमान औ रहीमी छोड़,
पुर वो शहीदों की चर्चा चलाऊँगी।
सूथना उतार, पहन घाघरा घुमावदार,
फ़रिया को फार शीश चुनरी चढ़ाऊंगी॥
कहत है ताज कृष्ण सों पैजकर,
वृन्दावन छोड़ अब कितहूँ न जाउंगी।
बांदी बनूंगी महारानी राधा जू की,
तुर्कनी बहाय नाम गोपिका कहाउंगी॥
इसके बाद ताज ने कृष्ण के कई पद लिखे। ये पद आज भी पुष्टिमार्ग परंपरा में जाते हैं।
ब्रजभूमि में रमणरेती के पास ताज बीवी का समाधि स्थल आज भी उस अलौकिक प्रेम की गाथा का साक्षी है।