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Mumukshu.org सेवार्थ श्री दिगम्बर जैन मुमुक्षु समाज

तुम चिंतन के क्षण में, अपने आत्म से कहना।
08/08/2025

तुम चिंतन के क्षण में, अपने आत्म से कहना।

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20/05/2025

जँहा रिक्शे वाले भी निम्मित उपादान की चर्चा करते हों वो काँजी स्वामी का सोनगढ़ है।

13/05/2025

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02/05/2025

*पुराण पुरुष मात्र पुराणों में नही वे जीवंत रहते है सज्जन जीवो के चित्त में।*

जब कोई स्त्री अपने स्त्रीत्व की रक्षा मरने की कीमत तक करती है तब *जीवंत रहती है उस स्त्री में सीता*

जब कोई पुरूष रक्षा करता है अपने स्वदारा व्रत की तब धर्म पत्नी से अनुपालित व्रत का वह संतोषी जीव प्रत्येक स्त्री में अपनी माँ अथवा बहन को देखता हुआ अपने भीतर *जीवंत रखता है सेठ सुदर्शन को*

वीतराग परिणति को प्राप्त करने में उत्सुक हुआ साधक जब कमठ से उपसर्गो पर नही घबराता तब वह *जीवंत रखता है अपने भीतर पार्श्वनाथ को*

पिता के वचन का अनुपालन करने वाला मर्यादित जीवन को जीते पुरुष के भीतर *राम आज भी जीवंत है*

अपनी पुत्रियों को उत्तम शिक्षा व सर्वोत्तम संस्कार तथा प्रजा के मार्ग प्रदाता पिता के भीतर *स्वम् राजा ऋषभ ही जीवंत है*

*जीवंत है भरत उस साधक के चित्त* में जिसका जीवन अनेको उपलब्धियों की प्राप्ति के पश्चात भी विभूतियों के प्रति नही अपितु शुद्धोपयोग के प्रति समर्पित है।

जिनके लिए परिवार समाज का संरक्षण पिता के न होते हुए भी पिता के दायत्व को तथा अपने भाइयों से बढ़ कर जो सम्पत्ति को नही देखते ऐसे सज्जन पुरुषों के चित्त में *पांडव आज भी जीवंत है*

*जीवंत अंजना है वह स्त्री* जिसका जीवन पवन के लिए इस प्रकार समर्पित है जिस तरह वर्षों से बंद मन्दिर की प्रतिमा बिन पूजन प्रक्षाल के भी भगवान ही रहती है।

*और जीवंत है पुराण पुरुषों का महानायक वह शुद्ध चैतन्य तत्व उस मुमुक्षु के चित्त में जिसे एक चैतन्य के सिवा कुछ भी सुहाता नही है।*

हिमांशु जैन (मुमुक्षु.org)

01/05/2025
22/04/2025

जय जिनेन्द्र भी एक मंगलाचरण है

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