Arya Samaj, Dayanand Nagar, Ghaziabad

Arya Samaj, Dayanand Nagar, Ghaziabad इन्द्रं॒ वर्ध॑न्तो अ॒प्तुर॑: कृ॒ण्वन्तो॒ विश्व॒मार्य॑म् । अ॒प॒घ्नन्तो॒ अरा॑व्णः !ऋ. ९.६३.५|

24/05/2026
12/02/2026

स्वराज, स्वदेशी व स्वावलंबन के प्रणेता महर्षि दयानंद जी ने आर्य समाज की स्थापना की और सामाजिक कुरीतियों के त्याग व स्त्री शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक किया। उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ से वैदिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया।
स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।

21/11/2025

🕉️ आर्य समाज , दयानन्द नगर : वार्षिक उत्सव - २०२५ 🕉️

परम श्रद्धेय ,

जगन्नियन्ता परमेश्वर की असीम कृपा से यह आर्यसमाज, अपना वार्षिक उत्सव वेद कथा का आयोजन दिनांक २८, २९, ३०, नवम्बर २०२५ तदनुसार शुक्रवार, शनिवार एवम् रविवार को हर्षोल्लास से मना रहा है।
आप सभी बहन भाइयों से विनम्र निवेदन है कि, इस वेद कथा में इष्ट, मित्रों एवं परिवार सहित पधार कर कथा में रखे गंभीर विषयों का श्रवण-मनन कर आत्म उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें।

📢 विस्तृत सूचना :

📅 दिनांक २८, २९ नवम्बर २०२५ तदनुसार शुक्रवार, शनिवार
⏰ प्रातः ८ बजे से ९ बजे तक, यज्ञ तथा प्रातः राश
प्रातः १० बजे से १२ बजे तक, भजन व् प्रवचन
अपराह्न २:३० बजे से सायं ५:३० बजे तक, भजन व् प्रवचन

📅 रविवार दिनांक ३०, नवम्बर २०२५
⏰ प्रातः ८ बजे से ९ बजे तक, यज्ञ तथा प्रातः राश
प्रातः 10 बजे से १२:३० बजे तक, भजन व् प्रवचन
अपराह्न १:३० बजे सह भोज

सादर
इं रामेश्वर दयालु गुप्त
(प्रधान , आर्य समाज , दयानन्द नगर , गाज़ियाबाद)

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01/11/2025

Session coming up on theory of evolution..

https://www.youtube.com/live/eyht7PtUjF8?si=ldnMKhtcBkdPXXDP
01/11/2025

https://www.youtube.com/live/eyht7PtUjF8?si=ldnMKhtcBkdPXXDP

आप देख रहे हैं, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा, आर्य समाज सार्द्ध शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय आर्य म.....

25/08/2025

*महर्षि दयानन्द सरस्वती*
● एक ब्रह्मास्त्र थे, जिन्हें कोई भी पंडित, पादरी, मौलवी, अघोरी, ओझा, तान्त्रिक हरा नहीं पाया और न ही उन पर अपना कोई मंत्र, तंत्र या किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव छोड़ पाया ।
● वेद के ज्ञाता थे, जिसने सम्पूर्ण भारत वर्ष में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में वेद का डंका बजाया था ।
● ईश्वर भक्त थे, जिसने ईश्वर को प्राप्त करने के लिए अपना घर ही त्याग दिया था ।
● महान व्यक्ति थे, जिसने लाखों की संपत्ति को ठोकर मार दी परन्तु सत्य की राह से विचलित नहीं हुए ।
● दानी थे, जिसने गुरु दक्षिणा में अपना सम्पूर्ण जीवन ही दान दे दिया ।
● क्रान्तिकारी थे, जिसने सबसे पहले स्वाधीनता का बिगुल फूँक न जाने कितने लोगों के अन्दर क्रान्ति की भावना को पोषित कर दिया |
● स्वदेशभक्त थे, जिसने सबसे पहले स्वदेशीय राज्य को सर्वोपरि कहा और अंग्रेजों के सामने ही उनका राज्य समस्त विश्व से नष्ट होने की बात कही ।
● गौरक्षक व गौ प्रेमी थे, जिसने सबसे पहले गौ रक्षा हेतु "गोकरुणानिधि" जैसे पुस्तक लिखा, और गौरक्षिणी सभा बनाई व इसके नियमों का प्रतिपादन किया ।
● निडर व्यक्ति थे, जिसने निर्भीक होकर समाज की कुप्रथाओं, कुरीतियों पर प्रहार किया ।
● सत्याग्रही थे, जिसने कभी भी सत्य से समझौता नहीं किया ।
● धर्म धुरन्धर थे, जो केवल वेद का ही नहीं अपितु कुरान, पुराण, बाइबल, त्रिपिटक व अन्य सम्प्रदायों व मत-मतान्तरों के ग्रन्थों का ज्ञान रखता था ।
● सत्य का पुजारी थे, जो अपनी हर बात डंके की चोट पर कहता था ।
● धर्म धुरन्धर थे, जिसने सभी पाखण्डों का खण्डन कर सत्य की राह दिखाई ।
● धर्म धुरन्धर थे, जिसने इस देश का धर्मान्तरण (ईसाइयत व इस्लामीकरण) होने से मात्र रोका ही नहीं वरन् शुद्धि व घर वापसी द्वारा देश का उद्धार किया ।
● सत्याग्रही थे, जिसे किसी प्रकार के लोभ व लालच विचलित नहीं कर पाये ।
● सन्यासी थे, जो पत्थरों, जूतों की मार से विचलित न हुआ वरन उसके संकल्प और भी मजबूत हुए ।
● ऋषि थे, जिसने यज्ञ, योग व पुरातन ऋषि महर्षियों के ज्ञान को पुनः स्थापित कराया ।
● ज्ञानी थे, जिसने ऋषिकृत पाणिनि, जैमिनी, ब्रह्मा, चरक , सुश्रुत आदि ग्रन्थों का उद्धार किया ।
● ऋषि थे, जिसने ऋषियों के नाम से बनाये गये सभी असत्य ग्रन्थों का भण्डा फोड़ा व हमारे ऋषियों के नाम पर लगे दाग को मिटाया ।
● समाज सुधारक थे, जिसने सबसे पहले सती प्रथा, बाल-विवाह जैसीे कुप्रथाओं पर प्रहार कर समस्त भारत में नारी की प्रतिष्ठा को समाज में पुनः स्थापित कराया ।
● समाज सुधारक थे, जिसने माँसाहार व शाकाहार में भेद स्पष्ट कर समाज को पुनः शाकाहार के रास्ते पर चलाया ।
● साहसी थे, जिसका साहस अपमान, तिरस्कार से कम नहीं हुआ बल्कि और भी दृढ़ हुआ ।
● समाज सुधारक थे, जिसने मात्र भारत के लिए ही नहीं अपितु सारे विश्व के कल्याण की भावना से निस्वार्थ काम किया ।
ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी महर्षि दयानन्द सरस्वती को शत-शत नमन !


#महर्षिदयानंदसरस्वती8171

24/08/2025

स्वामी दयानन्द सरस्वती लगभग छह फुट लंबे, स्वस्थ और प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी थे। वे सादगीपूर्ण वस्त्र धारण करते और भूमि पर पद्मासन में बैठना पसंद करते थे। उनका रंग हल्का साँवला, नेत्र शांत और गंभीर, तथा वाणी स्पष्ट, गम्भीर और मधुर थी।

उनकी भाषा सहज, सरल और प्रभावशाली थी। वे तर्कशक्ति में अत्यंत प्रखर और निर्णय में शीघ्र एवं निश्चित थे। कठिन शास्त्रीय पद्य और गद्य वे बिना रुके सुना देते थे, जिससे उनकी अद्भुत स्मरणशक्ति और गहन संस्कृत-विद्वता प्रकट होती थी।

विपक्षियों के क्रोध और अपशब्दों से भी वे विचलित नहीं होते थे। उनकी मधुर वाणी सुनकर विरोधी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहते थे। उनका आचरण शालीन, विनम्र और समानभाव से युक्त था।

उन्होंने कहा था कि उन्हें संस्कृत का ज्ञान ही पर्याप्त है, क्योंकि यही भारतवासियों की आत्मा की भाषा है। बाबू केशवचन्द्र सेन से संवाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे उन्हें अंग्रेज़ी न जानने का खेद है, वैसे ही ब्रह्मो नेता को संस्कृत न जानने का खेद होना चाहिए।

उनके उपदेश इतने रोचक और प्रभावी होते थे कि श्रोता उन्हें गहन ध्यान से सुनते और आज भी उनके विचार लाखों लोगों को आर्य समाज से जोड़ते

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