Jai Ma Jwala Mukhi (जय माँ ज्वाला मुखी) इस मन्दिर को 2 पट्टी थाती ओर बासर के लोग
भली भाँति जनते हे पर मे अपनी जानकारी के माध्यम से उन
लोगो को परचित करा रहा हूँ जो माँ ज्वाला मुखी के बारे मे
नहीँ जानते हे ?
यह मन्दिर हे सिद्दपीठ जगत
जननी माँ ज्वाला मुखी का इस स्थान का नाम देवढुंग हे पूर्वजो का कहना हे कि इस स्थान पर 1 बड़ा सा पथर
था ( जिसे हमारी बोली मे ढुंग कहते है ) जो अभी भी हे उस
पथर पर देवी देव
ता बैठा करते थे इसलिए इस स्थान का नाम
देवढुंग पड़ा था
इस मन्दिर के आगे की तरफ ठिक नीचे 1 गाँव हे
तिसरियाड़ा बासर इस गाँव मे 1 स्थान जो कि भंडार नाम से प्रसिद्द हे इसी स्थान पर माँ का 1 प्राचीन मन्दिर है इस
गाँव के भट्ट बन्धु से 1 परिवार माँ की पूजा करता हे जिन्हेँ
माँ का पुजारी माना गया हे इस गाँव के बीच 1 कुआँ हे जिसे
माँ का कुआँ कहा जाता हे जब माँ स्नान करती हे तो इसी कुवेँ के
पानी से करती हे ।माँ के पूजा के वर्तन इसी पानी से धोये जाते
हे । तिसरियाड़ा गाँव के ठिक नीचे चानी बासर नामक गाँव हे इस
गाँव मे से 1 परिवार पर माँ का बिराट रूप आता हे जिसे हम
ओतार्य कहते हे ।
इस मन्दिर के पीछे की तरफ बिलकुल नीचे थाती कठुड़ नाम
का गाँव हे जो कि थाती पट्टी मे आता हे ।
कहा जाता हे कि इस गाँव मे माँ का मायका हे क्योँकि जब माँ यहाँ पर आई थी तो इसी गाँव के ऊपर 1 स्थान हे जहाँ पर
माँ रुकी थी ओर यहीँ से माँ ने सामने देवढुँग नामक स्थान
देखा था ।
चानी मे माँ का ससरुवाल माना जाता इस गाँव के लोगोँ पर
माँ अपना रूप दिखाती हे ओर तिसरियाड़ा मे
माँ का जो पोरांड़िक मन्दिर हे माँ का वास यहीँ पर होता है कहा जाता हे कि माँ 7 गाँव वलो की हे पर यह गलत है
माँ तो सब की हे माँ के लिए सारे भक्त 1 समान हे पर
माँ का जो मन्दिर देवढुंग मे हे यहां पर 1 बहुत बड़ी कमेठी हे
जिन मे 7 गाँव के लोग कार्यकर्ता हे ।
चैत्र के महीने देवढुँग मे नवरात्र होती हे जो कि दस दिन
तक चलती पहले दिन भन्डार मे सारे भक्त जन 7 गाँव के ढोल ,डमाउ ,रणसिँगे ,गाजे ,बाजे इत्यादि इकठे होते ओर
पुजारी के हाथोँ माँ की यात्रा निकलती हे आगे आगे भक्त जन
ओर पीछे से माँ यह यात्रा जब चलती हे तो सारे लोग आगे होते
है माँ के पीछे कोई नही जा सकता है थोड़ा आगे चल कर
चौरंगी नाथ का मन्दिर आता हे जो की माँ के बीर हे इस
देवता के पुजारी भट्ट बन्धु मे से 1 परिवार हे आगे चल कर भुत नाम का 1 स्थान आता हे जहां पर
माँ अपनी शक्ति दिखाती हे कई लोगो का मानना हे
कि यहा पर भूत माँ को रोकने की कोशिस करते हे यहां पर
केदार भी हे ओर केदार मे भोले शंकर का वास होता हे मेरा मानन
हे भोले शंकर माँ की शक्ति जांचते हे यहां से आगे भैरव नाथ
का मन्दिर आता हे यहां के पुजारी बंगुड़ा बन्धु मे से 1 परिवार हे भैरव नाथ भी माँ का बीर हे थोड़ा सा आगे चल कर सारे भक्त
जन आम रास्ते से जाते हे पर माँ का यहाँ पर अपना अलग
ही रास्ता हे कहते कि उस रास्ते पर कभी गाय की मोत हुई
थी इसलिए माँ का अपना अलग ही मार्ग हे आगे चल कर
माँ अपने स्थान पर पहुंच जाती हे जहां पर पुजारी के
हथो माँ का सिँगार किया जाता हे उसके बाद भक्त जन माँ के दर्शन करते हे माँ 9 रात तक यहां पर रहती हे ओर दसवीँ दिन
इसी तरह माँ की यात्रा अपने पोरांड़िक मन्दिर नीचे
को आती हे ।
10 दिनो तक यहाँ पर देवी भगवत ओर रामचरित्र मानस
का वर्णन किया जाता हे ओर कमेठी द्वारा बहुत बड़े मेले
का आयोजन किया जाता सभी भक्त जन माँ के दर्शन ओर कथा का श्रवण करते हे ।
माँ के दरवार मे जो सच्चे मन से आता हे
माँ उसकी मनोकामना पूर्ण करती हे
बोलिए माँ ज्वाला मुखी मया की जय
धन्यवाद —