31/10/2025
श्री गुरुभ्यो नमः, श्री परम गुरुभ्यो नमः,हरे नमः।
श्री विष्णुपदो विजयते्।
अक्षय नवमी को आंवला नवमी के रूप में भी लोग जानते हैं आज के दिन करें ये उपाय मिलेंगे चमत्कारी लाभ।
आंवला नवमी विशेष रूप से आंवले के पेड़ की पूजा, व्रत और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए मनाई जाती है। इस दिन के धार्मिक महत्व के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ की भी एक लंबी परंपरा है, जिसे आजकल लोग अपने जीवन में आंवला के सेवन को बढ़ावा देने के लिए मानते हैं।
इस दिन की पूजा का उद्देश्य शांति, समृद्धि और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। इस दिन यदि कुछ खास उपाय किए जाएं, तो व्यक्ति को न सिर्फ मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य के लाभ मिलते हैं, बल्कि यह तात्कालिक और दीर्घकालिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकता है।
इस दिन के विशेष उपायों के जरिए आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और आंवला के अद्भुत लाभों का पूरा उपयोग कर सकते हैं।
आंवला नवमी के 7 विशेष उपाय, देंगे अनके फायदे
1. आंवले के पेड़ की पूजा: आंवले के पेड़ की जड़ में जल और थोड़ा कच्चा दूध अर्पित करें। हल्दी और कुमकुम से तिलक करें और घी का दीपक जलाएं।
2. परिक्रमा और कलावा बांधना: पेड़ के चारों ओर लाल धागा (कलावा) 7, 9 या 11 बार बांधें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार 7, 9 या 108 बार परिक्रमा करें।
3. मंत्र जाप: आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके 'ॐ धात्र्यै नमः' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
4. दान-पुण्य: इस दिन दान का अक्षय फल मिलता है। आंवला, पीले वस्त्र, हल्दी, गाय का घी या अनाज का दान करना शुभ माना जाता है।
5. वृक्ष के नीचे भोजन: आंवले के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं। फिर स्वयं भी परिवार सहित वहीं बैठकर भोजन करें। माना जाता है कि ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
6. आंवले का सेवन: इस दिन आंवले का सेवन करना बहुत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे शरीर को आरोग्यता प्राप्त होती है।
7. भगवान विष्णु को आंवला अर्पण: इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और उन्हें आंवला फल अर्पित करें। इससे श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आंवला नवमी के उपाय से मिलने वाले फायदे:
• विष्णु और लक्ष्मी की कृपा: आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है, इसलिए पूजा से उनकी और माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
• अक्षय फल की प्राप्ति: इस दिन किए गए शुभ कार्यों और दान का फल कभी खत्म नहीं होता।
• सुख-समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति का वास होता है।
• आरोग्य: रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
• पापों का नाश: सभी पापों का नाश होता है।
कथा -
एक राजा था, उसका प्रण था वह रोज सवा मन आंवले दान करके ही खाना खाता था। इससे उसका नाम आंवलया राजा पड़ गया।
एक दिन उसके बेटे बहू ने सोचा कि राजा इतने सारे आंवले रोजाना दान करते हैं, इस प्रकार तो एक दिन सारा खजाना खाली हो जायेगा। इसीलिए बेटे ने राजा से कहा की उसे इस तरह दान करना बंद कर देना चाहिए।
बेटे की बात सुनकर राजा को बहुत दुःख हुआ और राजा रानी महल छोड़कर बियाबान जंगल में जाकर बैठ गए।
राजा-रानी आंवला दान नहीं कर पाए और प्रण के कारण कुछ खाया नहीं।
जब भूखे प्यासे सात दिन हो गए तब भगवान ने सोचा कि यदि मैने इसका प्रण नहीं रखा और इसका सत नहीं रखा तो विश्वास चला जाएगा।
इसलिए भगवान ने, जंगल में ही महल, राज्य और बाग-बगीचे सब बना दिए और ढेरों आंवले के पेड़ लगा दिए।
सुबह राजा रानी उठे तो देखा की जंगल में उनके राज्य से भी दुगना राज्य बसा हुआ है।
राजा, रानी से कहने लगे
रानी देख कहते हैं, सत मत छोड़े। सूरमा सत छोड़या पत जाए, सत की छोड़ी लक्ष्मी फेर मिलेगी आए।
आओ नहा धोकर आंवले दान करें और भोजन करें। राजा-रानी ने आंवले दान करके खाना खाया और खुशी-खुशी जंगल में रहने लगे।
उधर आंवला देवता का अपमान करने व माता-पिता से बुरा व्यवहार करने के कारण बहू बेटे के बुरे दिन आ गए।
राज्य दुश्मनों ने छीन लिया दाने-दाने को मोहताज हो गए और काम ढूंढते हुए अपने पिताजी के राज्य में आ पहुंचे।
उनके हालात इतने बिगड़े हुए थे कि पिता ने उन्हें बिना पहचाने हुए काम पर रख लिया।
बेटे बहू सोच भी नहीं सकते कि उनके माता-पिता इतने बड़े राज्य के मालिक भी हो सकते है सो उन्होंने भी अपने माता-पिता को नहीं पहचाना।
एक दिन बहू ने सास के बाल गूंथते समय उनकी पीठ पर मस्सा देखा। उसे यह सोचकर रोना आने लगा की ऐसा मस्सा मेरी सास के भी था। हमने ये सोचकर उन्हें आंवले दान करने से रोका था कि हमारा धन नष्ट हो जाएगा।
आज वे लोग न जाने कहां होगे ?
यह सोचकर बहू को रोना आने लगा और आंसू टपक टपक कर सास की पीठ पर गिरने लगे। रानी ने तुरंत पलट कर देखा और पूछा कि, तू क्यों रो रही है?
उसने बताया आपकी पीठ जैसा मस्सा मेरी सास की पीठ पर भी था। हमने उन्हें आंवले दान करने से मना कर दिया था इसलिए वे घर छोड़कर कहीं चले गए।
तब रानी ने उन्हें पहचान लिया। सारा हाल पूछा और अपना हाल बताया। अपने बेटे-बहू को समझाया कि दान करने से धन कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है।
उधर आंवला देवता का अपमान करने व माता-पिता से बुरा व्यवहार करने के कारण बहू बेटे के बुरे दिन आ गए।
राज्य दुश्मनों ने छीन लिया दाने-दाने को मोहताज हो गए और काम ढूंढते हुए अपने पिताजी के राज्य में आ पहुंचे।
उनके हालात इतने बिगड़े हुए थे कि पिता ने उन्हें बिना पहचाने हुए काम पर रख लिया।
बेटे बहू सोच भी नहीं सकते कि उनके माता-पिता इतने बड़े राज्य के मालिक भी हो सकते है सो उन्होंने भी अपने माता-पिता को नहीं पहचाना।
एक दिन बहू ने सास के बाल गूंथते समय उनकी पीठ पर मस्सा देखा। उसे यह सोचकर रोना आने लगा की ऐसा मस्सा मेरी सास के भी था। हमने ये सोचकर उन्हें आंवले दान करने से रोका था कि हमारा धन नष्ट हो जाएगा।
आज वे लोग न जाने कहां होगे ?
यह सोचकर बहू को रोना आने लगा और आंसू टपक टपक कर सास की पीठ पर गिरने लगे। रानी ने तुरंत पलट कर देखा और पूछा कि, तू क्यों रो रही है?
उसने बताया आपकी पीठ जैसा मस्सा मेरी सास की पीठ पर भी था। हमने उन्हें आंवले दान करने से मना कर दिया था इसलिए वे घर छोड़कर कहीं चले गए।
तब रानी ने उन्हें पहचान लिया। सारा हाल पूछा और अपना हाल बताया। अपने बेटे-बहू को समझाया कि दान करने से धन कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है।
बेटे-बहू भी अब सुख से राजा-रानी के साथ रहने लगे।
हे भगवान, जैसा राजा रानी का सत रखा वैसा सबका सत रखना। कहते-सुनते सारे परिवार का सुख रखना।