26/02/2025
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॥ ओ३म् ॥
ॐ दक्षिणावन्तो अमृतं भजन्ते ॥ ऋग्वेद 1:125:6 = पुरुषार्थियो द्वारा किया दान परमानंद रुपी शाश्वत सुख को प्राप्त करता है।
यज्ञ, हवन, 16 संस्कार(गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोनयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, कर्णवेध, उपनयन, वेदारम्भ, समावर्तन, विवाह, वानप्रस्थ, संन्यास और अन्त्येष्टि संस्कार) जन्मदिन, पुण्यतिथि, गृह-प्रवेश, वास्तु शान्ति, स्वस्ति-यज्ञ, शान्ति-यज्ञ, पंच महा यज्ञ(ब्रह्म यज्ञ, देव यज्ञ, पितृ यज्ञ, अतिथि यज्ञ, बलि वैश्व देव यज्ञ ) चतुर्वेद परायण पाठ, चतुर्वेद परायण महायज्ञ, उपनिषद् कथा, वेद कथा, रूद्र महायज्ञ, गायत्री जप, महामृत्युंजय जप, अनुष्ठान, गायत्री यज्ञ, ओ३म् संकीर्तन, रूद्र महायज्ञ, वैदिक सत्य नारायण व्रत कथा, यज्ञ चिकित्सा, पुत्रकामेष्टि यज्ञ, वृष्टि यज्ञ, आयुष्काम यज्ञ,आदि के लिए सम्पर्क करे।
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