Vishnupad Temple

Vishnupad Temple The Vishnupada Mandir is the ancient temple in Gaya, India. It is a Hindu temple, dedicated to Lord Vishnu. This temple is located along the Falgu River
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08/08/2024

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पितृ पक्ष 2023: श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां
29 सितंबर - पूर्णिमा श्राद्ध
30 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध , द्वितीया श्राद्ध
01 अक्टूबर - तृतीया श्राद्ध
02 अक्टूबर - चतुर्थी श्राद्ध
03 अक्टूबर - पंचमी श्राद्ध
04 अक्टूबर - षष्ठी श्राद्ध
05 अक्टूबर - सप्तमी श्राद्ध
06 अक्टूबर - अष्टमी श्राद्ध
07 अक्टूबर - नवमी श्राद्ध
08 अक्टूबर - दशमी श्राद्ध
09 अक्टूबर - एकादशी श्राद्ध
11 अक्टूबर - द्वादशी श्राद्ध
12 अक्टूबर - त्रयोदशी श्राद्ध
13 अक्टूबर - चतुर्दशी श्राद्ध
14 अक्टूबर - सर्व पितृ अमावस्या

पितृपक्ष श्राद्ध 2024 - 17 सितंबर, 2024, मंगलवार, तिथि भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होकर 2 अक्टूबर, 2024, बुधवार, सर्...
29/07/2024

पितृपक्ष श्राद्ध 2024 - 17 सितंबर, 2024, मंगलवार, तिथि भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होकर 2 अक्टूबर, 2024, बुधवार, सर्व पितृ अमावस्या, तिथि अश्विन, कृष्ण अमावस्या को समाप्त होगा। https://www.gayatobodhgaya.com/pind-daan-packages.html

पितृ पक्ष 2023: श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां29 सितंबर - पूर्णिमा श्राद्ध30 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध , द्वितीया श्राद्ध...
27/09/2023

पितृ पक्ष 2023: श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां
29 सितंबर - पूर्णिमा श्राद्ध
30 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध , द्वितीया श्राद्ध
01 अक्टूबर - तृतीया श्राद्ध
02 अक्टूबर - चतुर्थी श्राद्ध
03 अक्टूबर - पंचमी श्राद्ध
04 अक्टूबर - षष्ठी श्राद्ध
05 अक्टूबर - सप्तमी श्राद्ध
06 अक्टूबर - अष्टमी श्राद्ध
07 अक्टूबर - नवमी श्राद्ध
08 अक्टूबर - दशमी श्राद्ध
09 अक्टूबर - एकादशी श्राद्ध
11 अक्टूबर - द्वादशी श्राद्ध
12 अक्टूबर - त्रयोदशी श्राद्ध
13 अक्टूबर - चतुर्दशी श्राद्ध
14 अक्टूबर - सर्व पितृ अमावस्या

Pitru Paksha 2023: हिंदू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति के लिए साल में 16 दिन तक श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, इस पखवाड़े...
05/07/2023

Pitru Paksha 2023: हिंदू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति के लिए साल में 16 दिन तक श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, इस पखवाड़े को पितृ पक्ष कहा जाता है. पितृ पक्ष में वंशज अपने पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए पिंड दान (Pind Daan) और तर्पण (Tarpan) करते हैं.
इस साल पितृ पक्ष 29 सितंबर 2023 से शुरू हो रहे हैं इसका समापन 14 अक्टूबर 2023 को होगा. पितृ पक्ष हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से अश्विन माह की अमावस्या तक चलता है, इसे सर्व पितृ अमावस्या और महालय अमावस्या कहते हैं.मान्यता है कि यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष है तो पितृ पक्ष में इस दोष से मुक्ति पाने के सबसे श्रेष्ठ समय है. आइए जानते हैं इस बार पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहे हैं, श्राद्ध की सभी तिथियों की डेट और महत्व.

पितृ पक्ष में कब करें श्राद्ध ? (Pitru Paksha Shradha)

पितृ पक्ष में पूर्वजों की मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है. जिस तिथि को पितर की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि को उस पितर के नाम से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जाता है. अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु तिथि पता न हो तो ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करना चाहिए.

पित पृक्ष 2023 श्राद्ध तिथियां (Pitru Paksha 2023 Tithi)

पूर्णिमा का श्राद्ध - 29 सितंबर 2023 (शुक्रवार)
प्रतिपदा का श्राद्ध - 29 सितंबर 2023 (शुक्रवार)
द्वितीया का श्राद्ध - 30 सितंबर 2023 (शनिवार)
तृतीया का श्राद्ध - 1 अक्टूबर 2023 (रविवार)
चतुर्थी का श्राद्ध - 2 अक्टूबर 2023 (सोमवार)
पंचमी का श्राद्ध - 3 अक्टूबर 2023 (मंगलवार)
षष्ठी का श्राद्ध - 4 अक्टूबर 2023 (बुधवार)
सप्तमी का श्राद्ध - 5 अक्टूबर 2023 (गुरुवार)
अष्टमी का श्राद्ध - 6 अक्टूबर 2023 (शुक्रवार)
नवमी का श्राद्ध - 7 अक्टूबर 2023 (शनिवार)
दशमी का श्राद्ध - 8 अक्टूबर 2023 (रविवार)
एकादशी का श्राद्ध - 9 अक्टूबर 2023 (सोमवार)
मघा श्राद्ध - 10 अक्टूबर 2023 (मंगलवार)
द्वादशी का श्राद्ध - 11 अक्टूबर 2023 (बुधवार)
त्रयोदशी का श्राद्ध - 12 अक्टूबर 2023 (गुरुवार)
चतुर्दशी का श्राद्ध - 13 अक्टूबर 2023 (शुक्रवार)
सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या - 14 अक्टूबर 2023 (शनिवार)

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श्रावण पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गयापाल ब्राह्मणों के द्वारा भगवान विष्णुपद वेदी का अन्न श्रृंगार किया गया वा फल्गु महाआरत...
23/08/2021

श्रावण पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गयापाल ब्राह्मणों के द्वारा भगवान विष्णुपद वेदी का अन्न श्रृंगार किया गया वा फल्गु महाआरती का आयोजन फल्गु सेवा समिति गयापाल द्वारा

श्री विष्णुपद पूर्णिमा महा श्रीनगार । गुरु पूर्णिमा दिनांक २४ जुलाई २०२१ ।
25/07/2021

श्री विष्णुपद पूर्णिमा महा श्रीनगार । गुरु पूर्णिमा दिनांक २४ जुलाई २०२१ ।

16/03/2020

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23/09/2018

Shradh 2018 will commence on 24th September, 2018 and end on 8th October, 2018. Here are the details of the 15-day period.

24th September, 2018- Purnima Shradh
25th September, 2018- Pratipada Shradh
26th September, 2018- Dwitiya Shradh
27th September, 2018- Tritiya Shradh
28th September, 2018- Maha Bharani, Chaturthi Shradh
29th September, 2018- Panchami Shradh
30th September, 2018- Shashthi Shradh
1st October, 2018- Saptami Shradh
2nd October, 2018- Ashtami Shradh
3rd October, 2018- Navami Shradh
4th October, 2018- Dashami Shradh
5th October, 2018- Ekadashi Shradh
6th October, 2018- Magha Shradh, Dwadashi Shradh
7th October, 2018-Trayodashi Shradh, Chaturdashi Shradh
8th October, 2018- Sarva Pitru Amavasya

Shradh 2018 or Pitru Paksha will commence on 24th September and end on 8th OctoberShradh 2018: Pitru Paksha CalendarShra...
23/09/2018

Shradh 2018 or Pitru Paksha will commence on 24th September and end on 8th October
Shradh 2018: Pitru Paksha Calendar
Shradh 2018 will commence on 24th September, 2018 and end on 8th October, 2018. Here are the details of the 15-day period.

24th September, 2018- Purnima Shradh
25th September, 2018- Pratipada Shradh
26th September, 2018- Dwitiya Shradh
27th September, 2018- Tritiya Shradh
28th September, 2018- Maha Bharani, Chaturthi Shradh
29th September, 2018- Panchami Shradh
30th September, 2018- Shashthi Shradh
1st October, 2018- Saptami Shradh
2nd October, 2018- Ashtami Shradh
3rd October, 2018- Navami Shradh
4th October, 2018- Dashami Shradh
5th October, 2018- Ekadashi Shradh
6th October, 2018- Magha Shradh, Dwadashi Shradh
7th October, 2018-Trayodashi Shradh, Chaturdashi Shradh
8th October, 2018- Sarva Pitru Amavasya

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पितृपक्ष 2018: श्राद्ध में भूलकर भी न करें 5 गलतियां पूर्णिमा से अमावस्या के ये 15 दिन पितरों को कहे जाते हैं। इन 15 दिन...
21/09/2018

पितृपक्ष 2018: श्राद्ध में भूलकर भी न करें 5 गलतियां

पूर्णिमा से अमावस्या के ये 15 दिन पितरों को कहे जाते हैं। इन 15 दिनों में पितरों को याद किया जाता है और उनका तर्पण किया जाता है। इस साल 24 से 8 अक्टूबर तक हैं। पितरों को खुश रहने के लिए श्राद्ध के दिनों में विशेष कार्य करना चाहिए वही इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

1. श्राद्ध करने के लिए ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे शास्त्रों में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो ज्येष्ठ पुत्र या कनिष्ठ पुत्र और अगर पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान देने के पात्र होते हैं।

2. पितरों के निमित्त सारी क्रियाएं गले में दाये कंधे मे जनेउ डाल कर और दक्षिण की ओर मुख करके की जाती है।

3. कई ऐसे पितर भी होते है जिनके पुत्र संतान नहीं होती है या फिर जो संतान हीन होते हैं। ऐसे पितरों के प्रति आदर पूर्वक अगर उनके भाई भतीजे, भांजे या अन्य चाचा ताउ के परिवार के पुरूष सदस्य पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर पिंडदान, अन्नदान और वस्त्रदान करके ब्राह्मणों से विधिपूर्वक श्राद्ध कराते है तो पितर की आत्मा को मोक्ष मिलता है।

4. श्राद्ध के दिन लहसुन, प्याज रहित सात्विक भोजन ही घर की रसोई में बनना चाहिए। जिसमें उड़द की दाल, बडे, चावल, दूध, घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी जैसे तोरई, लौकी, सीतफल, भिण्डी कच्चे केले की सब्जी ही भोजन में मान्य है। आलू, मूली, बैंगन, अरबी तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों को नहीं चढ़ती है।

5. श्राद्ध का समय हमेशा जब सूर्य की छाया पैरो पर पड़ने लग जाए यानी दोपहर के बाद ही शास्त्र सम्मत है। सुबह-सुबह अथवा 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुंचता है।

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