19/08/2022
विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
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आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है।सभी सनातन धर्मावलंबियों के घर इस पावन त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।प्रसाद के रूप में अनेक तरह के पक्वान्न बनते हैं।भगवान श्रीकृष्ण का भव्य श्रृंगार किया जाता है।अर्द्ध्यरात्रि में श्रीराधामाधव का जन्मोत्सव मनाकर प्रसाद भी ग्रहण किया जाता है।कुछ लोग अपने बच्चों को बालकृष्ण के रूप में भी सजाकर समाज के बीच उपस्थित कर खूब वाहवाही लूटते हैं।कई संस्थाओं के द्वारा आज के दिन बालकृष्ण प्रतियोगिता का आयोजन कर सर्वाधिक सुंदर साज सज्जा वाले श्री कृष्ण रूपधारी बच्चों को पुरस्कृत भी करते हैं।मंदिरों में खूब ढोल नगाड़े बजते हैं।जयकारे भी लगाये जाते हैं।बावजूद इन समस्त क्रियाकलापों के किसी ने भी यह जानने या जानकर सामाजिकों को यह बताना उचित नहीं समझा कि आखिर परमेश्वर इस धराधाम पर मानव रूप में अवतरित क्यों होते हैं?इसी आशय को स्पष्ट करने के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने नाना पुराण निगमागमो का सांगोपांग अध्ययन चिंतन मनन के उपरांत यह निष्कर्ष दिया कि ..."विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार"।अर्थात जब जब पृथ्वी पर अत्याचार का वातावरण बढ़ता है,विशेष प्रज्ञावान पुरुष भी जब किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में आ जाते हैं,किंपुरुष सा आचरण करने लगते हैं,गौयें,पृथ्वीमाता आदि की चित्कार अनसुनी की जाने लगती है,देवताओं से मानव विमुख होने लगता है,संतों की वाणी कर्णरंध्रों में विष घोलने लगती हैं तब समाज हित में परमेश्वर मानव रूप में अवतरित होकर रक्षात्मक कार्य में संलग्न होते हैं।महर्षि वेदव्यास ने भी इसी ओर संकेतित कर श्रीमद्भगवद्गीता में बताया कि "यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।
परित्राणाय साधुनाम् विनाशाय च दुस्कृताम्
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।"अर्थात् जब जब भी सृष्टि में धर्म का ह्रास होने लगेगा,सज्जनों संतों पर अत्याचार अनाचार के माध्यम प्रहार होगा तब तब हर युग में म़ैं मानव रूप में अवतरित होकर धर्म की रक्षा का कार्य करूँगा।श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रतिवर्ष मनाने के पीछे भी यही उद्देश्य छिपा होता है कि हम इनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लें और समाज में हो रहे अत्याचार अनाचार के विरुद्ध अपनी वाणी मुखरित करें।स्वयम् के संबंधियों को भी अनैतिक कार्यों में सहयोग न दें।आवश्यता पड़े तो उनका परित्याग करने में भी देर न करें।जैसा श्री दामोदर ने अपने सगे मामा कंस के साथ किया।श्री कृष्ण जन्मोत्सव सिर्फ एक उत्सव नहीं अपितु हमारे लिये एक संदेश है कि हम भी इनकी तरह अपना आचरण करें,गलत के लिये मुखरित हों।
वंदे कृष्णं जगद्गुरुं।...मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।