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हमलोग गुर्दा परिवार से हैं और पीढ़ियों से विष्णु-मंदिर के पुजारी के रूप सेवा करते आ रहे है | इसके साथ हमलोग सभी प्रकार के श्राद्ध-कर्मा, पिंडदान,पितृदोष-निबारण के साथ तुलसी-पुजा और भगवान-विष्णु पुजा के अनको प्रकार को सफलता से करवाते है I

11/09/2017

गया : बिहार के गया जिले में चल रहे पितृपक्ष मेले में रूस, स्पेन और जर्मनी से आये विदेशी भी पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान और तर्पण करेंगे. शुक्रवार को विष्णुपद के देव घाट पर विदेशी पर्यटकों ने अपने पितरों की आत्मा की

11/09/2017

गया : पितृमुक्ति की कामना काे लेकर देश के काने-काेने से ही नहीं, बल्कि देश की सीमा पार के लाेग भी अपने पितराें का श्राद्ध कर्म के निमित्त गयाधाम पहुंचे हैं. 17 दिनी श्राद्ध कर्म पर गयाधाम पहुंचे लाेगाें काे छाेड़ एक दिनी, तीन दिवसीय, पांच दिवसीय

पितृ तर्पण के लिए यदि आपके पास धन-दौलत, सोना-चांदी नहीं है तो अपनी दोनों भुजाओं को सूर्य देवता की ओर उठाकर कह देना चाहिए...
08/09/2017

पितृ तर्पण के लिए यदि आपके पास धन-दौलत, सोना-चांदी नहीं है तो अपनी दोनों भुजाओं को सूर्य देवता की ओर उठाकर कह देना चाहिए कि हमारे पास श्राद्ध के जरुरी की चीज़ें नहीं है अत: मैं अपने पितरों को प्रणाम करता हूं, वे मेरी भक्ति से ही तृप्त हों।

08/09/2017

हमारे पौराणिक किताबों और ग्रन्द्थों में अलग अलग किये जाने वाले विभिण प्रकार के श्राद्धो का उलेख किया गया है |
1.नित्य श्राद्ध - प्रत्येक दिन किये जाने वाले श्राद्ध को "नित्य-श्राद्ध" कहते हैं।
2.नैमितिक श्राद्ध - वार्षिक तिथि पर किए जाने वाले "श्राद्ध नैमित्तिक-श्राद्ध" कहलाता है ।
3.काम्य श्राद्ध - किसी कामना के लिए "काम्य-श्राद्ध" किया जाता है ।
4.नान्दी श्राद्ध - किसी मांगलिक अवसर पर किए जाने वाले श्राद्ध "नान्दी-श्राद्ध" होता है ।
5.पार्वण श्राद्ध - निश्चित समय जैसे की पितृपझ मेला पर किए जाने वाले श्राद्ध को "पार्वण-श्राद्ध" कहलाता है ।
6.सपिण्डन श्राद्ध - त्रिवार्षिक श्राद्ध जिसमें प्रेतपिण्ड का पितृपिण्ड में सम्मिलन कराया जाता है, स"पिण्डन-श्राद्ध" कहलाता है।
7.गोष्ठी श्राद्ध - गौत्र,जाती और जाती के लिए "गोष्ठी-श्राद्ध"करते हैं |
8.शुद्धयर्थ श्राद्ध - स्वयं शुद्धि के साथ -२ ब्राह्मण-भोज हेतु "शुद्धयर्थ- श्राद्ध" किया जाता है ।
9.कर्मांग श्राद्ध - षोडष संस्कारों के निमित्त जो श्राद्ध किया जाता है उसे "कर्मांग- श्राद्ध" कहते हैं।
10.दैविक श्राद्ध - देवताओं के निमित्त जो श्राद्ध किया जाता है उसे "दैविक- श्राद्ध" कहते हैं।
11.यात्रार्थ श्राद्ध - तीर्थ स्थानों में किये जाने वाले "यात्रार्थ-श्राद्ध" कहलाता है।
12.पुष्ट्यर्थ श्राद्ध - स्वयं एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि व उन्नति के लिए "पुष्ट्यर्थ- श्राद्ध" किया जाता है ।

08/09/2017

श्राद्ध - तर्पण की तिथियां और कार्यकर्म :-
5 सितंबर दिन मंगलवार को श्राद्ध पूर्णिमा - तीर्थपुरोहित पण्डाजी का चरण पूजा पुनपुन, गोदावरी श्राद्ध
6 सितंबर दिन बुधवार को प्रतिपदा श्राद्ध होगा - फलगु स्नान श्राद्ध, तीर्थपुरोहित पण्डाजी का चरण पूजा खीर का पिण्डा
7 सितंबर दिन गुरुवार द्वितीया श्राद्ध - ब्रह्मकुण्ड जौ चुर्णश्राद्ध, प्रेतशिला, रामशिला, रामकुण्डश्राद्ध, काकबलि तीन पिण्ड
8 सितंबर दिन शुक्रवार तृतीया श्राद्ध - पंचतीर्थ उत्तम मानस, उदीची, कनखल, दक्षिणामानस, जिव्हालोल श्राद्ध, गजाधर जी का पंचामृत स्नान
9 सितंबर दिन शनिवार चतुर्थी श्राद्ध - सरस्वती स्नान पंचरत्न दान, मातंग़वापी श्राद्ध, धर्मारण्यकूप के मध्य श्राद्ध
10 सितंबर दिन रविवार पंचमी श्राद्ध - ब्रह्मसरोवर, काकबलि श्राद्ध, अम्रसिंचन
11 सितंबर दिन सोमवार षष्ठी श्राद्ध - विष्णुपद, ब्रह्मपद, रूद्रपद श्राद्ध, तीर्थपुरोहितजी पंण्डाजी का पांव पूजा
12 सितंबर दिन मंगलवार सप्तमी श्राद्ध - कार्तिकपद, दक्षिणाग्निपद, गार्हपत्याग्निपद, आहवनीयाग्निपद, सुर्यपद, चन्द्रपद गणेशपद, संध्याग्निपद श्राद्ध
13 सितंबर दिन बुधवारअष्टमी श्राद्ध - आवसंध्याग्निपद, दधिचीपद, कण्वपद, मातंगपद, कौंचपद, अगस्तपद, इन्द्रपद, कश्यपद अधिकरणपद दूध तर्पण अन्नदान
14 सितंबर दिन गुरुवार नवमी श्राद्ध - रामगया श्राद्ध, सीताकुण्ड बालु का पिण्ड तीर्थ पुरोहित जी का चरण पूजा , सौभाग्यदान
15 सितंबर दिन शुक्रवार दशमी श्राद्ध - गया सिर, गया कूप श्राद्ध
16 सितंबर दिन शनिवार एकादशी श्राद्ध - मुण्डपृष्ठ, आदिगदाधर, धौतपद श्राद्ध एवं चाॅंदी दान
17 सितंबर दिन रविवार द्वादशी श्राद्ध त्रयोदशी श्राद्ध - भीम गया, गौप्रचार, गदालोल श्राद्ध एवं सोना दान
18 सितंबर दिन सोमवार चतुर्दशी श्राद्ध - विष्णुपद तर्पण संध्या में दीप दान
19 सिंतबर दिन मंगलवार सर्व पितृ अमावस्या - वैतरणी तर्पण, गोदान(यह 19 सितंबर से शुरू होकर 20 सितंबर को दोपहर 11.15 बजे तक रहेगी)
20 सिंतबर दिन बुधवार कृष्णपक्ष अमावस्या - अक्षयवट श्राद्ध खीर का पिण्ड
21 सिंतबर दिन बुधवार आश्विन शुक्लपक्ष 1 प्रतिपदा - गायत्रीघाट दही का पिण्ड आचार्य का दक्षिणा विदाई

पूर्णिमा से अमावस्या के ये 15 दिन पितरों के लिए जाना जाता हैं | इन 15 दिनों में हम पूर्वजो को याद करते है और उनका तर्पण करते हैं उनके आत्मा को शांति प्रदान करते हैं |

👏👏 संस्कृतियों के लिये संगम पितृपझ महासंगम 👏👏सनातन परम्परा के अनुसार पितरों की शांति एवं मुक्ति के लिए आस्विन महीने के क...
07/09/2017

👏👏 संस्कृतियों के लिये संगम पितृपझ महासंगम 👏👏
सनातन परम्परा के अनुसार पितरों की शांति एवं मुक्ति के लिए आस्विन महीने के कृष्ण पझ (पितृपझ ) पिंडदान का अतयन्त महत्व है | इस अवसर पर देश-विदेश से हिंदू धर्मालम्बी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतू गया आकर तर्पण करते हैं | जो मुख्तः तीन स्थलों - फल्गु नदी के तट पे ,विष्णुपत मंदिर में ,अझयवट के नीचे किया जाता है ..

गया जी - कल उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया पितृपक्ष मेले का उद्घाटन किया गया
06/09/2017

गया जी - कल उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया पितृपक्ष मेले का उद्घाटन किया गया

पितृपक्ष मेला का कल यानि से 05 सितम्बर 2017 को शुरूआत हो गई है और 20 सितम्बर, 2017 को समाप्त होगा.....
06/09/2017

पितृपक्ष मेला का कल यानि से 05 सितम्बर 2017 को शुरूआत हो गई है और 20 सितम्बर, 2017 को समाप्त होगा.....

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