04/10/2026
" क्या आप त्रिभंग मुद्रा में खड़ी इस रहस्यमयी चतुर्भुज मदनिका की आँखों में छिपे 900 साल पुराने राज़ को पढ़ सकते हैं? प्राचीन कारीगरी के इस जीवित चमत्कार को देखें, जहाँ हर बारीकी एक भूली-बिसरी कहानी कहती है।"
यह जटिल नक्काशी कर्नाटक के हासन जिले में स्थित ऐतिहासिक शहर बेल्लूर के प्रसिद्ध चेन्नाकेशव मंदिर के एक पिलर (स्तंभ) पर बनी हुई है। यह मंदिर होयसल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
आपके विचार को सुधारते हुए, यह चार हाथों वाली (चतुर्भुज) प्रतिमा है। यह एक 'मदनिका' या 'शालभंजिका' की प्रतिमा है। होयसल मंदिरों में मदनिकाएं दिव्य या अर्ध-दिव्य सौंदर्य, कला, और स्त्रीत्व का प्रतीक हैं। चूँकि इसके एक हाथ में दर्पण (शीशा) है, इसलिए इसे 'दर्पण मदनिका' कहा जा सकता है, जो सौंदर्य और आत्म-प्रतिबिंब का प्रतीक है।
चेन्नाकेशव मंदिर का निर्माण होयसल राजा विष्णुवर्धन द्वारा 1117 ईस्वी में शुरू किया गया था। इसलिए, यह नक्काशी लगभग 12वीं शताब्दी की है, जो इसे लगभग 900 साल पुराना बनाती है।