Shri Hari Dham Bandh Trust Samiti - श्री हरिबाबा बांध धाम

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Shri Hari Dham Bandh Trust Samiti  - श्री हरिबाबा बांध धाम श्री 1008 हरि बाबा जी महाराज को समर्पित (?

परम आदरणीय महाराज जी के विषय में कौन नहीं जानता है वे सेतु हैं जीव को राम तक पहुंचानें का वे हित चिंतन हैं जीव मात्र का वे प्राण हैं खादर के वे भगवान हैं मेरे| परम आदरणीय श्री श्री १००८ श्री हरि बाबा जी महाराज के भक्तिभाव कर्तव्यनिष्ठा और दीनों पर कृपा के भाव के प्रति जितना कहा जाए कम है मेरी सामर्थ्य बूँद के उल्लेख की भी नहीं और महाराज जी तो सागर से भी अधिक विस्तृत हैं ।। बाबा स्वयं ईश्वर का अवतार हैं जो शरीर मै हम खादरवासियों का कल्याण करनें हेतु आए ।। बाबा का मूल नाम श्री श्री १००८
श्री दीवान सिंह जी था परन्तु वे हरी नाम का इतना अधिक जप सुमिरण , संकीर्तन करते थे की उनका नाम परम आदरणीय श्री श्री १००८ श्री हरि बाबा जी महाराज पड़ गया ।। बाबा की सहस्रों उपलब्धियों में से एक है बाँध धाम ।। गंगा नदी में बाढ़ आने पर 700 ग्राम जलमग्न हो गए जिस घटना नें कोमल हृदय श्री हरि बाबा जी महाराज को अंदर तक हिला दिया और तब उन्होंने संकल्प लिया और बिना किसी सरकारी सहायता के गंगा नदी पर 45 किलोमीटर लम्बा बाँध केवल सत्संग के आधार पर बना दिया ।। इस में उन्होंने गरीबों से श्रम दान लिया था यह चमत्कार केवल बाबा ही कर सकते थे।। और इस बाँध पर पैंतालीस वर्ष से आज भी अनवरत अखंड हरि नाम संकीर्तन चल रहा है ।। शायद ही विश्व मै एसा कोई दूसरा पावन धाम हो जहाँ 45 वर्ष से अनवरत हरिनाम आनंद वर्षा हो रही हो | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।


महान संत प्रातः स्मरणीय श्री श्री 1008 हरि बाबा जी महाराज को समर्पित ।

32 मील लम्बे बांध का निर्माण मात्र ६ महीने में अपने आप में चमत्कारिक बात है ! पूज्य उड़िया बाबा जी, श्री हरि और माँ आनंदमयी ने अनेको लीलाएं करीं, जिनका बर्णन हम इस पेज के माध्य्यम से बताने का प्रयास कर रहें हैं !
श्री हरि की अनेको भक्त और उनके मंदिर निम्नप्रकार हैं !

1. श्री हरिबाबा मंदिर, हरिनगर - होशियारपुर, पंजाब
2. श्री हरिबाबा बांध धाम, गवां जिला संभल - उत्तरप्रदेश
3. श्री हरिबाबा मंदिर, दावानल कुण्ड, वृन्दावन -उत्तरप्रदेश
4. श्री हरिबाबा आश्रम, शिवपुरी - बरेली - उत्तरप्रदेश
5. श्री हरिबाबा मंदिर, चंदौसी जिला संभल -उत्तरप्रदेश
6. श्री हरिबाबा मंदिर, ग्राम कैल - जिला संभल - उत्तरप्रदेश
7. श्री हरिबाबा मंदिर रामनगर - उत्तराखंड

26/08/2026

प्रातः मंगला आरती

25/08/2026

तू मालिक मैं तेरा नौकर

25/08/2026

प्रभु 💞

कभी-कभी मौन पराजय नहीं होता, तैयारी होता है, इंतजार करना चाहिए उस अवसर का, जब शब्दों की नहीं, व्यक्तित्व की ज़रूरत हो!
25/08/2026

कभी-कभी मौन पराजय नहीं होता, तैयारी होता है,
इंतजार करना चाहिए उस अवसर का,
जब शब्दों की नहीं, व्यक्तित्व की ज़रूरत हो!

24/08/2026

बोलो बाबा बाबा

पुस्तक : ब्रजनुरागी श्रीघनश्यामदास जी ठाकुरश्री हरि           एकबार पूज्य महाराजजी को पूज्य श्रीहरिबाबा महाराजजी के दर्श...
23/08/2026

पुस्तक : ब्रजनुरागी श्रीघनश्यामदास जी ठाकुर

श्री हरि
एकबार पूज्य महाराजजी को पूज्य श्रीहरिबाबा महाराजजी के दर्शन करने की इच्छा हुई। पता चला कि वे दिल्ली में पूज्या आनन्दमयी माँ के नवनिर्मित मन्दिर के उद्घाटन में सम्मिलित होने गए हुये हैं। बिना किसी पूर्व योजना के पूज्य महाराजजी, श्रीठाकुरजी को लेकर दिल्ली चल पड़े। आश्रम का पता ज्ञात न होने से दिनभर इधर-उधर ढूँढते हुए काफी थक गये थे। रात्रि भी हो चुकी थी। श्रीठाकुरजी, पूज्य महाराजजी को विश्राम हेतु दिल्ली के बिड़ला मन्दिर में ले गये। बिड़ला मन्दिर के मैनेजर श्रीठाकुरजी के पूर्व परिचित थे। वहीं पर माँ आनन्दमयी के नवनिर्मित मन्दिर 'चन्द्रलोक' के उद्घाटन सम्बन्धी सूचना का बोर्ड दिखाई दिया जिसमें पूज्या आनन्दमयी माँ के आश्रम का पता लिखा था। पता ज्ञात होते ही श्रीमहाराजजी तुरन्त बिना विश्राम किए चल पड़े। गन्तव्य स्थान पर पहुँचे तो देखा कि पूज्य हरिबाबा प्रवचन कर रहे हैं। उनको देखकर श्रीमहाराजजी बोले-'इनके तेजपुञ्ज मुख को तो देखो! हमारी सम्पूर्ण थकावट इनके दर्शन मात्र से दूर हो गई।' सत्संग के पश्चात् जब दोनों महापुरुषों का परस्पर मिलन हुआ। दोनों ही संत लगभग पन्द्रह मिनट तक एकदूसरे का हाथ पकड़े हुए परस्पर एकटक देखते रहे। श्रीठाकुरजी इन दोनों के मध्य उनके परस्पर मिले हुए हाथों को अपने हाथ में लेकर आत्मविस्मृत से खड़े रहे। पुनः जब सचेत हुए और काफी देर तक दोनो संतो को भावगम्भीर दशा में देखा तो उन्हें सामान्य अवस्था में लाने के उद्देश्य से दोनों संतो के चरण स्पर्श किए। सहज होने पर पूज्य हरिबाबा इतना ही बोले-'श्री महाराजजी तो मूर्तिमान रस रूप हैं। इनमें इतनी सरलता है। इनके लिए मै कह ही क्या सकता हूँ। वृन्दावन से यहाँ मुझसे मिलने आए। मैं तो वृन्दावन आ ही रहा था।'

दूसरे दिन पूज्य महाराजजी व श्रीठाकुरजी ने दिल्ली के कई स्थानों में भ्रमण किया। श्रीठाकुरजी के पास के सब पैसे खर्च हो गये। देर भी काफी हो चुकी थी और भूख भी लग आई थी। श्रीठाकुरजी ने महाराजजी से कहा कि किराए के लिए पैसे तो बचे ही नहीं हैं अब क्या होगा। वृन्दावन कैसे पहुँचेंगे! पूज्य महाराजजी इनकी बात सुनकर मुस्कराए और कहा-'श्रीकृष्ण पर विश्वास रखिए वे ही कोई व्यवस्था करेंगे।' उनका इतना कहना ही था कि उसी समय एक सज्जन पूज्य महाराजजी के पास आए उन्होंने पूर्व में श्रीमहाराजजी को वृन्दावन में देखा था। वे बोले-'महाराजजी आप यहाँ कैसे? आप यहाँ आए हैं तो कृपा करके पास में ही मेरी दुकान में पधारें।' ये दोनों लोग उनके साथ चल दिए। अपनी दुकान ले जाकर उन सज्जन ने बड़े ही आदरपूर्वक स्वल्पाहार कराया। बाद में टिकट खरीदकर उन्हें वृन्दावन की बस में बैठा दिया। एकदम सहजरूप से घटित हुई इस योगक्षेम की घटना को देखकर श्रीठाकुरजी को बड़ा आश्चर्य हुआ।

23/08/2026

हरि बोल

22/08/2026

श्री राजेन्द्र दस महाराज जी द्वारा एक और विलक्षण कथा 🙏🏻

जहां जैसी जरूरत हो वहां वैसे बन जाओ .....कभी एकदम शांत, तो कभी बहुत स्ट्रांग !यही बात हनुमान चालीसा में भी बहुत खूबसूरती...
22/08/2026

जहां जैसी जरूरत हो वहां वैसे बन जाओ .....
कभी एकदम शांत, तो कभी बहुत स्ट्रांग !
यही बात हनुमान चालीसा में भी बहुत खूबसूरती से लिखी है

सूक्ष्म रूप धरी सियहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा..!

22/08/2026

आया तेरी शरण में

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