15/01/2022
आज ही के दिन 14 जनवरी 1761 पानीपत की तीसरी जंग लड़ी गयी। इस जंग से पहले सदाशिवराव भाऊ ने पुराने मुग़ल सेनापति इमाद-उल-मुल् के साथ मिलकर मुग़ल सेनापति नजीब खान यूसुफजई (नजीबुद्दोला) की हरा दिया और जंग के बाद इमाद-उल-मुल्क ने धोखे से मुग़ल बादशाह आलमगीर को कोटला फ़तह शाह में क़त्ल कर दिया।
दिल्ली के ख़स्ता हाल देखकर शाह वलीउल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह एलैह ने आलमगीर के समधी अहमद शाह अब्दाली को खत लिख दिया और पुराने मुग़ल कमांडरों को फिर से इकट्ठा किया जिसमे पुराने मुग़ल सेनापति रोहिलखण्ड के हाफिज रहमत खान और नजीबुद्दौला मुख्य थे।
शाह वलीउल्लाह देहलवी का खत मिलते ही अहमद शाह अब्दली ने दिल्ली का रुख किया और पानीपत की तीसरी जंग हुई। अब्दाली की तरफ से हाफिज रहमत खान और नजीबुद्दौला थे जबकि मराठों की तरफ से बांदा के नवाब शमशेर अली बहादुर और इब्राहिम खान गर्दी थे जबकि जाट और राजपूतों राजाओं ने इस जंग में मराठो के साथ नही दिया इस जंग से दूरी बनाए रखी।
अब्दाली की तरफ से सबसे ज़्यादा नुकसान हाफ़िज़ रहमत खान की सेना को हुआ, इब्राहिम खान गर्दी ने तोपों के साथ सेना की एक टुकड़ी लेकर हाफ़िज़ रहमत खान की सेना पर हमला कर काफ़ी नुकसान पहुंचाया था। सदाशिवराव भाऊ ने अब्दली की पहली घेराबंदी लगभग तोड़ दी थी। अभी तक अब्दाली ने अपने सैनिकों का इस्तेमाल नही किया था सदाशिवराव को आगे बढ़ता देख अब्दाली ने अपनी सेना के घुड़सवार लड़ाकों की फौज को आगे बढ़ाया और कमज़ोर पड़ रही सेना को कवर किया और तेज़ी से मराठा सेना पर हमला कर के पीछे ढकेल दिया।
लंबी घेराबंदी के बाद मराठा सेना सैनिक बिखरने लगे सैनिकों को बिखरता देख सेना को सम्भालने के लिए सदाशिवराव भाऊ हाथी से उतरकर ज़मीन पर आ गए और रड़नीति के तहत अफगानी पगड़ी पहन कर सेना की एक टुकड़ी के साथ अब्दाली पर काउंटर अटैक करना चाहते थे
लेकिन उनकी ये राड़नीति क़ामयाब नही हुई अब्दली सेना की एक टुकड़ी ने दूसरी तरफ से हमला कर दिया। जिस वजह से वजह से मराठा सेना दोबारा नही संभल पाई। सदाशिवराव भाऊ शाही हांथी से उतर चुके थे लेकिन रोहिल्ला राइफ़ल की गोली लगी और मारे गए। बाकी बचे हुए मराठा सैनिक भी बड़ी तादाद में मारे गए या उन्हें बंदी बना लिया गया, जो बचे वो वापस पुणे चले गए और इतिहास की एक बड़ी जंग का अंत हो गया।