Asharam Bapuji Is God&

Asharam Bapuji Is God& Asharam Bapuji Is Profile... God Of Hindu Sant
$ # # #** Guru Is God $ # # #**

22/12/2013

लोग कहते हे कि साई बाबा थे , स्वामी समर्थ थे ,
विवेकानंद थे , रामकृष्ण थे , भगवान् कृष्ण थे , भगवान् राम
थे , तुकाराम थे , ज्ञानेश्वर थे , नामदेव थे , एकनाथ थे ,
लेकिन मै कहता हु की आसाराम बापू जी हे और मैंने
उनको देखा हे.. मैंने उनको सुना हे। … मैंने
उनका कृपा प्रसाद पाया हे....... कितना बड़ा सौभाग्य हे मेरा। …… हरी हरी ॐ

17/12/2013
01/12/2013

aaj news me aaya ki es sare mamle me narayan sai ka hath h kyoki narayan sai bapuji ki smpti lene ke liye .......kya aapko lgta h ?
esme sara hath narayan sai ka h?

28/11/2013

Lie exposed 9 साल पहले कितने गंदे तरीके से बदनाम किया था इस मीडिया ने। लेकिन आज सच सबके सामने है कितने जैल में रहना पड़ा था शंकराचार्य जी को
आज मीडिया का मुह काला हुआ ----

शंकररमन हत्‍याकांड में शंकराचार्य समेत सभी आरोपी बरी---

पुड्डुचेरी की अदालत ने कांचीपुरम शंकररमन हत्‍याकांड मामले में कांचीमठ के शंकराचार्य और उनके सहयोगी को बरी कर दिया है. साथ ही इस मामले के सभी आरोपियों को अदालत ने निर्दोष करार दिया है. इस सनसनीखेज मर्डर केस में कांचीमठ के शंकराचार्य और उनके सहयोगी मुख्य आरोपी थे.
नौ साल से ज्‍यादा समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद पुड्डुचेरी के मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीएस मुरुगन ने निर्णय सुनाया.

28/11/2013

'हम राम के थे, राम के हैं और राम के ही रहेंगे। ॐ राम..... ॐ राम.... ॐ राम....।'
कोई भी चिन्ता किये बिना जो प्रभु में मस्त रहता है वह सहनशील है, वह साधुबुद्धि है।

23/11/2013

जिसने केवल जगत की वृत्ति बनायीं उसको भगवन की तरफ वृत्ति थाम्ब्नी पड़ती है ! उसको ध्यान, भजन करके वृत्ति वहा रखनी पड़ती है , अगर ध्यान भजन छोड़ देगा तो वृत्ति वापिस निचे आजायेगी !
जिसने ब्रम्हाभ्यास की वृत्ति की सिचाई कर दी है , हरा भरा होगया है ब्रम्हज्ञान से चित्त , फिर उसको लाओ संसार में कोई फरक नहीं पड़ता है .............................. पूज्य बापूजी नमः शिवाये !

02/11/2013

पूज्यश्री का संदेश .~. पूज्यश्री का संदेश .~. पूज्यश्री का संदेश

"यह (चारित्रिक) आरोप बेबुनियाद हैं, साजिश है | मेरी सच्चाई मेरे साथ है | भारतीय संस्कृति के खिलाफ बड़ा गहरा षड्यंत्र चल रहा हैं | अत: भारत के सभी हितैषियों को एकजुट होना पड़ेगा |" - पूज्य बापूजी

(वर्ष २००४ में साधकों व देशवासियों को सचेत करते हुए पूज्य बापूजी ने अभी हो रहे षडयंत्रों की भविष्यवाणी की थी और यह संदेश दिया था | )

भारत के सभी हितैषियों को एकजुट होना पड़ेगा | भले आपसी कोई मतभेद हो किन्तु संस्कृति की रक्षा में हम सब एक हो जायें | कुछ लोग किसीको भी मोहरा बनाकर दबाव डालकर हिन्दू संतों और हिन्दू संस्कृति को उखाड़ना चाहे तो हिन्दू अपनी संस्कृति को उखड़ने नहीं देगा | वे लोग मेरे दैवी कार्य में विघ्न डालने के लिए कई बार क्या-क्या षड्यंत्र कर लेते हैं | लेकिन मैं इन सबको सहता हुआ भी संस्कृति के लिए काम किये जा रहा हूँ | स्वामी विवेकानंद ने कहा : "धरती पर से हिन्दू धर्म गया तो सत्य गया, शांति गयी, उदारता गयी, सहानुभूति गयी, सज्जनता गयी |"

हम चाहते हैं सबका मंगल हो | हम तो यह भी चाहते हैं कि दुर्जनों को भगवान् जल्दी सदबुद्धि दें, नहीं तो समाज और न्यायपालिका सदबुध्दि दे |

जो जिस पार्टी में है ...पद का महत्त्व न समझो, अपनी संस्कृति का महत्त्व समझों पद आज है, कल नहीं रहेगा | लेकिन संस्कृति तो सदियों से तुम्हारी सेवा करती आ रही है | 'ॐ' का गुंजन करों, गुलामी के संस्कार काटो !

दुर्बल जो करता है वह निष्फल चला जाता है और लानत पाता है | सबल जो कहता है वह हो जाता है और उसका जयघोष होता है | आप सबल बनो !

11/10/2013

चाहे धरती डोल जाए,
चाहे आसमान हिल जाए,
चाहे सुरज पिघल जाए,
चाहे चँद्रमा से बर्फ गिरने लगे..
दुनिया की कोई भी ताकत मेरी श्रध्दा को गुरूचरणो से
डिगा नही सकता.. कुछ लोग कहते है मुझे, तुम आसाराम बापू के चेले हो.. आज
मै छाती ठोक के कहता हुँ हाँ मै बापू का चेला हूँ और ये
मेरा परम परम सौभाग्य है...
तो क्या उखाड़ लोगे,

03/10/2013

पूज्य बापूजी ने 2004 में ही कर
दी थी भविष्यवाणी !!
बहुत पहले ही पूज्य बापूजी ने
2004 में प्रवचन के दौरान ही ये
बोल दिया था कि :
* कुप्रचार
की ऐसी आंधी जो सबको हिला कर रख
देगी l
* परीक्षा के समय पक्के शिष्य रह
जायेंगे और कच्चे शिष्य निकल
जायेंगे l
*
जिसकी श्रद्धा टिकी रही उसका बेड़
लग जाएगा l
* बाद में यही 'अपयश' अपार 'यश' में
बदल जाएगा l
भाइयों व् बहनों, ये वही समय है ,
ऐसे में हम साधकों,
शिष्यों की श्रद्धा व् विश्वास
की परीक्षा है , इसलिए हमें
अपना मनोबल ऊंचा रखना है.. और एक
दूसरे के मनोबल को बढ़ाना है !
आप सबको प्रार्थना है कि हो सके
तो इस संदेश को ज्यादा से
ज्यादा लोगो तक पहुंचाएं l
स्त्रोत: ओजस्वी भारत (सितम्बर
2013)

20/09/2013

कुछ ऐसे मनाई जोधपुर के कारावास के बाहर गुरु पूर्णिमा बापू के बच्चों ने :---
बापू के भक्तो को जग की प्रवाह नही , दुखो के आ गिरे गोले लेकिन मुख से निकलती आह नही | आज जोधपुर की जेल के बाहर सुबह से पूनम व्रत धारियों का जमावड़ा लग गया | सभी नहा धो के सुबह सुबह जेल के बाहर आ गए | ५००-६०० के करीब जब लोग आ गए तो पुलिस ने बेरिकेटिंग कर दी | और बाकी आने वाले लोगों को थोडा दूर हि रोक दिया जिससे सारी भिड गेट के बाहर हि इकट्ठी न हो जाए | बढे बूढ़े तो क्या छोटे छोटे बच्चे भी बापू के दर्शन की आस में प्रतीक्षा में पुरे दिन बैठे रहे | ६ वर्ष की बच्ची ने भी आज पुरे दिन निर्जला उपवास रखा | शाम के वक्त गौ रक्षा संघ के आशु मोंगिया और सुनील शास्त्री जी बापू से जेल के अंदर मिलने गए और बाहर का वर्णन सुनाया तो बापू ने सबको शांत रहने के लिए कहा | और जल अभिमन्त्रित करके दिया बोले की सबको बोल दो मैंने सबका व्रत स्वीकार कर दिया है | अब इस जल से अपना व्रत खोल लें | जब वो बाहर आये और सबको बोला तो सब की आखे प्रेमाश्रु से भर गयी | फिर क्या था जेल के गेट को फूलो से सजाया गया | सफाई की गयी | बापू जी की ज्योत से ज्योत जगाओ आरती की गयी | पुलिस वाले भी हैरान हो गए की इतनी संख्या में लोग लेकिन इतना अनुशाशन और द्रण संकल्प | दिन भर में कई बार पुलिस की तरफ से लाठी चार्ज की धमकियां दी गयी लेकिन कोई भी पिच्छे नही हटा न किसी को अव्यवस्था उत्पन्न की | ऐसे हैं बापू के साधक जिन्हें कानून और संविधान का आदर करना आता है | नित्य प्रदर्शन हो रहे हैं , जुलुस निकल रहे हैं लेकिन कही भी पुलिस या प्रशाशन के साथ टकराव नही हुआ |
रात्रि में सभी लोग चन्द्रमा को हि गुरु रुप में पूज कर अपना व्रत समाप्त करेंगे | हजारों-लाखो साधको ने चन्द्रमा में पूज्य बापू के चितवन का दर्शन किया है और आज भी करेंगे | लेकिन भौतिकता वादी , और पाश्चत्य बुद्धि वाले क्या जाने की गुरु के प्रेम में भूखे रहने से भी अंतर आत्मा को कितनी तृप्ति मिलती है | इशवर शीघ्र इन विप्प्तियो का अंत करे और बापू जी फिर से उसी मधुर मधुर वाणी का प्रचार प्रसार करे | ऐसी शुभ आशा के साथ | हरि ओम | सभी धैर्य रखे , एकता के बंधन में बंधे | मित्रों और शत्रुओ की पहचान का ये सुअवसर है | लेकिन विरोध प्रतीकात्मक हो , अंतर में जलन , घ्रणा और द्वेष से बचे |

11/09/2013

गुरुदेव ने भेजा अक्षयपात्र

"हमें प्रचारयात्रा के दौरान गुरुकृपा का जो अदभुत अनुभव हुआ वह अवर्णनीय है | यात्रा की शुरूआत से पहले दिनांक : ८-११-९९ को हम पूज्य गुरूदेव के आशीर्वाद लेने गये | गुरूदेव ने कार्यक्रम के विषय में पूछा और कहा "पंचेड़ आश्रम (रतलाम) में भंडारा था | उसमें बहुत सामान बच गया है | गाड़ी भेजकर मँगवा लेना... गरीबों में बाँटना | हम झाबुआ जिले के आस-पास के गरीब आदिवासी इलाकों में जानेवाले थे | वहाँ से रतलाम के लिए गाड़ी भेजी | गिनकर सामान भरा गया | दो दिन चले उतना सामान था | एक दिन में दो भंडारे होते थे | अतः चार भंडारे का सामान था | सबने खुल्ले हाथों बर्तन, कपड़े, साड़ियाँ धोती, आदि सामान छः दिनों तक बाँटा फिर भी सामान बचा रहा | सबको आश्चर्य हुआ ! हम लोग सामान फिर से गिनने लगे परंतु गुरूदेव की लीला के विषय में क्या कहें ? केवल दो दिन चले उतना सामान छः दिनों तक खुल्ले हाथों बाँटा, फिर भी अंत में तीन बोरे बर्तन बच गये, मानों गुरूदेव ने अक्षयपात्र भेजा हो ! एक दिन शाम को भंडारा पूरा हुआ तब देखा कि एक पतीला चावल बच गया है | करीब १००-१२५ लोग खा सके उतने चावल थे | हमने सोचा : 'चावल गाँव में बांट देते है |'... परंतु गुरूदेव की लीला देखो ! एक गाँव के बदले पाँच गाँवों में बाँटे फिर भी चावल बचे रहे | आखिर रात्रि में ९ बजे के बाद सेवाधारियों ने थककर गुरूदेव से प्रार्थना की कि 'गुरुदेव ! अब जंगल का विस्तार है... हम पर कृपा करो |'... और चावल खत्म हुए | फिर सेवाधारी निवास पर पहुँचे |"
-संत श्री आसारामजी भक्तमंडल,
कतारगाम, सूरत

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382010

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