Hindu Jagriti Manch

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Proud to b an indian
16/06/2017

Proud to b an indian

30/04/2017

यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी किसी संप्रदाय विशेष को अपना शत्रु घोषित नहीं किया गया,इन्सान तो इन्सान पेड़ पौधों जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों सब में भगवान के रूप को देखा गया, उनकी पूजा की गई । आज तक एक भी लड़ाई किसी पूजा पद्धति के विरोध या समर्थन में नहीं लड़ी गई । हिन्दू धर्म में किसी क्षेत्र विशेष या संप्रदाय विशेष की बात न कर सारे संसार को परिवार मानकर उसकी भलाई की बात की गई । हिन्दूधर्म के प्रचार प्रसार के लिए आज तक किसी देश या संप्रदाय विशेष पर हमला नहीं किया गया। हिन्दू जीवन पद्धति ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है।
लेकिन जिसने भी मानवता के प्रतीक इस हिन्दू संस्कृति व उसे मानने वाले हिन्दुओं पर हमला किया है । इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे राक्षस को पाप का घड़ा भर जाने पर अपने किए की सजा भुगतनी पड़ी है।
हमारे विचार में राक्षसों के इस सैकुलर गिरोह के पापों का घड़ा भी लगभग भर चुका है। साधु-सन्तों का अपमान व भगवान राम के अस्तित्व को नकारना इस बात के पक्के प्रमाण हैं।
हमने सुना था कि जब किसी राक्षस का अन्त नजदीक होता है तो उसके द्वारा किए जाने वाले पाप व अत्याचार बढ़ जाते हैं जो हमने पिछले कुछ वर्षों में देख भी लिया ।
अब सिर्फ इस धर्मनिर्पेक्षता रूपी राक्षस का अन्त देखना बाकी है इस राक्षस के खात्में के लिए कर्नल श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,सुधाकर चतुर्वेदी जी, राम जी जैसे करोड़ों प्रशिक्षित गण हमले का जबाब देकर इन मुस्लिम आतंकवादियों व इनके समर्थक सैकुलरिस्टों का संहार करने के लिए तैयार बैठे हैं बस इंतजार है तो सेनापति के इशारे का जिस दिन ये इशारा मिल गया उसी दिन ये सब राक्षस अपनी सही जगह पर पहुँच जाँयेगे !
हम यहां पर यह सपष्ट कर देना चाहते हैं कि धर्म विहीन प्राणी मानव नहीं दानव होता है। अतः धरमनिर्पेक्षता मानव के लिए अभिशाप है क्योंकि यह मानव को दानव वना देती है। जिसका सीधा सा उधाहरण इस सेकुलर गिरोह द्वारा किए गए क्रियाकलाप हैं। इसी धर्मनिर्पेक्षता की वजह से सेकुलर गिरोह मानव जीवन के शत्रु आतंकवादियों का तो समर्थन करता है पर मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम का विरोध ।
हम बात कर रहे थे हिन्दू धर्म की, बीच में धर्म और अधर्म के बीच होने वाले निर्णायक युद्ध के लिए बन रही भूमिका का स्वतः ही स्मरण हो आया ।
जो लोग हिन्दुओं को लड़वाने के लिए यह मिथ्या प्रचार करते हैं कि हिन्दू धर्म में प्राचीन समय से छुआछूत है । उनकी जानकारी के लिए हम ये प्रमाण सहित स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि बेशक हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था शुरू से रही है जो कि किसी भी समाज को व्यवस्थित ढ़ंग से चलाने के लिए जरूरी होती है पर छुआछूत 1000 वर्ष के गुलामी के काल की देन है। खासकर मुसलिम जिहादियों के गुलामी काल की।
वर्णव्यवस्था की उत्पति के लिए दो विचार स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं
एक विचार यह है कि सभी वर्ण शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण भगवान के अंगो से बने । पैर से शूद्र, जंघा से वैश्य, भुजाओं से क्षत्रिय व सिर से ब्राह्मण। अब आप सोचो कि भगवान का कौन सा अंग अछूत हो सकता है सिर ,पैर, जंघा या भुजांयें । कोई नहीं क्योंकि जिसे हम भगवान मानते हैं उसका हर अंग हमारे लिए भगवान ही है । वैसे भी हम बड़ों व साधु संतों के पैर ही पूजते हैं। अतः किसी भी हिन्दू, वर्ण, जाति को अछूत कहना भगवान को अछूत कहने के समान है और जो यह सब जानते हुए भगवान का अपमान करता है वह नरक का भागीदार बनता है। अतः यह हम सब हिन्दुओं का कर्तव्य बनता है कि हम सब हिन्दुओं तक ये सन्देश पहुँचांए और उसे नरक का भागीदार बनने से रोकें।
दूसरा विचार यह है कि मनु जी के चार सन्तानें हुईं । जब बच्चे बड़े होने लगे तो मनु जी के मन में यह विचार आया कि सब कामों पर एक ही ताकतवर बच्चा कब्जा न कर ले इसलिए उन्होंने अपने चारों बच्चों को काम बांट दिए ।सबसे बड़े को सबको शिक्षा का जिसे ब्राह्मण कहा गया। उससे छोटे को सबकी रक्षा का जिसे क्षत्रिय कहा गया। तीसरे को खेतीबाड़ी कर सबके लिए भोजन पैदा करने का जिसे वैश्य कहा गया। चौथे को सबकी सेवा करने का जिसे शूद्र कहा गया ।
अब आप ही फैसला करो कि जब चारों भाईयों का पिता एक, चारों का खून एक, फिर कौन शुद्ध और कौन अशुद्ध ,कौन छूत कौन अछूत ?
यह एक परम सत्य है कि संसार में कोई भी काम छोटा या बडा , शुद्ध या अशुद्ध नहीं होता । फिर भी हम सेवा के काम पर चर्चा करते हैं और सेवा में भी उस काम की जिसे साफ-सफाई कहा जाता है जिसमें शौच उठाना भी जोड़ा जा सकता है ।(हालांकि भारत मे शौच घर से दूर खुली जगह पर किया जाता था इसलिए उठाने की प्रथा नहीं थी ये भी गुल jai...shree ramm

14/04/2017

यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी किसी संप्रदाय विशेष को अपना शत्रु घोषित नहीं किया गया,इन्सान तो इन्सान पेड़ पौधों जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों सब में भगवान के रूप को देखा गया, उनकी पूजा की गई । आज तक एक भी लड़ाई किसी पूजा पद्धति के विरोध या समर्थन में नहीं लड़ी गई । हिन्दू धर्म में किसी क्षेत्र विशेष या संप्रदाय विशेष की बात न कर सारे संसार को परिवार मानकर उसकी भलाई की बात की गई । हिन्दूधर्म के प्रचार प्रसार के लिए आज तक किसी देश या संप्रदाय विशेष पर हमला नहीं किया गया। हिन्दू जीवन पद्धति ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है। लेकिन जिसने भी मानवता के प्रतीक इस हिन्दू संस्कृति व उसे मानने वाले हिन्दुओं पर हमला किया है । इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे राक्षस को पाप का घड़ा भर जाने पर अपने किए की सजा भुगतनी पड़ी है। हमारे विचार में राक्षसों के इस सैकुलर गिरोह के पापों का घड़ा भी लगभग भर चुका है। साधु-सन्तों का अपमान व भगवान राम के अस्तित्व को नकारना इस बात के पक्के प्रमाण हैं। हमने सुना था कि जब किसी राक्षस का अन्त नजदीक होता है तो उसके द्वारा किए जाने वाले पाप व अत्याचार बढ़ जाते हैं जो हमने पिछले कुछ वर्षों में देख भी लिया ।

अब सिर्फ इस धर्मनिर्पेक्षता रूपी राक्षस का अन्त देखना बाकी है इस राक्षस के खात्में के लिए कर्नल श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,सुधाकर चतुर्वेदी जी, राम जी जैसे करोड़ों प्रशिक्षित गण हमले का जबाब देकर इन आतंकवादियों व इनके समर्थक सैकुलरिस्टों का संहार करने के लिए तैयार बैठे हैं बस इंतजार है तो सेनापति के इशारे का जिस दिन ये इशारा मिल गया उसी दिन ये सब राक्षस अपनी सही जगह पर पहुँच जाँयेगे ! हम यहां पर यह सपष्ट कर देना चाहते हैं कि धर्म विहीन प्राणी मानव नहीं दानव होता है। अतः धरमनिर्पेक्षता मानव के लिए अभिशाप है क्योंकि यह मानव को दानव वना देती है। जिसका सीधा सा उदाहरण इस सेकुलर गिरोह द्वारा किए गए क्रियाकलाप हैं। इसी धर्मनिर्पेक्षता की वजह से सेकुलर गिरोह मानव जीवन के शत्रु आतंकवादियों का तो समर्थन करता है पर मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम का विरोध ।

हम बात कर रहे थे हिन्दू धर्म की, बीच में धर्म और अधर्म के बीच होने वाले निर्णायक युद्ध के लिए बन रही भूमिका का स्वतः ही स्मरण हो आया । जो लोग हिन्दुओं को लड़वाने के लिए यह मिथ्या प्रचार करते हैं कि हिन्दू धर्म में प्राचीन समय से छुआछूत है । उनकी जानकारी के लिए हम ये प्रमाण सहित स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि बेशक हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था शुरू से रही है जो कि किसी भी समाज को व्यवस्थित ढ़ंग से चलाने के लिए जरूरी होती है पर छुआछूत 1000 वर्ष के गुलामी के काल की देन है। खासकर मुसलिम के गुलामी काल की। वर्णव्यवस्था की उत्पति के लिए दो विचार स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं------------ एक विचार यह है कि सभी वर्ण शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण भगवान के अंगो से बने । पैर से शूद्र, जंघा से वैश्य, भुजाओं से क्षत्रिय व सिर से ब्राह्मण।

अब आप सोचो कि भगवान का कौन सा अंग अछूत हो सकता है सिर ,पैर, जंघा या भुजांयें । कोई नहीं क्योंकि जिसे हम भगवान मानते हैं उसका हर अंग हमारे लिए भगवान ही है । वैसे भी हम बड़ों व साधु संतों के पैर ही पूजते हैं। अतः किसी भी हिन्दू, वर्ण, जाति को अछूत कहना भगवान को अछूत कहने के समान है और जो यह सब जानते हुए भगवान का अपमान करता है वह नरक का भागीदार बनता है। अतः यह हम सब हिन्दुओं का कर्तव्य बनता है कि हम सब हिन्दुओं तक ये सन्देश पहुँचांए और उसे नरक का भागीदार बनने से रोकें। दूसरा विचार यह है कि मनु जी के चार सन्तानें हुईं । जब बच्चे बड़े होने लगे तो मनु जी के मन में यह विचार आया कि सब कामों पर एक ही ताकतवर बच्चा कब्जा न कर ले इसलिए उन्होंने अपने चारों बच्चों को काम बांट दिए ।सबसे बड़े को सबको शिक्षा का जिसे ब्राह्मण कहा गया। उससे छोटे को सबकी रक्षा का जिसे क्षत्रिय कहा गया। तीसरे को खेतीबाड़ी कर सबके लिए भोजन पैदा करने का जिसे वैश्य कहा गया। चौथे को सबकी सेवा करने का जिसे शूद्र कहा गया ।
अब आप ही फैसला करो कि जब चारों भाईयों का पिता एक, चारों का खून एक, फिर कौन शुद्ध और कौन अशुद्ध ,कौन छूत कौन अछूत ? यह एक परम सत्य है कि संसार में कोई भी काम छोटा या बडा , शुद्ध या अशुद्ध नहीं होता । फिर भी हम सेवा के काम पर चर्चा करते हैं और सेवा में भी उस काम की जिसे साफ-सफाई कहा जाता है जिसमें शौच उठाना भी जोड़ा जा सकता है ।(हालांकि भारत मे शौच घर से दूर खुली जगह पर किया जाता था इसलिए उठाने की प्रथा नहीं थी..... Jai hundu...

08/06/2016

मर गए मारने वाले
🚩🚩🚩कट गए काटने वाले
जल गए जलाने वाले 🚩🚩🚩
शेर की दहाड़ और हिन्दू की ललकार के आगे न
कोई टिका है ना टिक पाऐगा🚩🚩🚩
🚩🚩हिन्दू पुत्र शेर है बस जागने की देर है
🚩जय श्री राम जय श्री राम🚩

25/02/2016

👉मैं पटेल हूँ, मै गुर्जर हूँ,
👉मै जाट हूँ, मै यादव हूँ,
👉मै राजपुत हूँ, मै पण्डित हूँ,
👉मै मराठा हूँ, मै दलित हुँ...

😔लड़ते रहिये शानों से,।
फिर से तुम जूते खाओगे, गजनी की संतानो से ।

शर्म करो, हिन्दू बनते हो, नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में, ये ज्वालायें फूकेंगी ।

ऐसे ही हिन्दू समाज के कतरे कतरे कर डालो,।
संविधान को छलनी कर के, गोबर इसमें भर डालो ।

जाती जाती करते इक दिन, तुम लावारिस हो जाओगे,।
बंटने पर ही अड़े रहे तो, फिर गुलाम हो जाओगे ।।

किसका इंतजार हे मूर्खो अब कोई भगत या आजाद नही आएगा ।
लिप्त रहे जात-पात में ऐसे तो,
☝🏻एकदिन हिन्दू समाप्त हो जाएगा ।।

23/02/2016

गुजरात मे 50 हजार राजपूतो ने किया सड़कों पे
आरक्षण की लड़ाई.........इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा
शेयर करे ताकि पूरे देश के राजपूत इस लड़ाई में साथ देने
को आए
अखंड राजपुताना
हल्ला बोल # जय महाराणा प्रताप
जय पृथ्वी राज चौहान
जय राजपुताना

23/02/2016

एक बार एक कसाई गाय को
काट रहा था
और गाय हँस रही थी....
ये सब देख के कसाई बोला..
"मै तुम्हे मार रहा हू
और तुम मुझपर हँस क्यो रही हो...?"
गाय बोलीः जिन्दगी भर मैने घास के
सिवा कुछ नही खाया...
फिर भी मेरी मौत इतनी दर्दनाक है.
तो
हे इंसान जरा सोच
तु मुझे मार के खायेगा तो
तेरा अंत
कैसा होगा...?.
दूध पिला कर 🐄
मैंने तुमको बड़ा किया...🐄
अपने बच्चे से भी छीना 🐄
पर मैंने तुमको दूध दिया🐄...
रूखी सूखी खाती थी मैं, 🐄
कभी न किसी को सताती थी मैं...🐄
कोने में पड़ जाती थी मैं, 🐄
दूध नहीं दे सकती मैं,🐄
अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों की🐄 आग
से तूने, 🐄
भोजन अपना पकाया था...🐄
गोबर गैस से रोशन कर के, 🐄
तेरा घर उजलाया था...🐄
क्यों मुझको बेच रहा रे, 🐄
उस कसाई के हाथों में...??🐄
पड़ी रहूंगी इक कोने में, 🐄
मत कर लालच माँ हूँ मैं...🐄
मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी, 🐄
वह कहता था जग से न्यारी...🐄
उसकी बंसी की धुन पर मैं, 🐄
भूली थी यह दुनिया सारी..🐄.
मत कर बेटा तू यह पाप,🐄
अपनी माँ को न बेच आप...🐄
रूखी सूखी खा लूँगी मैं 🐄
किसी को नहीं सताऊँगी मैं 🐄
तेरे काम ही आई थी मैं🐄
तेरे काम ही आउंगी मैं...🐄
अगर आप गौमाता से प्यार करते हैं🐄
और आपने गौमाता का दूध पिया है1🐄
तो इस मेसेज को शेयर करके थोडा बहुत दूध का कर्ज🐄
चुकता करे....🐄...!!!!
सर्व कि एक पुकार...🐄.!🐄
गौ हत्या अब नहीं स्वीकार....!!🐄
गौमाता की यह पीड़ा जन जन तक 🐄
पहुँचाने के लिये केवल 2 मिनट का 🐄
समय निकाल कर दोस्तों को 🐄
शेयर जरुर करें.........🐄
Save cow🐄...Regardes by Hindu Jagriti Manch Gajraula

23/02/2016

मेरा भारत महान......
"मंदिरों में घुसाया जाता है .....जाति देखकर,
किराये पर कमरा दिया जातै है...जाति देखकर,
होटल में खाना खिलाया जाता है.....जाति देखकर,
सोसायटी मे घर दिया जाता है.....जाति देखकर,
मकान बेचा जाता है.....जाति देखकर,
वोट दिया जाता है.. जाति देखकर,
मृत पशु उठवाये जाते है.. जाति देखकर,
गाली दी जाती है.. जाति देखकर,
साथ खाना खाते है.....जाति देखकर,
बाल काटे जाते है......जाति देखकर,
ईर्ष्या पैदा होती है.....जाति देखकर,
बलात्कार होते है ......जाति देखकर,
शादी की जाती है.....जाति देखकर,
सम्मान देते हे....जाति देखकर,
अपमान करते हे.....जाति देखकर,
छोटा बडा बना दिया जाता हे....जाति देखकर,
लोग उच्चता व श्रेष्ठता का मजा लेते हे...जाति के आधार पर......
लेकिन इनको आरक्षण चाहिये आर्थिक आधार पर..?????जाति आधारित समाज में समता के लिए आरक्षण लोकतांत्रिक राष्ट्र में अत्यावश्यक है,क्योंकि जाति है तो आरक्षण है.....वरना संसार के दूसरे किसी देश में जाति नहीं है इसलिये आरक्षण नहीं है...
जातियां समाप्त करो आरक्षण अपने आप संमाप्तहोगा...
जब तक जातिवाद है....आरक्षण रहेगा...
. Ankit Chauhan Rajput

16/02/2016

जिस देश में खेत की मेड़ का 1 इंच खिसकने पर 10 कत्ल हो जाते हैं , वो कश्मीर दे देगा?
बहुत बड़ी गलतफहमी पाल रखी है कुछ लोगो ने...

16/02/2016

ग़ाज़ियाबाद में मेयर उप-चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए अच्छी खबर लेकर आया। भाजपा प्रत्याशी आशु वर्मा ने मेयर पद पर जीत हासिल करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा नेता सुधन रावत को पराजित किया।

मंगलवार को अनाज मंडी में सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि मतगणना के लिए स्थल पर 56 टेबल लगी थीं प्रत्येक टेबिल पर एक सुपरवाइजर और तीन गणक तैनात थे।

नए मेयर के लिए नगर निगम अधिकारियों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। निगम मुख्यालय के थर्ड फ्लोर पर महापौर के कार्यालय में रंगाई-पुताई करा दी गई है।

पूर्व महापौर तेलूराम कांबोज कार्यालय के टॉयलेट को रिपेयर कराने के लिए कहते-कहते भले ही थक गए थे, लेकिन अब नए महापौर के लिए निगम ने टॉयलेट भी दुरुस्त करा दिया है।

परदे ड्राइक्लीन करा दिए गए हैं। अब नए महापौर चाहेंगे तो उनकी पसंद के पर्दे भी बदले जाएंगे।

गाजियाबाद महापौर उपचुनाव के नतीजे
आशु वर्मा - बीजेपी-115879
सुधन रावत - सपा- 70651
लालमन सिंह - कांग्रेस- 23317
भूपेंद्र - निर्दलीय- 10571
कृष्ण कुमार बंसल - निर्दलीय- 3179
प्यारेलाल - पीस पार्टी- 995
शमशेर राणा - निर्दलीय- 777
रामफल शाक्य - निर्दलीय- 650
फखरुद्दीन - निर्दलीय- 529
विनोद कसाना - निर्दलीय- 326
भूपेंद्र सिंह - निर्दलीय- 317
मौ० आज़ाद सैफी - निर्दलीय- 244

कुर्सियों से लेकर पंखे, एसी सब दुरस्त करा दिए हैं। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह तक नए महापौर निगम में कार्यभार संभाल लेंगे।

मत प्रतिशत कम रहने की वजह से इस बार मेयर उपचुनाव के विजेता की झोली में भी कम वोट आएंगे। इससे पहले मेयर चुनाव में भाजपा के तेलूराम कांबोज को 1.36 लाख वोट मिले थे, वहीं इस बार 2.18 लाख वोट में 12 प्रत्याशी शामिल रहे।

माना जा रहा है कि महज 60 से 70 हजार वोट पाकर ही जीत मिल सकती है। मतदान का प्रतिशत कम होने की वजह से इस बार माना जा रहा है कि अधिकांश प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे।

मैदान में ये 12 प्रत्याशी
प्रत्याशी------------------पार्टी
आशु वर्मा---------------भाजपा
लालमन-----------------कांग्रेस
सुधन रावत-------------सपा
प्यारेलाल----------------पीस पार्टी
आजाद सैफी------------निर्दलीय
कृष्ण कुमार बंसल------निर्दलीय
फखरुददीन--------------निर्दलीय
भूपेंद्र--------------------निर्दलीय
भूपेंद्र सिंह--------------निर्दलीय
रामफल शाक्य---------निर्दलीय
विनोद कसाना---------निर्दलीय
शमशेर राणा-----------निर्दलीय

08/02/2016

पहले मुस्लिम लीग बनी, तब जाकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बना!

पहले अलीगढ यूनिवर्सिटी बनी, तब जाकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बना!

पहले सोमनाथ को तोडा गया, तब जाकर बाबरी बिखरी!

पहले साबरमती काण्ड हुआ, तब जाकर नरोडा पाटिया हुआ!

पहले नोआखोली, चिट्टागो भंग हुआ, तब जाकर मेरठ हुआ!

पहले ५६ हिन्दू जिंदा जलाए गए, तब जाकर गुजरात हुआ!

पहले हम छेडते नहीं , और कोई छेडे तो उसे छोडते नहीं।
वन्दे मातरम

17/12/2015

इलाज ना ढूंढ तू इश्क़ का,
वो होगा ही नहीं…
इलाज मर्ज का होता है, इबादत का नहीं.

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