03/08/2025
धर्म में रहकर सत्य प्राप्त नहीं किया जा सकता
जब भी कोई हिंदू या अन्य धर्म से कोई भाई बहन मसीह को स्वीकार करता है तो उसको जानने वाले जो उसके धर्म और जाति से संबंध रखते हैं अपने बेतुके विचार रखते हैं और कहते हैं कि अरे तुमने धर्म बदल लिया! तुम्हें अपने धर्म में रहना चाहिए तुम्हें अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए और इसी वजह से वे सब उस व्यक्ति से घृणा करने लगते हैं उससे बात करना और उससे संबंध रखना कम कर देते हैं मैं इस तरह के लोगों को पूछना चाहता हूं कि धर्म बदलना आखिर क्या होता है? धर्म कैसे बदला जाता है? और क्या अपने धर्म के देवी देवताओं को छोड़कर सच्चे ईश्वर में विश्वास करने को धर्म बदलना कहा जाता है ईश्वर हम सभी को एक दृष्टि से देखता है जब उसने इंसान बनाया तो उसने इंसान को रहने और जीवन जीने के लिए नियम और सिद्धांत सिखाएं लेकिन ईश्वर ने कभी भी अपने नियमों और सिद्धांतों में या अपने वचनों में धर्म का उल्लेख नहीं किया है न ही उसने किसी जाति का उल्लेख किया है जाति धर्म ईश्वर ने नहीं बनाए
हम सभी जानते हैं कि सच्चा परमेश्वर सिर्फ एक है उसके बाद जितने भी हैं वह ईश्वर का स्थान नहीं ले सकते हैं हालांकि वे देवी देवता तुम्हें देह सुख दे सकते हैं तुम्हें चंगा कर सकते हैं और तुम्हें धन संपदा प्रदान कर सकते हैं लेकिन वे तुम्हारे जीवन को नहीं बचा सकते न ही तुम्हारी मंजिल को निर्धारित कर सकते हैं मनुष्य के संपूर्ण जीवन पर एकमात्र सच्चा परमेश्वर प्रभुत्व रखता है और वही उसे नियंत्रित करता है बाइबल में हम देख सकते हैं यहूदी धर्म, कैथोलिक धर्म और ईसाई धर्म या अन्य धर्म भी है इन धर्म की शुरुआत प्रभु यीशु के आने के बाद हुई यह धर्म प्रभु यीशु उन्हें बता कर नहीं गए थे बल्कि कुछ लोग थे जो अपने विचारों और मतों को सर्वश्रेष्ठ समझते थे और सबसे अधिक महत्व देते थे उन्हें लगता था कि वे जो सोचते और कहते हैं सिर्फ वही सत्य है उसके अलावा सब झूठ और बेकार है यह हठधर्मी लोग वे ही हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ा दिया था क्योंकि उनका मानना था की ईशू वह मसीहा नहीं है जिसकी भविष्यवाणी परमेश्वर द्वारा की गई थी और इसी वजह से वे आज भी यहोवा की आराधना करते हैं और मसीह के आने का इंतजार करते हैं और वे उन लोगों से अलग है जो लोग यीशु मसीह ही में विश्वास रखते हैं और इसीलिए पर अपने आप को यहूदी कहने लगी जो यहोवा परमेश्वर में आस्था रखते हैं दूसरी तरफ प्रभु यीशु को मारने वाले ईश्वर के नाम के आधार पर ईसाई धर्म की स्थापना की और कैथोलिक धर्म का मानना है की ईश्वर जी माता की कोख से जन्म लेकर आए थे वह मतदान है और वह उसे ईश्वर का स्थान देते हैं जितना भी प्रभु यीशु को भी नहीं देते और इसीलिए प्रभु यीशु को मानने वाले और प्रभु यीशु की माता मरियम को मानने वाले लोगों ने अपने-अपने समूह को धर्म का नाम दे दिया इसी प्रकार से सृष्टि की शुरुआत में ही कई फूटें पड़ी थीं और लोगों ने अपने विचारों अपने मतों के आधार पर अपने-अपने परमेश्वर को विकसित कर लिया था और उनकी आराधना करना आरंभ किया था किसी ने जानवरों की मूर्तियां बनाईं, किसी ने पूर्वजों की मूर्तियां बनाई और किसी ने युद्ध के देवताओं के रूप में मूर्तियों को बनाकर पूजा और यहीं से धर्म की उत्पत्ति हुई है इससे हम देख सकते हैं धर्म ईश्वर द्वारा नहीं बनाए गए हैं और न ही कभी ईश्वर ने धर्म को बढ़ावा दिया है यह इंसानों द्वारा स्थापित किए गए हैं चूंकि यह इंसानों द्वारा स्थापित किए गए हैं इसलिए इनमें कोई सत्य नहीं है मुझे बताएं क्या धर्म में रहकर सच्चे परमेश्वर को पाया जा सकता है? क्या धर्म हमें सत्य प्रदान कर सकता है? क्या यह धर्म बताते हैं कि सच्चा परमेश्वर कहां है? क्या धर्म में रहकर मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है? मुझे बताओ धर्म आवश्यक है या सच्चा परमेश्वर (निश्चित रूप से सच्चा परमेश्वर) धर्म इंसानों ने बनाया है ईश्वर ने नहीं
यदि धर्म ईश्वर ने बनाया होता तो ईश्वर हर इंसान को उनके धर्म के मुताबिक रंग रूप और सक्ल सूरत देता ताकि उनको देखकर उनके धर्म का पता लगाया जा सके लेकिन उसने हर इंसान को एक जैसा बनाया है हर इंसान की दो आंखें हैं, एक नाक है, दो कान है, क्या किसी भी इंसान का कुछ अलग दिखाई पड़ता है? जो उनके धर्म को दर्शाता है नहीं हर इंसान एक जैसा ही है किसी के भी कान लंबे या किसी की भी आंखें बड़ी नहीं है चूंकि धर्म इंसान के द्वारा बनाया गया है इसलिए निश्चित रूप से धर्म में रहकर सत्य प्राप्त नहीं किया जा सकता और न ही सच्चे ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि इंसान सत्य नहीं है वह एक भ्रष्ट मनुष्य है
धर्म में रहकर मनुष्य मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता है केवल सच्चा परमेश्वर ही मार्ग, यीशु ने उस से कहा,
मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। यूहन्ना 14:6
ईश्वर ने यह भी कहा मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। यूहन्ना 10:27
जब सच्चा परमेश्वर अपने लोगों को आवाज देता है तो वे लोग परमेश्वर के वचनों को सुनते हैं और उसकी और आकर्षित होते हैं क्योंकि वे लोग ईश्वर से हैं क्या कोई उन्हें सच्चे परमेश्वर के पास जाने से रोक सकता है? (नहीं) जहां तक कि उन लोगों की बात है जो शैतान से हैं वे सच्चे परमेश्वर की आवाज को नहीं पहचान सकते वे सिर्फ दुष्ट शैतान की आराधना करते हैं और उसे बलि चढ़ाते हैं अंत में वे शैतान के द्वारा ही नष्ट कर दिए जाएंगे