04/05/2026
*माँ शाकम्भरी: शाकाहार की अधिष्ठात्री देवी और सात्विक जीवन का मार्ग*
*॥ जय माँ शाकम्भरी ॥*
सनातन धर्म में माँ शाकम्भरी को 'शाक की देवी' और 'अंबिका' के रूप में पूजा जाता है। 'शाकम्भरी' नाम स्वयं में उनका स्वरूप स्पष्ट करता है - 'शाक' अर्थात सब्जियाँ, फल, कंद-मूल और 'अम्भरी' अर्थात धारण करने वाली। मान्यता है कि जब पृथ्वी पर सौ वर्षों का भयंकर अकाल पड़ा था, तब माँ ने अपने शरीर से उत्पन्न शाक-सब्जियों और फलों से समस्त प्राणियों की रक्षा की थी। तभी से वे शाकाहार, करुणा और पोषण की अधिष्ठात्री देवी कहलाईं।
*शाकाहार और माँ शाकम्भरी का संबंध*
पुराणों के अनुसार माँ शाकम्भरी का सम्पूर्ण स्वरूप ही सात्विक है। उनके हाथों में सदैव कमल, बाण, धनुष और शाक-सब्जियाँ सुशोभित रहती हैं, जो यह संदेश देती हैं कि प्रकृति द्वारा दिया गया शुद्ध आहार ही सर्वोत्तम है।
माँ की आराधना का मूल भाव 'जीव हत्या निषेध' और 'सभी प्राणियों के प्रति दया' है। इसीलिए जो भक्त सच्चे मन से माँ शाकम्भरी की उपासना करता है, उसके मन में स्वतः ही तामसिक भोजन यानी मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन आदि के प्रति विरक्ति आने लगती है।
*मांस-मदिरा से मुक्ति कैसे मिलती है?*
1. *मन की शुद्धि*: माँ शाकम्भरी 'शताक्षी' भी कहलाती हैं क्योंकि अकाल के समय प्राणियों का दुःख देखकर उनकी सौ आँखों से आँसू बहे थे। जब भक्त इस करुणा को समझता है, तो उसके मन से हिंसा का भाव समाप्त हो जाता है। उसे लगता है कि जिस जीव को हम खाते हैं, उसका दर्द भी माँ को होता है।
2. *सात्विक ऊर्जा का संचार*: नवरात्रि में माँ शाकम्भरी का विशेष पूजन होता है। इस दौरान फलाहार और सात्विक भोजन का नियम है। 9 दिन के इस नियम से शरीर के तामसिक गुण क्षीण होते हैं और मन को मांस-मदिरा से दूर रहने का अभ्यास हो जाता है।
3. *संकल्प शक्ति*: मान्यता है कि माँ के सामने "शुद्ध शाकाहारी जीवन" का संकल्प लेने से माँ स्वयं भक्त को बल देती हैं। कई परिवारों में देखा गया है कि माँ की मूर्ति स्थापना या ज्वारे बोने के बाद घर के सदस्यों ने स्वयं ही मांस-मदिरा छोड़ दी।
*माँ का संदेश आज के युग में*
आज जब बीमारियाँ, क्रोध और अशांति बढ़ रही है, तब माँ शाकम्भरी का संदेश और भी प्रासंगिक है। शाकाहार केवल भोजन नहीं, बल्कि 'अहिंसा परमो धर्मः' का जीवन दर्शन है। यह तन को निरोग, मन को शांत और आत्मा को निर्मल बनाता है।
*इसलिए ग्राम जखारा, खैरगढ़, फिरोजाबाद में बन रहा माँ शाकम्भरी का भव्य मंदिर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह 'सात्विक जीवन' का प्रचार केंद्र बनेगा।* यहाँ आकर जो भी भक्त माँ का आशीर्वाद लेगा, माँ उसे नशा, मांस और तामसिक प्रवृत्तियों से मुक्त कर सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देंगी।
*आइए, इस मंदिर निर्माण में सहयोग देकर माँ के 'शाकम्भरी स्वरूप' का प्रचार करें और समाज को व्यसन मुक्त, सात्विक और संस्कारी बनाने के पुण्य के भागी बनें।*
*॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः ॥*
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नीरज सिंह चौहान चरण सेवक माता शाकंम्भरी मंदिर निर्माण स्थल जखारा खैरगढ़ फिरोजाबाद उ प्र
8439748165