HUZUR Jaan-E-Auliya Sarkar QSA.

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21/05/2026

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Hazrat Shah Jahangir हज़रत मुख़लिसुर्रहमान, शाह जहांगीर आप हैं क़रार-ए-दिल-ओ-जाँ आप हैं, रोशन ज़मीर आप हैंतेरी चौखट के ग...
18/05/2026

Hazrat Shah Jahangir

हज़रत मुख़लिसुर्रहमान, शाह जहांगीर आप हैं
क़रार-ए-दिल-ओ-जाँ आप हैं, रोशन ज़मीर आप हैं

तेरी चौखट के गदा, तख़्त-नशीं से बढ़ के आला
फ़क़्र की सल्तनत के सुल्तान, अमीर आप हैं

एक झलक तेरी नज़र की, किस्मतों को रौशन कर दे
गुमराहों के रहबर-ए-राह, दस्तगीर आप हैं

इल्म-ओ-इरफ़ान का समंदर, आपके सीने में मचलता
तिश्ना लबों के लिए, आब-ए-ख़िज़्र-ओ-ख़मीर आप हैं

तेरी सोहबत का एक लम्हा, उम्र भर की इबादत से बेहतर
सालिकों की राह के रहबर, ताजदार आप हैं

तेरी नज़र-ए-क़ीमिया-गर, ख़ाक को इकसीर कर दे
गिरे हुओं को उठाने वाले, बे-नज़ीर आप हैं

"राव आक़िल" की दुआ है , दर पे हाज़री हो मेरी
दो जहां में आसरा भी, शाह जहांगीर आप हैं

✍️ Rao Aquil Hussaini

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मसनद-ए-जान-ए-औलिया पर, जलवा-गर जमील नासिर हैंफ़ैज़-ए-फ़ैज़ुल औलिया के, मुक़तदा जमील नासिर हैंजमील नाम, जमील शमाइल, जमील-...
17/05/2026

मसनद-ए-जान-ए-औलिया पर, जलवा-गर जमील नासिर हैं
फ़ैज़-ए-फ़ैज़ुल औलिया के, मुक़तदा जमील नासिर हैं

जमील नाम, जमील शमाइल, जमील-ए-सीरत-ओ-किरदार हैं
अबरारी सिलसिले के माह-ए-कामिल, नासिर-ए-अहल-ए-दिलदार हैं

मौज-ए-फ़ैज़ुल औलिया हैं, बह्र-ए-वहदत के रवाँ
जाम-ए-इरफ़ाँ बाँटते हैं, मय-कदा के शह-सवार हैं

सोहबत-ए-पाकीज़ा से जिनकी, ज़ंग-ए-दिल सब धुल गए
एक निगाह-ए-लुत्फ़ से "राव आक़िल", ख़ाक से गुलज़ार हैं

दामन-ए-जमील थामा है जिसने, उसे अब नहीं अंदेशा-ए-महशर
दस्त-ए-जमील हाथ में है, कश्ती-ए-जाँ के खेवनहार हैं

✍️ Rao Aquil Hussaini

तोरी प्रीत में सब कुछ भूल गई तु ने मोह लियो मोरा मन ख़्वाजामोरी बय्याँ पकड़ मोहे अपना बना मैं चूमूँ तोरा आँगन ख़्वाजातोर...
17/05/2026

तोरी प्रीत में सब कुछ भूल गई तु ने मोह लियो मोरा मन ख़्वाजा
मोरी बय्याँ पकड़ मोहे अपना बना मैं चूमूँ तोरा आँगन ख़्वाजा

तोरा नाम रटूँ तोहे याद करूँ कित जाऊँ मैं का को याद करूँ
सुध-बुध न रही मोरे तन-मन की तोरी जब से लगी है लगन ख़्वाजा

मुख़्लिस के कुँवर वलियन के वली आ प्यास बुझा मोरे नैनन की
देखूँ जो तोरा सुंदर मुखड़ा मैं भेंट में दे दूँ तन ख़्वाजा

दुनिया तोरे दर पर आवत है हर कोई मुरादें पावत है
मुझ पे भी दया की एक नजर मैं भी हूँ तोरी जोगन ख़्वाजा

हसरत है फ़ना की बा'द 'फ़ना' तोरी भेंट का सामाँ हो जाए
तोरे रौज़े की चादर मोरा कफ़न भेंसोड़ी में हो मदफ़न ख़्वाजा

✍️ फ़ना बुलंदशहरी

Hazrat Sufi Syed JAMEEL NASIR ABRARI Qibla (Sajjadanasheen Dargah-e-Abrari Hussaini Firozabad Sharif U. P.)Hazrat SUFI M...
13/05/2026

Hazrat Sufi Syed JAMEEL NASIR ABRARI Qibla (Sajjadanasheen Dargah-e-Abrari Hussaini Firozabad Sharif U. P.)

Hazrat SUFI MUBARAK Hasan SADIQI Sahab (Sajjadanasheen Dargah E SADIQI Delhi)

HUZUR FAIZUL AULIYA HAZRAT KHWAJA SUFI SYED MAKHDOOM MOHAMMED ANSAR HUSSAIN SHAH HASNI QSA.
11/05/2026

HUZUR FAIZUL AULIYA HAZRAT KHWAJA SUFI SYED MAKHDOOM MOHAMMED ANSAR HUSSAIN SHAH HASNI QSA.

The Blessed BARGAH SHARIF of HUZUR JAAN E AULIYA SARKAR QSA. (Old Pic)
11/05/2026

The Blessed BARGAH SHARIF of HUZUR JAAN E AULIYA SARKAR QSA.

(Old Pic)

09/05/2026

❤️

ख़्वाजा-ए-अंसार  तुम फ़ैज़ का दरिया होराह-ए-उल्फ़त के मुसाफ़िर के लिए साया होतेरी निस्बत ने चमक बख्शी मेरे ईमान कोतेरे स...
09/05/2026

ख़्वाजा-ए-अंसार तुम फ़ैज़ का दरिया हो
राह-ए-उल्फ़त के मुसाफ़िर के लिए साया हो

तेरी निस्बत ने चमक बख्शी मेरे ईमान को
तेरे सदके मिल गया रस्ता दिल-ए-हैरान को

फ़ैज़ तेरा आम है हर एक दर्दमंद के लिए
तेरा दर खुला हुआ है हर ज़रूरतमंद के लिए

तेरी महफ़िल में अजब नूर-ए-मोहब्बत है बसा
ज़िक्र होता है तो महका है दिलों का गुलसिताँ

तेरे दर पर झुक रहे हैं आज भी ख़ास-ओ-अवाम
तेरी चौखट बन गयी है मरकज़-ए-फ़ैज़-ओ-कराम

या ख़्वाजा अंसार करम की इक नज़र हो जाए अब
मेरे वीरान दिल का भी चमन गुलज़ार हो जाए अब

❤️❤️

हज़रत-ए-अबरार ए-जान-ए-गुलिस्तान-ए-हसनहै तेरी ज़ात-ए-गरामी मतला-ए-सुबह-ए-चमनकाम तेरे आ गयी आखिर तेरे दिल की लगनरंग लाया ह...
08/05/2026

हज़रत-ए-अबरार ए-जान-ए-गुलिस्तान-ए-हसन
है तेरी ज़ात-ए-गरामी मतला-ए-सुबह-ए-चमन

काम तेरे आ गयी आखिर तेरे दिल की लगन
रंग लाया है मुहब्बत में मुहब्बत का चलन

मेहरबान तुझ पर हुए है ताजदार-ए-मुरसलीन
तुझको हासिल हो गया है क़ुर्ब-ए-रब्बुल आलमीन

गुलशन-ए-ख़िल्द-ए-बरी में आशियाना है तेरा
एक मैं ही क्या हूँ शैदाई ज़माना है तेरा

अपने बेगानों के होंठों पर फ़साना है तेरा
मरकज़-ए-फ़ैज़-ओ-करम अब आस्ताना है तेरा

मुर्शिद-ए-आली ने बख्शा है तुझे ऐसा मुकाम
तेरे संग-ए-दर पे हाज़िर हो रहे है ख़ास-ओ-आम

तुझ पे है फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा बंद-ए-दो-आलम बे पनाह
तेरी आँखे है सरापा-ए-नबी की जलवा गाह

इश्क़-ए-सादिक़ ने अता कर दी तुझे एक ऐसी राह
सर झुकाते है तेरे दर पर हज़ारों कजकुलाह

✍️ हज़रत यासीन सादिक़ देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

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Firozabad

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