पवित्र बाइबल के संदेश

पवित्र बाइबल के संदेश प्रभु यीशु मसीह को प्यार करने वाले और पवित्र वचन का अध्ययन करने वाले इस पेज को लाइक करेंगे।

12/05/2026

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08/05/2026

Yeshu ka Chamatkaar

08/05/2026

यीशु मसीह द्वारा हवा और पानी (तूफान) को डांटकर शांत करने की घटना बाइबल में दर्ज सबसे प्रभावशाली चमत्कारों में से एक है, जो उनके अलौकिक सामर्थ्य को दर्शाता है। यह विवरण मत्ती 8:23-27, मरकुस 4:35-41, और लूका 8:22-25 में पाया जाता है।घटना का विवरण (मरकुस 4:35-41):तूफान और डर: यीशु और उनके चेले गलील की झील में नाव से जा रहे थे। अचानक भयंकर आंधी उठी, लहरें नाव के अंदर आने लगीं और नाव पानी से भरने लगी।यीशु का शांत होना: इस भयंकर तूफान के बीच भी, यीशु नाव में एक तकिया लगाकर सो रहे थे।चेलों का जगाना: चेले डर गए और उन्होंने यीशु को जगाकर कहा, "हे गुरु, क्या तुझे कोई चिंता नहीं कि हम नष्ट हुए जाते हैं?"।आंधी और पानी को डांटना: यीशु उठे और उन्होंने हवा को डांटा और पानी (समुद्र) से कहा, "शांत रह, थम जा!"।परिणाम: तत्काल हवा थम गई और चारों ओर "बड़ी शांति" या "महान शांति" छा गई।

07/05/2026

इब्रानियों 13:5: "...क्योंकि उसने स्वयं कहा है, 'मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा और न कभी त्यागूँगा'"।मत्ती 28:20: "और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे साथ हूँ"।व्यवस्थाविवरण 31:6: "मजबूत और साहसी बनो, डरो मत... क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे साथ है। वह तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगा और न ही तुम्हारा साथ त्यागेगा"।यूहन्ना 14:18: "मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आऊँगा"।यूहन्ना 6:37: "जो कोई मेरे पास आता है, मैं उसे कभी नहीं निकालूंगा"।

07/05/2026

Yeshu Zindabaad

04/05/2026

प्रिय दोस्तों सबको जय मसीह की नीचे मेरे यूट्यूब चैनल का लिंक है कृपया सब्सक्राइब करें।

https://youtube.com/?si=tCQ_rHw0PaGEl_uT

18/04/2026

कहानी: प्रार्थना की ताकत

एक गाँव में रवि नाम का एक युवक रहता था। वह पहले बहुत विश्वास करने वाला था, रोज़ प्रार्थना करता था और बाइबिल पढ़ता था। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसने सोचना शुरू कर दिया कि “मुझे अब प्रार्थना की ज़रूरत नहीं है, मैं खुद सब कर सकता हूँ।”

धीरे-धीरे उसने प्रार्थना करना और परमेश्वर का वचन पढ़ना छोड़ दिया।

शुरुआत में सब ठीक लगता रहा। उसे नौकरी मिली, पैसे भी आने लगे। लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी ज़िंदगी में परेशानियाँ शुरू हो गईं।

उसकी नौकरी में समस्या आने लगी। बॉस उससे नाराज़ रहने लगा। घर में भी तनाव बढ़ गया। उसके दोस्त भी उससे दूर होने लगे। वह अंदर से बहुत बेचैन रहने लगा, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्यों।

एक दिन उसकी नौकरी भी चली गई।

अब वह पूरी तरह टूट चुका था। रात को उसे नींद नहीं आती थी। उसके मन में डर, चिंता और निराशा भर गई थी। उसने हर जगह मदद ढूंढी, लेकिन कहीं शांति नहीं मिली।

एक दिन वह उदास होकर गाँव के एक बूढ़े व्यक्ति के पास बैठा था, जो परमेश्वर पर बहुत विश्वास करता था। बूढ़े ने उससे पूछा, “बेटा, क्या तुम प्रार्थना करते हो?”

रवि ने सिर झुका लिया और कहा, “नहीं, मैंने तो बहुत समय पहले छोड़ दी।”

बूढ़े ने मुस्कुराते हुए कहा,
“इंसान जब परमेश्वर से दूर होता है, तो शांति भी उससे दूर हो जाती है। प्रार्थना सिर्फ मांगने के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ संबंध बनाने के लिए होती है।”

उस दिन रवि को अपनी गलती का एहसास हुआ।

वह घर गया, घुटनों पर बैठा और बहुत समय बाद पहली बार प्रार्थना की:
“हे प्रभु, मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं आपसे दूर हो गया था। मुझे फिर से अपने पास ले आइए।”

उसने फिर से बाइबिल पढ़ना शुरू किया और रोज़ प्रार्थना करने लगा।

धीरे-धीरे उसके जीवन में बदलाव आने लगा। उसके मन में शांति लौट आई। कुछ समय बाद उसे एक नई और बेहतर नौकरी मिल गई। घर में भी खुशियाँ वापस आ गईं।

अब रवि समझ चुका था—
प्रार्थना हमारी ताकत है, और परमेश्वर का वचन हमारे जीवन का मार्गदर्शन करता है।

सीख (Moral):
जब हम प्रार्थना और परमेश्वर के वचन से दूर हो जाते हैं, तो जीवन में कठिनाइयाँ बढ़ जाती हैं। लेकिन जब हम फिर से परमेश्वर की ओर लौटते हैं, तो वह हमें शांति, मार्ग और आशीष देता है।

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18/04/2026

?

01/03/2025

शमूएल और शाऊल

15/08/2024

Amen!

18/08/2023

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