श्री बाला जी बस सेवा संघ

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श्री बाला जी बस सेवा संघ Ram Ram ji

09/05/2026

*Mutual fund SIP
*Home loan (property yet to decide sanction on income waiting period 3-6 months also available)
*Loan against property
*Vehicle Third-party insurance
*Health insurance of any company
*Term insurance (regular,5,10,12,15 pay, secure financially your family)
*Credit card Apply
*Personal loan
*Business loan or OD
*Car loan (New car,Old car) *Commercial vehicle loan *Gold loan *Education loan (profile,salaried, business,agri)
*Agriculture loan(Kcc)
*Solar system loan (govt subsidy loan)

ASHU KATARIA MFD
9877948700

काशी के एक छोटे से गाँव में एक वृद्धा रहती थी जिसका नाम था, गोमती माँ। उसके पास रहने को एक टूटी झोपड़ी और भगवान कृष्ण की ...
03/05/2026

काशी के एक छोटे से गाँव में एक वृद्धा रहती थी जिसका नाम था, गोमती माँ। उसके पास रहने को एक टूटी झोपड़ी और भगवान कृष्ण की एक छोटी सी पत्थर की मूर्ति थी। गोमती माँ बहुत गरीब थी, लेकिन उसका नियम अटूट था—वह हर दोपहर भगवान को 'मालपुआ' का भोग लगाती थी।
​पर हकीकत यह थी कि उसके पास न घी था, न शक्कर, और न ही आटा।
​भाव की रसोई
​गोमती माँ रोज़ दोपहर को चूल्हा जलाती, उस पर एक खाली मिट्टी की कड़ाई रखती और अपनी आँखें बंद कर लेती। वह कल्पना में भगवान के लिए मालपुए तलती। वह बड़े प्रेम से कहती:
​"प्रभु, देखो घी गर्म हो गया है, अब मैं इसमें घोल डाल रही हूँ... देखो कान्हा, मालपुआ कितना सुनहरा और कुरकुरा बना है!"
​वह घंटों तक इसी 'मानसिक पूजा' में मग्न रहती और अंत में एक खाली थाली भगवान के सामने रख देती। उसकी आँखों से आंसू बहते और वह कहती, "कान्हा, आज का मालपुआ सबसे मीठा बना है, चख कर देखो।"
​राजा का अहंकार और पंडितों का क्रोध
​गाँव के बड़े मंदिर में राजा ने एक विशाल भंडारा रखा। हज़ारों किलो असली घी और केसर से बने मालपुए तैयार हुए। लेकिन मंदिर के पंडित ने देखा कि भगवान की मूर्ति के चेहरे पर वह चमक नहीं थी, जो अक्सर होती थी।
​राजा ने अहंकार में कहा, "मैंने इतना वैभव अर्पित किया है, फिर भी भगवान खुश क्यों नहीं दिख रहे?"
​उसी समय मंदिर के द्वार पर गोमती माँ पहुँची। वह फटे कपड़ों में थी और उसके हाथ में एक खाली दोना (पत्तल) था। पंडितों ने उसे धक्के देकर बाहर निकाल दिया, "हटो यहाँ से बुढ़िया! यहाँ राजसी भोग लग रहा है, तेरी गरीबी यहाँ अपवित्रता फैलाएगी।"
​अनोखा चमत्कार
​जैसे ही गोमती माँ को बाहर निकाला गया, अचानक मंदिर के गर्भगृह से शुद्ध घी और इलायची की वैसी ही खुशबू आने लगी जैसे ताज़े मालपुए बन रहे हों। राजा और पंडित हैरान रह गए क्योंकि मंदिर की कड़ाइयाँ तो ठंडी हो चुकी थीं।
​तभी आकाशवाणी हुई:
​"राजन्, तुम्हारे पकवानों में केसर तो है पर प्रेम नहीं। मैं तो अभी गोमती माँ की झोपड़ी में उस 'अदृश्य कड़ाई' से निकले मालपुए खा रहा था। उसने मुझे अपने आँसुओं से सींचकर और अपनी भक्ति से तलकर खिलाया है।"
​राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ। वह दौड़कर गोमती माँ के पास गया और उसके पैर पकड़ लिए। उसने देखा कि गोमती माँ की उस खाली मिट्टी की कड़ाई में सचमुच घी की एक अद्भुत चमक और दिव्य सुगंध बाकी थी।
​कहानी की अनोखी सीख:
ईश्वर वैभव के भूखे नहीं हैं। आप उन्हें क्या चढ़ाते हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप किस भाव से चढ़ाते हैं। श्रद्धा की एक खाली कड़ाई भी अहंकार के सोने के थाल से बड़ी होती है।

एक पंडित जी प्रतिदिन रानी को कथा सुनाने महल मे जाया करते थे । कथा के अंत में प्रतिदिन कहते कि"राम सुमर ले तो बंधन छूटे।"...
03/05/2026

एक पंडित जी प्रतिदिन रानी को कथा सुनाने महल मे जाया करते थे । कथा के अंत में प्रतिदिन कहते कि

"राम सुमर ले तो बंधन छूटे।"

कुछ दिन कथा सुनने के पश्चात एक दिन पिंजरे में बंद तोता बोला -

"यूं मत कहो रे पंडित झूठे।"

उस समय तो पंडित जी मन मसोस कर रह गये और चुपचाप चले गये। परन्तु अब तो तोता प्रतिदिन पंडित को झूठे कह कर सम्बोधित करने लगा।

पंडित जी को मन में क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी?

परेशान हो कर पंडित जी अपने गुरु जी के पास गये। गुरु जी को सब हाल बताया।

गुरु जी अगले दिन पंडित जी के साथ स्वयं कथा करने गये और एकान्त मे तोते के पास जा कर पूछा तुम पंडित को झूठा क्यों कहते हो?

तोते ने कहा-

मैं पहले खुले आकाश में उड़ता था। एक बार मैं एक आश्रम में जा बैठा जहां सब साधू-संत राम-राम-राम बोल रहे थे। वहां बैठा तो मैंने भी राम-राम बोलना शुरू कर दिया। एक दिन मैं उसी आश्रम में राम-राम बोल रहा था, तभी एक संत ने मुझे पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लिया। फिर मुझे दो-चार श्लोक सिखाये। आश्रम में एक सेठ ने संत को भारी दान दक्षिणा दी। संत ने आशीर्वाद स्वरूप मुझे सेठ को सौंप दिया।

अब सेठ ने मुझे चांदी के पिंजरे में रखा। मेरा बंधन बढ़ता गया। अब मै स्वच्छ वायु और ताजा फलों के लिए भी तरसने लगा। निकलने की कोई संभावना न रही।

एक दिन उस सेठ ने राजा से अपना काम निकलवाने के लिए उपहार स्वरूप मुझे राजा को दे दिया।

राजा ने खुशी-खुशी मुझे ले लिया, क्योंकि मैं राम-राम और श्लोक बोलता था। रानी धार्मिक प्रवृत्ति की है तो राजा ने मुझे रानी को दे दिया। रानी ने सोने का पिंजरा बनवा दिया और खाने मे हमेशा मेवे और अन्य कीमती भोज्य पदार्थ ही मिलते हैं।

मिर्च खाना और पेड़ पर लटके फलों मे चोंच मार कर स्वाद लेना भूल ही गया हूं। अपनी मर्जी से चहकना भूल गया हूं।

अब मैं कैसे कहूं कि "राम-राम कहे तो बंधन छूटे।"

तोते ने गुरुजी से कहा आप ही कोई युक्ति बताएं, जिससे मेरा बंधन छूट जाए।

गुरु जी बोले-

"आज तुम खा कर थोड़ी देर बाद चुपचाप पड़ जाना, हिलना भी नहीं। हिलाया जाये तो भी मरणासन्न अवस्था मे पड़े रहना।"

तोते ने ऐसा ही किया। रानी ने पिंजरा खोल कर खुब हिलाया-डूलाया। थोड़ी देर बाद रानी ने सेवकों से कहा-

"यह तो मर गया है। इसे बाग मे गड्ढा खोद कर दबा दो।"

जैसे ही तोते को लेकर सेवक बाग मे पहुँचे तोता फुर्र से उड़ गया। तोता पिंजरे से निकलकर आकाश में उड़ते हुए बोलने लगा

"गुरु मिले तो बंधन छूटे।"

अतः शास्त्र कितना भी पढ़ लो, कितना भी जप कर लो, लेकिन सच्चे गुरु जब तक रास्ता ना बताऐं तब तक मुक्ति पाना सम्भव नही।

एक बार नारद मुनि ने भगवान श्रीराम के पास जाकर देखा कि वे एक बही-खाते में कुछ लिख रहे हैं। पूछने पर प्रभु ने बताया कि इसम...
21/04/2026

एक बार नारद मुनि ने भगवान श्रीराम के पास जाकर देखा कि वे एक बही-खाते में कुछ लिख रहे हैं। पूछने पर प्रभु ने बताया कि इसमें उन भक्तों के नाम हैं, जो नित्य भगवान को भजते हैं। उस सूची में अपना नाम सबसे ऊपर देखकर नारद जी को गर्व हो गया, किंतु उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि प्रभु के परम भक्त हनुमान जी का नाम उस सूची में कहीं नहीं था।

जब नारद जी ने हनुमान जी को यह बात बताई, तो हनुमान जी ने सहज भाव से कहा कि शायद वे इस योग्य नहीं होंगे। साथ ही उन्होंने नारद जी को प्रभु की एक दूसरी गुप्त डायरी के बारे में बताया। नारद जी ने जब पुनः प्रभु के पास जाकर उस दूसरी डायरी को देखा, तो दंग रह गए। उस डायरी में सबसे ऊपर हनुमान जी का नाम था। प्रभु ने मुस्कुराकर कहा— "नारद! पहली सूची उन भक्तों की है जो मुझे भजते हैं, लेकिन इस सूची में उन भक्तों के नाम हैं जिन्हें मैं स्वयं नित्य भजता हूँ।"

कथा का सार:
सच्ची भक्ति वह नहीं जो केवल मुख से प्रदर्शन करे, बल्कि वह है जो अहंकार शून्य होकर हृदय से की जाए। जो भक्त भगवान को भजते हैं, वे प्रभु की कृपा पाते हैं, लेकिन जो अनन्य भाव से समर्पित होते हैं, भगवान स्वयं उनके ऋणी और भक्त बन जाते हैं।

राधे राधे

जब मेवाड़ में मीरा बाई पर अत्याचार बढ़ गए, तो वे सब कुछ त्याग कर वृंदावन आ गईं। वहाँ वे प्रसिद्ध संत और वैष्णव संप्रदाय ...
21/04/2026

जब मेवाड़ में मीरा बाई पर अत्याचार बढ़ गए, तो वे सब कुछ त्याग कर वृंदावन आ गईं। वहाँ वे प्रसिद्ध संत और वैष्णव संप्रदाय के मुखिया जीव गोस्वामी से मिलना चाहती थीं। किंतु, जीव गोस्वामी ने यह कहकर मिलने से मना कर दिया कि वे किसी स्त्री का मुख नहीं देखते।

इस पर मीरा बाई ने एक अत्यंत मार्मिक और ज्ञानपूर्ण संदेश भेजा:

"मुझे लगा था कि वृंदावन में केवल एक ही पुरुष हैं—श्री कृष्ण। आज पता चला कि यहाँ उनके अलावा कोई और भी स्वयं को पुरुष मानता है।"

इस संदेश ने जीव गोस्वामी के अहंकार को झकझोर दिया। अगले ही पल मंदिर में एक चमत्कार हुआ—भगवान कृष्ण की मूर्ति स्त्री के वेश (घाघरा-चोली और आभूषणों) में दिखाई दी। मंदिर के पट स्वयं जीव गोस्वामी ने बंद किए थे, इसलिए यह स्पष्ट था कि यह भगवान का ही संकेत था।

कथा का सार:
जीव गोस्वामी तुरंत समझ गए कि भक्ति के मार्ग में लिंग का कोई अस्तित्व नहीं है। ईश्वर के सामने हर जीव 'स्त्री' (शरणागत भाव) है और केवल परमात्मा ही एकमात्र 'पुरुष' है। वे तुरंत मीरा बाई के पास जाकर नतमस्तक हुए और अपनी भूल स्वीकार की। अंत में उन्हें मीरा और कृष्ण एक-दूसरे में समाहित दिखाई दिए, जो भक्त और भगवान की एकता का प्रतीक है।

राधे राधे

यह कथा भक्ति, विश्वास और समर्पण की शक्ति को दर्शाती है। मेवाराम, जो कभी एक समृद्ध व्यापारी था, अपनी धर्मपरायण पत्नी की म...
21/04/2026

यह कथा भक्ति, विश्वास और समर्पण की शक्ति को दर्शाती है। मेवाराम, जो कभी एक समृद्ध व्यापारी था, अपनी धर्मपरायण पत्नी की मृत्यु के बाद आर्थिक और मानसिक रूप से टूट जाता है। पत्नी के जाने के बाद उसका वैभव समाप्त हो गया और वह एक छोटी सी दुकान तक सीमित रह गया, लेकिन उसने अपने घर के मंदिर में ठाकुर जी (श्री कृष्ण) और किशोरी जी (श्री राधा) की सेवा कभी कम नहीं होने दी।

कथा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

निस्वार्थ संकल्प: मेवाराम अपनी कमजोर होती आँखों और कांपते हाथों के बावजूद, अपनी पत्नी की परंपरा को जीवित रखने के लिए ठाकुर जी के लिए अपने हाथों से एक पोशाक सिलने का संकल्प लेता है। वह महीनों तक कष्ट सहकर भी इस सेवा में लगा रहता है।

अटल अटूट विश्वास: मेवाराम की पत्नी का मानना था कि ठाकुर जी रात्रि में विश्राम करने और भोग पाने आते हैं। मेवाराम उसी विश्वास के साथ नित्य रात्रि में सुंदर सेज सजाता और केसर की खीर व जल रखता था।

प्रभु की दिव्य लीला: भक्त के प्रेम का मान रखने के लिए निकुंज में वर्षा और शीत की एक लीला रची जाती है। मूसलाधार वर्षा से भीगती किशोरी जी को कष्ट से बचाने के लिए ठाकुर जी उन्हें अपनी गोद में उठाकर शरण की खोज में मेवाराम के घर पहुँचते हैं।

भक्ति का प्रतिफल: ठाकुर जी और किशोरी जी मेवाराम द्वारा बनाई गई पोशाकें धारण करते हैं, उसके हाथों से गूंथी माला पहनते हैं और उसकी बनाई खीर का भोग पाते हैं।

साक्षात प्रमाण: सुबह होने पर मेवाराम को कमरे में दिव्य सुगंध, मिट्टी से सने चरणों के निशान (आते समय एक जोड़ी और जाते समय दो जोड़ी), और ठाकुर जी द्वारा छोड़े गए रत्नजड़ित वस्त्र मिलते हैं। उसे आभास होता है कि उसकी मेहनत और निष्ठा सफल हुई।

निष्कर्ष: यह कथा सिद्ध करती है कि ईश्वर भौतिक ऐश्वर्य के नहीं, बल्कि शुद्ध भाव और प्रेम के भूखे हैं। मेवाराम की गरीबी और शारीरिक असमर्थता उसकी भक्ति के आड़े नहीं आई, और अंततः उसे उसकी सेवा का 'मेवा' साक्षात दर्शन और कृपा के रूप में प्राप्त हुआ।

राधे राधे

एक व्यक्ति जीवन के दुखों से तंग आकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने लगा। वर्षों तक उसने मूर्ति की पूजा-अर्चना की, लेकिन पर...
21/04/2026

एक व्यक्ति जीवन के दुखों से तंग आकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने लगा। वर्षों तक उसने मूर्ति की पूजा-अर्चना की, लेकिन परिस्थितियाँ न बदलने पर वह निराश हो गया। एक मित्र की सलाह पर उसने माँ काली की सेवा शुरू कर दी और श्रीकृष्ण की मूर्ति को मंदिर से हटाकर ऊपर एक छज्जे (टांड़) पर रख दिया।

एक दिन जब वह माँ काली के सामने सुगंधित अगरबत्ती जला रहा था, तो उसे विचार आया कि कहीं इसकी खुशबू ऊपर रखे श्रीकृष्ण तक न पहुँच जाए, जिन्हें उसने पूजना छोड़ दिया था। इसी 'अधिकार भाव' के कारण वह स्टूल पर चढ़कर श्रीकृष्ण की मूर्ति की नाक पर पट्टी बाँधने लगा। जैसे ही उसने मूर्ति को छुआ, भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हो गए और उसका हाथ पकड़ लिया।

हैरान भक्त ने जब इसका कारण पूछा, तो प्रभु ने मुस्कुराकर कहा— "आज तक तू मुझे पत्थर की निर्जीव मूर्ति मानकर पूजता था, इसलिए मैं नहीं आया। लेकिन आज जब तूने मेरी नाक बंद करने की कोशिश की, तो तेरे मन में यह दृढ़ विश्वास जागा कि यह मूर्ति भी सूंघ सकती है और इसमें प्राण हैं। तेरे इसी 'जीवित भाव' और विश्वास ने मुझे प्रकट होने पर विवश कर दिया।"

सीख: ईश्वर केवल कर्मकांड या सजावट की मूर्तियों में नहीं, बल्कि भक्त के उस सच्चे विश्वास में बसते हैं जहाँ भक्त उन्हें अपने समान जीवित और अनुभवशील मानता है।

राधे राधे

प्रातः उठकर धरती माँ के चरण स्पर्श: मंगल ग्रह को मजबूत करने का सबसे सरल और शक्तिशाली उपायक्या आपने कभी सोचा है कि हमारे ...
20/04/2026

प्रातः उठकर धरती माँ के चरण स्पर्श: मंगल ग्रह को मजबूत करने का सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे पूर्वज क्यों कहते थे कि सुबह उठते ही सबसे पहले धरती माँ को प्रणाम करो। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ज्योतिष और ऊर्जा विज्ञान का एक गहरा रहस्य है।

मंगल ग्रह: भूमि पुत्र की शक्ति

ज्योतिष शास्त्र में मंगल को 'भूमि पुत्र' कहा गया है। यानी यह ग्रह सीधे धरती की ऊर्जा से जुड़ा हुआ है। जब आप प्रातः काल उठकर नंगे पैर धरती पर चलते हैं और उसे प्रणाम करते हैं, तो आप वास्तव में मंगल ग्रह से सीधा ऊर्जा संपर्क स्थापित कर रहे होते हैं।

एक सरल सूत्र याद रखें:
जितना आप धरती से जुड़ेंगे, उतना आकाश तक उड़ान भर पाएंगे।

मंगल ग्रह किन क्षेत्रों को प्रभावित करता है

जब मंगल ग्रह आपकी कुंडली में मजबूत और शुभ होता है, तो यह आपके जीवन के निम्नलिखित क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाता है:

• भाई और पड़ोसी: मंगल से संबंध सुधरते हैं, पारिवारिक सामंजस्य बढ़ता है
• मित्र मंडली: सच्चे और सहयोगी मित्रों की प्राप्ति होती है
• भूमि और संपत्ति: जमीन, मकान और पैतृक संपत्ति से जुड़े मामले अनुकूल होते हैं
• विवाह और वैवाहिक जीवन: मंगल का शुभ प्रभाव विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है
• आंतरिक ऊर्जा: शरीर में जोश, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है
• ऋण और वित्तीय मामले: लोन संबंधी अटके हुए कार्य गति पकड़ते हैं
• साहस और पराक्रम: निर्णय लेने की क्षमता और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है

धरती स्पर्श की सही विधि

समय:
• ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के तुरंत बाद सर्वोत्तम
• नंगे पैर धरती पर खड़े हों

विधि:
1. उठते ही सबसे पहले धरती माँ को प्रणाम करें
2. दोनों हाथों से धरती को स्पर्श कर माथे से लगाएं
3. मन में प्रार्थना करें: हे धरती माँ, मुझे शक्ति, स्थिरता और समृद्धि प्रदान करें
4. कुछ क्षण नंगे पैर धरती पर चलें - इसे 'अर्थिंग' भी कहते हैं

भाव:
• केवल क्रिया नहीं, भाव महत्वपूर्ण है
• कृतज्ञता के साथ धरती को स्पर्श करें
• मानसिक रूप से मंगल देव से आशीर्वाद की प्रार्थना करें

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान भी 'अर्थिंग' या 'ग्राउंडिंग' के लाभों को स्वीकार करता है:

• धरती के इलेक्ट्रॉन्स शरीर में प्रवेश कर सूजन कम करते हैं
• प्रातः काल की धरती का स्पर्श तनाव हार्मोन को कम करता है
• नंगे पैर चलने से पैरों के मर्म बिंदु उत्तेजित होते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं
• यह प्रक्रिया शरीर की जैविक घड़ी को प्राकृतिक लय से जोड़ती है

विशेष टिप्स

• यदि घर में टाइल या फर्श है, तो बालकनी, छत या पास के बगीचे में जाएं
• बारिश के बाद की मिट्टी का स्पर्श विशेष फलदायी माना जाता है
• मंगलवार को यह उपाय और भी प्रभावशाली होता है
• नियमितता बनाए रखें - 21 दिन लगातार करने से प्रभाव स्पष्ट दिखने लगता है

याद रखें:

मंगल केवल एक ग्रह नहीं, यह आपके भीतर का साहस, ऊर्जा और संकल्प शक्ति है। जब आप धरती माँ से जुड़ते हैं, तो आप वास्तव में अपनी ही आंतरिक शक्ति को जगा रहे होते हैं। सरल उपाय, गहरा प्रभाव - यही हमारी वैदिक परंपरा की विशेषता है।

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कमेंट में लिखें: जय भूमि पुत्र

इस सरल लेकिन शक्तिशाली उपाय को उन मित्रों और परिवारजनों के साथ अवश्य साझा करें जिनकी कुंडली में मंगल संबंधी चुनौतियाँ हैं। आपका एक शेयर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और दिशा ला सकता है।

श्रीकृष्ण वंदना🙏नील गगन सा तन है जिसका,नयनों में गहरी मधुशाला।मोर मुकुट और बंसीधारी,वो है वृंदावन की माला।मधुर मुस्कान ब...
20/04/2026

श्रीकृष्ण वंदना🙏

नील गगन सा तन है जिसका,
नयनों में गहरी मधुशाला।
मोर मुकुट और बंसीधारी,
वो है वृंदावन की माला।

मधुर मुस्कान बिखेरे जो,
राधा के प्रेम में भीगा है।
हर राग में उसका नाम बजे,
हर मन उससे ही जुड़ा है।

यशोदा की गोदी का तारा,
कनक वंश का अभिमान बना।
गोवर्धन जब उंगली उठाया,
तब बालक नहीं, भगवान बना।

गोपियों के मन का चोर है,
प्रेम का सच्चा व्यवहार है।
जिसने धर्म युद्ध में रथ हाँका,
वो अर्जुन का सारथी यार है🙏
जय जय श्री राधे❤️🙏

18/04/2026

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