Har Har

Har Har शिवोहम

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे “न” काराय नमः शिवायः॥मंदाकिनी सलिल चंदन ...
06/07/2020

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे “न” काराय नमः शिवायः॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे “म” काराय नमः शिवायः॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै “शि” काराय नमः शिवायः॥

वषिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय।

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै “व” काराय नमः शिवायः॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै “य” काराय नमः शिवायः॥

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥ इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

नमामि शमीशान निर्वाण रूपं।विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।चिदाकाश माकाश वासं भजेयम।निर...
01/07/2020

नमामि शमीशान निर्वाण रूपं।
विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।
चिदाकाश माकाश वासं भजेयम।
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं।
गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं।
गुणागार संसार पारं नतोहं।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं।
मनोभूति कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरंमौली कल्लो लीनिचार गंगा।
लसद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा।
चलत्कुण्डलं भू सुनेत्रं विशालं।
प्रसन्नाननम नीलकंठं दयालं।
म्रिगाधीश चर्माम्बरम मुंडमालं।
प्रियम कंकरम सर्व नाथं भजामि।
प्रचंद्म प्रकिष्ट्म प्रगल्भम परेशं।
अखंडम अजम भानु कोटि प्रकाशम।
त्रयः शूल निर्मूलनम शूलपाणीम।
भजेयम भवानी पतिम भावगम्यं।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।
सदा सज्ज्नानंद दाता पुरारी।
चिदानंद संदोह मोहापहारी।
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।
न यावत उमानाथ पादार विन्दम।
भजंतीह लोके परे वा नाराणं।
न तावत सुखं शान्ति संताप नाशं।
प्रभो पाहि आपन्न मामीश शम्भो ।ॐॐ

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखराय धारणाय कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।1।गौर...
28/06/2020

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखराय धारणाय कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।1।

गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय भुजंगाधिप कंकणाय गंगाधराय गजराज विमर्दनाय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।2।

भक्ति प्रियाय भवरोग भयापहाय उग्राय दुर्गमभवसागर तारणाय ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।3। चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुंडल मण्डिताय मंजीर पादयुगलाय जटाधराय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय....।4।

पंचाननाय फणिराज विभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय अनन्त भूमि वरदाय तमोमयाय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।5।

भानुप्रियाय भवसागर तारणाय कालान्तकाय कमलासन पूजिताय नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।6।

रामप्रियाय रघुनाथ वर प्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।7।

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गति प्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय मातंग चर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।8।

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्‌। सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्‌। त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्‌ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥9॥

🕉️ नमः शिवाय 🙏 #लिंगाष्टकम्ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगंनिर्मलभासित शोभित लिंगम् |जन्मज दुःख विनाशक लिंगंतत्-प्रणमामि सदा...
27/06/2020

🕉️ नमः शिवाय 🙏

#लिंगाष्टकम्

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं
निर्मलभासित शोभित लिंगम् |
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 1 ‖

देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं
कामदहन करुणाकर लिंगम् |
रावण दर्प विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 2 ‖

सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं
बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् |
सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 3 ‖

कनक महामणि भूषित लिंगं
फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् |
दक्ष सुयज्ञ निनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 4 ‖

कुंकुम चंदन लेपित लिंगं
पंकज हार सुशोभित लिंगम् |
संचित पाप विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 5 ‖

देवगणार्चित सेवित लिंगं
भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् |
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 6 ‖

अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं
सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् |
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 7 ‖

सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं
सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् |
परात्परं परमात्मक लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 8 ‖

लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ |
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ‖

कुछ  #प्रसिद्ध  #भारतीय प्राचीन  #वैज्ञानिक एवं  #संशोधकपुरातन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनि एवं दार्शनिक हमारे आद...
03/05/2020

कुछ #प्रसिद्ध #भारतीय प्राचीन #वैज्ञानिक एवं #संशोधक

पुरातन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनि एवं दार्शनिक हमारे आदि वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अनेक आविष्कार किए और विज्ञान को भी ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

#अश्विनीकुमार: मान्यता है कि ये देवताओं के चिकित्सक थे। कहा जाता है कि इन्होंने उड़ने वाले रथ एवं नौकाओं का आविष्कार किया था।

#धन्वंतरि: इन्हें आयुर्वेद का प्रथम आचार्य व प्रवर्तक माना जाता है। इनके ग्रंथ का नाम धन्वंतरि संहिता है। शल्य चिकित्सा शास्त्र के आदि प्रवर्तक सुश्रुत और नागार्जुन इन्हीं की परंपरा में हुए थे।

#ऋषि #भारद्वाज: आधुनिक विज्ञान के मुताबिक राइट बंधुओं ने वायुयान का आविष्कार किया। वहीं हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक कई सदियों पहले ही ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र के जरिए वायुयान को गायब करने के असाधारण विचार से लेकर, एक ग्रह से दूसरे ग्रह व एक दुनिया से दूसरी दुनिया में ले जाने के रहस्य उजागर किए। इस तरह ऋषि भारद्वाज को वायुयान का आविष्कारक भी माना जाता है।

#ऋषि #विश्वामित्र: ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र क्षत्रिय थे। ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को पाने के लिए हुए युद्ध में मिली हार के बाद तपस्वी हो गए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई। इसी कड़ी में माना जाता है कि आज के युग में प्रचलित प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले विश्वामित्र ने ही खोजी थी।

#गर्गमुनि: गर्ग मुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार।ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के बारे में नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ। कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनिजी ने पहले बता दिए थे।
#पतंजलि: आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ही ऋषि पतंजलि ने कैंसर को भी रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है।

#महर्षि #कपिल: सांख्य दर्शन के प्रवर्तक व सूत्रों के रचयिता थे महर्षि कपिल, जिन्होंने चेतना की शक्ति एवं त्रिगुणात्मक प्रकृति के विषय में महत्वपूर्ण सूत्र दिए थे।

#कणाद ऋषि: ये वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक हैं। ये अणु विज्ञान के प्रणेता रहे हैं। इनके समय अणु विज्ञान दर्शन का विषय था, जो बाद में भौतिक विज्ञान में आया।

#सुश्रुत: ये शल्य चिकित्सा पद्धति के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य थे। इन्होंने सुश्रुत संहिता नामक ग्रंथ में शल्य क्रिया का वर्णन किया है। सुश्रुत ने ही त्वचारोपण (प्लास्टिक सर्जरी) और मोतियाबिंद की शल्य क्रिया का विकास किया था। पार्क डेविस ने सुश्रुत को विश्व का प्रथम शल्यचिकित्सक कहा है।

#जीवक: सम्राट बिंबसार के एकमात्र वैद्य। उज्जयिनी सम्राट चंडप्रद्योत की शल्य चिकित्सा इन्होंने ही की थी। कुछ लोग मानते हैं कि गौतम बुद्ध की चिकित्सा भी इन्होंने की थी।

#बौधायन: बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुलयशास्त्र के रचयिता थे। आज दुनिया भर में यूनानी उकेलेडियन ज्योमेट्री पढाई जाती है मगर इस ज्योमेट्री से पहले भारत के कई गणितज्ञ ज्योमेट्री के नियमों की खोज कर चुके थे। उन गणितज्ञ में बौधायन का नाम सबसे ऊपर है, उस समय ज्योमेट्री या एलजेब्रा को भारत में शुल्वशास्त्र कहा जाता था।
#भास्कराचार्य: आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया। भास्कराचार्यजी ने अपने ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’।
#चरक: चरक औषधि के प्राचीन भारतीय विज्ञान के पिता के रूप में माने जातें हैं। वे कनिष्क के दरबार में राज वैद्य (शाही चिकित्सक) थे, उनकी चरक संहिता चिकित्सा पर एक उल्लेखनीय पुस्तक है। इसमें रोगों की एक बड़ी संख्या का विवरण दिया गया है और उनके कारणों की पहचान करने के तरीकों और उनके उपचार की पद्धति भी प्रदान करती है। वे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पाचन, चयापचय और प्रतिरक्षा के बारे में बताते थे और इसलिए चिकित्सा विज्ञान चरक संहिता में, बीमारी का इलाज करने के बजाय रोग के कारण को हटाने के लिए अधिक ध्यान रखा गया है। चरक आनुवांशिकी (अपंगता) के मूल सिद्धांतों को भी जानते थे।

#ब्रह्मगुप्त: 7 वीं शताब्दी में, ब्रह्मगुप्त ने गणित को दूसरों से परे ऊंचाइयों तक ले गये। गुणन के अपने तरीकों में, उन्होंने लगभग उसी तरह स्थान मूल्य का उपयोग किया था, जैसा कि आज भी प्रयोग किया जाता है। उन्होंने गणित में शून्य पर नकारात्मक संख्याएं और संचालन शुरू किया। उन्होंने ब्रह्म मुक्त सिध्दांतिका को लिखा, जिसके माध्यम से अरब देश के लोगों ने हमारे गणितीय प्रणाली को जाना।
#अग्निवेश: ये शरीर विज्ञान के रचयिता थे।
#शालिहोत्र: इन्होंने पशु चिकित्सा पर आयुर्वेद ग्रंथ की रचना की।
#व्याडि: ये रसायनशास्त्री थे। इन्होंने भैषज (औषधि) रसायन का प्रणयन किया। अलबरूनी के अनुसार, व्याडि ने एक ऐसा लेप बनाया था, जिसे शरीर पर मलकर वायु में उड़ा जा सकता था।
#आर्यभट्ट: इनका जन्म 476 ई. में कुसुमपुर ( पाटलिपुत्र ) पटना में हुआ था | ये महान खगोलशास्त्र और व गणितज्ञ थे | इन्होने ही सबसे पहले सूर्ये और चन्द्र ग्रहण की वियाख्या की थी | और सबसे पहले इन्होने ही बताया था की धरती अपनी ही धुरी पर धूमती है | और इसे सिद्ध भी किया था | और यही नही इन्होने हे सबसे पहले पाई के मान को निरुपित किया।
वराहमिहिर: इनका जन्म 499 ई . में कपित्थ (उज्जेन ) में हुआ था | ये महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्र थे | इन्होने पंचसिद्धान्तका नाम की किताब लिखी थी जिसमे इन्होने बताया था की , अयनांश , का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर होता होता है | और इन्होने शून्य और ऋणात्मक संख्याओ के बीजगणितीय गुणों को परिभाषित किया |
#हलायुध: इनका जन्म 1000 ई . में काशी में हुआ था | ये ज्योतिषविद , और गणितज्ञ व महान वैज्ञानिक भी थे | इन्होने अभिधानरत्नमाला या मृतसंजीवनी नमक ग्रन्थ की रचना की | इसमें इन्होने या की पास्कल त्रिभुज ( मेरु प्रस्तार ) का स्पष्ट वर्णन किया है।पुरातन ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनि एवं दार्शनिक हमारे आदि वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अनेक आविष्कार किए और विज्ञान को भी ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

#नमः_शिवाय..🙏

 #भजे_पर्वतीवल्लभम_नीलकंठ:...
29/04/2020

#भजे_पर्वतीवल्लभम_नीलकंठ:...

शारीरिक कौशल की दृष्टि से धरती के किसी भी प्राणी के साथ हम अपनी तुलना नहीं कर सकते। लेकिन हम मनुष्यों को एक विशेष योग्यत...
27/04/2020

शारीरिक कौशल की दृष्टि से धरती के किसी भी प्राणी के साथ हम अपनी तुलना नहीं कर सकते। लेकिन हम मनुष्यों को एक विशेष योग्यता प्रदान की गयी है। बस जीवित रहने या जीवन चलाने के हमारे सहज ज्ञान से कहीं अधिक कुछ करने की विशेष योग्यता के साथ हमें बनाया गया है और ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है। एक मनुष्य के रूप में आप जीवन को चलाने की मूल आवश्यकता से कहीं अधिक ऊंचे स्तर पर देख और संभाल सकते हैं। दुर्भाग्यवश, जीवित रहने की मूल आवश्यकता से परे देखने की बजाय, अधिकतर लोगों ने बस ये किया है कि अपने जीवित रहने की मूल आवश्यकता के स्तर को ही बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। एक समय था जब जीवित रहने या जीवन चलाने का अर्थ बस दिन में दो समय का खाना होता था। आज इसका अर्थ बीएमडब्ल्यू है! मानवीय तंत्र का उपयोग करने का यह तरीका नितांत मूर्खतापूर्ण है, क्योंकि मानवीय तंत्र के पास एक अलग ही संभावना है।

ये शरीर एक साधन है। क्या आप इसका उपयोग सिर्फ अपने लिये खाना और वस्तुएँ इकट्ठा करने में ही करेंगे ? क्या आप बस शारीरिक उपलब्धियों के लिये ही इसका उपयोग करेंगे ? या फिर, आप इसका उपयोग सबसे ऊँची संभावना के रूप में करेंगे? यदि आप इसका उपयोग एक साधन के रूप में करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी पहचान इस शरीर के साथ जोड़ना बंद कीजिये। आप अच्छी तरह से जानते हैं कि आप ने इस शरीर को यहीं इकट्ठा किया है - ये बस आपके द्वारा खाए भोजन का ढेर ही है। तो, जो आप ने इकट्ठा किया है उसे आप 'मैं खुद' कैसे कह सकते हैं ? आप ने जो कुछ भी इकट्ठा किया है, वह कुछ समय के लिये आप का हो सकता है, पर ये आप नहीं बन सकता।

मानव शरीर एक गज़ब का चमत्कारिक साधन है। आप अगर एक जीवन में इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आप को बहुत कुछ करना होगा। लेकिन किसी न किसी रूप में, लोगों का अपने शरीर के साथ लगाव इतना गहरा होता है कि वे अपने शरीर को एक साधन के रूप में देख ही नहीं पाते। अपने शरीर के साथ अपनी पहचान और अपना लगाव अति गहरा होने के कारण वे इसे 'मैं स्वयं' ही समझते रहते हैं। जब आप इस शरीर को 'मैं स्वयं' की तरह देखते हैं तो उसके साथ बहुत सारी भावनायें जुड़ जाती हैं। फिर हम इसका उपयोग एक साधन की तरह नहीं कर पाते।

योग में भूत शुद्धि की सम्पूर्ण प्रक्रिया बस इसीलिये है -- पाँचों तत्वों से मुक्त होना। अगर आप अपने और पाँचों तत्वों के बीच, प्रभावशाली ढंग से दूरी बना सकते हों तो आप और आप के शरीर के बीच एक स्पष्ट स्थान रहेगा।

एक बार जब आप अपने और अपने शरीर के बीच दूरी बना लेते हैं तो आप को यह देख कर बहुत खुशी होगी कि इस तरह की अद्‌भुत मशीन आप को मिली है। बंधन और मुक्ति की समस्त सामग्रियां, इसमें अंदर ही हैं। आप इसे दिव्य बना सकते हैं। आप अपनी ऊर्जा व्यवस्था को इस तरह गतिमान कर सकते हैं कि आप का शरीर एक देवता बन जाये। या फिर आप एक मृत शरीर की तरह भी हो सकते हैं। हम कह रहे हैं कि आप इस शरीर को शव बना सकते हैं या शिव बना सकते हैं। शव का अर्थ है, मृत शरीर या लाश। शिव का अर्थ है अंतिम सत्य। ये इसी पर निर्भर करता है कि शरीर के साथ आप क्या करते हैं। यह उन तरीकों से काम कर सकता है, जिनके बारे में आप ने कभी विश्वास नहीं किया होगा कि मानव शरीर ऐसे भी काम कर सकता है।

#नमः_शिवाय !!
्री_नाथजी_की !

ज्ञान🌺🌺1⃣0⃣🌺🌺गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो, हालो सत् के मारगाँ ॥ टेर ॥1⃣आप सुवारथ सब जग राचे, परमारथ कुण राचे ओ बाबाजी।...
16/04/2020

ज्ञान
🌺🌺1⃣0⃣🌺🌺
गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो,
हालो सत् के मारगाँ ॥ टेर ॥
1⃣
आप सुवारथ सब जग राचे, परमारथ कुण राचे ओ बाबाजी।
परमारथ रा राचणियाँ नर थोड़ा रे बीरा ॥ १॥ गुरु ज्ञान ध्यान....
2⃣
हाथा में थारे झबरक दिवलो,
आगणियो कोनी सूज्याओ बाबाजी
पैड़ी ये दुहेली किसी बिध
चढ़स्यो २ बीरा ॥
3⃣
समदरिये रा माणसिया थे
तालरियाँ काँई रिज़्या बो बाबाजी
समदरिये में महँगा मोती निपजे रे बीरा ॥ ३॥ गुरु ज्ञान ध्यान.....
4⃣
ओछे जल का माणसिया थारी
तृष्णा कबहूँ न भागे ओ बाबाजी
पर नााँरया मोहेड़ा नर हीणा : बीरा ॥ ४॥ गुरु ज्ञान ध्यान....
5⃣
तंवरा में टीकायत सिद्ध श्री रामदेवजी बोल्या ओ बाबाजी
हाथ लगेड़ो माणसियो मत खोवो २ बीरा ॥ ५॥ गुरु ज्ञान ध्यान..

-{{: शिव डमरू वाले :}}-शिव डमरू वाले को, दिल से ना भूलाना तू  |शंभू त्रिपुरारी की, निज आरती गाना तू ||शिव शिव कहके प्राण...
14/04/2020

-{{: शिव डमरू वाले :}}-

शिव डमरू वाले को, दिल से ना भूलाना तू |
शंभू त्रिपुरारी की, निज आरती गाना तू ||

शिव शिव कहके प्राणी, जीने का मजा लेले |
मालूम नहीं कब तू, दुनिया से रजा लेले ||
भोले भण्डारी को, निज हाल सुनाना तू || शम्भू ||

किस्मत के भरोसे पे, कर्मो को किये जा तू |
दो दिन की रवानी है, हँस हँस के जिए जा तू |
माया के दीवानों का, कुछ खोफ़ ना खाना तू || शम्भू ||

पीकर के जहर शिव ने, अमृत को बिसारा था |
कर जोड़ के देवो ने, भोले को पुकारा था |
शिव चरण के पाणी को, आँखों से लागाना तू || शम्भू ||

जय शंकर की......
जय श्री नाथजी की ....

निशाकाल में ही अरुणोदय के संकेत छिपे होते हैं तथैव विपरीत परिस्थितियां हमें आत्म-उन्नति के अनेक अवसर प्रदान करती हैं ! इ...
12/04/2020

निशाकाल में ही अरुणोदय के संकेत छिपे होते हैं तथैव विपरीत परिस्थितियां हमें आत्म-उन्नति के अनेक अवसर प्रदान करती हैं ! इस वैश्विक संकट-काल में सकारात्मक रहें ! धैर्य, संयम, उत्साह, पारमर्थिकता सहेज कर रखें ..! जीवन में मिलने वाली चुनौतियों को लेकर सकरात्मक दृष्टिकोण रखिए।अगर हमारी सोच सकारात्मक है तो चुनौती को अवसर बनने में समय नहीं लगेगा। जब भी, जहां से भी चुनौतियां मिल रही हैं, उन्हें स्वीकार कीजिए। चुनौतियाँ हमें आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती हैं तथा उत्साह भरती हैं। इसलिए चुनौतियों से कभी ना घबराइए, उन्हें एक नया अवसर समझिए। नई-नई चुनौतियाँ हमें हर बार कुछ नया सिखाती है। याद रखिये, कुछ नया करने व सिखने के लिए चुनौतियाँ भी जीवन में आवश्यक हैं।अतः ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखें, क्योंकि जीवन एक संघर्ष है, चुनौतियां तो आएंगी ही। इनसे सहम कर जो हिम्मत हार जाते हैं, सफलता उनसे दूर भाग जाती है। मुश्किलों एवं कष्टों से भागना, नयी मुसीबतों को निमंत्रण देने के समान है। जीवन में समय-समय पर चुनौतियों एवं मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, यही जीवन का सत्य है।

आरम्भ करो चुनौतियों, दुविधाओं और कठिनाईओं से निराश न हों; क्योंकि आरम्भ करना सदा ही कठिन रहा है। मनुष्य जीवन अनन्त सम्भावनाओं से भरा है। असफलता-अभाव और किसी भी प्रकार की प्रतिकूलता आपके लक्ष्य से आपको दूर नहीं कर सकती। संकल्प की दृढ़ता, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण उन्नयन-उत्कर्ष प्रदाता हैं। अतः पराक्रम और पुरुषार्थ से लक्ष्य सिद्धि प्राप्त की जा सकती है ...।

सकारात्मक विचार दु:ख, दैन्य और अल्पता के निवारण की सर्वोत्तम औषधि है। स्वस्थ, सकारात्मक और पवित्र विचार दिशा और दृष्टि प्रदान करते हैं। जीवन रचना में विचार की मूल भूमिका है। मन में हरपल शुभ व दिव्य विचार प्रसूत हों, ऐसी सचेतता रहे। सकारात्मक विचार अंतस के सौंदर्य, माधुर्य, ऐश्वर्य और आत्म-ऊर्जा को चैतन्य कर व्यक्ति को सहजता प्रदान करते हैं।
आध्यात्मिक शक्ति को प्राप्त करना ही मनुष्य की वास्तविक उन्नति है। आध्यात्मिक शक्तियों के अभाव में विवेक, विचार व ज्ञान खो जाता है और व्यक्ति अवसाद (Depression) में पहुंच जाता है। आध्यात्मिक उन्नति द्वारा हर प्रकार की उन्नति संभव है। उसे छोड़कर किसी भी उन्नति का फल स्थाई नहीं होता। आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक उन्नति भी होती है। प्राचीन काल में आध्यात्मिक उन्नति को ही सर्वोपरि समझा जाता था। आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होने पर शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक बल स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। जिसे अध्यात्म बल प्राप्त है वह संसार में सदैव अभय रहता है और प्रत्येक संघर्ष में विजयी होता है। आध्यात्मिक उन्नति द्वारा भौतिक उन्नति स्वभाविक है। यह आध्यात्मिक उन्नति मानव शरीर में ही संभव है। अतः व्यक्ति को अपना ऐसा स्वभाव बनाना चाहिए कि वाणी से कभी कठोर शब्द न निकले तथा सहनशीलता के गुणों को विकसित करने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहना चाहिए ...।

नमः शिवाय ।।

शिव अजन्मा हैं, मृत्युंजय हैं। उनकी जन्मजयंति या निर्वाण दिन तो होता नहीं ! तब कैसे मनायें भोलेबाबा का दिन ?! शिव जी का ...
21/02/2020

शिव अजन्मा हैं, मृत्युंजय हैं। उनकी जन्मजयंति या निर्वाण दिन तो होता नहीं ! तब कैसे मनायें भोलेबाबा का दिन ?! शिव जी का विवाह दिवस ही मना सकते हैं हम। आज शिवरात्रि, शिवजी के विवाह दिवस की हार्दिक बधाई। हम जीव आज शिव से एकत्व अनुभव करें।

आज उपवास उप=समीप,वास=रहना। आज मन को प्रभुमें लगाना है, प्रभु के समीप रहना है।

ईशानसंहिता के अनुसार आज शिवलिंगका प्रादुर्भाव हुआ है। ऐसे शिवमय(कल्याणमय) दिन पर हमारा मन अर्धनारीश्वर होते हुए भी कामविजेता, गृहस्थ होते हुए भी विरक्त और नीलकण्ठ होकर भी विष से अलिप्त ऐसे शिवोपासनमें लगे यही इस दिन-विशेष की सार्थकता है।
सभी को महाशिवरात्रि की शिवमयी बधाई।

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Fatehpur Shekhawati
Fatehpur

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