26/08/2025
जीवन में मनुष्यत्व दुर्लभ है
........स्वामी सत्यानन्द
अखिल भारतीय सोऽहम् महामण्डल, फतेहाबाद के तत्त्वावधान में चल रहे सप्तदिवसीय संत सम्मेलन के तृतीय दिवस सोऽहम् पीठाधीश्वर श्री स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने कहा कि जीवन में मनुष्यत्व अर्थात् मानवता दुर्लभ है। हमको भगवान की कृपा से मानव जीवन तो मिल गया है। किन्तु हम प्रमादवश भूल जाते हैं। जीवन में धर्म के अनुसार श्रेष्ठ कर्म करके दया, प्रेम, परोपकार, करुणादि श्रेष्ठ गुण आ जाएं तो समझना चाहिए कि हम परमार्थ के मार्ग पर बढ़ रहे हैं। यदि हमारे पास सद्विद्या, तप, दान, ज्ञान, सदाचार, धर्म आदि गुण नहीं है तो समझना चाहिए जीवन व्यर्थ ही है। खाना, पीना, सोना, जागना आदि तो पशु, पक्षी भी कर लेते हैं। इसलिए हमको प्रयत्नपूर्वक अच्छे गुणों धारण करना चाहिए जिससे हमारे जीवन में मानवता आ सके।
म.म.शुकदेवानंद ने कहा कि मन को निर्मल बनाने के लिए हमको प्रयास करना चाहिए क्योंकि निर्मल मन वाले से ही भगवान प्रसन्न होते हैं। स्वामी रामशरणदास ने हनुमान जी के सद्गुणों का वर्णन किया। स्वामी प्रीतमदास ने हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज की कथा सुनाई। स्वामी प्रणवानंद ने जगत को क्षणभंगुर बताया। स्वामी शिवानंद ने भगवान की शरण ग्रहण करने की प्रेरणा दी। स्वामी सदानंद, स्वामी हरीशानंद ने भी श्रोताओं कूपदेशित किया। इस अवसर पर श्री पुरुषोत्तम बड़ोपलिया, रामकुमार, राधेश्याम, पूनम, कार्तिक, शिवम् स्वामी, संजय गोयल, रमेश, गुरुदेव, घनश्याम, बजरंग, सोनू, रामनिवास मित्तल अशोक गर्ग .......... इत्यादि भक्तों ने भगवान की आरती कराई।