Yogender Bhardwaj - The Astro

Yogender Bhardwaj - The Astro Simple Astrology... Which gives you real faith not hypocrisy. Just think and then believe. Karmaa's are the real thing in life, and here we change them...

27/07/2019

आदतें जो ग्रहों को क्रोधित करती हैं

1. घर का मंदिर कभी गंदा नहीं होना चाहिए, अगर ऐसा होता है तो बृहस्पति ग्रह क्रोधित होते हैं। कोशिश करें कि आपके घर का मंदिर हमेशा साफ-सुथरा रहे।

2. अगर आप अपने झूठे बर्तन वहीं छोड़ देते हैं तो चंद्रमा और शनि नाराज होते हैं। ऐसा होने से सफलता में कमी आने लगती है।

3. जो व्यक्ति देर रात तक जागता है उसे चंद्रमा कभी शुभ फल प्रदान नहीं कर पाता।

4. जब भी आपके घर कोई मेहमान आता है तो उसे ठंडा और स्वच्छ पानी अवश्य पिलाएं, ऐसा करने से राहु ग्रह ठीक रहता है और अशुभ नहीं करता।

5. अगर आप रसोई को गंदा रखते हैं तो मंगल ग्रह का नकारात्मक परिणाम आपके ऊपर पड़ता है। इसलिए रात को सोते समय रसोई हमेशा साफ करें।

6. अगर रोज सुबह उठकर आप अपने घर में लगे पौधों को पानी देते हैं तो इसे बुध, शुक्र, सूर्य और चंद्रमा ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देते हैं।

7. जो लोग अपना पैर घसीटकर चलते हैं, उन लोगों का राहु खराब होता है। अपने ऐस आदत को जल्द से जल्द सुधार लें।

8. बाथरूम में पानी को बिखेरना, गंदे कपड़े वहां रखना, ये सब चंद्रमा को रुष्ट करता है। ऐसा करने से चंद्रमा कभी शुभ फल नहीं देता।

9. जो लोग घर में घुसते ही अपने चप्पल, जुराबें और कपड़े इधर-उधर फेंक देते हैं, उनके जीवन में शत्रुओं की संख्या बढ़ने लगती है।
जो लोग हर समय चीखते और गुस्से में रहते हैं, उनका शनि खराब होता है। शनि के खराब होने से जमीन-जायदाद से जुड़े मसलों में नुकसान होता है।

10. कमरे का बिस्तर हमेशा फैला रहता है, बिस्तर पर हमेशा सिलवटें पड़ी रहती हैं और साथ ही तकिए भी इधर-उधर गिरे रहते हैं, उन्हें राहु और शनि परेशान करते हैं।

11. बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने से बृहस्पति ग्रह प्रसन्न होते हैं और वे जातक को शुभ फल प्रदान करते हैं।
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22/05/2019

अपने 🧒🏻बच्चों👧🏻 के ग्रहों के संकेत को उनके व्यवहार से जाने:

*🌹ज्योतिषाचार्य: योगेंदर भारद्वाज🌹*
80590-60409

1⃣सूरज कमजोर होने पर बच्चे को सुबह जागने में परेशानी होगी और पिता से दूरी बढ़ेगी।

2⃣चंद्र जब कमजोर होगा तो कुछ पूछने पर रोने लगेंगे।

3⃣मंगल जब कमजोर होगा तो गुस्सा बढ़ेंगा और चिड़चिड़े होंगे।

4⃣बुध जब कमजोर होगा तो कम बात करेंगे, याददाश्त कमजोर होगी। बाजार से क्या लाना है भूल जायेगे,किताब कहाँ रखी,किसको दी भूल जायेगे।

5⃣गुरु जब कमजोर होगा तो बुजुर्ग का सम्मान नहीं करेंगे,जंक फूड ज़्यादा खायेगे।

6⃣शुक्र जब कमजोर होगा तो काम करने का कोई समय नहीं होगा। सुबह उठकर चादर की घड़ी नही बनायेगा।

7⃣शनि जब कमजोर होगा तो एकांत में बैठने लगते हैं। पैर घिस कर चलेंगे।

8⃣राहु जब कमजोर होगा तो मोबाइल में ज़्यादा व्यस्त रहेंगे। कम उम्र में गलत आदतों के शिकार हो जायेगे।

9⃣केतु जब कमजोर होगा तो बच्चे अँधेरे में अधिक समय रहते है, कम रोशनी में मोबाइल चलना और कम रोशनी में पढ़ाई करना, बिस्तर पर लेट कर किताब पढ़ना आदि।

कुंडली के सम्पूर्ण विश्लेषण के लिए सम्पर्क करें।
🌹ज्योतिषाचार्य योगेन्द्र भारद्वाज 🌹
80590-60409

19/05/2019

कुंडली विश्लेषण के लिए सम्पर्क करें...
ज्योतिष विशेषज्ञ
योगेन्द्र भारद्वाज
8059060409

19/05/2019

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*आज का विषय: कुंडली द्वारा आजीविका का मुख्य माध्यम नौकरी का निर्धारण व नौकरी के प्रकार।*
प्रस्तुति: ज्योतिषाचार्य योगेन्द्र भारद्वाज
(8059060409)

1. *सरकारी नौकरी:* इसके लिए उच्च सूर्य, उच्च शुक्र, लग्न व दशम का विपरीत स्थान परिवर्तन-युति, सूर्य का अपने कारक भाव 1, 5, 9 में बैठना।

2. *गैर-सरकारी नौकरी:* इसके लिए कोई विशेष ग्रह स्थिति नही है, परंतु फिर भी उच्च शुक्र, उच्च बुध, दशमेश की चतुर्थ व स्वराशि होना, षष्टमेश का स्वराशि, शनि का षष्टमेश होना, व सूर्य अथवा शुक्र का स्वराशि होकर षष्टमेश में होने से जातक ग़ैरसरकारी नौकरी में जाता है।

3. *अर्धसरकारी:* इसके लिए सूर्य व शनि की युति, सूर्य व शुक्र के साथ गुरु व बुध की युति, सूर्य का शुक्र के नक्षत्र में होना, अथवा शुक्र का सूर्य के नक्षत्र में होना, सूर्य का दशमेश के नक्षत्र में होना, आदि संयोग बनते हैं।

4. *समय निर्धारण:* अधिकतर स्थितियों में देखा गया है कि जब भी लग्नेश की महादशा के अंदर दशमेश, चतुर्थेश, भाग्येष की अंतर्दशा चलती है, अथवा दशमेश के अंदर लग्नेश व चतुर्थेश् की अंतर चलती है तो जातक की नौकरी के संयोग बनते हैं। इसके साथ साथ षष्टमेश कि भी दशा आदि का ध्यान रखना होना होता है।

4. *बिना शिक्षा के नौकरी:* ये विषय राकेश जी द्वारा उठाया गया है, अतः इसके सन्दर्भ में यही कहना चाहूंगा कि, आज बहुत से लोग जो शॉपिंग मॉल, दुकान, आदि जगहों पर कार्यरत है, हालांकि ये नौकरी भी ग़ैरसरकारी में आती है, परंतु इस विशेष स्थिति में जातक का षष्टम भाव बहुत अधिक पीड़ित होता है, अथवा षष्ठम में शनि का नीच होना व सूर्य आदि का पापी ग्रही के साथ सम्पर्क में आना अथवा दशम साथ मे शनि का पापी ग्रेहों के साथ युति-नक्षत्र-स्वराशि होना आदि कहे जाते हैं।

ऐसे जातक पूरी उम्र केवल लोगो की गुलामी करने के लिए ही बने होते हैं, वे अपने जीवन मे बदलाव चाहते तो हैं परंतु परिवार की समस्या जे आगे उन्हें विवश होना पड़ता है, ओर यही राहु आदि पापी ग्रह करवाते हैं।

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19/05/2019

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*आज का विषय: सन्तान योग*
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*
80590-60409

● *सन्तान सुख:* किसी भी जातक की कुंडली मे सन्तान योग देखने के लिए लग्न कुंडली व चन्द्र कुंडली दोनो में से जिसका भी पंचमेश बली हो, दोनो का पंचम भाव, पंचम भाव कारक गुरु की स्थिति व गुरु से पंचम स्थान आदि का विचार करना जरूरी होता है। इसके साथ साथ सप्तमांश कुंडली का भी अध्ययन जरूरी है।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

● *सन्तान योग:* इसमे यह देखा जाता है कि कुंडली मे सन्तान प्राप्ति के लिए कौन-कौनसे ग्रह मिलकर योग बना रहे हैं।
सामान्य रूप से लग्न-लग्नेश, पंचम-पँचमेश, पंचम-नवम व इनके स्वामी की इन्ही भावों में स्थिति, युति व दृष्टि सम्बन्ध बनाने से जातक को सन्तान सुख मिलता है। इसके साथ ही यदि लग्न में पंचमेश, पंचम में लग्नेश दोनो ही अपनी स्वराशि-मित्र राशि, उच्च, मूलत्रिकोण होकर बैठे हो तो जातक को सन्तान योग दिलवाते हैं।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

● *सन्तान संख्या:* इसके अनुसार यह देखा जाता है कि जातक को कितनी सन्तान होने का योग है।
इसके लिए *प्रथम सन्तान* के लिए पंचम स्थान, *द्वितीय सन्तान* के लिए पंचम से तृतीय स्थान अर्थात सप्तम, ओर *तृतीय सन्तान* के लिए पंचम के तृतीय का तृतीय स्थान अर्थात नवम स्थान को देखा जाता है। यह क्रम ऐसे ही चलता है।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

● *पुत्र सन्तान:* कुंडली के पुरुष प्रधान ग्रह जब पँचम में, पँचमेश होकर, पँचम-पँचमेश से युति, दृष्टि सम्बन्ध बनाते हैं तो जातक को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है, इसके साथ यदि जातक के लग्न-लग्नेश, नवम-नवमेश आदि भी पुरुष प्रधान हो तो जातक को *केवल पुत्र* ही होते हैं। इसके साथ ही शनि व बुध का विषम राशि मे योग पुत्र प्रदान करता है।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

● *पुत्री सन्तान:* उपरोक्त के ठीक विपरीत स्थिति में जब कोई स्त्री प्रधान ग्रह जब पँचम में, पँचमेश होकर, पँचम-पँचमेश से युति, दृष्टि सम्बन्ध बनाते हैं तो जातक को पुत्री रूपी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, इसके साथ यदि जातक के लग्न-लग्नेश, नवम-नवमेश आदि भी स्त्री प्रधान हो तो जातक को *केवल पुत्री* ही होती हैं। इसके साथ ही शनि व बुध का सम राशि मे योग पुत्री प्रदान करता है।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

● *निसंतानता:* इसमे जातक को कोई भी सन्तान नही होती।
इसके लिए मुख्य रूप से पँचमेश-नवमेश का 6-8-12 में होना, पँचम स्थान में पापी ग्रहो की स्थिति, युति, पँचमेश शत्रु राशिस्थ, निर्बल, कमजोर अवस्था मे हो तो जातक को कोई सन्तान नही होती अथवा बहुत अधिक यत्न करने से काफी समय बाद जब पँचम-पँचमेश से जुड़े पापी ग्रह की दशा-अन्तर्दशा आदि चली जाती है तब सन्तान की प्राप्ति होती है।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

● *अन्य घटक:* लग्न, पँचम अथवा नवम स्थान में पितृ दोष, काल सर्प दोष व गुरु चांडाल दोष जैसे अशुभ योग भी सन्तान प्राप्ति में अड़चनें पैदा करते हैं अथवा सन्तान विवाह के बहुत अधिक समय बाद होती है।
*आचार्य योगेंद्र भारद्वाज*

नोट: कुंडली विश्लेषण के लिए सम्पर्क करें।

ज्योतिषाचार्य योगेन्द्र भारद्वाज।
8059060409

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*************************प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के उपाय************************* आज के युग में हर विद्यार्थी चाहता ...
15/07/2017

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प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के उपाय
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आज के युग में हर विद्यार्थी चाहता है कि उसका भविष्य उज्जवल हो, वह जीवन में बहुत आगे बड़े, उसकी शिक्षा सार्थक हो, उसका कैरियर श्रेष्ठ हो। उसके लिए वह बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है, उनमें बैठता है , अथक परिश्रम करता है । लेकिन श्रेष्ठ कैरियर में कम्पटीशन बहुत ज्यादा होता है, और स्थान बहुत ही कम , अत: बहुत से विद्यार्थी लाख प्रयास के बाद भी अपना इच्छित स्थान नहीं प्राप्त कर पाते है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप अपनी कड़ी और योजनाबद्ध मेहनत के साथ कुछ आसान सी बातो को ध्यान में रखे तो आपको अपने परिश्रम के उत्कर्ष परिणाम प्राप्त होते है । यहाँ पर हम आपको कुछ आसान से उपाय बता रहे है जिससे आपको प्रतियोगी परीक्षा में अवश्य जी लाभ प्राप्त होगा ।
om किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्ति हेतु हर गुरुवार को नियम से किसी भी गाय को पीले पेड़े अवश्य खिलाये ।

*** विद्यार्थी को चहिये की वह गणेश चालीसा का पाठ करें और बुधवार को गणपति जी को बेसन के लड्डू और दूर्वा अर्पित करें।

*** विद्यार्थी को चाहिए की वह अपनी पड़ाई की मेज या कमरे की ईशान की दीवार पर माँ सरस्वती की तस्वीर जरुर लगायें और रोज उनसे बेहतर विद्या प्राप्ति के लिए आग्रह करें ।

*** परीक्षा देने जाते समय यदि छात्र मीठा दही या अन्य कोई भी मीठा खाकर जाये तो उसे निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है ।

*** परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता के लिए विद्यार्थी छात्र छात्रा को रोज नियम से उगते हुए सूर्य देव को फूल ,लाल चंदन, चावल आदि डालकर जल चडाने एवं उनका ध्यान करने से अति विशेष लाभ की प्राप्ति होती है , इस नियम का जीवन पर्यंत पालन करने से व्यक्ति को जीवन में सदैव सफलता की प्राप्ति होती है ।

*** ब्राम्ही का नित्य सेवन करने वाले विधार्थियों की बुद्धि त्रीव होती है स्मरण शक्ति बडती है इसलिए उन्हें परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त होती हैं।

*** जिन विद्यार्थियों को परीक्षा में उत्तर भूल जाने की आदत हो, उन्हें परीक्षा में अपने पास कपूर और फिटकरी रखनी चाहिए। इससे मानसिक रूप से मजबूती बनी रहती है और यह नकारात्मक ऊर्जा को भी हटाती हैं ।

*** विद्यार्थियों के कमरे में दीवार पर नीम की डाली लगनी चाहिए इससे कमरे में शुद्ध हवा के साथ साथ सकारात्मक उर्जा का भी प्रभाव बना रहता है ।

*** साधारणतया मस्तिष्क का केवल 3 से 7 प्रतिशत भाग ही सक्रिय हो पाता है। शेष भाग सुप्त रहता है, जिसमें अनंत ज्ञान छिपा रहता है। ऐसी विलक्षण शक्ति को जाग्रत करने के दोनों कानों के नीचे के भाग को अंगूठे और अंगुलियों से दबाकर नीचे की ओर खीचें। पूरे कान को ऊपर से नीचे करते हुए मरोड़ें। सुबह 4-5 मिनट और दिन में जब भी समय मिले, कान के नीचे के भाग को खींचे।

*** सिर व गर्दन के पीछे बीच में मेडुला नाड़ी होती है। इस पर अंगुली से 3-4 मिनट मालिश करें। इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ा हुआ याद रहता है।

*** उत्तर दिशा में मुंह करके पिरामिड की आकृति की टोपी पहनकर पढ़ाई करने से पढ़ा हुआ बहुत शीघ्र याद होता है। टोपी, कागज, गत्ता या मोटे कपड़े की बनाई जा सकती है।

*** 125 ग्राम बादाम और 125 ग्राम सौंफ को मिलाकर बारीक़ कूट लें । इसको प्रतिदिन एक तोला रात में सोते समय पानी के साथ ले लें । शरीर स्वस्थ रहेगा दिमाग और नज़र दोनों ही तेज़ होते है ।

*** किसी शुभ मुहूर्त में लाल सुलेमानी हक़ीक को धारण करने से भी दिमाग तेज़ होता है …निर्णय लेने में आसानी रहती है ।

05/07/2017

उधार दिया पैसा फंस जाए तो
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कभी-कभी उधार में बहुत-सा पैसा फंस जाता है। ऐसी स्थिति में यह प्रयोग करके देखें-
किसी भी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रुई धुनने वाले से थोड़ी साफ रुई खरीदकर ले आएँ।[केमिकल से साफ़ की हुई बाजारू रुई का प्रयोग करने से बचें ] उसकी चार बत्तियाँ बना लें। जावित्री, नागकेसर तथा काले तिल (तीनों अल्प मात्रा में) थोड़ा-सा गीला करके कूट पीस लें और इसमें बत्तियों को भिगोकर सुखा लें। यह चारों बत्तियाँ किसी चौमुखे दिए में रख लें। रात्रि को सुविधानुसार किसी भी समय दिए में तिल का तेल डालकर चौराहे पर चुपके से रखकर जला दें। अपनी मध्यमा अंगुली का साफ पिन से एक बूँद खून निकाल कर दिए पर टपका दें। मन में सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम, जिनसे कार्य है, तीन बार पुकारें। मन में विश्वास जमाएं कि परिश्रम से अर्जित आपकी धनराशि आपको अवश्य ही मिलेगी। इसके बाद बिना पीछे मुड़े चुपचाप घर लौट आएँ। अगले दिन सर्वप्रथम एक रोटी पर गुड़ रखकर गाय को खिला दें। यदि गाय न मिल सके तो उसके नाम से निकालकर घर की छत पर रख दें।यदि कर्ज दी हुई राशि अधिक है तो किसी सिद्ध काली साधक से काली का यन्त्र ताबीज बनवाकर धारण करें तथा इस प्रयोग के साथ काली के प्रयोग करें |............................................हर-हर महादेव
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05/07/2017

वशीकरण टोटका
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अगर पति या प्रेमी का पत्नी या प्रेमिका के प्रति प्यार कम हो गया हो तो श्री कृष्ण का स्मरण कर तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करती हुई शुक्रवार के दिन छुपा कर रखें। जैसे अगर साड़ी पहनतीं हैं तो अपने पल्लू में बांध कर उसे रखा जा सकता है और अन्य लिबास पहनती हैं तो रूमाल में रखा जा सकता है।
शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति या प्रेमी को खिला दें। मात्र तीन शुक्रवार में स्पष्ट फर्क नजर आएगा।.......................................................हर-हर महादेव
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05/07/2017

॥ श्रीकृष्णस्तोत्रं मोहिनीरचितम् ॥
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श्री गणेशाय नमः । मोहिन्युवाच ।
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सर्वेन्द्रियाणां प्रवरं विष्णोरंशं च मानसम् ।
तदेव कर्मणां बीजं तदुद्भव नमोऽस्तु ते ॥ १॥
स्वयमात्मा हि भगवान् ज्ञानरूपो महेश्वरः ।
नमो ब्रह्मन् जगत्स्रष्टस्तदुद्भव नमोऽस्तु ते ॥ २॥
सर्वाजित जगज्जेतर्जीवजीव मनोहर ।
रतिबीज रतिस्वामिन् रतिप्रिय नमोऽस्तु ते ॥ ३॥
शश्वद्योषिदधिष्ठान योषित्प्राणाधिकप्रिय ।
योषिद्वाहन योषास्त्र योषिद्बन्धो नमोऽस्तु ते ॥ ४॥
पतिसाध्यकराशेषरूपाधार गुणाश्रय ।
सुगन्धिवातसचिव मधुमित्र नमोऽस्तु ते ॥ ५॥
शश्वद्योनिकृताधार स्त्रीसन्दर्शनवर्धन ।
विदग्धानां विरहिणां प्राणान्तक नमोऽस्तु ते ॥ ६॥
अकृपा येषु तेऽनर्थं तेषां ज्ञानं विनाशनम् ।
अनूहरूपभक्‍तेषु कृपासिन्धो नमोऽस्तु ते ॥ ७॥
तपस्विनां च तपसां विघ्नबीजाय लीलया ।
मनः सकामं मुक्‍तानां कर्तुं शक्‍तं नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
तपःसाध्यस्तथाऽऽराध्यः सदैवं पाञ्चभौतिकः ।
पञ्चेन्द्रियकृताधार पञ्चबाण नमोऽस्तु ते ॥ ९॥
मोहिनीत्येवमुक्‍त्वा तु मनसा सा विधेः पुरः ।
विरराम नम्रवक्‍त्रा बभूव ध्यानतत्परा ॥ १०॥
उक्‍तं माध्यन्दिने कान्ते स्तोत्रमेतन्मनोहरम् ।
पुरा दुर्वाससा दत्तं मोहिन्यै गन्धमादने ॥ ११॥
स्तोत्रमेतन्महापुण्यं कामी भक्‍त्या यदा पठेत् ।
अभीष्टं लभते नूनं निष्कलङ्को भवेद् ध्रुवम् ॥ १२॥
चेष्टां न कुरुते कामः कदाचिदपि तं प्रियम् ।
भवेदरोगी श्रीयुक्‍तः कामदेवसमप्रभः ।
वनितां लभते साध्वीं पत्‍नीं त्रैलोक्यमोहिनीम् ॥ १३॥
॥ इति श्रीमोहिनीकृतं कृष्णस्तोत्रं समाप्तम् ॥
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05/07/2017

बारिश का जल = सौंदर्य भी और मनोकामना पूर्ती भी
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मानसून की वर्षा भारत की कृषि का ,पीने के जल का आधार है |यह जीवन आधार तो है ही साथ ही यह सौंदर्य वर्धक भी है और इसके अद्भुत तांत्रिक प्रयोग भी हैं जो आपकी मनोकामनाओं को भी पूर्ण करते हैं और दुखों को भी समाप्त करते हैं |
१. बारिश का पानी आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता हैं देखना चाहती हैं इसका चमत्कार, तो उसे किसी बरतन में भर कर देखें। बारिश का यह जल आपके चेहरे की त्वचा के लिए टॉनिक का कार्य करेगा। ऐसा की आप अपने मुख-मंडल की आभा देखती रह जाएंगी। इस पानी को छानकर बोतल में भर लें और प्रतिदिन इस जल से अपना मुंह धोएं इस से चेहरे की त्वचा बहुत नरम रहेगी।
२. मुल्तानी मिट्टी को बारिश के पानी में रात भर भिगोकर सुबह 10-15 मिनट तक लगाये। इससे मुंहासों से मुक्ति मिल जाएंगी।
३. शरीर की त्वचा की सुरक्षा के लिए सरसों के दानों को कम आंच पर भूनकर कच्चे दूध और बारिश के जल में पीसकर उबटन के लिए घोल तैयार कर लें। इस उबटन को पूरे शरीर पर लगाए, इससे आपके सौंदर्य में यकीनन चार चांद लग जाएंगे।

बारिश का पानी आपकी जिंदगी में सौन्दर्य के साथ ही खुशहाली ,समृद्धि और आरोग्यता भी ला सकता है.तंत्र में बारिश के पानी के कुछ ख़ास टोटके बताये गये हैं, जो व्यक्ति की तक़दीर बदल सकते हैं.
1. बारिश का पानी कितना लाभकारी है ऐसा हमारे शास्त्रों में भी लिखा हुआ है. यदि आप अचानक की किसी धन लाभ से मिलना है तो आप एक काम कीजिये कि घर के ईशान कोण में बारिश का पानी संचित कीजिये. किसी भी तरह से घर के इस हिस्से में कोई टंकी या कुछ बनवाकर, यहाँ बारिश का पानी जमा करें. आपको अचानक धन लाभ होगा.
2. अगर आपका व्यापार पिछले कुछ समय से परेशानी में हैं तो आप एक काम कीजिये कि एक साफ़ पीतल के लोटे या बर्तन में बारिश का पानी जमा कीजिये और इस जल से लक्ष्मी जी का अभिषेक करें. साथ में लक्ष्मी जी की आरती पढ़ें. आपको लाभ मिलेगा.
3. परिवार में अगर कलेश रहता है और सुख नहीं आ पा रहा है तो आप विष्णु भगवान पर बारिश का का जल चढायें और साथ में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का मन्त्र जाप, कम से कम 108 बार करें. परिवार में सुख बना रहेगा.
4. यदि आपको लगता है कि घर में नकारात्मक शक्तियों का वास है तो आप एक काम कीजिये कि बारिश का पानी किसी बर्तन में लें और इस जल को साफ़ जमीन पर रखकर, कम से कम 51 बार हनुमान चालीसा का जाप करें. बाद में इस जल को सारे लोगों पर और सारे घर में इस जल की वर्षा करें. आपको इसका आश्चर्यजनक लाभ होगा.
5. यदि आपको कोई पुराना रोग है जो सही नहीं हो रहा है और यह रोग सर्दी से जुड़ा नहीं है तो आप बारिश के जल में नहाते वक्त महामृत्युंजय मन्त्र का जाप कम से कम 1000 बार करें. यदि वर्षा रुक भी जाये तो आप मन्त्र जाप करते रहें. आपको लाभ होगा.महामृत्युंजय मंत्र से वर्षा जल को अभिमंत्रित कर पीने से स्वास्थय लाभह होता है |
6. अगर आपके ऊपर कर्ज है और आप उसको चुका नहीं पा रहे हैं तो एक काम कीजिये की बारिश का पानी किसी बाल्टी में जमा करें और इसके अन्दर दूध डाल दें. इसके बाद आप अपने इष्ट देव को याद करते हुए, इससे नहा लें. कर्ज जल्द से जल्द खत्म होने लगेगा.
7. अगर घर में किसी का विवाह नहीं हो पा रहा है तो आप एक काम कीजिये कि बारिश के जल से गणेश भगवान का जलाभिषेक कीजिये. साथ में गणेश जी की आरती करें. ऐसा करते रहें, आपको लाभ होगा.साथ ही बुद्धि तेज होती हे।विवाह योग शीघ् बनता हे।
8. बारिश के जल के लिए एक ख़ास बात यह बताइ जाती है कि बारिश सावन के माह में जरूर होती है तो अगर इस माह में कोई व्यक्ति बारिश के पानी से शिव भगवान का जलाभिषेक करता है तो उसके सभी दुःख खत्म होने लगते हैं..........................................हर-हर महादेव
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05/07/2017

मंत्र साधना करते समय सावधानियां
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मंत्रों की शक्ति असीम है। किन्तु यदि साधनाकाल में नियमों का पालन न किया जाए तो कभी-कभी बड़े घातक परिणाम सामने आ जाते हैं। प्रयोग करते समय तो विशेष सावधानी‍ बरतनी चाहिए। मंत्र उच्चारण की तनिक सी त्रुटि सारे करे-कराए पर पानी फेर सकता है |कभी कभी मंत्र उच्चारण में जरा सी गलती अर्थ को उल्टा कर देती है जिससे अनर्थ होने लगता है |
प्राचीन धर्म ग्रन्थों में मंत्र जाप के महत्व को बहुत विस्तार पूर्वक बताया गया है.| भारतीय संस्कृति में मंत्र जप की परंपरा पुरातन काल से ही चली आ रही है.| प्राचीन वेद ग्रंथों में सहस्त्रों मंत्र प्राप्त होते हैं जो उद्देश्य पूर्ति का उल्लेख करते हैं.| मंत्र शक्ति का आधार हमारी आस्था में निहीत है.| मंत्र के जाप द्वारा आत्मा, देह और समस्त वातावरण शुद्ध होता है.| छोटे से मंत्र अपने में असीम शकित का संचारण करने वाले होते हैं. | इन मंत्र जापों के द्वारा ही व्यक्ति समस्त कठिनाईयों और परेशानियों से मुक्ति प्राप्त कर लेने में सक्षम हो पाता है.| प्रभु के स्मरण में मंत्र अपना प्रभाव इस प्रकार करते हैं कि ईश्वर स्वयं हमारे कष्टों को दूर करने के लिए तत्पर हो जाते हैं.|
मंत्र शक्ति प्राण उर्जा को जागृत करने का प्रयास करती है. | मंत्र गूढ़ अर्थों का स्वरुप होते हैं |संतों ने मंत्र शक्ति का अनुभव करते हुए इन्हें रचा जैसे मार्कण्डेय ऋषि जी ने महामृत्युंजय मंत्र को सिद्ध किया और विश्वामित्र जी ने गायत्री मंत्र को रचा |इसी प्रकार तुलसीदास जी एवं कालिदास जी ने कई मंत्रों की रचना की.| मंत्र जाप में प्रयोज्य वस्तुओं का ध्यान अवश्य रखना चाहिए आसन, माला, वस्त्र, स्थान, समय और मंत्र जाप संख्या इत्यादि का पालन करना चाहिए. | मंत्र साधना यदि विधिवत की गई हो तो इष्ट देवता की कृपा अवश्य प्राप्त होती है.| मंत्र के प्रति पूर्ण आस्था होनी चाहिए,|
मंत्रों में शाबर मंत्र, वैदिक मंत्र और तांत्रिक मंत्र आते हैं.|
मानसिक ,वाचिक अथवा उपाशु जप द्वारा मंत्रों का जप किया जाता है. | स्पष्ट मंत्रों को उच्चारण करते हुए वाचिक जप कहलाता है, | धीमी गति में जिसका श्रवण दूसरा नहीं कर पाता वह उपांशु जप कहलाता है और मानस जप जिसमें मंत्र का मन ही मन में चिंतन होता है.| मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखना चाहिए, | ग्रहण के समय किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है. | ग्रहण काल में जप करने से कई सौ गुना अधिक फल मिलता है।
मंत्र जाप करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है.| मंत्र पाठ करते समय मंत्रों का उच्चारण सही तरह से करना आवश्यक होता है तभी हमें इन मंत्रों का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है. | मंत्र जपने के लिए मन में दृढ विश्वास जरूर होना चाहिए, तभी मंत्रों के प्रभाव से हम परिचित हो सकते हैं. | मंत्र जाप करने से पूर्व साधक को अपन मन एवं तन की स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए. | मन को एकाग्रचित करते हुए प्रभु का स्मरण करन अचाहिए तथा ॐ का उच्चारण करना चाहिए. | जाप करने वाले व्यक्ति को आसन पर बैठकर ही जप साधना करनी चाहिए. | आसन ऊन का, रेशम का, सूत, कुशा निर्मित या मृगचर्म का इत्यादि का बना हुआ होना चाहिए. | आसन का उपयोग इसलिए आवश्यक माना जाता है क्योंकि उस समय जो शक्ति हमारे भीतर संचालित होती है वह आसन ना होने से पृथवी में समाहित होकर हममें उक्त उर्जा से वंचित कर देती है.|
साधक मंत्र का जाप श्रद्धा और भक्तिभाव से करे तो पूर्ण लाभ कि प्राप्ति होती है. जप साधना को सिद्धपीठ, नदी पर्वत, पवित्र जंगल, एकांत स्थल, जल में, मंदिर में या घर पर कहीं भी किया जा सकता है. मंत्र जाप करते समय दीपक को प्रज्जवलित करके उसके समक्ष मंत्र जाप करना शुभ फलों को प्रदान करने वाला होता है.| मंत्र साधना का विधान शिव संकल्प, आस्था व शुचिता, दृढ़इच्छाशक्ति, आसन, माला एकाग्रता, जप, हवन एवं धैर्य से ही पूर्ण हो पाता है.| गुरु के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन साधक को अवश्‍य करना चाहिए। साधक को चाहिए कि वो प्रयोज्य वस्तुएँ जैसे- आसन, माला, वस्त्र, हवन सामग्री तथा अन्य नियमों जैसे- दीक्षा स्थान, समय और जप संख्या आदि का दृढ़तापूर्वक पालन करें, क्योंकि विपरीत आचरण करने से मंत्र और उसकी साधना निष्‍फल हो जाती है। जबकि विधिवत की गई साधना से इष्‍ट देवता की कृपा सुलभ रहती है। साधना काल में निम्न नियमों का पालन अनिवार्य है।
* जिसकी साधना की जा रही हो, उसके प्रति पूर्ण आस्था हो।
* मंत्र-साधना के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति।
* साधना-स्थल के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ-साथ साधन का स्थान, सामाजिक और पारिवारिक संपर्क से अलग-अलग हो।
* उपवास प्रश्रय और दूध-फल आदि का सात्विक भोजन किया जाए तथा श्रृंगार-प्रसाधन और कर्म व विलासिता का त्याग आवश्यक है।
* साधना काल में भूमि शयन। * वाणी का असंतुलन, कटु-भाषण, प्रलाप, मिथ्यावाचन आदि का त्याग करें और कोशिश मौन रहने की करें।
* निरंतर मंत्र जप अथवा इष्‍ट देवता का स्मरण-चिंतन आवश्‍यक है।
* आचार विचार व्यवहार शुद्ध रखें.
* बकवास और प्रलाप न करें.
* किसी पर गुस्सा न करें.
* किसी स्त्री का चाहे वह नौकरानी क्यों न हो, अपमान न करें.
* जप और साधना का ढोल पीटते न रहें, इसे यथा संभव गोपनीय रखें.
* बेवजह किसी को तकलीफ पहुँचाने के लिए और अनैतिक कार्यों के लिए मन्त्रों का प्रयोग न करें. ऐसा करने पर परदैविक प्रकोप होता है जो सात पीढ़ियों तक अपना गलत प्रभाव दिखाता है.|
* गुरु और देवता का कभी अपमान न करें.
* ब्रह्मचर्य का पालन करें.| विवाहित हों तो साधना काल में बहुत जरुरी होने पर अपनी पत्नी से सम्बन्ध रख सकते हैं.|
* अपनी पूजन सामग्री और देवी देवता के यंत्र चित्र को किसी दुसरे को स्पर्श न करने दें.|
मंत्र साधना में प्राय: विघ्न-व्यवधान आ जाते हैं। निर्दोष रूप में कदाचित ही कोई साधक सफल हो पाता है, अन्यथा स्थान दोष, काल दोष, वस्तु दोष और विशेष कर उच्चारण दोष जैसे उपद्रव उत्पन्न होकर साधना को भ्रष्ट हो जाने पर जप तप और पूजा-पाठ निरर्थक हो जाता है। इसके समाधान हेतु आचार्य ने काल, पात्र आदि के संबंध में अनेक प्रकार के सावधानीपरक निर्देश दिए हैं। अभिचार कर्म के लिए वाचिक रीति से मंत्र को जपना चाहिए। शां‍‍‍ति एवं पुष्‍टि कर्म के लिए उपांशु और मोक्ष पाने के लिए मानस रीति से मंत्र जपना चाहिए। . मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखना चाहिए। मंत्र- साधक के बारे में यह बात किसी को पता न चले कि वो किस मंत्र का जप करता है या कर रहा है। यदि मंत्र के समय कोई पास में है तो मानसिक जप करना चाहिए।
सूर्य अथवा चंद्र ग्रहण के समय (ग्रहण आरंभ से समाप्ति तक) किसी भी नदी में खड़े होकर जप करना चाहिए। इसमें किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है। जप का दशांश हवन करना चाहिए। और ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। वैसे तो यह सत्य है कि प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है परंतु ग्रहण काल में जप करने से कई सौ गुना अधिक फल मिलता है।
विशेष : नदी में जप हमेशा नाभि तक जल में रहकर ही करना चाहिए।...........................................................हर-हर महादेव
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05/07/2017

दैनिक जीवन में ध्यान देने योग्य कुछ ज्योतिषीय सावधानियां
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दैनिक जीवन में हम दूसरों के देखा-देखी या किसी किताब में पढ़कर कुछ ऐसे मन्त्र जप, दान आदि करते रहते हैं जो ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ नहीं होता या लाभ के स्थान पर हानि होनी शुरू हो जाती है :-
(1) उच्च के ग्रहों का कभी दान नहीं करना चाहिए और नीच ग्रहों का दान और मंत्र जाप करना चाहिए
(2) गुरु दशम भाव में हो या चौथे भाव में हो तो मंदिर निर्माण के लिए धन नहीं देना चाहिए ये बहुत अशुभ होता है तथा कभी न कभी जातक को अधिक परेशानी तक पहुंचा सकता है
(3) सप्तम भाव में गुरु हो तो कभी भी पीले वस्त्र दान नहीं करने चाहिए
(4) बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना बहुत अशुभ होगा परिवार की वृद्धि रुक जायगी
(5) सप्तम/अष्टम सूर्य हो तो ताम्बे का दान नहीं देना चाहिए, धन की हानि होने लगेगी
(6) मंत्रोच्चारण के लिए शिक्षा-दीक्षा लेनी चाहिए क्योंकि अशुद्ध उच्चारण से लाभ की बजाय नुक्सान होगा मंत्र जाप पूर्ण संख्या में, एक ही आसन पर, एक ही समय में सम संख्या में करना चाहिए मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद दशांश हवन अवश्य करना चाहिए तभी पूर्ण फल मिलेगा
(7) कुछ लोग वार के अनुसार वस्त्र पहनते हैं जो ठीक नहीं है कुंडली में जो ग्रह अच्छे हैं उनके वस्त्र पहनना शुभ है लेकिन जो ग्रह शुभ नहीं हैं उनके रंग के वस्त्र पहनना परेशानी देता है
(8) हम देखते हैं कि कई लोग बिना किसी से सलाह लिए मोती पहन लेते हैं जो गलत है |अगर कुंडली में चन्द्रमा अशुभ भाव स्वामी है तो जातक depression (अवसाद ग्रस्त ) में आ सकता है
(9) अक्सर देखा गया है कि जिस बच्ची की शादी नहीं हो रही है तो कुछ पंडित पुखराज पहनने की सलाह दे देते है बिना कुन्डली देखे पुखराज पहनाने से कई बार शादी ही नहीं होती | कुंडली में गुरु नीच का हो अशुभ प्रभाव में हो, अशुभ भाव में हो तो पुखराज नहीं पहनना चाहिए |
(10) आमतौर पर देखा जाता है लोग घर में मनी प्लांट लगा लेते हैं कि इसके लगाने से घर में धन वृद्धि होगी लेकिन अगर बुध खराब हो तो घर में मनी प्लांट लगाने से घर की बहन, बेटी दुखी रहती हैं |
(11) कैक्टस, कांटे वाले पौधे घर में लगाने से शनि प्रबल हो जाता है अतः जिनकी कुंडली में शनि खराब हो तो उन्हें ऐसे पौधे नहीं लगाने चाहिए |
उपरोक्त छोटी छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो हमें ग्रह कभी हानि नहीं पहुंचाएंगे |........................................................................हर-हर महादेव
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