20/01/2024
आज कल प्रभु श्री राम जी की जन्मभूमि पर होने वाले प्राण प्रतिष्ठा आयोजन के बारे में बहुत कुछ बोला जा रहा है।
पूजनीय शंकराचार्य भी मानव हैं,मंदिर निर्माण करवाने व प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण भेजने वाली कमेटी भी मानव ही है जिनसे भूल होना स्वभाविक है,लेकिन ये दोनों या कोई और किसी भी हालात में इतने बड़े नहीं हो सकते कि प्रभु श्री राम जी के जन्म स्थान पर बन रहे मंदिर की प्रतिष्ठा को टक्कर दे सके।
भगवान के नाम मात्र से अशुभ ..भी शुभ हो जाता है।
यह कोई आम मंदिर नही है बल्कि प्रभु श्री राम जी की जन्मभूमि पर बना मंदिर है जिसके लिए हों रही प्राण प्रतिष्ठा की तुलना किसी अन्य आयोजन से नही की जा सकती।
सैंकड़ो शंकराचार्य या सैंकड़ो मलिकार्जुन खड़गे श्री राम जी के जन्मस्थान की धूल के बराबर भी नही हैं।
माया बड़े बड़े ऋषि मुनियों ..देवताओं को भी भर्मित कर देती है फिंर ये सब तो साधरण मानव ही हैं।
पभु पता नही क्या लीला करना चाहते हैं जो एक सीधी सी बात भी इन बड़े बड़े लोगो की समझ मे नही आ रही जिससे ये भर्मित होकर गलतियां कर रहे हैं ।
लेकिन हम आम जनसाधारण का ध्यान सिर्फ और सिर्फ प्रभु श्री राम के काम की ओर होना चाहिए न कि उसपर हो रही राजनीति पर।
राजनीति तो हमेशा चलती रहेगी लेकिन प्रभु के जन्म स्थान पर होने वाली प्राण पतिष्ठा का अवसर जीवन मे दोबारा नही आने वाला।
इस पवित्र आयोजन को विवादों में घसीटने की बजाए संम्मान पूर्वक इसका स्वागत करना चाहिए ओर अपनी अपनी समर्थानुसार दीवाली की तरह बहुत ही उल्लास से मनाया जाना चाहिए।
जय श्री राम ../\.... Copy paste.