राजराजेश्वरी माँ बगलामुखी

राजराजेश्वरी माँ बगलामुखी page related to Maa baglamukhi

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय स...
18/05/2026

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥२॥
उपरोक्त श्लोक दुर्गा सप्तशती का एक अचूक उपाय है किसी भी विषम ,परिस्थिति में , शत्रुबाधा से मुक्ति हेतु रोग की अधिकता होने पर इसका एक माला जाप भगवती के समक्ष घी का दीप प्रज्वलित करके उसमें थोड़ा सा पीसी हुई हल्दी डालकर किया जाए तो मां की कृपा से 11 दिनों में ही आपको अप्रत्याशित लाभ देखने को मिलेगा ।जब कोई शहर ना हो एक बार सीखो अवश्य करे ।मां बगला कल्याण करे

क्या नाम जप ही परम कल्याणकारी और पर्याप्त है ?आज के समय हम सब सोशल मीडिया ,कथावाचकों और कई विद्वानों के द्वारा नाम जप की...
16/05/2026

क्या नाम जप ही परम कल्याणकारी और पर्याप्त है ?

आज के समय हम सब सोशल मीडिया ,कथावाचकों और कई विद्वानों के द्वारा नाम जप की महत्ता और महिमा के विषय में सुनते है सामान्यतः ये उचित भी है गोस्वामी तुलसीदास भी कहते है कलियुग केवल नाम आधार सुमिर सुमिर नर उतरही पारा। किंतु रामायण में ही कहा गया है 'मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के॥ इसका तात्पर्य है कि मंत्रों की महिमा को नकारा नहीं जा सकता है अब प्रश्न आता है कि सामान्य जन क्या करे किस और जाए ।क्या केवल नाम जप ही पर्याप्त है और यदि है तो फिर धार्मिक अनुष्ठान,यज्ञ हवन अभिषेक इन सबका क्या तात्पर्य है क्यों वेद में मंत्र के विषय में लिखा है बहा नाम जप की महिमा है ही नहीं ।के अल नाम जप की और जाएंगे तो हमारे धार्मिक अनुष्ठान और संस्कृति का लोप हो जाएगा फिर मंदिरों की आवश्यकता ही कहा रह जाएगी ,न पूजा न अर्चना बस नाम जप
जहां तक मेरा अनुभव है दोनों को साथ लेकर चलना ही श्रेष्ठ है केवल नाम जप या केवल क्रिया दोनों ही अपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर लोगों को धार्मिक क्रियाओं ,मंत्र का ज्ञान ही नहीं है ना ही गुरु शिष्य परंपरा है जो ज्ञान का विस्तार हो सके ,किंतु जो मंदिरों में बैठे है या घरों में मूर्ति रूप में विराजे है उनकी सेवा ,अर्चन भी आवश्यक है जिसके लिय मंत्र या क्रिया की आवश्यकता होगी ।यानी कि अपनी योग्यता ,आवश्यकता के अनुरूप हमे दोनों का चयन करना होगा हम सामर्थ्यवान है ,और ज्ञान रखते है तो हमें धार्मिक संस्कृति को लोप होने से बचाना होगा वरना अगली।पीढ़ीहवन ,अर्चन,अभिषेक ,साधना ,और सिद्धि जिसे शब्दों को मात्रा किताबों में ही पड़ेगी मंदिरों का लोप समय के साथ होता चला जाएगा , और एक समृद्ध चेतना में संस्कृति का लोप हो जाएगा ।नाम जप तब उत्तम है जब आप सामर्थ्य ना रखते हो ,जब आप भगवत सेवा करने में अक्षम हो , जब आप असहाय हो ना कि तब जब आप सामर्थ्य रखते है ।
मेरा उद्देश्य किसी विधा का विरोध नहीं है किंतु उस सत्य को उजागर करना है जो आवश्यक है ।

12/01/2026

गुप्त नवरात्र विशेष
जो भी देवीउपासक जो अभी साधना आरम्भ कारण चाहते ही किंतु जिन्होंने गुरु दीक्षा प्राप्त नहीं की है बे सभी मुझे कमेंट में अवगत कराए मां बगला की कृपा और आदेश अनुसार जैसा निर्देश होगा आपकी सहायता करने का प्रयास करूंगा ।
न ही मैं कोई बहुत बड़ा संत हु ना ही बहुत विद्वान बस मां की शरण में हु और चाहता हु की ज्यादा से ज्यादा लोग मां की कृपा प्राप्त कर सके मुझसे इससे जायद अपेक्षा ना करे ,मैं आपको मार्ग बता सकता हु यदि आपके पुण्य उदय हाय तो आप भगवती से जुड़ सकेंगे ।
आपेक्षित समय प्रति दिन 1 घंटा और भाव 100 प्रतिशत विश्वास 100 प्रतिशत
जिनको आगे बढ़ना है कमेंट में अपना नाम मान नम्बर दे सकते है
इसके बदले में ना ही शुल्क ना अत्यधिक सम्मान ना ही कोई पद

मातभैंरवि ! ! भद्र-कालि विजये ! वाराहि ! विश्वाश्रये ! श्रीविद्ये ! समये ! महेशि ! बगले ! कामेशि ! वामे रमे ! मातंगि ! त...
12/01/2026

मातभैंरवि ! ! भद्र-कालि विजये ! वाराहि ! विश्वाश्रये ! श्रीविद्ये ! समये ! महेशि ! बगले ! कामेशि ! वामे रमे ! मातंगि ! त्रिपुरे ! परात्पर-तरे ! स्वर्गापवर्ग-प्रदे ! दासोहं शरणागतः करुणया विश्ववेश्वरि ! त्राहि माम्

।। अर्थ ।।
हे माँ बगले ! भैरवी, भद्र-काली, वाराही, भुवनेश्वरी, श्रीविद्या, षोडशी, बाला-त्रिपुर-सुन्दरी, कमला आदि सब तुम्ही हो, स्वर्ग और मोक्ष भी तुम्हीं देती हो, परात्पर ब्रह्म भी तुम हो, मैं तुम्हारा शरणागत हूँ। हे विश्वेश्वरि ! करुणा करके मेरी रक्षा करो ।

मध्ये सुधाधिमणिमण्डपरत्नवेद्यां,                   सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णम्।पीताम्बराभरणमाल्यविभूषिताङ्गीं,         ...
06/01/2026

मध्ये सुधाधिमणिमण्डपरत्नवेद्यां,
सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णम्।
पीताम्बराभरणमाल्यविभूषिताङ्गीं,
देवीं स्मरामि धृतमुद्गरवैरिजिह्वम्॥
जिह्वाग्रामदाय करणे देवीं,
वामेन शत्रुं प्रतिपीढन्तिम्।
गदाभिघातेन च दक्षिणेन,
पीताम्बराड्यां द्विभुजां नमामि ॥

सर्वैश्वर्यमयीं देवि बगलामुखी जगद्धिता।
प्रसन्नोस्तु जगन्माता सर्वैश्वर्याणि देहि मे।।
जयति मां बगलामुखी

किसी भी साधना में या अनुष्ठान से पूर्व गणेश की कृपा प्राप्ति अनिवार्य है फिर चाहे वो लक्ष्मी साधना हो या दस महाविद्या की...
05/01/2026

किसी भी साधना में या अनुष्ठान से पूर्व गणेश की कृपा प्राप्ति अनिवार्य है फिर चाहे वो लक्ष्मी साधना हो या दस महाविद्या की कृपा सबके लिए द्वार श्री गणेश ही है वास्तव में गणेश ही चेतना है जो आपको उस सत्ता का अहसास करते है श्री गणेश ही आपको चेता के उस स्तर तक ले जा सकते है जहां आप उस ऊर्जा के साथ खुद को जोड़ पाते है इस लिए यदि आप किसी भी साधना के पथ पर है आपको गणपति से ही आरंभ करना होगा सभी महाविद्याओं के अपने गणिपति है उनके स्वभाव के अनुसार ही गणपति की साधना मां बगलामुखी की कृपा राप्ती हेतु आपको हरिद्रा गणपति की शरण में जन होगा उनकी कृपा के बिना मां तक पहुंचना मुश्किल ही है वैसे तो हरिद्रा गणपति का अपना अनुष्ठान है जो हर साधक के लिए अनिवार्य ही हैं फिर भी यदि समय और जानकारी का अभाव हो तो ॐ गं गणपतए नमः की एक माला तो प्रतिदिन अनिवार्य है संभव हो तो हल्दी मिश्रित जल से अभिषेक करे ।जयति मां बगलामुखी

जयति मां बगलामुखी मां की कृपा चाहिए़ तो एक शिशु की तरह अवैध बन जाओ ।ज्ञान  अहंकार और भौतिक लक्षणों को त्याग दो अगर तुम स...
04/01/2026

जयति मां बगलामुखी
मां की कृपा चाहिए़ तो एक शिशु की तरह अवैध बन जाओ ।ज्ञान अहंकार और भौतिक लक्षणों को त्याग दो अगर तुम सोचते हो कि तुम भगवती को जान गए या जान लोगे तो फिर आप कभी उठक नहीं पहुंच सकते इसलिए दासत्व भाव को प्रपात हो जाओ शरणागत हो जाओ फिर देखो उसकी कृपा कैसे वृष्टि ही ।जी जय बगला जय बगला का निरंतर जाप करो बिना ये जानने का प्रयास किय कि इससे क्या होगा आप के गृहदशा आर्थिक संकट और बाकी सभी मुश्किल दूर हो जाएगी ।

श्रीहरिहर प्राकट्यदिन !! ( वैकुंठचतुर्दशी )शिव त्वमेवाऽसि हरिस्वरूपो हरे त्वमेवाऽसि शिवस्वरूपः । भ्रान्त्या जनास्त्वां द...
04/11/2025

श्रीहरिहर प्राकट्यदिन !! ( वैकुंठचतुर्दशी )

शिव त्वमेवाऽसि हरिस्वरूपो हरे त्वमेवाऽसि शिवस्वरूपः ।
भ्रान्त्या जनास्त्वां द्विविधस्वरूपं पश्यन्ति मूढा ननु नाशहेतोः॥
शिवे हरौ भेदधियाऽऽधियुक्ता मुक्तिं लभन्ते न जना दुरापाम् ।
भुक्तिं च नैवेह परन्तु दुःखं संसारकूपे पतिताः प्रयान्ति ॥

(हरिहराद्वैत स्तोत्रं) C/p आभार सहित

25/10/2025

Celebrating my 7th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

दीपावली पर पांच दिवसीय साधना का विधान है महालक्ष्मी और मां पीतांबरा की कृपा एक साथ पाने के लिए इन 5 दिनों तक लगातार मां ...
16/10/2025

दीपावली पर पांच दिवसीय साधना का विधान है महालक्ष्मी और मां पीतांबरा की कृपा एक साथ पाने के लिए इन 5 दिनों तक लगातार मां की अर्चना करे जिसके फलस्वरूप पूरा वर्ष आपको धन ,ऐश्वर्य और शक्ति की कमी का अहसास नहीं होगा ग्रह जनित सभी मुश्किल आपसे दूर रहेंगी बाकी शत्रुओं से मां स्वयं रक्षा करती है ।
ये कोई साधारण समय नहीं है विद्वान इसका पर लाभ उठाते है आशा करता हु सभी यथाशक्ति अर्चन ,मंत्र। जाप और अन्य रूप में मां की सेवा करेंगे

पीताम्बरां द्वि-भुजां च, त्रि-नेत्रां गात्र-कोमलाम् ।शिला-मुद्-गर-हस्तां च, स्मरामि बगला-मुखीम् ।।
16/10/2025

पीताम्बरां द्वि-भुजां च, त्रि-नेत्रां गात्र-कोमलाम् ।
शिला-मुद्-गर-हस्तां च, स्मरामि बगला-मुखीम् ।।

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