Ramdham Charitable trust

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यश्चांपदः परिपूर्णः सुखसमृद्धिकारकःधनतेरस महोत्सवः सदा मंगलप्रदायकः॥सुख समृद्धि और यश वैभव के पर्व धनतेरस की हार्दिक मंग...
29/10/2024

यश्चांपदः परिपूर्णः सुखसमृद्धिकारकः
धनतेरस महोत्सवः सदा मंगलप्रदायकः॥

सुख समृद्धि और यश वैभव के पर्व धनतेरस की हार्दिक मंगलकामनाएं...!!

शुभ धनतेरस 🪔

अनिल द्विवेदी
#शुभ_धनतेरस #अनिलद्विवेदी

...…..कहते हैं एक सपना टूटने के बाद दूसरा सपना देखना ही ज़िन्दग़ी है पर जब एक एक करके हर सपना टूटने लगता है तो उन टूटे सपन...
17/10/2024

...…..कहते हैं एक सपना टूटने के बाद दूसरा सपना देखना ही ज़िन्दग़ी है पर जब एक एक करके हर सपना टूटने लगता है तो उन टूटे सपनों के साथ इंसान भी टूट जाता है... फिर डरने लगता है वो हर सपने से, उनमे छिपी हर ख़ुशी से... क्यूकि तब उसे लगने लगता है कि उसका हर सपना टूटने के लिए है... और उसकी हर ख़ुशी उस से छीनने के लिए है... एक नकारात्मकता घेर लेती है उसे हर तऱफ से... फिर वो ज़िन्दगी के उस मुकाम पे धीरे धीरे बढ़ते जाता है जहा उसे खुशियां खुशियां नहीं लगती और ग़म ग़म नहीं लगते... वो खुशियों में ज्यादा खुश नहीं होता, और ग़म में ज्यादा दुखी नहीं होता... जब वो टूटे सपने और अपने सुख दुःख के चक्र को पार कर के इस मुकाम पे पहुंच जाता है, तब वो जीना सीख जाता है ज़िन्दगी को... तब वो सांसारिक मोह माया परिवार दोस्त प्यार सबको भूल के बस अपने लिए जीने लगता है.... तो शायद सपनो का टूटना, अपनों का रूठना सब एक जरिया है हमे ज़िन्दगी से मिलाने के लिए... उस ज़िन्दगी से जो होती तो हमारी है पर उसपे हक़ हमसे ज्यादा दूसरों का होता है... जब हम इन सबसे थक जाते है हैं फिर जीना शुरू करते हैं अपने लिए अपने हिसाब से....शायद ज़िन्दगी यही है .......😊
बी पॉजिटिव ऑलवेज
#अनिलद्विवेदी

.....सिर्फ एक दिन के लिए अपनी परेशानियां किसी और को देकर देखो..ज़िम्मेदारियों के बोझ से उसका दम ना निकल जाए तो कहना..क्य...
14/10/2024

.....सिर्फ एक दिन के लिए अपनी परेशानियां किसी और को देकर देखो..ज़िम्मेदारियों के बोझ से उसका दम ना निकल जाए तो कहना..क्योंकि हर इंसान को उतनी ही मुश्किलें मिलती हैं जितनी उसकी सहने की क्षमता होती है..कोई दूसरा ना तो हमारी तकलीफों का अंदाज़ा लगा सकता है और ना ही झेल सकता है..लेकिन हम हैं कि इसी दुख-दर्द के बीच ना सिर्फ आगे बढ़ते रहते हैं बल्कि मुस्कुरा भी लेते हैं..प्यार भरी दो बातें भी कर लेते हैं और ज़रूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी कर देते हैं..!!
ऐसा एक हीरो के अलावा और कौन सकता है..इसलिए मायूस होने से पहले अपने अंदर के हीरो को पहचानो..जो ना तो रुकना जानता है और ना ही टूटना....याद रहे - हथौड़े की चोट शीशे को तो चूर - चूर कर देती है ,पर लोहे को फौलाद बनाती है ..अपना चुनाव खुद कीजिये कि आप शीशा बनना चाहते हैं या फिर फौलाद..!!

#अनिलद्विवेदी

सफलता इस बात से तय नही होती कि आप किस मुकाम पर हैं ....बल्कि इस बात से तय होती है कि आप गिर - गिर कर कितनी बार उठे हैं ....
13/10/2024

सफलता इस बात से तय नही होती कि आप किस मुकाम पर हैं ....बल्कि इस बात से तय होती है कि आप गिर - गिर कर कितनी बार उठे हैं ...लोग पराजय के बाद खत्म नही होते ....लोग तब खत्म होते हैं जब वो मैदान छोड़ देते है । परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यूँ न हों हालात से जंग जारी रखिये ...और अपने सपनो पर यकीन कीजिये , यकीन मानिए एक दिन आपका सपना आपकी मुट्ठी में होगा ...बस शिद्दत से अपने सपनो का पीछा कीजिये ...इस विश्वास के साथ कि “हम जीतेंगे ही “!!

#अनिलद्विवेदी

....सौ बार गिरो तो सौ बार उठो..हज़ार बार आंसू बहें तो हज़ार बार पोंछो..क्योंकि ज़िंदगी है तो मुश्किलें हैं..और मुश्किलों...
13/10/2024

....सौ बार गिरो तो सौ बार उठो..हज़ार बार आंसू बहें तो हज़ार बार पोंछो..क्योंकि ज़िंदगी है तो मुश्किलें हैं..और मुश्किलों से लड़ने का हौसला है तो ज़िंदा हैं हम..!
सूरज जैसा शक्तिमान भी सिर्फ इसलिए फलक पर है क्योंकि वो हर रोज़ अंधेरे से लड़ता है..चंद्रमा को भी अपने वर्चस्व की जंग लगातार लड़नी पड़ती है..तब जाकर पूनम का चांद नसीब होता है..तो फिर हताश क्यों होना..? जब तक जूझोगे नहीं तब तक अपनी अहमियत कैसे साबित करोगे...?
#अनिलद्विवेदी

.....मुश्किलें जिंदगी को सफलता के मुकाम तक पहुचाने का जरिया हैं ...... जब तक हमारी सहनशक्ति की बार-बार परीक्षा नहीं ली ज...
09/10/2024

.....मुश्किलें जिंदगी को सफलता के मुकाम तक पहुचाने का जरिया हैं ...... जब तक हमारी सहनशक्ति की बार-बार परीक्षा नहीं ली जाएगी......तब तक कभी ना रुकने, कभी ना हार मानने का हौसला कहां से आएगा...और जब तक खुद नहीं रोएंगे..तब तक दूसरों की तकलीफ कैसे समझ में आएगी..?? ये जितने भी छोटे-बड़े दुख, दर्द, मुसीबतें और परेशानियां हैं ना...ये कोई सजा नहीं ....बल्कि मजबूत और बेहतर इंसान बनने की कड़ियां हैं.....इसलिए कुढ़-कुढ़ कर अपने दिमाग, शरीर और इमोशन की ताकत को जाया ना करें ....इन कड़ियों को जोड़िये और मुश्किल हालात में भी अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिये ...याद रहे - झूला जितना पीछे की ओर जाता है ,उतना ही आगे भी आता है , यही जिंदगी है ...!!

#अनिलद्विवेदी

...........जैसे वज़न का माप ग्राम है, लम्बाई का माप मीटर... वैसे ही चरित्र का माप 'गांधी' है. तो ज़रा एक बार ख़ुद से पूछ...
02/10/2024

...........जैसे वज़न का माप ग्राम है, लम्बाई का माप मीटर... वैसे ही चरित्र का माप 'गांधी' है. तो ज़रा एक बार ख़ुद से पूछिए न प्लीज़, कितना गांधी है आपका चरित्र...?

महात्मा और दुरात्मा के स्केल के दो अतियों के बीच आप ख़ुद को किस जगह पर खड़ा पाते हैं? कितने मिली, सेंटी या डेसी गांधी हैं आप...??

गांधी जयंती की शुभकामनाएं ...!!

#अनिलद्विवेदी

….कभी पहचाना अपने आपको? कितनी हिम्मत और हौसलों का कारवां (Carvan) साथ लेकर चलते हो? ज़िम्मेदारियां पैर खींचती हैं, थक के...
22/09/2024

….कभी पहचाना अपने आपको? कितनी हिम्मत और हौसलों का कारवां (Carvan) साथ लेकर चलते हो? ज़िम्मेदारियां पैर खींचती हैं, थक के चूर हो जाते हो, फिर भी रुकने का नाम नहीं लेते..बैचेनी डसती है, अकेलापन खाने को दौड़ता है, तब भी दूसरों की फिक्र करना नहीं छोड़ते..बार-बार सताए जाते हो, बार-बार रुलाए जाते हो, लेकिन सिसकियों को दबाए, छलनी दिल से भी मुस्कुरा देते हो..
क्या हो? किस मिट्टी के बने हो? ना टूटना जानते हो..ना रुकना..बस चलते ही जाते हो..देखो ना, चलते-चलते कितना सफर तय कर लिया है..कितना मुश्किल था इतनी सारी कठिनाइयों को पार करते हुए यहां तक पहुंचना, लेकिन फिर भी आ गए हो..
जब यहां तक आने की ताकत रखते हो, तो आगे भी जा सकते हो..ये हिम्मत..ये हौसला..जो अब तक दिखाया है..उसे कम नहीं होने देना..इसी जज़्बे ने हमें अभी तक ज़िंदा रखा है..अब यही जज़्बा हमें आगे बढ़ाएगा..भले ही, अभी तक हम कुछ खास नहीं कर पाए हों, लेकिन अब ज़रूर कर लेंगे..क्योंकि अब हमें अपना साथ मिल गया है..हमने उस उजाले को देख लिया है जो हमारे अंदर और आसपास है..यही उजाला हमारी राहें रोशन करेगा..बस, पूरे ईमान (Faith) से कदम बढ़ाते रहना..!!

#अनिलद्विवेदी

...जैसा भी वक्त है...जो भी हालात हैं....हमारे हैं..जीने के लिए हमें प्रकृति से यही मिले हैं तो क्यों ना इसका भरपूर फायदा...
19/09/2024

...जैसा भी वक्त है...जो भी हालात हैं....हमारे हैं..जीने के लिए हमें प्रकृति से यही मिले हैं तो क्यों ना इसका भरपूर फायदा उठाया जाए.....क्योंकि अच्छा वक्त, अगर खुशियां देता है..तो बुरा वक्त, रफ एंड टफ (मजबूत) बनाता है....! अच्छी किस्मत, अगर बैठे-बिठाए स्टार बनाती है..तो बुरी किस्मत, असली हीरो बनने का मौका देती है......इसलिए हालात बदलने से पहले अपना नज़रिया बदलो.....जब अच्छी-बुरी चीजों के पीछे छुपा मकसद समझ में आने लगेगा..तो हर चीज़ अपने फायदे (Favour) में लगने लगेगी....याद रहे - हर रात के बाद उजालों भारी सुबह जरूर होती है ..☺️😊

#अनिलद्विवेदी

....जब हम ऐसे लक्ष्य से प्रेरित होते हैं जिनका गहरा अर्थ हो , ऐसे सपनो से प्रेरित होते हैं जिनके पूर्ण होने की चाहत हो औ...
16/09/2024

....जब हम ऐसे लक्ष्य से प्रेरित होते हैं जिनका गहरा अर्थ हो , ऐसे सपनो से प्रेरित होते हैं जिनके पूर्ण होने की चाहत हो और ऐसे प्रेम से प्रेरित होते हैं जिसको व्यक्त करने की ज़रुरत हो तो हम वाकई में ज़िन्दगी जीते हैं...!!

#अनिलद्विवेदी

‘’अपने ज्ञान से हमे योग्य और कुशल बनाने वाले सभी शिक्षकों के प्रति सादर आभार .!!न केवल ज्ञान प्रदान करने,बल्कि मूल्यों क...
05/09/2024

‘’अपने ज्ञान से हमे योग्य और कुशल बनाने वाले सभी शिक्षकों के प्रति सादर आभार .!!

न केवल ज्ञान प्रदान करने,बल्कि मूल्यों को स्थापित करने के लिए मैं अपने सभी शिक्षकों को कोटि कोटि धन्यवाद देता हूं। उन सभी शिक्षकों को जिन्होंने मुझे बड़े सपने देखने और उन सपनों को हासिल करने हेतु मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ । मुझ पर आप लोगों का विश्वास ही मेरा सबसे बड़ा प्रेरक है !!

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ ..!’’

हमारे त्यौहारों के मूल में भावनाएँ, आस्था और जुड़ाव है ! जुड़ाव प्रकृति से, जुड़ाव प्रकृति की हर कृति से, और जुड़ाव मानव...
19/08/2024

हमारे त्यौहारों के मूल में भावनाएँ, आस्था और जुड़ाव है ! जुड़ाव प्रकृति से, जुड़ाव प्रकृति की हर कृति से, और जुड़ाव मानव समाज से…..रक्षाबन्धन का पर्व मूलतः भावनाओं के उद्वेग का ऐसा ही एक त्यौहार है।
रक्षा सूत्र, एक धागा, भाई-बहन के पारस्परिक स्नेह को प्रदर्शित करता है। यहाँ महँगी राखी, सस्ती राखी, सोने-चाँदी या महँगे तारों से सजी राखी या फिर उसके बदले में मिलने वाला नेग रक्षाबन्धन बिलकुल नहीं है। रक्षा बन्धन मुहूर्त और मन्त्र भी नहीं है।

रक्षा बन्धन प्रत्येक भाई से हर बहन का और प्रत्येक बहन से हर भाई का एक दूसरे की, और सभी भाई-बहनों की, मर्यादा का सम्मान और उसकी रक्षा हेतु तत्पर रहने की याद दिलाने और वचन लेने का पर्व है। यह वचन सोशल मीडिया पर हमारे व्यवहार पर भी लागू होता है परन्तु सबसे महत्वपूर्ण है आपसी स्नेह!
बाज़ार और लेन-देन का हिसाब छोड़िए, त्यौहार की मूल भावना से जुड़िये……आपस में जुड़िये!

सभी भाई-बहन, सभी के भाई-बहनों का ख़याल रखें! आमने-सामने ही नहीं, पीछे भी, सोशल मीडिया पर भी!

रक्षाबन्धन के पावन पर्व की शुभकामनाएँ!

#अनिलद्विवेदी

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