21/10/2025
"झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते हैं,
बाज की उड़ान में कभी आवाज नहीं होती।"
🌿 शाब्दिक अर्थ:-
“झूठी शान के परिंदे” —
वे लोग या व्यक्ति जो केवल दिखावा करते हैं,
जिनमें वास्तविक गुण या ताक़त नहीं होती,
लेकिन वे अपनी झूठी शान दिखाने के लिए ज़्यादा हंगामा करते हैं।
“बाज़ की उड़ान में कभी आवाज़ नहीं होती” —
बाज़ यानी शक्तिशाली और आत्मविश्वासी व्यक्ति या जीव।
जब वह उड़ता है, तो बिना शोर किए, बहुत ऊँचा और सटीक उड़ता है।
💫भावार्थ:-
जो व्यक्ति वास्तव में सक्षम, योग्य और आत्मविश्वासी होता है, उसे अपनी ताक़त दिखाने या दूसरों को प्रभावित करने के लिए शोर मचाने की ज़रूरत नहीं होती।
वह अपने कर्मों और उपलब्धियों से ही अपनी पहचान बनाता है।
इसके विपरीत, जो लोग केवल दिखावे और झूठी शान में जीते हैं, वे बातें ज़्यादा करते हैं, लेकिन उनके पास कोई ठोस उपलब्धि या गहराई नहीं होती।
वे बस फड़फड़ाते रहते हैं — जैसे कोई छोटा पक्षी जो उड़ तो लेता है, पर ऊँचाई नहीं छू पाता।
🦅 उदाहरण से समझें:-
एक सच्चा ज्ञानी व्यक्ति शांत रहता है, लेकिन उसका ज्ञान उसकी बातों और कर्मों से झलकता है।
वहीं, एक अज्ञानी व्यक्ति बार-बार अपनी झूठी बुद्धि या शान का प्रदर्शन करता है, ताकि लोग उसे बड़ा समझें।
💡 जीवन-सीख:-
दिखावा नहीं, गुणवत्ता ज़रूरी है।
शोर नहीं, सच्चाई बोलती है।
जो ऊँचाई पर होता है, वह शांत होता है।