Kanak Bhawan

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Kanak Bhawan Kanak in Hindi is Gold and the temple got its name from the gold festooned deities of Rama and Sita.

The statues of Rama and Sita have been bejeweled with a great amount of gold, which presents a magnificent appeal to the entire premises of the temple. Greatly connected to tradition and mythology it is believed that this temple was built by Kaikeyi as a mark of repentance. But history says that the then queen of Tikamgarh, Virshbhanu kuvari put up this temple in 1891. Kanak Bhavan temple is a delightful experience to all the visitors since it unfurls the splendor of sun set and sun rise with all its magnificence. A landmark destination in Ayodhya this shrine fetches tourists all round the year.

शोभा यात्रा में रामायण की विभिन्न स्मृतियों को सजीव करती झांकियां।    #शुभदीपावली
18/10/2017

शोभा यात्रा में रामायण की विभिन्न स्मृतियों को सजीव करती झांकियां। #शुभदीपावली

04/04/2017

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी .
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ..

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी .
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी ..

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता .
माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता ..

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता .
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयौ प्रकट श्रीकंता ..

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै .
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै ..

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै .
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ..

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा .
कीजे सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ..

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा .
यह चरित जे गावहि हरिपद पावहि ते न परहिं भवकूपा ..

शुभम करोति कल्याणमआरोग्रम धना सम्पदाशत्रू बुद्धि विनाशयेदीपं ज्योति नमोस्तुते!!!
30/10/2016

शुभम करोति कल्याणम
आरोग्रम धना सम्पदा
शत्रू बुद्धि विनाशये
दीपं ज्योति नमोस्तुते!!!

11/10/2016

अधर्म पर धर्म की विजय
असत्य पर सत्य की विजय
बुराई पर अच्छाई की विजय
पाप पर पुण्य की विजय
अत्याचार पर सदाचार की विजय
क्रोध पर दया, क्षमा की विजय
अज्ञान पर ज्ञान की विजय
रावण पर श्रीराम की विजय
के प्रतीक पावन पर्व
विजयादशमी की हार्दीक शुभकामनायेँ।

दीवाली के इस मंगल अवसर पर ,आप सभी की मनोकामना पूरी हों,खुशियाँ आपके कदम चूमे ,इसी कामना के साथ आप सभी को दिवाली की ढेरों...
23/10/2014

दीवाली के इस मंगल अवसर पर ,आप सभी की मनोकामना पूरी हों,
खुशियाँ आपके कदम चूमे ,इसी कामना के साथ आप सभी को दिवाली की ढेरों बधाई .........

21/10/2014
05/06/2014

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।

रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

|| छंद ||

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।

करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।

तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

।।सोरठा।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।

मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

श्री कनक बिहारी जू, श्री कनक भवन अयोध्या धाम की आज 08.11.2013 की झाँकी..!!!श्री जनकपुर में श्रीसीताजी और श्रीरामजी का वि...
08/11/2013

श्री कनक बिहारी जू, श्री कनक भवन अयोध्या धाम की आज 08.11.2013 की झाँकी..!!!

श्री जनकपुर में श्रीसीताजी और श्रीरामजी का विवाह संपन्न होने के बाद उनके श्री अयोध्याजी में मंगल आगमन पर इस कनक भवन को माता कैकेयीजी ने श्री सीताजी को मुँह दिखाइ में भेंट किया था.. इस भवन में विराजमान तीनों जोड़ी विग्रह श्री सीता रामजी की ही हैं.. बडी जोड़ी श्री महल बिहारी जी भगवान.. मझली जोड़ी श्री कनक बिहारी जी भगवान और छोटी जोड़ी श्री मणी बिहारी जी भगवान के नाम से जानी जाती है..!!

श्री कनक भवन के इतिहास के मुताबिक जरासंघ राक्षस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण जी पटरानी रूकमणी जी को लेकर द्वारिका (गुजरात) जाने से पहले श्री अयोध्या जी आये थे और श्री कनक भवन की मुलाकात ली थी...!!!

वर्तमान श्री कनक भवन का नव निर्माण टीकमगढ (मध्य प्रदेश) के नामदार महाराजा द्वारा उनकी धर्म पत्नी महारानी श्री वॄषभानु कुँवरि जी.. जो श्री कनक बिहारी जी भगवान की अनन्य प्रेमी थी, ऊन्हीं की प्रेरणा से वि.सं. 1948 में करवाया गया और गर्भ गृह मेँ जो श्री सीताराम जी की दो जोड़ी (मझला विग्रह और छोटा विग्रह) बिराजमान थी उसके साथ श्री सीतारामजी का बडा, अद्भुत और अतुल्य विग्रह जो श्री महल बिहारी जी के नाम से जाना जाता है वह बनवा कर स्थापित किया गया.. श्री महल बिहारी जी का विग्रह अचल है और बाकी का दो विग्रह चल है जो विशेष अवसर पर गर्भ गृह से बाहर आते हैं..!!!

श्री कनक बिहारी जी भगवान की कृपा सब पर बनी रहे.. ऐसी मंगल कामना…!!!

जय जय सियाराम..!!!

जय श्री किशॊरी जू..!!!

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224123

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