01/02/2026
पीपल (वैज्ञानिक नाम: Ficus religiosa) भारत, नेपाल और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक विशाल, दीर्घायु (सैंकड़ों वर्ष) और पवित्र पर्णपाती वृक्ष है। इसे हिंदू धर्म में पूजनीय और बौद्ध धर्म में बोधि वृक्ष (ज्ञान का प्रतीक) माना जाता है। इसके पत्ते दिल के आकार के होते हैं, जो छाया और औषधीय लाभ (दमा, पीलिया, त्वचा रोग) प्रदान करते हैं। पीपल के पेड़ के बारे में मुख्य जानकारियां (विकिपीडिया के अनुसार): धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व: हिंदू धर्म में इसे त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) का वास माना जाता है और पूजा की जाती है। बौद्ध धर्म में, सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) को इसी पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, इसलिए इसे "बोधिवृक्ष" भी कहते हैं।वैज्ञानिक और शारीरिक विशेषताएं: पीपल मोरसी (Moraceae) परिवार से संबंधित है। इसके पत्ते पतले, चंचल और सिरों पर पूंछ जैसे होते हैं। कोमल पत्ते गुलाबी/तांबे रंग के होते हैं, जो बाद में हरे हो जाते हैं। इसकी लकड़ी ईंधन के लिए अच्छी होती है, लेकिन इमारती काम के लिए नहीं।औषधीय उपयोग: आयुर्वेद में पीपल के पेड़ के छाल, फल और पत्तियों का प्रयोग पीलिया, त्वचा रोग, सर्दी, सिरदर्द और दमा के इलाज के लिए किया जाता है।पर्यावरण: यह वृक्ष छायादार होता है और रात में भी आंशिक रूप से ऑक्सीजन प्रदान कर सकता है (कुछ वैज्ञानिक मतों के अनुसार, हालांकि लोकप्रिय धारणा में इसे रात में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने वाला माना जाता है)।लंबी उम्र: पीपल के पेड़ सैंकड़ों साल तक जीवित रह सकते हैं। श्रीलंका में एक पीपल का पेड़ है जो लगभग \(288\) ईसा पूर्व से जीवित है। इसका नाम अन्य भाषाओं में अश्वत्थ (संस्कृत), पिंपळ (मराठी), और बोधि वृक्ष भी है। यह अक्सर मंदिरों और ग्रामीण इलाकों में पाया जाता है।