Shri Sankat Mochan Hanuman Mandir

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This Temple was Established by Shri Lallu Singh Bhadauriya in Memory of His Father Shri Mukut Singh Bhadauriya in village Nagla Ram Sundar Jaswant Nagar, Etawah in 1968

सभी भक्तों को  #बुढ़वा_मंगल की हार्दिक शुभकामनाएँ  🙏श्री  #हनुमान की सभी भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाये रखेजय श्री  #सीता...
26/09/2023

सभी भक्तों को #बुढ़वा_मंगल की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏
श्री #हनुमान की सभी भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाये रखे
जय श्री #सीताराम,

♦️जानिये त्रिपुंड और तिलक किसे कहते है तथा किस दिन किस का तिलक लगये और इस में कौन कौन देवता निवास करते है !🔸ज्योतिष के अ...
04/08/2023

♦️जानिये त्रिपुंड और तिलक किसे कहते है तथा किस दिन किस का तिलक लगये और इस में कौन कौन देवता निवास करते है !

🔸ज्योतिष के अनुसार यदि तिलक धारण किया जाता है तो सभी पाप नष्ट हो जाते है सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं।

🔸ललाट अर्थात माथे पर भस्म या चंदन से तीन रेखाएं बनाई जाती हैं उसे त्रिपुंड कहते हैं।

🔸शैव संप्रदाय के लोग इसे धारण करते हैं। शिवमहापुराण के अनुसार त्रिपुंड की तीन रेखाओं में से हर एक में नौ-नौ देवता निवास करते हैं।

♦️त्रिपुंड के देवताओ के नाम इस प्रकार हैं-
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1- अकार, गार्हपत्य अग्नि, पृथ्वी, धर्म, रजोगुण, ऋग्वेद, क्रियाशक्ति, प्रात:स्वन तथा महादेव- ये त्रिपुंड की पहली रेखा के नौ देवता हैं।

2- ऊंकार, दक्षिणाग्नि, आकाश, सत्वगुण, यजुर्वेद, मध्यंदिनसवन, इच्छाशक्ति, अंतरात्मा और महेश्वर- ये त्रिपुंड की दूसरी रेखा के नौ देवता हैं।

3- मकार, आहवनीय अग्नि, परमात्मा, तमोगुण, द्युलोक, ज्ञानशक्ति, सामवेद, तृतीयसवन तथा शिव- ये त्रिपुंड की तीसरी रेखा के नौ देवता हैं।

त्रिपुंड का मंत्र-ॐ त्रिलोकिनाथाय नम:

🔸तिलक के प्रकार :
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तिलक कई प्रकार के होते हैं - मृतिका, भस्म, चंदन, रोली, सिंदूर, गोपी आदि।

♦️सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं।

🔸चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है, व्यक्ति संकटों से बचता है, उस पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है, ज्ञानतंतु संयमित व सक्रिय रहते हैं।

चन्दन के प्रकार👉 हरि चंदन, गोपी चंदन, सफेद चंदन, लाल चंदन, गोमती और गोकुल चंदन।

♦️तिलक लगाने के लाभ
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1👉 तिलक करने से व्यक्त‍ित्व प्रभावशाली हो जाता है. दरअसल, तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्त‍ि के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर इजाफा होता है.

2👉 ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग शांति व सुकून अनुभव करते हैं. यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है.

3👉 दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जागता है. यह उत्साह लोगों को अच्छे कामों में लगाता है.

4👉 इससे सिरदर्द की समस्या में कमी आती है.

5👉 हल्दी से युक्त तिलक लगाने से त्वचा शुद्ध होती है. हल्दी में एंटी बैक्ट्र‍ियल तत्व होते हैं, जो रोगों से मुक्त करता है.

6👉 धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन का तिलक लगाने से मनुष्य के पापों का नाश होता है. लोग कई तरह के संकट से बच जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है.

7👉 माना जाता है कि चंदन का तिलक लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है।

किस दिन किस का तिलक लगाये :
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यदि वार अनुसार तिलक धारण किया जाए तो उक्त वार से संबंधित ग्रहों को शुभ फल देने वाला बनाया जा सकता है।

🔸सोमवार 👉 सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है तथा इस वार का स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है। मन को काबू में रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए आप सफेद चंदन का तिलक लगाएं।

🔸मंगलवार 👉 मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में विकास होता है।

🔸बुधवार 👉 बुधवार को जहां मां दुर्गा का दिन माना गया है वहीं यह भगवान गणेश का दिन भी है।इस दिन का ग्रह स्वामी है बुध ग्रह। इस दिन सूखे सिंदूर (जिसमें कोई तेल न मिला हो) का तिलक लगाना चाहिए।

🔸गुरुवार 👉 गुरुवार को बृहस्पतिवार भी कहा जाता है। बृहस्पति ऋषि देवताओं के गुरु हैं। इस दिन के खास देवता हैं ब्रह्मा। इस दिन का स्वामी ग्रह है बृहस्पति ग्रह।गुरु को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है। हल्दी या गोरोचन का तिलक भी लगा सकते हैं।

🔸शुक्रवार 👉शुक्रवार का दिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मीजी का रहता है। इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र ग्रह है।हालांकि इस ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है। दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे। इस दिन लाल चंदन लगाने से जहां तनाव दूर रहता है ।

🔸शनिवार 👉 शनिवार को भैरव, शनि और यमराज का दिन माना जाता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है शनि ग्रह। शनिवार के दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन लगाना चाहिए जिससे भैरव महाराज प्रसन्न रहते हैं।

🔸रविवार 👉 रविवार का दिन भगवान विष्णु और सूर्य का दिन रहता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है सूर्य ग्रह जो ग्रहों के राजा हैं। इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन लगाएं।

#सनातनहमारीपहचान 🧡
ें_भगवाधारी 🚩

संख्या 108 का रहस्य और महत्व? Secret science  of 108 number?ॐ  का जप करते समय 108 प्रकार की विशेष भेदक ध्वनी तरंगे उत्पन...
20/05/2023

संख्या 108 का रहस्य और महत्व?
Secret science of 108 number?

ॐ का जप करते समय 108 प्रकार की विशेष भेदक ध्वनी तरंगे उत्पन्न होती है जो किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक घातक रोगों के कारण का समूल विनाश व शारीरिक व मानसिक विकास का मूल कारण है। बौद्धिक विकास व स्मरण शक्ति के विकास में अत्यन्त प्रबल कारण है ।

108 यह अद्भुत व चमत्कारी अंक बहुत समय ( काल ) से हमारे ऋषि -मुनियों के नाम के साथ प्रयोग होता रहा है।

संख्या 108 का रहस्य

स्वरमाला

अ→1 ... आ→2... इ→3 ... ई→4 ... उ→5... ऊ→6 ... ए→7 ... ऐ→8 ओ→9 ... औ→10 ... ऋ→11 ... लृ→12
अं→13 ... अ:→14..
ऋॄ →15.. लॄ →16

व्यंजनमाला

क→1 ... ख→2 ... ग→3 ... घ→4 ...
ङ→5 ... च→6... छ→7 ... ज→8 ...
झ→9... ञ→10 ... ट→11 ... ठ→12 ...
ड→13 ... ढ→14 ... ण→१15 ... त→16 ...
थ→17... द→18 ... ध→19 ... न→20 ...
प→21 ... फ→22 ... ब→23 ... भ→24 ...
म→25 ... य→26 ... र→27 ... ल→28 ...
व→29 ... श→30 ... ष→31 ... स→32 ...
ह→33 ... क्ष→34 ... त्र→35 ... ज्ञ→36 ...
ड़ 37 ... ढ़ ... 38
--~~~ओ अहं = ब्रह्म ~~~--
ब्रह्म = ब+र+ह+म =23+27+33+25=108

1 यह मात्रिकाएँ (16स्वर +38 व्यंजन=54 ) नाभि से आरम्भ होकर ओष्टों तक आती है, इनका एक बार चढ़ाव, दूसरी बार उतार होता है, दोनों बार में वे 108 की संख्या बन जाती हैं। इस प्रकार 108 मंत्र जप से नाभि चक्र से लेकर जिव्हाग्र तक की 108 सूक्ष्म तन्मात्राओं का प्रस्फुरण हो जाता है। अधिक जितना हो सके उतना उत्तम है पर नित्य कम से कम 108 मंत्रों का जप तो करना ही चाहिए ।

2 मनुष्य शरीर की ऊँचाई
= यज्ञोपवीत(जनेउ) की परिधि
= ( 4 अँगुलियों) का 27 गुणा होती है।
= 4 × 27 = 108

3 नक्षत्रों की कुल संख्या = 27
प्रत्येक नक्षत्र के चरण = 4
जप की विशिष्ट संख्या = 108
अर्थात् ॐ मंत्र जप कम से कम 108 बार करना चाहिये ।

4 एक अद्भुत अनुपातिक रहस्य
पृथ्वी से सूर्य की दूरी/ सूर्य का व्यास=108
पृथ्वी से चन्द्र की दूरी/ चन्द्र का व्यास=108
अर्थात् मन्त्र जप 108 से कम नहीं करना चाहिये।

5 हिंसात्मक पापों की संख्या 36 मानी गई है जो मन, वचन व कर्म 3 प्रकार से होते है। अर्थात् 36×3=108। अत: पाप कर्म संस्कार निवृत्ति हेतु किये गये मंत्र जप को कम से कम 108 अवश्य ही करना चाहिये।

6 24 घंटे में एक व्यक्ति सामान्य मनुष्य 21600 बार सांस लेता है। दिन-रात के 24 घंटों में से 12 घंटे सोने व गृहस्थ कर्तव्य में व्यतीत हो जाते हैं और शेष 12 घंटों में व्यक्ति जो सांस लेता है वह है 10800 बार। इस समय में ईश्वर का ध्यान करना चाहिए । शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को हर सांस पर ईश्वर का ध्यान करना चाहिये । इसीलिए 10800 की इसी संख्या के आधार पर जप के लिये 108 की संख्या निर्धारित करते हैं।

7 एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है। सूर्य वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है। छःमाह उत्तरायण में रहता है और छः माह
दक्षिणायन में। अत: सूर्य छः माह की एक स्थिति
में 108000 बार कलाएं बदलता है।

8 ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम - मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अत: ग्रहों की संख्या 9 में राशियों की संख्या को 12 से गुणा करें तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है।

10 108 में तीन अंक हैं, 1, 0 , 8. इनमें एक “1" ईश्वर का प्रतीक है। ईश्वर का एक सत्ता है अर्थात ईश्वर १ है और मन भी एक है, शून्य “0" प्रकृति को दर्शाता है। आठ “8" जीवात्मा को दर्शाता है क्योंकि योग के अष्टांग नियमों से ही जीव प्रभु से मिल सकता है जो व्यक्ति अष्टांग योग द्वारा प्रकृति के आठो मूल से विरक्त हो कर ईश्वर का साक्षात्कार कर लेता है उसे सिद्ध पुरुष कहते हैं। जीव “8" को परमपिता परमात्मा से मिलने के लिए प्रकृति “0" का सहारा लेना पड़ता है। ईश्वर और जीव के बीच में प्रकृति है आत्मा जब प्रकृति को शून्य समझता है तभी ईश्वर “1" का साक्षात्कार कर सकता है। प्रकृति “0" में क्षणिक सुख है और परमात्मा में अनंत और असीम। जब तक जीव प्रकृति “0" को जो कि जड़ है उसका त्याग नहीं करेगा , अर्थात शून्य नही करेगा, मोह माया को नहीं त्यागेगा तब तक जीव “8" ईश्वर “1" से नहीं मिल पायेगा पूर्णता ( 1+8 =9 ) को नहीं प्राप्त कर पायेगा
9 पूर्णता (पूर्णांक )का सूचक है

11 1- ईश्वर और मन
2- द्वैत, दुनिया, संसार
3- गुण प्रकृति (माया)
4- अवस्था भेद (वर्ण)
5- इन्द्रियाँ
6- विकार
7- सप्तऋषि, सप्तसोपान
8- आष्टांग योग
9- नवधा भक्ति (पूर्णता)
अहंकार के गुण 2
बुद्धि के गुण = 3
मन के गुण = 4
आकाश के गुण = 5
वायु के गुण = 6
अग्नि के गुण = 7
जल के गुण = 8
पॄथ्वी के गुण = 9
2+3+4+5+6+7+8+9 =
अत: प्रकृति के कुल गुण = 44
जीव के गुण = 10
इस प्रकार संख्या का योग = 54
अत: सृष्टि उत्पत्ति की संख्या = 54
एवं सृष्टि प्रलय की संख्या = 54
दोंनों संख्याओं का योग = 108

13 संख्या “1" एक ईश्वर का संकेत है।
संख्या “0" जड़ प्रकृति का संकेत है।
संख्या “8" बहुआयामी जीवात्मा का संकेत है।
यह तीन अनादि परम वैदिक सत्य हैं यही पवित्र त्रेतवाद है

संख्या “2" से “9" तक एक बात सत्य है कि इन्हीं आठ अंकों में “0" रूपी स्थान पर जीवन है। इसलिये यदि “0" न हो तो कोई क्रम गणना आदि नहीं हो सकती। “1" की चेतना से “8" का खेल । “8" यानी “2" से “9" ।
यह “8" क्या है ? मन के “8" वर्ग या भाव ।

ये आठ भाव ये हैं ।

1. काम ( विभिन्न इच्छायें / वासनायें ) । 2. क्रोध । 3. लोभ । 4. मोह । 5. मद ( घमण्ड ) । 6. मत्सर ( जलन ) । 7. ज्ञान । 8. वैराग ।

एक सामान्य आत्मा से महानात्मा तक की यात्रा का प्रतीक है
108
इन आठ भावों में जीवन का ये खेल चल रहा है ।

14.सौर परिवार के प्रमुख सूर्य के एक ओर से नौ रश्मियां निकलती हैं और ये चारो ओर से अलग-अलग निकलती है। इस तरह कुल 36 रश्मियां हो गई। इन 36 रश्मियों के ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बनें । इस तरह सूर्य की जब नौ रश्मियां पृथ्वी पर आती हैं तो उनका पृथ्वी के आठ वसुओं से टक्कर होती हैं। सूर्य की नौ रश्मियां और पृथ्वी के आठ वसुओं के आपस में टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हुई वे संस्कृत के 72 व्यंजन बन गई। इस प्रकार ब्रह्मांड में निकलने वाली कुल 108 ध्वनियाँ पर संस्कृत की वर्ण माला आधारित है।

रहस्यमय संख्या 108 का हिन्दू-वैदिक संस्कृति के साथ हजारों सम्बन्ध हैं जिनमें से कुछ का संग्रह है।

30/04/2023

जब गरुड़ को हुआ सत्य बोध कि "होता वही है जो प्रभु चाहते हैं"
भगवान को लेकर कैलाश पधारे!
एक बार भगवान विष्णु गरुड़ पर बैठ कर कैलाश पर्वत पर पहुंचे। द्वार पर गरुड़ को छोड़ कर वे खुद शिव जी से मिलने अंदर चले गए। कैलाश की अपूर्व प्राकृतिक शोभा को देख कर गरुड़ मंत्रमुग्ध थे कि तभी उनकी दृष्‍टि एक खूबसूरत छोटी सी चिड़िया पर पड़ी। चिड़िया इतनी सुंदर थी कि गरुड़ के सारे विचार उसकी तरफ केंद्रित होने लगे। उसी समय मृत्‍यु के देवता यमराज भी कैलाश पहुंचे और अंदर जाने से पहले उन्होंने उस छोटे से पक्षी को आश्चर्य की द्रष्टि से देखा। गरुड़ समझ गए उस चिड़िया का अंत निकट है और यमदेव कैलाश से जाते हुए उसे अपने साथ यमलोक ले जायेंगे।

निश्‍चित मृत्‍यु से बचाने का प्रयास!!!!

गरूड़ को चिड़या पर बहुत दया आई। वे इतनी छोटी और सुंदर चिड़िया को मरता हुआ नहीं देख सकते थे। उन्‍होंने चिड़िया को अपने पंजों में दबाया और कैलाश से हजारो कोस दूर एक जंगल में चट्टान के ऊपर छोड़ दिया, और खुद बापिस कैलाश पर आ गए। जब यम बाहर आए तो गरुड़ ने पूछ लिया कि उन्होंने उस चिड़िया को इतनी आश्चर्य भरी नजर से क्यों देखा था। यम देव बोले "गरुड़ जब मैंने उस चिड़िया को देखा तो मुझे ज्ञात हुआकि वो चिड़िया कुछ ही पल बाद यहां से हजारों कोस दूर एक नाग द्वारा खा ली जाएगी। मैं सोच रहा था कि वो इतनी जल्‍दी इतनी दूर कैसे जाएगी, पर अब जब वो यहां नहीं है तो निश्चित ही वो मर चुकी होगी।"

सत्‍य का हुआ बोध!!!!

तब गरुड़ समझ गये "मृत्यु टाले नहीं टलती चाहे कितनी भी चतुराई की जाए।" इस लिए भगवान कहते हैं-

"करता तू वह है, जो तू चाहता है परन्तु होता वह है, जो मैं चाहता हूं, कर तू वह, जो मैं चाहता हूं, फिर होगा वो , जो तू चाहेगा"

गर्मियों में हम पक्षियों को दाना पानी देते समय ये नही समझ पाते कि अनजाने में पुण्य की जगह पाप का भागी तो नही बन रहे.?बाज...
20/04/2023

गर्मियों में हम पक्षियों को दाना पानी देते समय ये नही समझ पाते कि अनजाने में पुण्य की जगह पाप का भागी तो नही बन रहे.?

बाजरा गर्मियों में पक्षियों, कबूतरों के लिए खतरनाक होता हैं जिसे खाकर उन्हें फफोले हो जाते हैं जैसे इसे हुए है ।
पक्षियों के मुंह फट जाते है, ना कुछ खा सकते हैं ना कुछ देख सकते हैं.. अंत मे मर जाते हैं 😢

बाजार में चिड़ियों को चुगाने वाले 7अनाजो के मिश्रण (सतनाज) में भी बाजरा होता हैं अतः उसे डालने से बचे ।

गर्मियों में पक्षियों को केवल ज्वार, चावल, गेंहू का दलिया दे सकते हैं.. भीगा हुआ हो तो और अच्छा । (खड़ा अनाज पक्षियों के अंडकोष को नुकसान पहुँचाता हैं) भूलकर भी पक्षियों को गर्मी में बाजरे का दाना ना दें ।

पानी ज़रूर रखे 🙏

27/03/2023
11/01/2023

ये १५ मंत्र जो, हर माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए:-
१. "महादेव"
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे,
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ,
उर्वारुकमिव बन्धनान्,
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !!

२. "श्रीगणेश"
वक्रतुंड महाकाय,
सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नम कुरू मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा !!

३. "श्रीहरि विष्णु"
मङ्गलम् भगवान विष्णुः,
मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः,
मङ्गलाय तनो हरिः॥

४. "श्री ब्रम्हाजी"
ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा,
नमस्ते परमात्ने ।
निर्गुणाय नमस्तुभ्यं,
सदुयाय नमो नम:।।

५. "श्रीकृष्ण"
वसुदेवसुतं देवं,
कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकी परमानन्दं,
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।

६. "श्रीराम"
श्री रामाय रामभद्राय,
रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय,
सीताया पतये नमः !

७. "माँ दुर्गा"
ॐ जयंती मंगला काली,
भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,
स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।

८. "माँ महालक्ष्मी"
ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो,
धन धान्यः सुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन,
भविष्यति न संशयःॐ ।

९. "माँ सरस्वती"
ॐ सरस्वति नमस्तुभ्यं,
वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि,
सिद्धिर्भवतु मे सदा ।।

१०. "माँ महाकाली"
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं,
हलीं ह्रीं खं स्फोटय,
क्रीं क्रीं क्रीं फट !!

११. "हनुमान जी"
मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

१२. "श्री शनिदेव"
ॐ नीलांजनसमाभासं,
रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसम्भूतं,
तं नमामि शनैश्चरम् ||

१३. "श्री कार्तिकेय"
ॐ शारवाना-भावाया नम:,
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा ,
वल्लीईकल्याणा सुंदरा।
देवसेना मन: कांता,
कार्तिकेया नामोस्तुते ।

१४. "कालभैरव जी"
ॐ ह्रीं वां बटुकाये,
क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये,
कुरु कुरु बटुकाये,
ह्रीं बटुकाये स्वाहा।

१५. " माँ गायत्री"
ॐ भूर्भुवः स्वः,
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
🙏खुद भी सीखे और परिवार-बच्चों को भी सिखायें🙏

आस्था, श्रद्धा व नारी शक्ति के पावन पर्व हरतालिका तीज की सभी माता-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान गौरी-शंकर की कृपा स...
30/08/2022

आस्था, श्रद्धा व नारी शक्ति के पावन पर्व हरतालिका तीज की सभी माता-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान गौरी-शंकर की कृपा सदैव आप पर बनी रहे|

16/04/2022

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
बल, बुद्धि, विद्या के सर्वश्रेष्ठ प्रतीक, बजरंग बली महावीर हनुमान जयंती की ढेर सारी शुभकामनाएँ! 🙏🏻💐इस पुण्य-अवसर पर प्रस्तुत है एक विशेष कथा…😍

'श्री हनुमान जयंती' की सभी भक्तों एवं श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।परम रामभक्त, संकटमोचन, मारुति नंदन बजरं...
16/04/2022

'श्री हनुमान जयंती' की सभी भक्तों एवं श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

परम रामभक्त, संकटमोचन, मारुति नंदन बजरंगबली की कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर बनी रहे।

सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं आरोग्यता का वास हो।

ॐ हनुमते नमः

आस्था, श्रद्धा, विश्वास व परम्परा से जुड़ा महापर्व करवा चौथ की सभी माताओं-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। आज का यह दिन आपके...
24/10/2021

आस्था, श्रद्धा, विश्वास व परम्परा से जुड़ा महापर्व करवा चौथ की सभी माताओं-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। आज का यह दिन आपके जीवन में सुख-समृद्धि एवं खुशहाल दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद लेकर आए, ईश्वर से यही प्रार्थना है।

आप सभी को बुढबा मंगल की बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी लोगों पर  हनुमानजी महाराज की कृपा सदैव बनी रहे जय ज...
14/09/2021

आप सभी को बुढबा मंगल की बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी लोगों पर हनुमानजी महाराज की कृपा सदैव बनी रहे
जय जय श्रीहनुमान

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