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Kaash aisa ho pata! 🙂
11/09/2026

Kaash aisa ho pata! 🙂

फिल्म हनुमान अंश की तारीफ तो आप सबने खूब सुनी होगी, पर्दे पर जो भव्य भीड़ देखी, जो गांव वाला सीन देखा, वो किसी VFX से नह...
11/09/2026

फिल्म हनुमान अंश की तारीफ तो आप सबने खूब सुनी होगी, पर्दे पर जो भव्य भीड़ देखी, जो गांव वाला सीन देखा, वो किसी VFX से नहीं बना।

उसके पीछे की कहानी आपके होश उड़ा देगी आइए आपको बताते हैं...!!

ये हैं फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी...
कोई बड़ा माइक, कोई घमंड नहीं, खुद टोपी पहनकर, एक छोटा सा खिलौना जैसा माइक लेकर चित्रकूट के परसौंजा गांव की कीचड़ भरी गलियों में घूम-घूम कर लोगों को बुला रहे थे...
और कैसे प्यार से बोल रहे हैं, लोगों को बुला रहे हैं ये आप कहीं पर भी वीडियो में देख सकते हैं जिसके कुछ शब्द यहां लिखे हैं....

"नमस्कार सभी को राम-राम...
आपके गाँव परसौंजा में हम सभी एक फिल्म का निर्माण कर रहे हैं, इस फिल्म में एक सीन है जिसके लिए हमको बड़े-बूढ़े, कुर्ता पजामा, धोती कुर्ता, सदरी में चाहिए, महिलाएं भी अगर सम्मिलित होना चाहें तो साड़ियों में आ सकती हैं, दादा, मामा, चाचा, चाची, दादी अगर आप सफेद कुर्ता पजामा पहन के आ सकते हैं तो आएं आपका दिल से स्वागत है।"

न कोई कास्टिंग एजेंसी, न मुंबई से लाए गए जूनियर आर्टिस्ट, सीधा गांव के चाचा-दादी को ही स्टार बना दिया।

और देखो एक लड़का सिर पर लाइट और सामान उठाए चल रहा है, दूसरा हाथ में क्लैपबोर्ड लिए पूरी टीम बारिश में, कीचड़ में गांव-गांव घूम रही है।

यही तो फर्क है, बड़े-बड़े डायरेक्टर AC वैन में बैठकर भीड़ मंगवाते हैं, और यहां विशाल भाई खुद गली-गली जाकर हाथ जोड़कर भीड़ जुटा रहे हैं।

इसीलिए तो हनुमान अंश सिर्फ एक फिल्म नहीं लगती, अपने गांव की कहानी लगती है क्योंकि पर्दे पर जो चेहरे हैं, वो एक्टर नहीं, हमारे अपने लोग हैं।

ऐसी ईमानदारी से बनी फिल्म को तो ब्लॉकबस्टर होना ही था।

क्या आपको पता है चित्रकूट की पावन भूमि पर परसौंजा गांव के अलावा शिवरामपुर, आरोग्यधाम, मंदाकिनी तट और पंजाबी बाबा आश्रम जैसी जगहों पर भी फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्य फिल्माए गए हैं।

आपने हनुमान अंश देखी क्या?
कमेंट में जरुर बताइएगा...






10/09/2026
10/09/2026

भारतीय समाज किस दिशा में जा रहा है ?

वास्तव में यह तय कर पाना इतना जटिल हो गया है कि लोकतंत्र समाज को दूषित कर रहा है या समाज स्वयं ही पतन की ओर बढ़ रहा है

आज आम आदमी पार्टी के मालिक अरविन्द केजरीवाल का एक विडियो न्यूज़ वाले चला रहे थे

जंतर मंतर की वो गालीबाज लड़की जो स्वयं को 15 साल की बच्ची बता रही है

उसका समर्थन कर रहा था अरविन्द केजरीवाल

राहुल गाँधी ने तो शायद ही कोई सीमा हो जिसका उल्लंघन नहीं किया हो

ऐसा नहीं है कि सिर्फ विपक्ष ही यह सब कर रहा है

सत्ता पक्ष का भी हाल बहुत बुरा है

सरकार को ऐसा लगता है कि विपक्ष जितनी नीचता करे उतना ही अच्छा है क्यूंकि इससे उनकी सरकार को सुरक्षा कवच मिलता है

यदि योगी आदित्यनाथ को छोड़ दें तो आज की स्थिति में देश में कोई भी राजनेता राजनेता कहलाने के योग्य ही नहीं और इस लिस्ट में प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अमित शाह तक सभी राजनेता शामिल हैं
जो देश-समाज की चिंता करने के बजाय अपना चुनावी हित देखने में लगे हैं
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मोदी-युग को भारतीय समाज के पतन का युग माना जाएगा

जिसमें समाज को बुरी तरह से पतन के मार्ग पर धकेल दिया गया
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दो बार आपको पूर्ण बहुमत की सरकार मिली

तीसरी बार अपने आपसी झगडे में पूर्ण बहुमत से दूर रहे

लेकिन आपने समाज के उत्थान के लिए क्या किया ?

उलटे आपने समाज को विपक्ष के हाथों बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया
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यही वो दौर है जब OTT पर इस प्रकार से गाली-गलौज की शुरुआत होती है

सरकार नपुंसक बनी रहती है

इस हद तक गाली-गलौज और अश्लीलता परोसी गई है कि समाज अब समाज कहलाने लायक नहीं बचा

इस स्तर पर देश भ्रष्ट हो चूका है कि अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं बचा

युवाओं को आकर्षित करने मोदी ने जो सेल्फी की नौटंकी शुरू किया

वो सेल्फी की बीमारी से बढ़कर रील कल्चर में कन्वर्ट हुआ

और आज धनाड्य वर्ग हो या निर्धन शिक्षित हो या अशिक्षित

चारों और महिलाएं रील बनाने में व्यस्त हैं

सोशल मीडिया इन्स्टाग्राम इत्यादि को यदि पोर्न मीडिया घोषित कर दिया जाए या ऑनलाइन रेड लाइट एरिया
तो बिल्कुल भी गलत नहीं होगा

हो सकता है और भी बाकि ऐसे कई प्लेटफॉर्म्स हों जो यही सब कर रहे हों

लेकिन ये अंधी सरकार कर क्या रही है ?

मेटा ने तो स्वीकार भी कर लिया है कि वे जानबूझकर अश्लील कंटेंट्स को प्रेफ़रेंस देते हैं ताकि लोग मोबाइल से चिपके रहें

ऐसे में सरकार ने मेटा को देश में प्रतिबंधित क्यूँ नहीं किया ?

क्या सरकार इतनी नपुंसक है ?
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धुरंधर जैसी फ़िल्में

मुझे नहीं समझ आया कि देश में लोगों का नैतिक स्तर इतना गिर गया है कि परिवार के साथ बैठकर ऐसी फ़िल्में देख रहे हैं ?

विषय हिंसा का नहीं

विषय है गाली-गलौज का

एक दौर था जब मिडिल क्लास में गालियों का प्रयोग परिवार के बीच नहीं होता था

धुरंधर की सफलता ने बता दिया कि वह दौर समाप्त हो चूका है

आज मिडिल क्लास परिवारों में भी महिलाएं गालियों के लिए बड़ी सहज हैं

ये बना दिया है आपने समाज को !!!
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हम उस दौर में जी रहे हैं जहाँ प्री-मेरिटल एक्स्ट्रा-मेरिटल अफेयर्स, या अपोजिट जेंडर के सामान्य मित्रों के साथ किसी भी हद की बातचीत हमें सामान्य लगती हैं

मतलब कोई शर्म लिहाज संस्कार जैसा कुछ नहीं बचा

अश्लील जोक्स गाली-गलौज वाले रील्स लोग धड़ल्ले से किसी को भी शेयर कर दे रहे हैं
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पशु बन चूका है समाज !

सभ्यता-संस्कृति मिट चुकी है

और मोदी जी !

आपको इतिहास इसी गन्दगी के लिए याद करेगा

आज से 50 साल बाद जब लोग पीछे पलट कर देखेंगे तो लोग आपको गालियाँ ही देंगे
कि आपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को गर्त में जाने दिया
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और मुझे तो उन तमाम माता पिता पर भी आश्चर्य होता है जिनकी संतानें अभी २ वर्ष से 30-35 वर्ष की आयु तक की हैं

कोई कण्ट्रोल नहीं आपका अपने बच्चे पर ?

या आप खुद इतने असभ्य हैं कि अपने बच्चे को संस्कार सिखा ही नहीं पाए ?
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छोटे-छोटे बच्चे मोबाइल चला रहे हैं घंटों

क्या सीख रहे हैं उससे ?
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हम लोग आज भी अपने से बड़ों को जवाब देने का साहस नहीं जुटा पाते

बहुत सोच समझ कर उत्तर देते हैं

और ये कल के पिद्दी

ये ऐसा जवाब देते हैं....

विषय यह नहीं है कि किसने किसे व्यक्तिगत रूप से क्या कहा

विषय यह है कि ये जो बच्चे हैं ये तो पशु से भी बदतर होने वाले हैं

दूसरी बात यह है कि जो बच्चे बड़ों को सम्मान नहीं दे पा रहे हैं वे कभी सीख भी नहीं पाएँगे

मतलब उनका भविष्य पूरी तरह अन्धकारमय है
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इसका अर्थ यह हुआ कि अगले 10-20 वर्षों में भारत में ९९% जनता पशु-तुल्य होगी
और ये बच्चे सिर्फ और सिर्फ अपराधी बनेंगे

Hanuman Ansh Is Emerging As One Of The Most Talked-About Box Office Stories Of 2026. Made On A Reported Budget Of Just ₹...
10/09/2026

Hanuman Ansh Is Emerging As One Of The Most Talked-About Box Office Stories Of 2026. Made On A Reported Budget Of Just ₹2 Crore, Figures Being Shared Online Suggest That The Film May Have Generated Nearly 2,400% Profit, Putting Its Extraordinary Return On Investment In The Spotlight.

For Comparison, Dhurandhar 2 Is Reportedly Being Discussed At Around 1,000% Profit. If These Figures And Calculations Are Accurate, Hanuman Ansh Could Rank Among The Most Profitable Films Of The Year.

The Film’s Remarkable Journey Shows That Box Office Success Is Not Always About Having The Biggest Budget, Biggest Star Cast Or Widest Release. A Small Film With Strong Audience Support And Positive Word Of Mouth Can Sometimes Deliver Returns That Rival Or Even Surpass Much Bigger Productions.

Hanuman Ansh’s Reported Success Has Therefore Become A Major Example Of How Smart Budgeting And Strong Audience Connection Can Create An Unexpected Box Office Phenomenon.

दाल में झौंक लगते ही स्वाद बढ़ जावे है 😂इब भक्तां का कहना है—खीर में भी कुछ “स्पेशल” पड़ गया तो स्वाद डबल हो जावेगा! 🤣🤮अ...
10/09/2026

दाल में झौंक लगते ही स्वाद बढ़ जावे है 😂
इब भक्तां का कहना है—खीर में भी कुछ “स्पेशल” पड़ गया तो स्वाद डबल हो जावेगा! 🤣🤮

अंधभक्ति की भी कोई सीमा होया करे भाई! 😂🙌

😂🔥

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